Sant Na Bandhe Ganthari
Author:
MithileshwarPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 240
₹
300
Available
‘संत न बाँधे गाँठड़ी’ उपन्यास जीवन और समाज से अभिन्न धार्मिक आस्था-विश्वास, श्रद्धा-भक्ति तथा आध्यात्मिक चेतना के विकास के नाम पर हमारे समक्ष निरन्तर गहराते संकट से न सिर्फ़ अवगत कराता है बल्कि अन्धश्रद्धा के ख़िलाफ़ हमें जागरूक और सतर्क बने रहने की प्रबल प्रेरणा भी देता है।</p>
<p>यह उपन्यास वैसे बाबाओं, स्वामियों एवं गुरुओं को ही कटघरे में नहीं लाता बल्कि इसके लिए जनसमाज की अन्धश्रद्धा को भी ज़िम्मेवार मानता है। अपने ही जैसे किसी इंसान को गुरु और संत के तहत ईश्वर का प्रतिरूप समझ उनके प्रति अपना तन-मन और धन सर्मिपत कर देना अन्धश्रद्धा नहीं तो और क्या है।</p>
<p>उपन्यास की व्यापकता और महत्त्व का परिचायक इसका ऐसा कथ्य और तथ्य है जिसके तहत धार्मिक, आध्यात्मिक क्षेत्र के किसी भी पक्ष को ऩजरअन्दाज नहीं किया गया है, बल्कि गहराई, बेबाकी और सूक्ष्मता के साथ पूरे परिदृश्य का ऐसा सम्यक् और सटीक विश्लेषण हुआ है जिसके तहत दूध का दूध और पानी का पानी की तरह धार्मिक, आध्यत्मिक जगत का सत्य और तथ्य, कपट और पाखंड तथा योग और भोग सबकुछ स्पष्ट होता चला गया है।
ISBN: 9789389742435
Pages: 287
Avg Reading Time: 10 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Ek Kasbe Ke Notes
- Author Name:
Neelesh Raghuwanshi
- Book Type:

-
Description:
नीलेश रघुवंशी की एक उपलब्धि यह है कि उसने एक ऐसे कथानक को, जिसमें भावनिकता के भयावह अवसर थे, एक निर्मम ढंग से यथार्थवादी रखा है जिसमें हास-परिहास के लिए भी गुंजाइश है। परिवार में माँ है लेकिन वह हमेशा ममतामयी और पतिपरायणा नहीं है, उसमें छिपी विद्रोहिणी कभी भी जागृत हो सकती है। इकलौता बेटा मुँहफट और दुर्विनीत है। अलग-अलग उम्रों, स्वभावों और नियतियों वाली बेटियाँ हैं लेकिन उनमें एक बराबरी का बहनापा है। उनके अपने-अपने कुँवारे और ब्याहता सपने हैं। उनकी जद्दोजहद, छोटी-बड़ी दुखान्तिकाएँ और जीवन-परिवर्तक उपलब्धियाँ भी हैं। क्या भारत सरीखे जटिल समाज में ‘फेमिनिस्ट’ सरीखे सीमित और भ्रामक शब्द की जगह ‘एक क़स्बे के नोट्स’ को हम ‘मातृवादी’ या ‘बेटीवादी’ या ‘बहनापावादी’ कह सकते हैं? और यदि पिता को लेकर इतनी समझदारी और स्नेह है तो ‘पितावादी’ भी क्यों नहीं?
शायद यह हिन्दी का पहला उपन्यास है जिसमें किसी लेखिका ने एक निम्न-मध्यवर्गीय क़स्बाई पारिवारिक जीवन को इतनी अन्तरंगता और असलियत से जीवन्त किया हो। प्रतिभा के लिए सृजन में तो कुछ भी असम्भव नहीं, किन्तु किसी पुरुष के लिए ऐसे घर-परिवार का इतना अन्दरूनी अनुभव मुश्किल ही था।
सच तो यह लगता है कि लेखिका ने इस एक क़स्बे के बहाने लगभग सभी उत्तर भारतीय क़स्बों को चेहरा दे दिया है। हम सब यदि (अब) छोटे शहरों में नहीं भी रहते हैं तो कभी-न-कभी उनमें हमारी बूद-ओ-बाश थी, वहाँ से गुज़रते, लौटते रहते हैं, हमारे कितनी ही दोस्तियाँ और रिश्ते, और सबसे ऊपर, स्मृतियाँ, अब भी वहीं बसी हुई हैं। हिन्दी लेखन से एक झटके से क़स्बा काट दो, वह हलाल हो जाएगा। नीलेश रघुवंशी ने बेशक अपने क़स्बे को सजीव पात्रों से आबाद किया है लेकिन उसमें हरकत और जान तभी आती है जब सारे क़स्बाई दृश्य, ध्वनियाँ, रंग, गंध, स्पर्श और वे मौसम और धूल-धूसर जो सिर्फ़ क़स्बों में नसीब होते हैं, उस अलबम को मूक सीपियाँ से परदे के वाचाल रंगीन में बदल देते हैं। टेलीविज़न पर अपने लम्बे अनुभव के कारण लेखिका अपना शिल्प नियंत्रित रखना जानती है, और पठनीयता के स्तर पर पिछले कुछ वर्षों में ऐसे उपन्यासों का दुर्भिक्ष-सा रहा है।
—विष्णु खरे
Sadhu Ojha Sant
- Author Name:
Sudhir Kakkar
- Book Type:

-
Description:
आधुनिक चिकित्सा-पद्धति के विकास तथा शिक्षा के प्रचार-प्रसार के बावजूद आज भी भारतीय जनमानस में साधुओं-ओझाओं आदि के प्रति विश्वास पूरी तरह ख़त्म नहीं हुआ है। इसे आधुनिक विज्ञान और राज्य की अक्षमता कहें या जनसाधारण के मन में बैठा अन्धविश्वास कि आज भी ऐसी-ऐसी ख़बरें सुनाई दे जाती हैं जिन पर सहज ही विश्वास नहीं हो पाता।
प्रतिष्ठित मनोविश्लेषक सुधीर कक्कड़ अपनी इस कृति में उसी अविश्वसनीय लेकिन वास्तविक दुनिया की यात्रा करते हैं। साधुओं, ओझाओं, स्थानीय वैद्यों और सन्तों द्वारा सदियों से जारी परम्परागत मनोचिकित्सा पद्धतियों का विश्लेषण करते हुए वे उनके रहस्यों का उद्घाटन करते हैं। मन्दिरों, मठों आदि पर निरन्तर होनेवाली गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत करते हुए वे इनकी कार्य-शैली और आस्थावान लोगों की मनोरचना को अपने वैज्ञानिक-नज़रिए से भी देखते चलते हैं।
भारतीय ज्ञान में रुचि रखनेवाले लोगों के लिए उपयोगी इस पुस्तक में लेखक ने भारतीय और पश्चिमी मनोविज्ञान का तुलनात्मक अध्ययन भी किया है।
Out of Love
- Author Name:
Swetha R Mohan
- Rating:
- Book Type:

- Description: Some relationships in life begin casually and come with us for a very long-time, more than we expected! Sometimes we misunderstand people and a few times we misunderstand what they mean to us. When we realize it, It is too late. Do we get a chance to restart? This fiction is about a few people in their prime part of life - late teens to early twenties. Priya, the Talkative, boisterous girl sets the pace of the story. She can be friends with anyone unlike sanjana, who sees her bestial and only friend in Oriya. All Indian teenage girls have a thing in common - their liking for Reel life heroes. The girls were no exception. They are die-hard fans of an upcoming actor from a star family, Rishi. Not an everyday thing, but it did happen to them. Priya, sanjana and Rishi cross paths. They meet, greet, get friendly and get closer. It is about these three people's journey - their emotions, their behaviour, and their relationship. The same love that brings them closer drifts them apart when dynamics change. Out of love, do they make, break or mend their relationship!.
Tremors of Love
- Author Name:
Aditi Ray
- Book Type:

- Description: Unexpected events make Anuradha Godel and Arnav Nag get back in touch after many years and they decide to journey together to Sikkim. As they rekindle their friendship, while discovering the hidden spots of this Hill town, they also begin to accept various emotions that they have been running away from. Will then nye-mae-el give them the ultimate happiness that they are looking for? 'Tremors of love' Is about discovering a new place, the self, and love.
Andhere Band Kamare
- Author Name:
Mohan Rakesh
- Book Type:

- Description: वर्तमान भारतीय समाज का अभिजात नागर मन दो हिस्सों में विभाजित है—एक में है पश्चिमी आधुनिकतावाद और दूसरे में वंशानुगत संस्कारवाद। इससे इस वर्ग के भीतर का द्वन्द्व पैदा होता है, उससे पूर्णता के बीच रिक्तता, स्वच्छन्दता के बीच अवरोध और प्रकाश के बीच अन्धकार आ खड़ा होता है। परिणामतः व्यक्ति ऊबने लगता है, भीतर ही भीतर क्रोध, ईर्ष्या और सन्देह जकड़ लेते हैं उसे, अपने ही लिए अजनबी हो उठता है वह, और तब इसे हम हरबंस की शक्ल में पहचानते हैं—हरबंस इस उपन्यास का केन्द्रीय पात्र, जो दाम्पत्य सम्बन्धों की सहज रागात्मकता, ऊष्मा और अर्थवत्ता की तलाश में भटक रहा है। हरबंस और नीलिमा के माध्यम से पारस्परिक ईमानदारी, भावनात्मक लगाव और मानसिक समदृष्टि से रिक्त दाम्पत्य जीवन का यहाँ प्रभावशाली चित्रण हुआ है। अपनी पहचान के लिए पहचानहीन होते जा रहे भारतीय अभिजातवर्ग की भौतिक, बौद्धिक और सांस्कृतिक महत्त्वाकांक्षाओं के अँधेरे बन्द कमरों को खोलनेवाला यह उपन्यास हिन्दी की विशिष्टतम कथाकृतियों में गण्य है
Bharatiyata Ki Pahchan
- Author Name:
Manoj Kumar Rai
- Book Type:

- Description: हम भारत की संपूर्ण सत्ता को समझने के लिए उसे तीन कोणों से देखें तो ठीक-ठीक समझ सकते हैं। वे कोण हैं— (1) ‘मृण्मय’ (अर्थात भौगोलिक-आर्थिक-जैविक दृष्टि से), (2) ‘शाश्वत’ (ऐतिहासिक अविच्छिन्न विकास की दृष्टि से), (3) ‘चिन्मय’ (श्रुति अर्थात ‘अचल’ मूल्यों की दृष्टि से, यानी ‘मूल प्रकृति’ या essence की दृष्टि से)। इन तीन कोणों से भारत का अध्ययन करके संपूर्ण भारतीय ‘सत्ता’ और भारतीय पुरुषार्थ को हम समझ सकते हैं। भारत का मृण्मय रूप हमारे गाँव-नगर, खेत-खलिहान, नदी-पहाड़, हाट-बाजार में उपस्थित है और इस रूप द्वारा भारत ‘काम’ और ‘अर्थ’ की साधना कर रहा है। भारत का ‘शाश्वत रूप’ काल-प्रवाह अर्थात इतिहास में हजार-हजार वर्षों से, सैंधव सभ्यता के पूर्व से, निषाद-द्रविड़-किरात आर्य—इन चार महान् प्रवाहों के क्रमागत आगमन से निरंतर चलायमान है। यह ‘शाश्वत’ इस अर्थ में है कि यह अविच्छिन्न रहा है। अत: भारत का ‘शाश्वत रूप’ इतिहास की विकास-यात्रा में नित्य देहांतर करते हुए, निरंतर चलते हुए ‘धर्म’ नामक तृतीय पुरुषार्थ की अखंड, अविच्छिन्न उपासना कर रहा है। भारत का ‘चिन्मय रूप’ इस शाश्वत रूप से भी सूक्ष्म है। इस रूप का लक्ष्य है ‘मोक्ष धर्म’, अर्थात ‘शुद्ध आनंद’।
Frozen Tears
- Author Name:
Advyth
- Book Type:

- Description: A highly intelligent serial killer is loose in the Metro city in India. His targets are unconnected people from different age groups, the only common element being that he gives his victims a painless death. Dev, a senior police officer who is assigned the case, is struck by the empathetic way in which the killer masterminds his horrific acts. His conventional ways of investigating the case lead nowhere. He is then joined by his daughter, Rudra, who is a psychiatrist and criminologist working for the London police Department. Rudra brings in her novel ways of investigation of getting into the killer mind and has her first breakthrough. As the case proceeds, Rudra is shocked to discover how crimes all over the world are driven by universal passions, and how, with the slight provocation, even seemingly innocent people can be driven to horrendous crimes. But what Rudra does not know is that the killer, who is always one step ahead of her, is much closer to home than she thinks. It takes a terrible tragedy to prove that to her. Join author advyth as he narrates this unique crime investigation thriller that is full of eye-opening insights on the human mind that will shock one and all.
Memoirs of A Heart
- Author Name:
Madhouse Writers
- Book Type:

- Description: Madhouse writers are a group of writers and poets from Instagram who made a group of theirs in October 2015. Sharing their art, all the writers strive for mutual betterment, and their goal is to share their excellent work with all the impatient souls out here who seek peace in writing. Themselves being beginners in the field of publishing, they aim at establishing their stature and helping others with the same. From among a small clan of writers, 23 have contributed to making this book as it is.
Dalamber Ka Sapna
- Author Name:
Denis Diberot
- Book Type:

- Description: दिदेरो की यह कृति दरअसल तीन संवादों—‘दलाम्बेर और दिदेरो का संवाद’, ‘दलाम्बेर का सपना’ और ‘संवाद का उत्तर भाग’—की शृंखला है। बेहद दिलचस्प और मौलिक ढंग से विज्ञान के सवालों पर चर्चा करते हुए भी इसका मूल उद्देश्य जीवविज्ञान की प्रस्थापनाएँ प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि अधिभूतवाद, पारम्परिक नैतिकता, अलौकिक शक्तियों में विश्वास और दकियानूसी के विरुद्ध भौतिकवादी नियत्ववाद का बिगुल फूँकना था जिनका इस्तेमाल प्रभुत्वशाली वर्ग बाक़ी मनुष्यों के जीवन को नियंत्रित करने के लिए करता था। दिदेरो की ख़ास शैली में वैज्ञानिक चिन्तन और गीतात्मकता का मेल करनेवाली यह रचना इसीलिए क़रीब ढाई सौ वर्ष बाद भी दुनिया-भर के पाठकों को आकर्षित करती है।
Khalnayak
- Author Name:
Yi Mun Yol
- Book Type:

-
Description:
इस उपन्यास की कथा साफ़ तौर से एक रूपक है जो कोरियाई राजनीति से जुड़ी है। यह कोरिया में एक अधिनायकवादी राज्य शैली से अनिश्चित क़िस्म के प्रजातंत्र में बदलने की गाथा है। इसमें ताक़त के भयंकर दुरुपयोग, आम जन के द्वारा उसे स्वीकार कर चुपचाप सहते रहने की मनोदशा, प्रजातंत्र की ओर उन्मुख करनेवाली जागृति को तो साक्षात् किया ही गया है लेकिन बड़ी बात यह है कि अधिनायक की हार के बावजूद अधिनायकवादी प्रवृत्ति के प्रति सदा सावधान बने रहने की ओर सशक्त संकेत भी किया गया है।
इस उपन्यास के दो स्तर हैं : एक सीधा-सादा और दूसरा सांकेतिक। सीधे-सीधे अर्थ के अनुसार यह कक्षा के एक ऐसे बिगड़ैल मॉनीटर की कहानी है जो अपनी ताक़त और अपने साम्राज्य का झंडा बनाए रखने के लिए कितने ही तरह के हथकंडे अपनाता है। सांकेतिक अर्थ के अनुसार यह मनुष्य के भीतर की एक ऐसी प्रवृत्ति को सामने लाता है जो ताक़तवर बनने की भरपूर कोशिश करती है। उपन्यास आत्मकथात्मक शैली में है जिसका ‘विकृत नायक’ अर्थात् ‘खलनायक’ ‘ओम सोकदे’ है।
माना जाता है कि यह उपन्यास 1980 के ग्वांगजू सामूहिक हत्याकांड से प्रेरित होकर लिखा गया था जिसमें प्रजातंत्र के लिए आन्दोलन कर रहे निहत्थे लोगों को दक्षिण कोरियाई सैनिकों (जिन्हें उत्तर कोरिया से लोहा लेने के लिए प्रशिक्षण दिया गया था और जो शायद युद्ध न होने की स्थिति में ऊब चुके थे) ने मौत के घाट उतारा था।
Khambhon Per Tiki Khushabu
- Author Name:
Narendra Nagdev
- Book Type:

-
Description:
भवन-निर्माण के व्यवसाय में गहरी जड़ें जमा चुके, हर क़ीमत पर कांट्रैक्ट हासिल कर लेनेवाले कुख्यात टेंडर माफ़िया की आतंककारी कार्यप्रणाली तथा उन्हें रोकने को कटिबद्ध, एक समर्पित, सृजनशील वास्तुकार का उनके साथ जोखिम-भरे संघर्ष का दस्तावेज़...
संघर्ष में एक सकारात्मक तथ्य को रेखांकित करता कि सृष्टि वह दानव नहीं चलाता जो अपने अहंकारवश बाढ़ ला देता है पूरे शहर में, वरन् उस चिड़िया के पंख चलाते हैं जो चोंच में तिनका दबाकर, तिनके में पानी की एक बूँद उठाकर, बार-बार फेंक आती है शहर के बाहर ताकि धीरे-धीरे बाढ़ से मुक्त हो सके शहर...
आर्किटेक्चर क्षेत्र के सघन व्यावसायिक घटनाक्रम के साथ-साथ एक लोककथात्मक फ़ैंटेसी की महीन बुनावट और विध्वंसक शक्तियों के गाल पर तमाचा-सा जड़ता एक अतियथार्थवादी चरम...
वर्तमान और अतीत के बीच, कल्पना और यथार्थ के बीच, सही और ग़लत के बीच झूलता हुआ सा, एक मोहक शिल्प तथा भाषा के सहज प्रवाह से युक्त नरेन्द्र नागदेव का आत्मीय, संवेदनशील प्रस्तुतीकरण—‘खम्भों पर टिकी ख़ुशबू...’
Unity And Strenght
- Author Name:
Amarendra Narayan
- Book Type:

-
Description:
Unity and Strength is a novel inspired by the life of Sardar Vallabhbhai Patel, the Architect of Independent India. His qualities of ardent patriotism, unflinching courage and determination, sharp foresight and honest hard work have influenced millions of people during and after the freedom struggle. The present generation of Indians looks at his contribution with much awe and respect.
Sardar Patel is a great source of strength and an idol of national unity. The novel describes how inspired by his sacrifice and dedication, common families came forward to follow him in the freedom struggle. It also narrates how in the independent India, the great leader unified the princely states in an astonishingly efficient manner within an unbelievable short time.Drawing inspiration from his life and thoughts, the novel indicates what we can do to fully realise his unfulfilled dreams of making a prosperous and strong India.
Shigaf
- Author Name:
Manisha Kulshreshtha
- Book Type:

- Description: विस्थापन का दर्द महज़ एक सांस्कृतिक, सामाजिक विरासत से कट जाने का दर्द नहीं है, बल्कि अपनी खुली जड़ें लिए भटकने और कहीं जम न पाने की भीषण विवशता है, जिसे अपने निर्वासन के दौरान सैनसबेस्टियन (स्पेन) में रह रही अमिता, लगातार अपने ब्लॉग में लिखती रही है। डॉन किहोते की ‘रोड टू ला मांचा’ से कश्मीर वादी में लौटने की, अमिता की भटकावों तथा असमंजस-भरी इस यात्रा को अद्भुत तरीक़े से समेटता हुआ यह उपन्यास विस्थापन और आतंकवाद की कोई व्याख्या या समाधान नहीं प्रस्तुत करता, वरन् आस्था-अनास्था की बर्बर लड़ाइयों के बीच, कुचले जाने से रह गए कुछ जीवट पलों को जिलाता है और ज़मीन पर गिर पड़े उस दिशा संकेतक बोर्ड को उठाकर फिर-फिर गाड़ता है जिस पर लिखा है—भाई मेरे, अमन का एक रास्ता इधर से भी होकर गुज़रता है। शिगाफ़ यानी एक दरार जो कश्मीरियत की रूह में स्थायी तौर पर पड़ गई है, जिसमें से धर्मनिरपेक्षता एक हद तक रिस चुकी है, इस शिगाफ़ को भरने के लिए प्रयासरत है उपन्यास का पत्रकार नायक ज़मान। अमिता और ज़मान जिनका लक्ष्य तो एक है मगर फिर भी दो विपरीत व विषम अतीत से उपजे जीवन-मूल्यों को सहेजते हुए वे कई बार प्रक्रिया तथा प्रतिक्रिया से उलझते हुए आपस में टकराते रहते हैं। अमिता के ब्लॉग, यास्मीन की डायरी, मानव बम जुलेखा का मिथकीय कोलाज, अलगाववादी नेता वसीम के एकालाप के ज़रिए कश्मीर और कश्मीरियत की विदीर्ण व्यथा-कथा को अलग कोण, नए शैलीगत प्रयोगों तथा ताज़गी-भरी भाषा के साथ अपने उपन्यास ‘शिगाफ़’ में अनूठे ढंग से प्रस्तुत कर रही हैं—मनीषा कुलश्रेष्ठ।
Parvati Chachi
- Author Name:
Vijay Kumar
- Book Type:

- Description: Parvati Chachi
Ajnabi Jazeera
- Author Name:
Nasera Sharma
- Book Type:

-
Description:
हिन्दी की वरिष्ठ कथाकार नासिरा शर्मा के लेखन की सर्वोपरि विशेषता है सभ्यता, संस्कृति और मानवीय नियति के आत्मबल व अन्तःसंघर्ष का संवेदना-सम्पन्न चित्रण। उनके कथा साहित्य के सरोकार ग्लोबल हैं। उनका कथाकार सन्तप्त और उत्पीड़ित मनुष्यता के पक्ष में पूरी शक्ति के साथ निरन्तर सक्रिय रहा है। ‘अजनबी जज़ीरा’ नासिरा शर्मा का नया उपन्यास है।
‘अजनबी जज़ीरा’ में समीरा और उसकी पाँच बेटियों के माध्यम से इराक़ की बदहाली बयान की गई है। ग़ौरतलब है कि दुनिया में जहाँ कहीं ऐसी दारुण स्थितियाँ हैं, यह उपन्यास वहाँ का एक अक्स बन जाता है। छोटी-से-छोटी चीज़ को तरसते और उसके लिए विरासतों-धरोहरों-यादगारों को बाज़ार में बेचने को मजबूर होते लोग; ज़िन्दगी बचाने के लिए सबकुछ दाँव पर लगाती औरतें और विदेशी आक्रमणकारियों की प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष निगरानी में साँस लेते नागरिक—ऐसी अनेक स्थितियों-मनःस्थितियों को नासिरा शर्मा ने इस उपन्यास के पृष्ठों पर साकार कर दिया है।
पतिविहीना समीरा अपनी युवा होती बेटियों के वर्तमान और भविष्य को लेकर फ़िक्रमन्द है। बारूद, विध्वंस और विनाश के बीच समीरा ज़िन्दगी की रोशनी व ख़ुशबू बचाने के लिए जूझ रही है। उपन्यास समीरा को चाहनेवाले अंग्रेज़ फ़ौजी मार्क के पक्ष से क्षत-विक्षत इराक़ की एक मार्मिक व्याख्या प्रस्तुत करता है। समीरा और मार्क की प्रेमकहानी अद्भुत है, जिसमें ज़िम्मेदारियों के हस्सास रंग शिद्दत से शामिल हैं। घृणा और प्रेम का सघन अन्तर्द्वन्द्व इसे अपूर्व बनाता है। लेखिका यह भी रेखांकित करती है कि ऐसे परिदृश्य में स्त्री-विमर्श के सारे निहितार्थ सिरे से बदल जाते हैं।
सभ्य कहे जानेवाले आधुनिक विश्व में विध्वंस का यह यथार्थ स्तब्ध कर देता है। विध्वंस की इस राजनीति में क्या-क्या नष्ट होता है, इसे नासिरा शर्मा की बेजोड़ रचनात्मक सामर्थ्य ने ‘अजनबी जज़ीरा’ में अभिव्यक्त किया है।
ज़रूरी वैश्विक प्रश्नों के प्रति जागरूक और संवेदनशील बनाता एक अद्भुत उपन्यास।
Anadi Anant
- Author Name:
Madhu Bhaduri
- Book Type:

-
Description:
'कालचक्र' और 'ज्वार' के बाद मधु भादुड़ी का यह तीसरा उपन्यास है। भारतीय विदेश सेवा में कार्यरत और प्राय: विदेश में ही रहनेवाला कोई साहित्यकार तेजी से बदल रहे भारतीय यथार्थ पर क्या इतनी पैनी नजर रख सकता है कि एक औपन्यासिक रचना के साथ पूरा न्याय कर सके ? मधु भादुड़ी ने अपने रचना कर्म से साबित किया है कि वे ऐसा कर सकती हैं। बगैर किसी दार्शनिक अतिरेक के, रोजमर्रे की ब्यौरेवार जिंदगी से गुजरते हुए वे मानवीय नियति के प्रश्नों से टकराती हैं और इसी क्रम में नियति निर्धारित करनेवाले कारकों पर रोशनी भी डालती हैं।
'अनादि अनंत' कलेवर की दृष्टि से एक छोटा उपन्यास है लेकिन इसमें एक भारतीय स्त्री के उत्पीड़ित से उत्पीड़क बनने और अपने इस परिवर्तन के जरिए अपनी विडंबना ही उजागर करने की एक बड़ी कथा कही गई है। जो साहित्यिक रूढ़ियाँ भारतीय स्त्री की सामाजिक हैसियत को लेकर सुदूर अतीत से बनी चली आ रही हैं और जो नई रूढ़ियाँ इस विषय में हाल के दौर में बनी हैं, दोनों पर ही यह उपन्यास कड़ा आघात पहुँचानेवाला साबित होगा, ऐसा हमारा विश्वास है ।
साथ की तीनों कहानियाँ, 'मुनिया', 'टेस्टर्ज टी' और 'अस्पताल' मधु भादुड़ी की किस्सागोई की बानगी हैं। वैसी ही सघन घटनात्मकता और क्लाइमेक्स की स्थितियाँ इनमें मौजूद हैं, जैसी आपको शास्त्रीय कहानियों से अपेक्षित होती हैं। एक लेखिका के बतौर मधु भादुड़ी की यह तीसरी प्रस्तुति आपको रोमांचित करेगी और हिंदी लेखक के विश्वव्यापी होते दायरे के प्रति आश्वस्त भी।
Rupantar
- Author Name:
Radhakrishna
- Book Type:

-
Description:
‘रूपान्तर’ कथाकार राधाकृष्ण का एक विशिष्ट उपन्यास है। इसमें संस्कृति के कुछ दुर्लभ प्रसंगों के माध्यम से जीवन के गूढ़ रहस्यों को विश्लेषित किया गया है।
चक्रवर्ती सम्राट मान्धाता का विविध आयामों में विकसित होता द्वन्द्वपूर्ण व्यक्तित्व उपन्यास का आकर्षण है। साथ ही तपस्वी सौभरि का विराग-योग जिस प्रकार परिवर्तित होता है, वह विस्मयपूर्ण है। इन दो चरित्रों का दो ध्रुवों पर स्थित चरित्र-चित्रण लेखक ने पूर्ण तन्मयता के साथ किया है।
मान्धाता का द्वन्द्व है—उदयाचल से लेकर अस्ताचल तक की भूमि को अपने प्रबल पराक्रम से पददलित करनेवाले चक्रवर्ती सम्राट मान्धाता की दारुण वेदना—अब किस पर विजय?
सौभरि की समस्या है—तपश्चर्या और साधना में शरीर को तृणवत् उपेक्षित करनेवाले ध्यान-योगी सौभरि का मानसिक द्वन्द्व, शरीर रसहीन क्यों नहीं हो पाता?
अत्यन्त विचारोत्तेजक उपन्यास।
Chalni Mein Amrit
- Author Name:
Kamala Markande
- Book Type:

-
Description:
‘चलनी में अमृत’ यशपाल द्वारा अनूदित एक उपन्यास है जो 1950 के दशक में कमला पूर्नईया टेलर द्वारा ‘नेक्टर इन सीव’ नाम से अंग्रेज़ी में लिखा गया। यह लेखिका का पहला ही उपन्यास था, फिर भी इसे बेस्ट सेलर के रूप में ख्याति मिली और 1955 में अमेरिकन लाइब्रेरी एसोसिएशन ने इस उपन्यास को वर्ष की महत्त्वपूर्ण कृति कहते हुए दर्ज किया। कमला पूर्नईया को संस्कृतियों के टकराव पर लिखने के लिए विशेष रूप से जाना जाता है।
‘चलनी में अमृत’ उपन्यास विपन्नता, भूख और व्यवस्थागत शोषण की मार्मिक कथा सामने लाता है। फ़्लैश बैक से खुलता हुआ यह उपन्यास कथा पात्र रुक्मिणी यानी रुकू की विवाह स्मृति से आरम्भ होता है। उसका विवाह तब हुआ था जब वह केवल बारह वर्ष की थी और सौभाग्य का एकमात्र टुकड़ा उसके हिस्से यही था कि उसका पति नाथन एक सज्जन व्यक्ति था। रुकू के जीवन में सपने और ख़ुशियाँ एक झलक-भर को आती हैं और फिर आर्थिक सामाजिक त्रासदी उन्हें झपट लेती है। खेती को निगलती हुई उद्योग की आहट भी इस उपन्यास में है, जो एक टेनरी (चमड़े का कारख़ाना) की तरह आकर रुकू के जीवन की यातना बनती है। विपन्नता की पराकाष्ठा है कि रुकू की बेटी देह व्यापार के लिए विवश होती है और एक माँ के रूप में रुकू को यह नियति सह लेनी पड़ती है। परिवार में शिशु का जन्म जो आह्लाद लाता है, उसे बच्चों की असमय मृत्यु, उनका पलायन क्रूरता से मिटा भी देता है। कठिन जीवन-यापन के दौरान समय के सच को नकारती सामाजिक मान्यताएँ रुकू और उसके पति दोनों को ब्लैकमेल होने को मजबूर करती हैं। इस तरह इनका पूरा जीवन बूँद-बूँद क्षणिक ख़ुशियों के बीच से गुज़रता है लेकिन कोई भी ख़ुशी इनके पास ठहरने नहीं पाती। इस त्रासदी के पीछे प्रकृति भी है और समाज रचित व्यवस्था भी।
इस तरह, यह उपन्यास अपने समाज के यथार्थ पर भी संवेदनापूर्वक उँगली रखता है। उपन्यास का अनुवाद अपने आस्वाद में इस कृति को मूलतः हिन्दी रचना-सा ही आभास देता है। ‘चलनी में अमृत’ अपने मुख्य सरोकार में आज भी एक प्रासंगिक कृति है।
Mataa-E-Dard
- Author Name:
Razia Fasih Ahamad
- Book Type:

-
Description:
‘मता-ए-दर्द’, यानी पीड़ा की पूँजी, जो उसके खाते में जमा होना शुरू हुई तो फिर बढ़ती ही चली गई। ख़ुशी के कुछ पल जो तय थे, वे ज़िन्दगी की शुरुआत में ही ख़र्च हो गए, जब उसने पहले प्यार का पहला सपना देखा था। जल्दी ही वह सपना टूटा और नासूर बनकर रूह के क़रीब बैठ गया। फिर प्यार उसके लिए प्यार न रहा, या तो उस नासूर को ढकने के लिए मरहम बना या वक़्तन-ब-वक़्तन उससे फूटनेवाली ठंडी आग की पलट, जिसका मक़सद मर्दों को अगर झुलसा देना नहीं तो सुलगाकर छोड़ देना ज़रूरी था। फिर भी यह उसकी जीत हरगिज़ न थी, दिल के हाथों वह बार-बार मजबूर हुई, अपने ऊपर से क़ाबू खो बैठी, और फिर पीड़ा की अपनी पूँजी समेटने में जुट गई। जहाँ यह उपन्यास ख़त्म होता है, वहाँ भी वह एक दोराहे पर ही खड़ी है।
पाकिस्तान की पृष्ठभूमि में लिखा गया यह उपन्यास स्त्री को लेकर लिखी जानेवाली उन फ़ार्मूलाबद्ध कथाओं में से नहीं है जिसमें लेखक अपनी वैचारिक मान्यताओं को अपने पात्रों के ऊपर थोप देते हैं। यहाँ एक स्त्री है जो अपनी स्वाभाविक गति में बनती हुई अपनी ऊँचाई की तरफ़ बढ़ रही है। वह समझौते करती है, प्रतिकार करती है, हताश होती है, लेकिन अपनी ज़िन्दगी में जो ख़ूबसूरत है, महसूस करने लायक़ है, उसके प्रति आँखें बन्द नहीं करती।
Mukhyamantri
- Author Name:
Chanakya Sen
- Book Type:

-
Description:
‘मुख्यमंत्री’ एक राजनीतिक उपन्यास है। इसमें भारत के समकालीन राजनीतिक जीवन का आश्चर्यजनक यथार्थ चित्रण है। यह कृति वर्तमान भारतीय जीवन की तीखी आलोचना है। कृष्ण द्वैपायन कौशल का दुर्धर्ष व्यक्तित्व, उसकी रसिकता, उसके कुटिल राजनीतिक दाँव-पेच, अपने राजनीतिक संगी-साथियों के दोषों और कमज़ोरियों को पहचानने का उसका बुद्धिकौशल तथा सत्ता हथियाने के लिए सिद्धान्तों की भी निर्ममतापूर्वक
हत्या करने में गुरेज़ न करना—इन सबके कारण वह एक जीवन्त और शक्तिशाली चरित्र बन गया है। इसके साथ ही उपन्यास में उन अनेक राजनीतिज्ञों का भी बड़ा मार्मिक चित्रण हुआ है जिन्हें हमने देखा-सुना तो है, पर जिनके बारे में हमने कुछ अस्पष्ट-सी धारणाएँ बना रखी हैं। किन्तु उपन्यासकार ने इन सबको पूरे फ़ोकस में लाकर खड़ा कर दिया है।
‘मुख्यमंत्री’ मूल बांग्ला में 1966 में प्रकाशित हुआ था। अब तक इसके अनेक संस्करण हो चुके हैं। यह एक असाधारण उपन्यास है। भारतीय भाषाओं में लिखे गए राजनीतिक उपन्यासों में मुख्यमंत्री अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। भारतीय राजनीति के चारित्रिक ह्रास को समग्रता में उद्घाटित करता इसका कथानक ऐतिहासिक साहित्यिक दस्तावेज़ बन जाता है। स्वतंत्रता-प्राप्ति के तत्काल बाद के वर्षों में राजनीतिक सत्ता पाने और बनाए रखने के लिए जोड़-तोड़ के जिन समीकरणों को स्थापित किया गया उन्होंने ही आगे चलकर सम्पूर्ण भारतीय राजनीति में चारित्रिक प्रदूषण फैलाया है। स्वतंत्रतापूर्व के आदर्श स्वातंत्र्योत्तर भारत की राजनीति में किस प्रकार एकांगी व असहाय हो गए यह भी इस उपन्यास में देखा जा सकता है।
स्वतंत्रता के बाद के वर्षों की यह कथा हमारी आज की व्यथा से अलग नहीं है। यही वजह है कि यह उपन्यास वर्षों बाद भी प्रासंगिक है, बल्कि कहना चाहिए कि आज और अधिक प्रासंगिक है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book