Markandeya Purana
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A marvellous amalgam of mythology and metaphysics, the Markandeya Purana unfolds as a series of conversations, in which the sage Markandeya is asked to answer some deeper questions raised by events in the Mahabharata. These illuminating exchanges evolve into a multi-faceted exploration of the core concepts of Hindu philosophy-from an excellent exposition of yoga and its unique attributes to a profound treatise on the worship of the goddess, the Devi Mahatmya, which also includes the popular devotional texts known as 'Chandi' or 'Durga Saptashati'. Brimming with insight and told with clarity, this luminous text is also a celebration of a complex mythological universe populated with gods and mortals, and contains within its depths many nested tales like that of Queen Madalasa and her famous song. Bibek Debroy's masterful translation draws out the subtleties of the Markandeya Purana, enabling a new generation of readers to savour its timeless riches.
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A marvellous amalgam of mythology and metaphysics, the Markandeya Purana unfolds as a series of conversations, in which the sage Markandeya is asked to answer some deeper questions raised by events in the Mahabharata. These illuminating exchanges evolve into a multi-faceted exploration of the core concepts of Hindu philosophy-from an excellent exposition of yoga and its unique attributes to a profound treatise on the worship of the goddess, the Devi Mahatmya, which also includes the popular devotional texts known as 'Chandi' or 'Durga Saptashati'.
Brimming with insight and told with clarity, this luminous text is also a celebration of a complex mythological universe populated with gods and mortals, and contains within its depths many nested tales like that of Queen Madalasa and her famous song.
Bibek Debroy's masterful translation draws out the subtleties of the Markandeya Purana, enabling a new generation of readers to savour its timeless riches.
Book Details
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ISBN9780143448259
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Pages560
-
Avg Reading Time19 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIN
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‘देवतुल्य नास्तिक’ पुस्तक में अरुण भोले कुछ विशिष्ट व्यक्तित्वों के माध्यम से जीवन के रहस्यों को जानने का प्रयास करते हैं। ‘ज्ञानपिपासु गौतम’, ‘अन्तर्मुखी विज्ञान’, ‘तटस्थ प्रकृति’, ‘वैज्ञानिक ज्ञान-मीमांसा’, ‘सन्देह और श्रद्धा के संगम’, ‘संवाद और सहयोग', 'जले दीप से दीप' तथा 'विज्ञान और नियति' शीर्षकों के अन्तर्गत लेखक ने सत्य और ज्ञान की खोज करनेवाले विश्वविख्यात व्यक्तित्वों का विश्लेषण किया है।
लेखक का उद्देश्य स्पष्ट है। वह चाहता है कि शक्तियों में समन्वय हो।
लेखक के शब्दों में : ‘अपने अन्वेषण और प्रयोगों से विज्ञान ने जो तथ्य बटोरे हैं, उन सबके आत्यन्तिक अर्थ क्या हैं तथा लोकमंगल की दृष्टि से उनका परम उपयोग क्या होगा, इसी का बोध ज्ञान माना जाएगा। वैसे ज्ञान के अभाव में अमर्यादित वैज्ञानिक जानकारियाँ हमें सर्वनाश की ओर ले जा सकती हैं। यही वह स्थल है जहाँ हमें धर्म और दर्शन की सहायता लेनी पड़ेगी; क्योंकि वैज्ञानिक भी मानते हैं कि जीवन को सँवारने और मानवीय भावनाओं को प्रभावित करने का अधिक अभ्यास और अनुभव दर्शन और धर्म को ही है।’
विश्व संस्कृति की अन्तर्धाराओं का प्रवाहपूर्ण, प्रामाणिक और सतर्क विश्लेषण।
Soorsagar Saar Satik
- Author Name:
Dr. Dhirendra Verma
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Description:
सूरदास हिन्दी साहित्य के सूर्य माने जाते हैं, किन्तु इस महाकवि की प्रसिद्ध कृति ‘सूरसागर’ का पठन-पाठन का रसास्वादन उतना नहीं हो पा रहा है जितना होना चाहिए। इसके अनेक कारण हैं। एक तो यह ग्रन्थ बहुत बड़ा है, दूसरे इसमें अनेक स्तरों की सामग्री मिश्रित रूप में पाई जाती है।
इसी बात को ध्यान में रखते हुए ‘सूरसागर’ के लगभग 5000 पदों में से 831 अत्यन्त उत्कृष्ट पदों का चयन इस पुस्तक में किया गया है। विनय तथा भक्ति के पदों के उपरान्त कृष्णचरित सम्बन्धी पद, गोकुल लीला, वृन्दावन लीला, राधा-कृष्ण, मथुरा गमन, उद्धव-सन्देश और द्वारिका चरित तथा कृष्ण-जन्म से लेकर राधा-कृष्ण के अन्तिम मिलन तक के
सम्पूर्ण कृष्णचरित क्रमबद्ध वर्णन प्रस्तुत ग्रन्थ में किया गया है। इस प्रकार का प्रयास पहली बार प्रस्तुत है।
आशा है, अध्येता इस ग्रन्थ से पूरा लाभ उठा सकेंगे।
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