Seemant
Author:
Hemangini A. RanadePublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 120
₹
150
Unavailable
कौन-सी वह तीव्र अनुभूति है जो मानव-मन को किसी स्थान विशेष की ओर अनजाने ही आकर्षित करती है? यह आकर्षण भौगोलिक हदों तक सीमित नहीं, इसका सम्मोहन देशकाल की सीमाओं से परे है। उपन्यास की नायिका एंजेलिका, जिस देश में जन्मी, पली और बढ़ी है, उस समाज और वातावरण में अपने को सर्वथा अजनबी पाती है, जहाँ हज़ारहा कोशिशों के बावजूद उसे चैन और सुकून हासिल नहीं है। वह नहीं जानती कि इस छटपटाहट के पीछे कारण क्या हैं? माता-पिता की उसके प्रति रही उदासीनता को लेकर आक्रोश या स्वयं अपने स्वभाव में एक अनाम अधूरापन जिसका निर्धारण असम्भव है। अन्ततः जब वह अपने गन्तव्य—भारत आ पहुँचती है, बकौल उसकी जापानी सहेली फ्रुमिको के, अपने भारतीय पति को ‘भारत के एक टिकट के लिए भुनाकर’, तो क्या परिपूर्णता की उसकी खोज वाकई समाप्त हो जाती है? या अभी देशकाल की कई और भौतिक सीमाओं को उलाँघना बाक़ी है? परदेस जाकर बसनेवाले लोग किन-किन कारणों से अपने-अपने देशों का त्याग करते हैं, अपनाए हुए देश से उनकी क्या और कौन-सी अपेक्षाएँ हुआ करती हैं, इस प्रश्न को भी आयरलैंड और भारत की पृष्ठभूमि पर रचित इस उपन्यास में उपस्थित किया गया है।
ISBN: 9788171787289
Pages: 160
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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रेनाट डोरेस्टीन नीदरलैंड की सबसे अधिक पढ़ी जानेवाली उपन्यासकार हैं। 1983 में अपनी लेखन-यात्रा शुरू करनेवाली रेनाट ने कई उपन्यास लिखे, जिनमें ‘ए हर्ट ऑफ़ स्टोन’, ‘अननेचुरल मदर’, ‘फेटल लॉस’, ‘नो मर्सी’ प्रमुख हैं। ‘फेटल लॉस’ के लिए ‘गोल्डन आउल पुरस्कार’ सहित उन्हें लेखन में उनके योगदान के लिए विशिष्ट ‘एनी रोमेन पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया गया।
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- Description: Hermann Hesse once said “every age, every culture and tradition has its own character, its own strengths, its own weakness and its beauties and cruelties” who would we be if it weren’t for our customs, cultures and traditions. Anu, a young girl of Mumbai, felt the same way. She was born and raised in Mumbai, did her schooling in Delhi and college in the U.S. She had never understood what the customs and traditions of every religion was all about? She failed to recognize why most religions had such strict customs and why most people were orthodox and most modern. She gets into a fight with her husband on Diwali as why they should have the Diwali Pooja. They have a major argument and Anu leaves the house and goes lives with her parents. Her parents had warned her Rajesh’s customary beliefs and customs. Anu refuses to go back to her house and decides she needs a holiday to get away from everyone. During her journey, she bumps into one of her old school friends, Rahul. They catch up on old times and have a lot of fun together. Anu asks him to go on this journey with her. Things take an interesting turn on this journey. This is a story about Anu who takes this journey to understand the customs and traditions of every religion. She travels to places like Jammu and Kashmir, the U.S.A, Africa and many more.
Ummid
- Author Name:
Shrikumaran Tampi
- Book Type:

- Description: श्रीकुमारन तम्पी के मूल मलयालम उपन्यास 'कुट्टनाटु' का परम विद्वान डॉ. रंजीत रविशैलम द्वारा किया गया हिन्दी अनुवाद 'उम्मीद' एक मर्मस्पर्शी कृति है। त्याग की भावनाओं को उजागर करता यह उपन्यास केरल के उस परिवेश का सजीव चिंत्राकन करता है, जो आज से लगभग 60 वर्ष पूर्व के गाँव की जीवनशैली को प्रस्तुत करने में सक्षम है। जाति और धर्म को प्राथमिकता देने वाले उस समय के केरलीय परिवेश में एक नायर परिवार कुलीनता के नाम पर अपना सर्वस्व त्यागने का साहस करता है, इस भावपूर्ण और कठिन विषय को सरलता के साथ प्रस्तुत किया गया है। ईसाई, मुसलमान, हिन्दू के बीच समन्वय स्थापित करने के प्रयास का यथावत् चित्रण, साथ ही, दो भाईयों के भिन्न व्यवहार का बहुत सुन्दर चित्रण किया गया है। जहाँ एक ओर, एक भाई के स्वार्थी व्यवहार को दर्शाने के लिए उचित शाब्दिक स्थितियाँ निर्मित की गई हैं, वहीं दूसरी ओर, दूसरे भाई के त्याग की भावना को उजागर करने के लिए उपयुक्त भावुक वातावरण बनाया गया है।
Naari
- Author Name:
Siyaramsharan Gupt
- Book Type:

-
Description:
चिरन्तन नारी युग-युग के अन्धकार में, उसे तुच्छ करके चिरकाल से आगे बढ़ती जा रही है, दु:ख और विपत्ति के अँधियारे पथ को पददलित करती हुई। उसे कोई भय नहीं है, कोई चिन्ता नहीं है। यही वह भाव है, यही वह मूल-मंत्र है, जिसके इर्द-गिर्द प्रसिद्ध उपन्यासकार सियारामशरण गुप्त जी ने इस उपन्यास का ताना-बाना बुना है, जो रोचक है, उत्कृष्ट मनोरंजन प्रदान करनेवाला है, और दिशाहीन होते समाज को सही दिशा दिखानेवाला भी है।
नारी सहित प्रत्येक व्यक्ति ईश्वर की सृष्टि है। इसी कारण ईश्वर की तरह वह गहन भी है। ईश्वर की तरह ही कष्ट सहन करके ही उसे ईश्वरीय शक्ति उपलब्ध करना होगा। उचित यही है, करणीय यही है। यही वह मान्यता है, यही वह सिद्धान्त है, जिसे इस उपन्यास में निरूपित किया गया है, स्थापित किया गया है। उपन्यास के पात्र जैसे सजीव होकर इन सर्वोच्च मान्यताओं को अपने क्रिया-कलापों और संवादों से इस प्रकार पूर्णता से स्थापित करते चलते हैं कि पाठक के मन-मस्तिष्क पर उसका स्थायी प्रभाव पड़े।
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