Mataa-E-Dard
(0)
Author:
Razia Fasih AhamadPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
225
180 (20% off)
Unavailable
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‘मता-ए-दर्द’, यानी पीड़ा की पूँजी, जो उसके खाते में जमा होना शुरू हुई तो फिर बढ़ती ही चली गई। ख़ुशी के कुछ पल जो तय थे, वे ज़िन्दगी की शुरुआत में ही ख़र्च हो गए, जब उसने पहले प्यार का पहला सपना देखा था। जल्दी ही वह सपना टूटा और नासूर बनकर रूह के क़रीब बैठ गया। फिर प्यार उसके लिए प्यार न रहा, या तो उस नासूर को ढकने के लिए मरहम बना या वक़्तन-ब-वक़्तन उससे फूटनेवाली ठंडी आग की पलट, जिसका मक़सद मर्दों को अगर झुलसा देना नहीं तो सुलगाकर छोड़ देना ज़रूरी था। फिर भी यह उसकी जीत हरगिज़ न थी, दिल के हाथों वह बार-बार मजबूर हुई, अपने ऊपर से क़ाबू खो बैठी, और फिर पीड़ा की अपनी पूँजी समेटने में जुट गई। जहाँ यह उपन्यास ख़त्म होता है, वहाँ भी वह एक दोराहे पर ही खड़ी है।</p> <p>पाकिस्तान की पृष्ठभूमि में लिखा गया यह उपन्यास स्त्री को लेकर लिखी जानेवाली उन फ़ार्मूलाबद्ध कथाओं में से नहीं है जिसमें लेखक अपनी वैचारिक मान्यताओं को अपने पात्रों के ऊपर थोप देते हैं। यहाँ एक स्त्री है जो अपनी स्वाभाविक गति में बनती हुई अपनी ऊँचाई की तरफ़ बढ़ रही है। वह समझौते करती है, प्रतिकार करती है, हताश होती है, लेकिन अपनी ज़िन्दगी में जो ख़ूबसूरत है, महसूस करने लायक़ है, उसके प्रति आँखें बन्द नहीं करती।
Read moreAbout the Book
‘मता-ए-दर्द’, यानी पीड़ा की पूँजी, जो उसके खाते में जमा होना शुरू हुई तो फिर बढ़ती ही चली गई। ख़ुशी के कुछ पल जो तय थे, वे ज़िन्दगी की शुरुआत में ही ख़र्च हो गए, जब उसने पहले प्यार का पहला सपना देखा था। जल्दी ही वह सपना टूटा और नासूर बनकर रूह के क़रीब बैठ गया। फिर प्यार उसके लिए प्यार न रहा, या तो उस नासूर को ढकने के लिए मरहम बना या वक़्तन-ब-वक़्तन उससे फूटनेवाली ठंडी आग की पलट, जिसका मक़सद मर्दों को अगर झुलसा देना नहीं तो सुलगाकर छोड़ देना ज़रूरी था। फिर भी यह उसकी जीत हरगिज़ न थी, दिल के हाथों वह बार-बार मजबूर हुई, अपने ऊपर से क़ाबू खो बैठी, और फिर पीड़ा की अपनी पूँजी समेटने में जुट गई। जहाँ यह उपन्यास ख़त्म होता है, वहाँ भी वह एक दोराहे पर ही खड़ी है।</p>
<p>पाकिस्तान की पृष्ठभूमि में लिखा गया यह उपन्यास स्त्री को लेकर लिखी जानेवाली उन फ़ार्मूलाबद्ध कथाओं में से नहीं है जिसमें लेखक अपनी वैचारिक मान्यताओं को अपने पात्रों के ऊपर थोप देते हैं। यहाँ एक स्त्री है जो अपनी स्वाभाविक गति में बनती हुई अपनी ऊँचाई की तरफ़ बढ़ रही है। वह समझौते करती है, प्रतिकार करती है, हताश होती है, लेकिन अपनी ज़िन्दगी में जो ख़ूबसूरत है, महसूस करने लायक़ है, उसके प्रति आँखें बन्द नहीं करती।
Book Details
-
ISBN9788126702817
-
Pages224
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: Pride and Prejudice is a romantic novel by Jane Austen set in the 18th century, first published in 1813. The story plot is about Bennet family that has 5 unmarried but attractive daughters. Mrs. Bennet is always looking for eligible prospects for her daughters especially military officers, until one day the family meets two rich, good looking and eligible bachelors who come to stay in their neighbourhood. Things are starting to build, speculations rise and sparks fly when the youngest daughter Elizabeth encounters the young and rich Mr. Darcy. But shortly after the two gentlemen leave for London leaving the whole town wondering will they come back?
The Bestseller
- Author Name:
Ajitabha Bose
- Book Type:

- Description: Every author wants to become a bestseller one day. Do you know over 1 lac books are published in India every year! Only a few become a bestseller. Have you ever wondered how it is to live a life of a Bestselling author? Come, join me and read a Story of life, love and dreams. It's a story of priyanshi and her dream to become a bestseller. || Book Teaser by Rajeev Khandelwal || "size doesn't matter when it's love." - Shah Rukh Khan || "ajitabha wants to bring a new trend in Books for the busy generation." - The Telegraph || "big love stories in small packages." - Hindustan times || "love stories runs in his veins." - India today || "it's not easy to sum Up a story in a few pages and keep the emotions intact! Ajitabha's attempt to that is worth appreciating." - Sudeep Nagarkar.
Jo Bhula Diye Gaye
- Author Name:
Shriprakash Mishra
- Book Type:

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Description:
चौरी चौरा कांड को कांग्रेसियों ने इतिहास के बाहर कर दिया कि उसके कारण गांधी जी ने अपना आन्दोलन वापस ले लिया था। क्रान्तिकारियों ने उसे बाहर कर दिया, क्योंकि उसमें किसी नामी-गिरामी क्रान्तिकारी ने हिस्सा नहीं लिया था। अंग्रेज़ों ने बाहर कर दिया, क्योंकि वह उनकी सत्ता को सीधे ललकार गया। दु:खद यह कि उसे जन ने भी बाहर कर दिया, जबकि वह सबाल्टर्न की दृष्टि से हुआ आज़ादी की लड़ाई में एक महत्त्वपूर्ण हस्तक्षेप था। फिर उसकी स्मृति कुछ लोगों के मन में हमेशा गूँजती रही है और नई पीढ़ी के लोग उससे जुड़े लोगों के बारे इधर काफ़ी जिज्ञासु दिखते हैं।
इस उपन्यास में उनकी कथा के साथ-साथ गोरखपुर के इलाक़े में प्रान्त और राष्ट्र से जुड़कर यह आज़ादी की लड़ाई 1920 से लेकर 1942 तक कैसे चली थी, उसकी एक झलक यहाँ मिलेगी, वहाँ के सामाजिक जीवन की तमाम छवियों के साथ।
उत्तर-पूर्व को लेकर लिखनेवाले श्रीप्रकाश मिश्र के लेखन में यह उपन्यास एक नया मोड़ इंगित करता है, जो पाठकों को कई तरह से पसन्द आएगा।
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