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मीडिया इंडस्ट्री में एंकर बनने के लिए पहले केवल ‘स्क्रीन टेस्ट’ होता था लेकिन अब फीमेल एंकर के लिए उसमें एक नया टेस्ट जुड़ रहा है- ‘स्किन टेस्ट’! गिव एंड टेक की इसी दास्तां को बयां कर रही है एक न्यूज चैनल की चार लड़कियां । एंकर बनने की ख्वाहिशमंद चारों लड़कियों की एंकरिंग की जर्नी बॉस के ‘शैतानी सोफे’ से होकर गुजरती है । ‘कास्टिंग काऊच’ की ये दास्तां स्क्रीन लाइफ के उतार-चढ़ाव से गुजरती हुई जब आखिरी पड़ाव पर पहुंचती हैं तब फीमेल एंकरिंग की वो दुनिया सामने आती है जिसको लेकर अटकलों का बाजार गर्म रहता है । कहानी और किरदार काल्पनिक हैं लेकिन ‘स्किन टेस्ट’ की पूरी दास्तां टीवी स्क्रीन के चमकते चेहरे के पीछे ‘आग और धुएं’ के सत्य रिश्ते पर आधारित है ।
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मीडिया इंडस्ट्री में एंकर बनने के लिए पहले केवल ‘स्क्रीन टेस्ट’ होता था लेकिन अब फीमेल एंकर के लिए उसमें एक नया टेस्ट जुड़ रहा है- ‘स्किन टेस्ट’!
गिव एंड टेक की इसी दास्तां को बयां कर रही है एक न्यूज चैनल की चार लड़कियां । एंकर बनने की ख्वाहिशमंद चारों लड़कियों की एंकरिंग की जर्नी बॉस के ‘शैतानी सोफे’ से होकर गुजरती है ।
‘कास्टिंग काऊच’ की ये दास्तां स्क्रीन लाइफ के उतार-चढ़ाव से गुजरती हुई जब आखिरी पड़ाव पर पहुंचती हैं तब फीमेल एंकरिंग की वो दुनिया सामने आती है जिसको लेकर अटकलों का बाजार गर्म रहता है ।
कहानी और किरदार काल्पनिक हैं लेकिन ‘स्किन टेस्ट’ की पूरी दास्तां टीवी स्क्रीन के चमकते चेहरे के पीछे ‘आग और धुएं’ के सत्य रिश्ते पर आधारित है ।
Book Details
-
ISBN9789347125416
-
Pages135
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age11-18 yrs
-
Country of OriginIndia
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चित्रलेखा’ न केवल भगवतीचरण वर्मा को एक उपन्यासकार के रूप में प्रतिष्ठा दिलानेवाला पहला उपन्यास है, बल्कि हिन्दी के उन विरले उपन्यासों में भी गणनीय है, जिनकी लोकप्रियता बराबर काल की सीमा को लाँघती रही है। ‘चित्रलेखा’ की कथा पाप और पुण्य की समस्या पर आधारित है। पाप क्या है? उसका निवास कहाँ है? —इन प्रश्नों का उत्तर खोजने के लिए महाप्रभु रत्नाम्बर के दो शिष्य, श्वेतांक और विशालदेव, क्रमशः सामन्त बीजगुप्त और योगी कुमारगिरि की शरण में जाते हैं। इनके साथ रहते हुए श्वेतांक और विशालदेव नितान्त भिन्न जीवनानुभवों से गुज़रते हैं। और उनके निष्कर्षों पर महाप्रभु रत्नाम्बर की टिप्पणी है, "संसार में पाप कुछ भी नहीं है, यह केवल मनुष्य के दृष्टिकोण की विषमता का दूसरा नाम है। हम न पाप करते हैं और न पुण्य करते हैं, हम केवल वह करते हैं जो हमें करना पड़ता है।
Aapka Bunti
- Author Name:
Mannu Bhandari
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‘आपका बंटी’ मन्नू भंडारी के उन बेजोड़ उपन्यासों में है जिसके बिना न बीसवीं शताब्दी के हिन्दी उपन्यास की बात की जा सकती है न स्त्री–विमर्श को सही धरातल पर समझा जा सकता है। तीस वर्ष पहले (1970 में) लिखा गया यह उपन्यास हिन्दी की लोकप्रिय पुस्तकों की पहली पंक्ति में है। दर्जनों संस्करण और अनुवादों का यह सिलसिला आज भी वैसा ही है जैसा ‘धर्मयुग’ में पहली बार धारावाहिक रूप से प्रकाशन के दौरान था। बच्चे की निगाहों और घायल होती संवेदना की निगाहों से देखी गई परिवार की यह दुनिया एक भयावह दु:स्वप्न बन जाती है। कहना मुश्किल है कि यह कहानी बालक बंटी की है या माँ शकुन की। सभी तो एक–दूसरे में ऐसे उलझे हैं कि एक की त्रासदी सभी की यातना बन जाती है। शकुन के जीवन का सत्य है कि स्त्री की जायज़ महत्त्वाकांक्षा और आत्मनिर्भरता पुरुष के लिए चुनौती है—नतीजे में दाम्पत्य तनाव उसे अलगाव तक ला छोड़ता है। यह शकुन का नहीं, समाज में निरन्तर अपनी जगह बनाती, फैलाती और अपना क़द बढ़ाती ‘नई स्त्री’ का सत्य है। पति–पत्नी के इस द्वन्द्व में यहाँ भी वही सबसे अधिक पीसा जाता है बंटी, जो नितान्त निर्दोष, निरीह और असुरक्षित है। बच्चे की चेतना में बड़ों के इस संसार को कथाकार मन्नू भंडारी ने पहली बार पहचाना था। बाल मनोविज्ञान की गहरी समझ–बूझ के लिए चर्चित, प्रशंसित इस उपन्यास का हर पृष्ठ ही मर्मस्पर्शी और विचारोत्तेजक है। हिन्दी उपन्यास की एक मूल्यवान उपलब्धि के रूप में ‘आपका बंटी’ एक कालजयी उपन्यास है।
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