Kumbh Aastha Ka Prateek
(0)
Author:
Sanjay ChaturvediPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Religion-spirituality₹
400
320 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
कुंभ भारतीय समाज का ऐसा पर्व है, जिसमें हमें एक ही स्थान पर पूरे भारत के दर्शन होते हैं—लघु भारत एक स्थान पर आकर जुटता है और हम सगर्व कहते हैं कि महाकुंभ विश्व का सबसे विशाल पर्व है। कुंभ की ऐतिहासिक परंपरा में देश व समाज को सन्मार्ग पर लाने के लिए ऋषियों, महर्षियों के विचार सदैव आदरणीय और उपयोगी रहे हैं। आर्यावर्त के पुराने नक्शे में शामिल देश भी तब महाकुंभों में एकत्र होकर समाज के जरूरी नीति-नियमों को, तत्कालीन शासकों को जानने के लिए ऋषियों की ओर देखते थे और उसके पालन के लिए प्रेरित होते थे। हर बारह वर्ष बाद देश के विभिन्न स्थलों पर शंकराचार्यों के नेतृत्व में हमारे मनीषी देश की नीति और नियम को तय कर समाज संचालित करते थे। ये नियम सनातन परंपरा को अक्षुण्ण रखने के साथ-साथ समय की माँग के अनुसार भी बनते थे। आज मानव समाज के सामने जो समस्याएँ चुनौती बनकर खड़ी हैं, उनमें आतंकवाद, भ्रष्टाचार, हिंसा और देशद्रोह के समान मानव को जर्जर कर देनेवाली समस्या है पर्यावरण प्रदूषण। प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है, प्रदूषण बढ़ रहा है, कभी-कभी तो श्वास लेना भी कठिन जान पड़ता है। कुंभ का सबसे बड़ा संदेश पर्यावरण का संरक्षण करना है। ज्ञान, भक्ति, आस्था, श्रद्धा के साथ-साथ जनमानस में सामाजिक-नैतिक चेतना जाग्रत् करनेवाले सांस्कृतिक अनुष्ठान ‘कुंभ’ पर एक संपूर्ण सांगोपांग विमर्श है यह पुस्तक।
Read moreAbout the Book
कुंभ भारतीय समाज का ऐसा पर्व है, जिसमें हमें एक ही स्थान पर पूरे भारत के दर्शन होते हैं—लघु भारत एक स्थान पर आकर जुटता है और हम सगर्व कहते हैं कि महाकुंभ विश्व का सबसे विशाल पर्व है। कुंभ की ऐतिहासिक परंपरा में देश व समाज को सन्मार्ग पर लाने के लिए ऋषियों, महर्षियों के विचार सदैव आदरणीय और उपयोगी रहे हैं। आर्यावर्त के पुराने नक्शे में शामिल देश भी तब महाकुंभों में एकत्र होकर समाज के जरूरी नीति-नियमों को, तत्कालीन शासकों को जानने के लिए ऋषियों की ओर देखते थे और उसके पालन के लिए प्रेरित होते थे। हर बारह वर्ष बाद देश के विभिन्न स्थलों पर शंकराचार्यों के नेतृत्व में हमारे मनीषी देश की नीति और नियम को तय कर समाज संचालित करते थे। ये नियम सनातन परंपरा को अक्षुण्ण रखने के साथ-साथ समय की माँग के अनुसार भी बनते थे। आज मानव समाज के सामने जो समस्याएँ चुनौती बनकर खड़ी हैं, उनमें आतंकवाद, भ्रष्टाचार, हिंसा और देशद्रोह के समान मानव को जर्जर कर देनेवाली समस्या है पर्यावरण प्रदूषण। प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है, प्रदूषण बढ़ रहा है, कभी-कभी तो श्वास लेना भी कठिन जान पड़ता है। कुंभ का सबसे बड़ा संदेश पर्यावरण का संरक्षण करना है।
ज्ञान, भक्ति, आस्था, श्रद्धा के साथ-साथ जनमानस में सामाजिक-नैतिक चेतना जाग्रत् करनेवाले सांस्कृतिक अनुष्ठान ‘कुंभ’ पर एक संपूर्ण सांगोपांग विमर्श है यह पुस्तक।
Book Details
-
ISBN9789382901587
-
Pages184
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Yamgita
- Author Name:
Ashok Kumar Sharma
- Book Type:

- Description:
मृत्यु के देवता माने गए यमराज के उपदेशों पर आधारित यमगीता है। कठोपनिषद्, विष्णु पुराण तथा अग्नि पुराण में उपलब्ध यमगीता किसी को भी अज्ञात के भय, भविष्य की चिन्ता और मृत्यु के आतंक से मुक्त करने वाला ग्रंथ है। गीताओं में प्राय: सृष्टि और परमात्मा के रहस्यों की बातें प्रमुख होती हैं, लेकिन यह ग्रंथ जीवन में निराशा से बचने और निरन्तर उन्नति करने के जटिल सिद्धान्त सरल भाषा में बताता है। दुखों-कष्टों एवं असफलताओं से बचने के लिए आध्यात्मिक सिद्धान्तों का भी वर्णन इस गीता में है। इस ग्रंथ में तीन यमगीताओं के सार के साथ ही इनके आधुनिक सन्दर्भ भी हैं।
Gautam Buddh ki kahaniyan
- Author Name:
Kamini Gayakwad
- Book Type:

- Description:
राजकुमार सिद्धार्थ के पिता राजा शुद्धोधन यह बिल्कुल नहीं चाहते थे कि उनका बेटा एक यशस्वी सम्राट न बन कर तपस्वी बने, संत बने। उन्होंने राजकुमार सिद्धार्थ के चारों ओर सुख सुविधाओं का ऐसा जाल बुना कि सिद्धार्थ उसमें उलझकर रह जाएँ, उन्हें वैराग्य का विचार भी न आए। शुद्धोधन चाहते थे कि राजकुमार सिद्धार्थ को संसार का दुःख देखने ही न दें । लेकिन ऐसा कहाँ संभव था ? सिद्धार्थ, महाकारुणिक बुद्ध हुए और अनगिनत लोगों के जीवन में दया, करुणा और शांतिपूर्ण सहस्तित्व का प्रकाश फैलाया । ये कहानियाँ हम उनके जीवन के असंख्य प्रेरक प्रसंगों में से चुनकर यहाँ प्रकाशित कर रहे हैं ।
Little Hanuman
- Author Name:
Kamini Gayakwad
- Book Type:

- Description:
Hanuman, son of Kesri and Anjana. Why Hanuman has a monkey face? Why he lifted the mountain? Why he burned the Golden city Lanka? Why Lord Indra hit him in the sky? This book has all the answers of your WHY's. Let's dive into the vast and wonderful world of our little Hanuman. With beautiful illustrations and simple language, it will delight you
The Prophet
- Author Name:
Khalil Gibran
- Book Type:

- Description:
The Prophet is one of the most beloved classics of our time. This is a collection of poetic essays that are philosophical, spiritual, and, above all, inspirational. Khalil Gibran was a Lebanese-American writer, poet, and visual artist. Gibran's simple and direct style was a revelation and an inspiration.
Temples Tour: East India
- Author Name:
Rajiv Aggarwal
- Book Type:

- Description:
Temples Tour is a book of compilation of major Temples in India and it is compiled with the help of official website of 739 districts of the country (till March 2020), website of Ministry of Tourism of Government of India and all states, website of Archaeological Survey of India, Wikipedia, official website of Temples, other religious websites, Facebook, Twitter, many books and articles. In this compilation, I have covered Temples from Andaman to Ajmer, Bodhgaya to Sarnath, Jagannath Puri to Kedarnath, Kanyakumari to Ksheer Bhavani, Koteshwar to Kamakhya, Lakshadweep to Leh, Sammedshikhar to Shravanbelgola and Somnath to Kashi Vishwanath. There are various types of Temples such as Ashtavinayak Temples, Buddhist Temples, Char Dham, Chota Char Dham, Eight Mahakshetras of Lord Vishnu, Hot/Perennial Sulphur Springs, ISKCON Temples, Jain Temples, Jyotilinga, Nag Devta Temples, Nava Narasimhas, Nava Thirupathi, Panch Badri, Panch Dwarka, Panch Kannan Kshetrams, Panch Kedar, Panch Prayag, Pancha Narasimha Kshetras, Pancharama Kshetras, Pancha Bhoota Sthalam, Panch Sabhai Temples, Sapta Puris, Seven Baithaks of Pushtimarg (Thakurji), Seven Thakurji of Vrindavan, Shakti Peetha, Shani Parihara Temples, Sindhi Temple, Six Abodes of Lord Murugan, Sun Temples, Trilinga Kshetras and other Temples, ponds/lakes, trees, saints and statues of more than 50 foot height.
Sai Ki Seva Mein
- Author Name:
Dr. Suresh Haware
- Book Type:

- Description:
साईं की सेवा करने का मुझे अवसर मिला, यह मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा ईश्वरीय आशीर्वाद है, ऐसी मेरे मन की प्रामाणिक भावना है। इस कालावधि में मेरी जिंदगी पूरी तरह से बदल गई। मैं शिरडी कभी आता नहीं था, लेकिन इस पूरे कार्यकाल में मैं शिरडी के सिवाय कहीं जाता ही नहीं था। साईं बाबा का पहले कभी विचार करता नहीं था। लेकिन इस दौरान साईं के सिवाय कोई दूसरा विचार ही नहीं किया। पैर अपने आप शिरडी की ओर खिंचे चले आते थे।
Hindu Hone Ka Dharma
- Author Name:
Prabhash Joshi
- Book Type:

- Description:
अपने सुदीर्घ पत्रकार जीवन में प्रभाष जोशी का लेखन लोक के विवेक को रेखांकित करने और जहाँ वह मंद पड़ा हो वहाँ उसे पुनर्जाग्रत करने का लेखन रहा है। ज़्यादातर हिन्दी समाज से संवाद करती उनकी पत्रकारिता एक ओर सत्ता-राजनीति से सीधी बहस में उतरती है और दूसरी ओर समाज, संस्कृति, पर्यावरण, संगीत और खेल की मार्फ़त समग्र जीवन-मूल्यों की खोज करती है। प्रभाष जोशी के सम्पादन में 1983 में प्रकाशित दैनिक ‘जनसत्ता’ एक बड़ी घटना थी जिसने ‘सबकी ख़बर लेने’ के साहस और ‘सबको ख़बर देने’ की प्रतिबद्धता के साथ पत्रकारिता के इकहरे विन्यास को, उसके सत्ता-केन्द्रित स्वरूप को तोड़ते हुए उसे लोकधर्मी बनाने की पहल की। क़रीब दस वर्ष बाद 1992 में जब हिन्दू समाज से उभरे कुछ विकृत और उन्मादी तत्त्वों ने अपनी साम्प्रदायिक-नकारात्मक प्रवृत्तियों के चरम के रूप में अयोध्या की बाबरी मस्जिद का ध्वंस किया तो प्रभाष जोशी उन चुनिंदा लेखकों-पत्रकारों में अग्रणी थे जिन्होंने हमारे सर्वग्राही धर्म और उदार-सहिष्णु-सामासिक संस्कृति के साथ हुए इस दुष्कृत्य का विरोध किया। ऐसे समय में जब ज़्यादातर हिन्दी मीडिया साम्प्रदायिकता के आक्रमण के आगे घुटने टेक रहा था या हक्का-बक्का था तो प्रभाष जोशी ने गांधी विचार के आलोक में जिस वैचारिक संघर्ष की शुरुआत की, वह भी ‘जनसत्ता’ के प्रकाशन जैसी ही एक घटना थी।
‘हिन्दू होने का धर्म’ बाबरी ध्वंस के बाद और गुजरात नरसंहार तक ‘जनसत्ता’ में लिखे गए प्रभाष जोशी के सैकड़ों लेखों-स्तम्भों में से एक चयन है जिसके फ़ोकस में संघ परिवार के साम्प्रदायिक हिन्दुत्व के विपरीत हिन्दू होने का वह मर्म है जो हमारी वास्तविक परम्परा और समाज के मूल्यों को निर्मित करता आया है और महात्मा गांधी जिसके सबसे बड़े प्रतीक-व्यक्तित्व थे। साम्प्रदायिक तत्त्वों और छद्म राष्ट्रवाद के विभिन्न मुखोशों और दशाननों को उधेड़ती ये टिप्पणियाँ हमारे आसपास बनाए जा रहे एक बुरे या निकृष्ट हिन्दू से जिरह करती हुई उसकी जगह एक अच्छे, सच्चे और नैतिक हिन्दू को प्रतिष्ठित करती हैं और यह सिद्ध करती हैं कि हिन्दुत्व की संघ परिवारी परिभाषाएँ व्यापक हिन्दू समाज में पूरी तरह अमान्य हैं। आज़ादी की लड़ाई के समय से ही हमारे देश में ‘गांधी जीतेंगे या गोडसे’ की बहस चलती रही है और उसे भी इन लेखों में बहस का विषय बनाया गया है। ख़ास बात यह है कि प्रभाष जोशी अपना वैचारिक विमर्श और अलख हिन्दुत्व के ही मोर्चे पर चलाए और जगाए रहते हैं जिससे उनके तर्क और निष्कर्ष ज़्यादा विश्वसनीय और कारगर हो उठते हैं और इस काम में हमारा पारम्परिक लोक-विवेक और धर्म उनकी मदद करता चलता है।
Devtulya Nastik
- Author Name:
Arun Bhole
- Book Type:

- Description:
धर्म, दर्शन और विज्ञान अपने-अपने तरीक़े से सत्य और ज्ञान की खोज करते रहते हैं। स्थूल रूप से इनकी चेष्टाएँ विरोधी प्रतीत हो सकती हैं, लेकिन गहरे मन्तव्यों में लक्ष्य एक ही है। आस्तिक और नास्तिक केवल व्यावहारिक विभाजन हैं—प्रक्रिया की भिन्नता के कारण।
‘देवतुल्य नास्तिक’ पुस्तक में अरुण भोले कुछ विशिष्ट व्यक्तित्वों के माध्यम से जीवन के रहस्यों को जानने का प्रयास करते हैं। ‘ज्ञानपिपासु गौतम’, ‘अन्तर्मुखी विज्ञान’, ‘तटस्थ प्रकृति’, ‘वैज्ञानिक ज्ञान-मीमांसा’, ‘सन्देह और श्रद्धा के संगम’, ‘संवाद और सहयोग', 'जले दीप से दीप' तथा 'विज्ञान और नियति' शीर्षकों के अन्तर्गत लेखक ने सत्य और ज्ञान की खोज करनेवाले विश्वविख्यात व्यक्तित्वों का विश्लेषण किया है।
लेखक का उद्देश्य स्पष्ट है। वह चाहता है कि शक्तियों में समन्वय हो।
लेखक के शब्दों में : ‘अपने अन्वेषण और प्रयोगों से विज्ञान ने जो तथ्य बटोरे हैं, उन सबके आत्यन्तिक अर्थ क्या हैं तथा लोकमंगल की दृष्टि से उनका परम उपयोग क्या होगा, इसी का बोध ज्ञान माना जाएगा। वैसे ज्ञान के अभाव में अमर्यादित वैज्ञानिक जानकारियाँ हमें सर्वनाश की ओर ले जा सकती हैं। यही वह स्थल है जहाँ हमें धर्म और दर्शन की सहायता लेनी पड़ेगी; क्योंकि वैज्ञानिक भी मानते हैं कि जीवन को सँवारने और मानवीय भावनाओं को प्रभावित करने का अधिक अभ्यास और अनुभव दर्शन और धर्म को ही है।’
विश्व संस्कृति की अन्तर्धाराओं का प्रवाहपूर्ण, प्रामाणिक और सतर्क विश्लेषण।
Mahayogiraj Gorakhnath
- Author Name:
Brajendra Kumar Singhal
- Book Type:

- Description:
‘महायोगिराज गोरखनाथ’ नाथपन्थ की अनन्य विभूति गुरु गोरखनाथ का शोधपूर्ण, विस्तृत और अद्यतन जीवन चरित्र है। भारत की अनेक विभूतियों की तरह, गोरखनाथ के भी कृतित्व और कीर्ति से जनसामान्य जितना परिचित है, उतना उनके व्यक्तिगत जीवन से नहीं। गोरखनाथ ने भी, अगर उनके द्वारा ‘काफिर-बोध’ में दिए गए कुछ संकेतों को छोड़ दें तो अपने व्यक्तिगत जीवन का उल्लेख लगभग नहीं किया है। वस्तुतः दादूपन्थ के सन्त चैनजी की लिखी 'गोरख जनमलीला' ही एकमात्र सबसे पुराना लिखित स्रोत है जिसमें गोरखनाथ की जीवनकथा दी गई है। नाथ-सिद्धों की परम्परा में गोरखनाथ के बारे में जो कुछ श्रुतियाँ पहले से मौजूद थीं, उन्हों को चैनजी ने अपनी कृति में छन्दोबद्ध कर दिया है। स्वाभाविक ही गोरखनाथ सम्बन्धी चर्चाओं का मुख्य आधार ‘गोरख जनमलीला’ रही है। लेकिन ब्रजेन्द्रकुमार सिंहल ने अपने इस ग्रन्थ में गोरख जनमलीला का अनुवाद प्रस्तुत करने के साथ-साथ उसमें वर्णित प्रमेय को विभिन्न ऐतिहासिक पुरातात्त्विक और अन्यान्य साक्ष्यों के साथ रखकर तथ्यगत प्रामाणिकता स्थापित करने का स्तुत्य कार्य किया है। इस प्रकार यह पुस्तक गुरु गोरखनाथ के व्यक्तित्व और कृतित्व से सांगोपांग रूप से परिचित कराती है। साथ ही नाथ-परम्परा, उसके विपुल साहित्य तथा उसकी सुदीर्घ शिष्य-परम्परा और उस परम्परा के अवदान का यथोचित उल्लेख करते हुए एक समग्र परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत करती है।
Islam : Siddhant Aur Swaroop
- Author Name:
Zafar Raza
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Raja Harishchandra Ki Kathayen
- Author Name:
Chandrashekhar Singh
- Book Type:

- Description:
प्रस्तुत पुस्तक में सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र की कुछ ऐसी ही कहानियों को संगृहीत किया गया है, जिनके द्वारा धर्म, सत्यता, संस्कार और प्रेम का ज्ञान प्रकट होता है। सरल भाषा एवं सुंदर चित्रों के साथ पुस्तक को आकर्षक एवं उपयोगी बनाने का प्रयास किया गया है। हमें आशा ही नहीं, पूर्ण विश्वास है कि राजा हरिश्चंद्र के जीवन की प्रेरित ये कहानियाँ बाल पाठकों में अवश्य ही धर्म, संस्कृति एवं सत्यता का संचार करने में सहायक होंगी।
Magh Mela
- Author Name:
Vincent Van Ross +2
- Book Type:

- Description:
This might come as a surprise to many readers. But, this is indeed the very first book on Magh Mela. As of now, the only book relevant to Magh Mela that is available in the market is a reproduction of the chapter on Magh Mahatmaya appearing in Padma Purana. But, that is purely mythological in content and does not deal with many aspects of the Magh Mela as it plays out in Allahabad. Everybody has heard of Kumbh Mela. But, how many of us have heard of Magh Mela? Does it surprise you to learn that Kumbh Mela is nothing but Magh Mela that is celebrated every twelfth year and Ardh Kumbh is nothing but the sixth Magh Mela celebrated between two Kumbh Melas? In other words, a mini version of the Kumbh Mela is celebrated in Allahabad year after year in the form of Magh Mela which goes almost unnoticed and unreported outside of Allahabad and Uttar Pradesh. Magh Mela is an incredible annual phenomenon in Allahabad (Prayag) from time immemorial. It is a monthlong Hindu festival that is celebrated in the month of Magh at Sangam or the confluence of rivers Ganga, Yamuna and the mythical river Saraswati. Magh Mela is marked by (snan) ritual bathing and taking up temporary residence near Sangam in the month Magh and leading an austere life devoted to prayers and rituals (kalpavas) according to their vows. The month of Magh begins with Paush Purnima and ends with Magh Purnima. But, the Magh Mela begins on Makkar Sankranti or Paush Purnima (whichever is earlier) and ends with Maha Shivaratri because of administrative reasons. Lord Vishnu is the presiding deity of Allahabad as well as the month of Magh which is considered to be the most auspicious month for Hindus. Allahabad is also known as Tirthraj Prayag. In other words, Allahabad is the king of pilgrimage sites for Hindus. Separate chapters are devoted to the most auspicious months of the Hindu calendar in the Puranas in the form of Vaishak Mahatmaya, Kartik Mahatmaya and Magh Mahatmaya explaining the significance of each month. The most important ritual for Vaishak is charity (daan). Similarly, the main ritual for Kartik is offerings in the form of earthen lamps (deep daan); and, the main ritual for Magh is ritual bathing (snan). Therefore, Magh Mela is essentially a bathing festival coupled with kalpavas. And, Tirthraj Prayag is the sacred land that has been designated for Magh Mela by Hindu scriptures. That is the secret of Magh Mela.
Jeevan Gita: Bhagavadgita Mein Jyotish Vigyan (Set of Volume 1 & 2)
- Author Name:
Dr. Arun Kumar Jaiswal
- Book Type:

- Description:
डॉ. अरुण कुमार जायसवाल—एक प्रेरक व्यक्तित्व, जिन्होंने अपनी जीवन-साधना से अपने क्षण-प्रति-क्षण के जीवन में यह प्रमाणित किया है कि जीवन का अर्थ ‘मर्म एवं दर्शन-साधनों’ में नहीं, साधना में है। डॉ. जायसवाल की जीवन साधना उन्हीं की भाँति बहुआयामी है। वैदिक संस्कृति, ज्योतिष विज्ञान, भारतीय दर्शन—इन्हीं में से कुछ है। श्रीमद्भगवद्गीता के वे न केवल तत्त्वदर्शी विज्ञाता हैं बल्कि इसमें वर्णित साधना विधियों के वे लोकोत्तर व रहस्यदर्शी साधक हैं। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता की रचना को प्रकट करनेवाले महर्षि कृष्णद्वैपायन, जिन्हें वेदव्यास के नाम से भी जाना जाता है और इसका दिव्य गायन करनेवाले विश्वात्मा भगवान् कृष्ण, दोनों को ही तत्त्वत: आत्मसात् करने में सफलता पाई है। डॉ. अरुण ने अपने इस ग्रंथ में स्वयं के हृदय की अनुभूतियों को अक्षरों में पिरोया है। जैसे भगवान् सूर्य के सारथी अरुण सूर्यदेव के प्रकाश से संसार का परिचय कराते हैं, कुछ इसी तरह से डॉ. अरुण ने भी भगवद्गीता के ज्ञानसूर्य का अपनी जीवन-चेतना एवं जीवन-साधना से इस ग्रंथ के माध्यम से परिचय दिया है। उनके इस ग्रंथ में पूर्ववर्ती आचार्यों एवं मनीषियों के परंपरागत दर्शन-ज्ञान के साथ ज्योतिष विज्ञान के मर्म का भी समन्वय व प्राकट्य है। डॉ. अरुण कुमार जायसवाल की जीवनयात्रा व्यक्ति से व्यक्तित्व बनने-गढऩे व विनिर्मित होने की साधना यात्रा है। व्यक्ति के रूप में अपने परिवार-नगर व प्रांत में जनमे एवं जीवन साधना के लिए समर्पित होकर असंख्यों के लिए प्रेरक बने। उनका नाम, उनका परिचय ही इस ग्रंथ का भी परिचय है। निष्काम कर्म- अनासक्त जीवन-साधनाशील जीवनयात्रा, जो नित सोपानों एवं आयामों की ओर निरंतर गतिशील है। उसका यथार्थ परिचय तो बस उनसे मिलनेवालों एवं प्रेरित होनेवालों की अनुभूतियों में पहचाना जा सकता है। उनसे परिचित होने का सुगम साधन भी यही है। सत्य और यथार्थ यही है कि ग्रंथकार का परिचय किन्हीं शब्दों में नहीं समा सकता है। वह तो उनके निरंतर विराट् होते हुए व्यक्तित्व में है, जो गीता गायक की निरंतर चेतना में अनवरत घुलता-मिलता हुआ उन्हीं में एकाकार होता जा रहा है।
Jeevan Gita: Bhagavadgita Mein Jyotish Vigyan (Set of Volume 1 & 2)
Dr. Arun Kumar Jaiswal
20% off₹ 1800
₹ 1440
Out of Stock
Cosmic Vedic Technology
- Author Name:
Dr.Sanjay Rout
- Book Type:

- Description:
Cosmic Vedic Technology is a book that will help you to understand the relationship between your mind and body, as well as the role of cosmic energy in your life. It will show you how to use these principles to improve your health, wealth, and relationships.
Death: An Inside Story
- Author Name:
Sadhguru
- Book Type:

- Description:
Death is a taboo in most societies in the world. But what if we have got this completely wrong? What if death was not the catastrophe it is made out to be but an essential aspect of life, rife with spiritual possibilities for transcendence? For the first time, someone is saying just that. In this unique treatise-like exposition, Sadhguru dwells extensively upon his inner experience as he expounds on the more profound aspects of death that are rarely spoken about. From a practical standpoint, he elaborates on what preparations one can make for one’s death, how best we can assist someone who is dying and how we can continue to support their journey even after death. Whether a believer or not, a devotee or an agnostic, an accomplished seeker or a simpleton, this is truly a book for all those who shall die!
Markandeya Purana
- Author Name:
Bibek Debroy
- Book Type:

- Description:
A marvellous amalgam of mythology and metaphysics, the Markandeya Purana unfolds as a series of conversations, in which the sage Markandeya is asked to answer some deeper questions raised by events in the Mahabharata. These illuminating exchanges evolve into a multi-faceted exploration of the core concepts of Hindu philosophy-from an excellent exposition of yoga and its unique attributes to a profound treatise on the worship of the goddess, the Devi Mahatmya, which also includes the popular devotional texts known as 'Chandi' or 'Durga Saptashati'. Brimming with insight and told with clarity, this luminous text is also a celebration of a complex mythological universe populated with gods and mortals, and contains within its depths many nested tales like that of Queen Madalasa and her famous song. Bibek Debroy's masterful translation draws out the subtleties of the Markandeya Purana, enabling a new generation of readers to savour its timeless riches.
Sanatan Sanskriti Ka Mahaparva Simhastha
- Author Name:
Siddhartha Shankar Gautam
- Book Type:

- Description:
आधुनिक कुंभ पर्व का धार्मिक रूप से प्रचार-प्रसार आदिगुरु शंकराचार्य ने किया था। उन्होंने पर्व की शुरुआत धार्मिक मान्यताओं को बढ़ावा देने और हिंदुओं को अपनी सनातन संस्कृति की पहचान दिलाने के उद्देश्य से की थी। आज भी कुंभ पर्व मुख्यतः साधु-संत समाज का ही पर्व माना जाता है। वस्तुतः कुंभ पर्व सनातन है। अग्नि पुराण, गरुड़ पुराण, वराह पुराण, कूर्म पुराण, वामन पुराण, मत्स्य पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण, पद्म पुराण, शिव पुराण, विष्णु पुराण, स्कंद पुराण, लिंग पुराण, हरिवंश पुराण, श्रीमद्भागवत, महाभारत, वाल्मीकि रामायण तथा अन्य प्राचीन ग्रंथों, जैसे ऋग्वेद, अथर्ववेद, शतपथ ब्राह्मण में वर्णित आख्यानों से कुंभ पर्व की प्राचीनता का अनुमान लगाया जा सकता है। गौतम बुद्ध ने नदियों के तट पर आयोजित कुंभ पर्व को ‘नदी पर्व’ कहा है। विष्णु पुराण के अनुसार—‘‘हजारों स्नान कार्तिक में, सैकड़ों स्नान माघ मास में किए हों तथा करोड़ों बार वैशाख में नर्मदा स्नान से जो पुण्य प्राप्त होता है, वही पुण्य एक बार कुंभ पर्व में स्नान करने से प्राप्त होता है।’’ —इसी पुस्तक से
MadhyaKalin Dharm-Sadhna
- Author Name:
Hazariprasad Dwivedi
- Book Type:

- Description:
्यकालीन धर्म-साधना' यद्यपि भिन्न-भिन्न अवसर पर लिखे गये निबन्धों का संग्रह ही है, तथापि आचार्य द्विवेदी जी ने प्रयत्न किया है कि ये लेख परस्पर विच्छिन और असम्बद्ध न रहें और पाठकों को मध्यकालीन धर्म-साधनाओं का संक्षिप्त और धारावाहिक परिचय प्राप्त हो जाए। दो प्रकार के साहित्य से इन धर्म-सानाओं का परिचय संग्रह किया गया है— (1) विभिन्न सम्प्रदायों के साधना-विषयक और सिद्धान्त-विषयक ग्रन्थ; और (2) साधारण काव्य-साहित्य। इस प्रकार पुस्तक में आलोचित अधिकांश धर्म-साधनाएँ शास्त्रीय रूप में ही आई हैं। जिन सम्प्रदायों के कोई धर्म-ग्रन्थ प्राप्त नहीं हैं या जो धर्म-साधनाएँ साधारण काव्य-साहित्य में नहीं आ सकी हैं, वे छूट गई हैं। हमारे देश की धर्म-साधना का इतिहास बहुत विपुल है। विभिन्न युग की सामाजिक स्थितियों से भी इसका सम्बन्ध है। फलस्वरूप इस पुस्तक में प्रयत्न किया गया है कि उत्तर भारत की प्रधान धर्म-साधनाएँ यथासम्भव विवेचित हो जाएँ और उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि का भी सामान्य परिचय पाठक को मिल जा
Baseshwar
- Author Name:
Kashinath Ambalge
- Book Type:

- Description:
निर्बलों की सहायता करना ही सबलों का कर्तव्य है। उसी से सुखी समाज की स्थापना हो सकती है। सभी धर्मों के मूल में दया की भावना ही प्रमुख है। बसवेश्वर के एक वचन का यही भाव है—दया के बिना धर्म कहाँ? सभी प्राणियों के प्रति दया चाहिए। दया ही धर्म का मूल है, दया-धर्म के पथ पर जो नहीं चलता कूडलसंगमदेव को वह नहीं भाता।
बसवेश्वर की वचन रचना का उद्देश्य ही सुखी समाज की स्थापना था। चोरी, असत्य, अप्रामाणिकता, दिखावा, आडम्बर एवं अहंरहित समाज की स्थापना बसव का परम उद्देश्य था, जो निम्न एक वचन से स्पष्ट होता है—चोरी न करो, हत्या न करो, झूठ मत बोलो, क्रोध न करो, दूसरों से घृणा न करो, स्वप्रशंसा न करो, सम्मुख ताड़ना न करो, यही भीतरी शुद्धि है और यही बाहरी शुद्धि है, यही मात्र हमारे कूडलसंगमदेव को प्रसन्न करने का सही मार्ग है। हठ चाहिए शरण को पर-धन नहीं चाहने का, हठ चाहिए शरण को पर-सती नहीं चाहने का, हठ चाहिए शरण को अन्य देव को नहीं चाहने का, हठ चाहिए शरण को लिंग-जंगम को एक कहने का, हठ चाहिए शरण को प्रसाद को सत्य कहने का, हठहीन जनों से कूडलसंगमदेव कभी प्रसन्न नहीं होंगे।
Chitt Basain Mahaveer : Jivan Aur Darshan
- Author Name:
Prem Suman Jain
- Book Type:

- Description:
विश्व के साधक चिन्तकों में जैन दार्शनिक एवं तीर्थंकर कई दृष्टियों से स्मरण किए जाते हैं। उनका चिन्तन धर्म, जाति, देशकाल को गहरे प्रभावित करता है। उन्होंने प्राणीमात्र के कल्याण एवं विकास के सूत्र अपने उद्बोधनों में प्रदान किए हैं। भगवान महावीर का सन्देश है कि सुख, शान्ति, तनावरहित जीवन अपरिग्रह, सन्तोष, संयम से ही आ सकता है। तीर्थंकर महावीर ने अपने जीवन में व्यक्तिगत स्वामित्व के विसर्जन का प्रयोग करके बताया है। उन्होंने राज्यपद को त्यागा और पदार्थों के ढेर से अलग जा खड़े हुए, तब वे समता और शान्ति के स्वामी बने भगवान महावीर ने व्यक्ति के पूर्ण विकास के लिए एक ओर जहाँ आत्म-विकास का पथ प्रशस्त किया है, वहीं दूसरी ओर लोक-कल्याण के लिए सामाजिक मूल्यों का भी सृजन किया है। अहिंसा, अपरिग्रह और अनेकान्त—ये तीनों मूल्य महावीर के सामाजिक अनुसन्धान के परिणाम हैं। तीर्थंकर महावीर के चिन्तन ने व्यक्ति को पुरुषार्थी और स्वावलम्बी बनने की शिक्षा दी है। उन्होंने मानव को सहिष्णु, निराग्रही होने का भी सन्देश दिया है। विचारों की उदारता से ही हम सत्य की तह तक पहुँच सकते हैं। तीर्थंकर महावीर का सारा जीवन आत्म-साधना के पश्चात् सामाजिक और नैतिक मूल्यों के निर्माण में ही व्यतीत हुआ। इसी कारण तीर्थंकर महावीर मानव जाति के गौरव के रूप में प्रतिष्ठित हुए। ‘चित्त बसें महावीर’ पुस्तक में प्रो. प्रेम सुमन जैन ने तीर्थंकर महावीर के प्रेरणादायक जीवन और दर्शन को एक रोचक शैली में प्रस्तुत किया है। एक महत्त्वपूर्ण और संग्रहणीय कृति।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book