Mein Prem Tere Ka Deewana
Author:
Manish RaosahabPublisher:
Author'S Ink PublicationsLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 144.5
₹
170
Available
ये बादल, बारिश, ये बूंदे, ये मिट्टी की ख़ुशबू, है कुछ और नही, जो माने दिल br>तेरा, तो पैगाम सही, ना माने तो है कुछ और नही, ये हवा, जो लहरा जाती जुल्फ़े br>तेरी, धड़का दिल को जाती, इशारा है गर तू पहचाने, ना पहचाने तो है कुछ और नही। बस इसी तरहा, ये किताब उन जज़्बातों को समेटे हुए है जो प्रेम के दोनों पहलुओं को एक साथ जोड़े हुए है। जब दिल प्रसन्न हो तो भव्य सागर की खामोशी से विशालकाय आसमान की गर्जन तक सब लुभावना प्रतीत होता है और कभी जब दिल को उदासी का अनुभव हो, पीड़ा का एहसास हो, तो वह भी उसी प्रेम का हिस्सा है जो किसी का नाम भर लेने से हमारे चेहरे को एक सरल व मीठी मुस्कान से अलंकृत कर देता है। भले ही ये कविताये कल्पना की स्याही से लिखी गयी हो, मगर जिस रंग से लिखी गयी है वह प्रेम का रंग है और जो खुशबू है वो वही जज़्बात है जो अक्सर हम प्रेम के मार्ग में अनुभव करते है। जितना मुझे लिख कर मिला, उम्मीद है, उतना ही आनंद आपको पढ़ने में मिलेगा।.
ISBN: 9789390006052
Pages: 100
Avg Reading Time: 2 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Maharana Pratap
- Author Name:
Suryakant Tripathi 'Nirala'
- Book Type:

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Description:
महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास में वीरता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के पर्याय हैं। वे एक कठिन और उथल-पुथल भरे काल-खंड में पैदा हुए थे, जब मुग़लों की सत्ता समूचे भारत पर छाई हुई थी और मुग़ल सम्राट अकबर अपनी विशिष्ट कार्य-शैली के कारण ‘महान’ कहा जा रहा था। लेकिन महाराणा प्रताप उसकी ‘महानता’ के पीछे छिपी उसकी साम्राज्यवादी आकांक्षा के विरुद्ध थे, इसलिए उन्होंने उसकी अधीनता स्वीकार नहीं की। परिणामस्वरूप अकबर उनके विरुद्ध युद्ध में उतरा। इस प्रक्रिया में महाराणा प्रताप ने जिस वीरता, स्वाभिमान और त्यागमय जीवन को वरण किया, उसी ने उन्हें एक महान लोकनायक और वीर पुरुष के रूप में सदा-सदा के लिए भारतीय इतिहास में प्रतिष्ठित कर दिया।
महाकवि निराला ने प्रताप के इसी प्रेरक चरित्र को तथ्यात्मक ढंग से चित्रित किया है।
मुख्य रूप से यह पुस्तक किशोर पाठकों को ध्यान में रखकर लिखी गई है, लेकिन इसकी प्रांजल भाषा-शैली और तथ्यपरकता इसे एक महापुरुष की ऐतिहासिक जीवनी का महत्त्व प्रदान कर देती है।
Panch Aangnon Wala Ghar
- Author Name:
Govind Mishra
- Book Type:

- Description: क़रीब पचास वर्षों में फैली ‘पाँच आँगनों वाला घर’ के सरकने की कहानी दरअसल तीन पीढ़ियों की कहानी है—एक वह जिसने 1942 के आदर्शों की साफ़ हवा अपने फेफड़ों में भरी, दूसरी वह जिसने उन आदर्शों को धीरे-धीरे अपनी हथेली से झरते देखा और तीसरी वह जो उन आदर्शों को सिर्फ़ पाठ्य-पुस्तकों में पढ़ सकी। परिवार कैसे उखड़कर सिमटता हुआ क़रीब-क़रीब नदारद होता जा रहा है—व्यक्ति को उसकी वैयक्तिकता के सहारे अकेला छोड़कर! गोविन्द मिश्र के इस सातवें उपन्यास को पढ़ना अकेले होते जा रहे आदमी की उसी पीड़ा से गुज़रना है।
Baton Mein Beete Din
- Author Name:
Namvar Singh
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- Description: ‘बातों में बीते दिन’ पुस्तक नामवर सिंह के साक्षात्कारों का संकलन है। इस किताब में शामिल साक्षात्कारों का विषय क्षेत्र अत्यन्त विस्तृत है। पेरेस्त्रोइका-ग्लासनोस्त और आधुनिकतावाद से लेकर कविता, कहानी, उपन्यास और निजी जीवन तक। साहित्य और देश-दुनिया की नामवर जी की समझ का एक स्पष्ट प्रतिबिम्ब यहाँ मिलता है। उनकी विश्व-दृष्टि का रूपायन इन साक्षात्कारों में हुआ है। पुस्तक तीन खंडों में बँटी हुई है। मध्यम आकार के और विषय केन्द्रित साक्षात्कार पहले खंड में हैं। दूसरे खंड में रचनाकारों और रचनाओं पर केन्द्रित बातचीत है। प्रेमचन्द, सुमित्रानन्दन पंत, त्रिलोचन और अमृतराय तथा सुमित्रानन्दन पंत की कृति ‘गुंजन’ और कृष्णा सोबती के उपन्यास ‘मित्रो मरजानी’—इन साक्षात्कारों के केन्द्र में है। तीसरे खंड में महावीर अग्रवाल द्वारा लिये गए नौ साक्षात्कार हैं जो उनके निजी जीवन से लेकर आलोचना और विविध विषयों से सम्बन्धित हैं। आलोचना लिखित हो या वाचिक—उसके पीछे बुनियादी प्रक्रिया है—पढ़ना, विवेचना, विचारना। तर्क और संवाद। नामवर जी के इन साक्षात्कारों में इसका व्यापक समावेश है। इनसे गुजरते हुए हम महसूस करते हैं कि वह किसी रचना को हमेशा नई और अपनी तरह से पढ़ने की कोशिश करते हैं और इस तरह ‘पढ़ते’ हुए वे लगातार नई तरह से ‘सोचते’ और ‘विचारते’ हुए सामने आते हैं। उनकी वाचिक आलोचना मूल्यांकन की ऊपरी सीढ़ी तक पहुँचती है। निकष बनाती है। प्रतिमानों पर बहस करती है। उसमें ‘लिखित’ की तरह की ‘कौंध’ मौजूद होती है। नहीं होता तो बस पूरापन।
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