Ek Beegha Pyar
Author:
Abhimanyu AnatPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 396
₹
495
Available
मॉरिशस के प्रवासी भारतीय लेखक अभिमन्यु अनत उस देश के हिन्दी साहित्यकारों में विशिष्ट स्थान के अधिकारी हैं। अब तक उनके कई उपन्यास और कहानी-संग्रह प्रकाशित हुए हैं जिनमें मॉरिशस के देहातों की मर्मस्पर्शी झाँकी देखने को मिलती <br>है।</p>
<p>‘एक बीघा प्यार’ अभिमन्यु अनत का दूसरा उपन्यास है, जिसमें अदम्य साहस और निष्ठा तथा श्रम की महिमा का आख्यान है। एक प्रकार से यह अच्छाई और बुराई के संघर्ष की कहानी है—मनुष्य का आदर्शवाद समाज-विरोधी तत्त्वों से टकराकर बार-बार पराजित होता प्रतीत होता है, पर आस्था का विनाश नहीं होता और अन्तत: नायक को, जो परिस्थितियों से प्रताड़ित और खेती के काम से ऊब गया था, पुन: खेतों की ओर लौटते दिखाया गया है—निडर, नि:शंक भाव से। साथ ही, पूरे कथानक में सहज-निश्छल प्रेम की निर्मल स्रोतस्विनी भी प्रवाहित है जिसमें स्नान कर एक नए प्रकार की ताज़गी का अनुभव होता है।
ISBN: 9788171789702
Pages: 159
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Description:
यह घनानन्द और सुजान की प्रेमकथा का औपन्यासिक पाठ है। प्रेम और शृंगार की जो ऊँचाई हमें घनानन्द के काव्य में दिखती है, कहते हैं, उसका श्रेय नर्तकी सुजान के सौन्दर्य और प्रेम की गहनता को जाता है।
स्वर्णकार की दुलारी बेटी सुजान साहित्य-संगीत और धर्म आदि की शिक्षा में पारंगत थी लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति के चलते उसे एक रुग्ण व्यक्ति से ब्याह दिया गया। परिणाम कि जल्दी ही उसके सामने वैधव्य आन खड़ा हुआ, और साथ ही दुर्भाग्य भी। अन्तत: शरण मिली आगरा की विख्यात नर्तकी विश्वमोहिनी के यहाँ। वहाँ सुजान की कला पर और रंग चढ़ा।
मुग़ल साम्राज्य के जिस दरबार में घनानन्द मीर मुंशी थे, सुजान वहीं की राजनर्तकी बनी। शहंशाह रँगीले शाह दोनों को समान भाव से सराहते थे। इसी परिवेश में दोनों की प्रेमकथा परवान चढ़ी और सुजान को अपनी नृत्यकला में तो आनन्द को अपने स्वर तथा शब्द-साधना को चरम पर पहुँचाने के लिए दु:ख, पीड़ा और जीवट की खुराक़ मिली।
यह उपन्यास ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और देश-काल की तत्कालीन परिस्थितियों को अंकित करते हुए इस प्रेमकथा को सहानुभूतिपूर्वक शब्दांकित करता है।
Ek Gandharv Ka Duswapna
- Author Name:
Haricharan Prakash
- Book Type:

-
Description:
अक्सर देखा गया है कि संगीत, कला और साहित्य से जुड़े लोग अपनी एक निजी और आन्तरिक दुनिया में रमे रहते हैं। वे बाहरी दुनिया की बड़ी-से-बड़ी घटनाओं को भी निरपेक्ष भाव से लेते हैं। उनके भीतरी संसार में बाहर के घटनाचक्र का, यथार्थ का प्रवेश कुछ विचित्र क़िस्म के ऊहापोह और उथल-पुथल पैदा करता है।
उपन्यास का नायक भवनाथ ऐसा ही एक संगीतज्ञ है—बजाने-गाने में मस्त। चारों ओर की चीख़-पुकार में उसे खोए हुए सुरों का ख़याल आता है। वह दिव्यास्त्रों की तरह दिव्यरागों की कल्पना करता है। गन्धर्व कौन-सा सुर जगाते होंगे, कौन-सा राग मूर्त करते होंगे, हमसे कहीं ऊपर उनका सुर होगा—ऐसा सोचता रहता है। संगीत की खोई हुई दुनिया के झिलमिले सपने आते और चले जाते।
गन्धर्व के बहाने हरी चरन प्रकाश द्वारा रचा गया एक बेहद मार्मिक और रोचक उपन्यास है—‘एक गन्धर्व का दुःस्वप्न’।
स्वतंत्रता-प्राप्ति से लेकर आज तक के सामाजिक-राजनीतिक घटनाचक्रों को इस उपन्यास में बड़ी बेबाकी से रेखांकित किया गया है। चाहे वह महात्मा गांधी की हत्या हो या फिर बाबरी मस्जिद के विध्वंस से उपजे दंगे-फ़साद, वह मंडल-कमंडल की राजनीति हो या फिर जाति-धर्म की—देश की सम्प्रभुता को ख़तरे में डालनेवाले तत्त्वों को बड़ी संजीदगी से बेनक़ाब किया गया है इस उपन्यास में।
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