Gautam Buddh ki kahaniyan
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राजकुमार सिद्धार्थ के पिता राजा शुद्धोधन यह बिल्कुल नहीं चाहते थे कि उनका बेटा एक यशस्वी सम्राट न बन कर तपस्वी बने, संत बने। उन्होंने राजकुमार सिद्धार्थ के चारों ओर सुख सुविधाओं का ऐसा जाल बुना कि सिद्धार्थ उसमें उलझकर रह जाएँ, उन्हें वैराग्य का विचार भी न आए। शुद्धोधन चाहते थे कि राजकुमार सिद्धार्थ को संसार का दुःख देखने ही न दें । लेकिन ऐसा कहाँ संभव था ? सिद्धार्थ, महाकारुणिक बुद्ध हुए और अनगिनत लोगों के जीवन में दया, करुणा और शांतिपूर्ण सहस्तित्व का प्रकाश फैलाया । ये कहानियाँ हम उनके जीवन के असंख्य प्रेरक प्रसंगों में से चुनकर यहाँ प्रकाशित कर रहे हैं ।
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राजकुमार सिद्धार्थ के पिता राजा शुद्धोधन यह बिल्कुल नहीं चाहते थे कि उनका बेटा एक यशस्वी सम्राट न बन कर तपस्वी बने, संत बने। उन्होंने राजकुमार सिद्धार्थ के चारों ओर सुख सुविधाओं का ऐसा जाल बुना कि सिद्धार्थ उसमें उलझकर रह जाएँ, उन्हें वैराग्य का विचार भी न आए। शुद्धोधन चाहते थे कि राजकुमार सिद्धार्थ को संसार का दुःख देखने ही न दें । लेकिन ऐसा कहाँ संभव था ? सिद्धार्थ, महाकारुणिक बुद्ध हुए और अनगिनत लोगों के जीवन में दया, करुणा और शांतिपूर्ण सहस्तित्व का प्रकाश फैलाया । ये कहानियाँ हम उनके जीवन के असंख्य प्रेरक प्रसंगों में से चुनकर यहाँ प्रकाशित कर रहे हैं ।
Book Details
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ISBN9788198146366
-
Pages63
-
Avg Reading Time2 hrs
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Age0-11 yrs
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Country of OriginIndia
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