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Dukhmochan

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दु:खमोचन एक गाँव की कहानी है—ऐसे एक पिछड़े गाँव की कहानी, जहाँ युगों से निश्चल पड़ी जिंदगी नए युग की रोशनी पाकर धीरे–धीरे जाग रही है। मौजूदा परिवेश में प्रकारान्तर से यह देश के हर पिछड़े गाँव के जागने की कहानी है। दुखमोचन में लोकजीवन के चितेरे कथाकार नागार्जुन ने अलग–अलग जातियों और वर्गों में बँटे उस ठेठ देहाती समाज का जीवन्त चित्रण किया है, जो आज भी अभावों और विवशताओं में जीता है। ‘दुखमोचन’ एक छोटा मगर शक्तिशाली उपन्यास है। इसका नायक ‘दुखमोचन’ नई युग–चेतना का संवाहक है। अन्ध रूढ़ियों और पुराने संस्कारों से ग्रस्त समाज में बदलाव लाने के लिए वह जो संघर्ष करता है, उसे कथाकार ने बड़ी मार्मिकता से चित्रित किया है। पीड़ितों और दलितों के रहबर के रूप में दुखमोचन की भूमिका जहाँ मन में प्रेरणा जगाती है, वहीं नित्याबाबू और त्रिजुगी चौधरी जैसे गाँव के इने–गिने सम्पन्न लोगों के फरेबों और कुचक्रों से रोष उत्पन्न होता है।

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दु:खमोचन एक गाँव की कहानी है—ऐसे एक पिछड़े गाँव की कहानी, जहाँ युगों से निश्चल पड़ी जिंदगी नए युग की रोशनी पाकर धीरे–धीरे जाग रही है। मौजूदा परिवेश में प्रकारान्तर से यह देश के हर पिछड़े गाँव के जागने की कहानी है। दुखमोचन में लोकजीवन के चितेरे कथाकार नागार्जुन ने अलग–अलग जातियों और वर्गों में बँटे उस ठेठ देहाती समाज का जीवन्त चित्रण किया है, जो आज भी अभावों और विवशताओं में जीता है।

‘दुखमोचन’ एक छोटा मगर शक्तिशाली उपन्यास है। इसका नायक ‘दुखमोचन’ नई युग–चेतना का संवाहक है। अन्ध रूढ़ियों और पुराने संस्कारों से ग्रस्त समाज में बदलाव लाने के लिए वह जो संघर्ष करता है, उसे कथाकार ने बड़ी मार्मिकता से चित्रित किया है। पीड़ितों और दलितों के रहबर के रूप में दुखमोचन की भूमिका जहाँ मन में प्रेरणा जगाती है, वहीं नित्याबाबू और त्रिजुगी चौधरी जैसे गाँव के इने–गिने सम्पन्न लोगों के फरेबों और कुचक्रों से रोष उत्पन्न होता है।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Hardbound
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
10th
Publication year
1966
Weight
290 grams
ISBN-13
9788171788743
Pages
150
Reading time
~5 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14.5 × 22 cm
Language
Hindi

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