Mein Prem Tere Ka Deewana
Author:
Manish RaosahabPublisher:
Author'S Ink PublicationsLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 144.5
₹
170
Available
ये बादल, बारिश, ये बूंदे, ये मिट्टी की ख़ुशबू, है कुछ और नही, जो माने दिल br>तेरा, तो पैगाम सही, ना माने तो है कुछ और नही, ये हवा, जो लहरा जाती जुल्फ़े br>तेरी, धड़का दिल को जाती, इशारा है गर तू पहचाने, ना पहचाने तो है कुछ और नही। बस इसी तरहा, ये किताब उन जज़्बातों को समेटे हुए है जो प्रेम के दोनों पहलुओं को एक साथ जोड़े हुए है। जब दिल प्रसन्न हो तो भव्य सागर की खामोशी से विशालकाय आसमान की गर्जन तक सब लुभावना प्रतीत होता है और कभी जब दिल को उदासी का अनुभव हो, पीड़ा का एहसास हो, तो वह भी उसी प्रेम का हिस्सा है जो किसी का नाम भर लेने से हमारे चेहरे को एक सरल व मीठी मुस्कान से अलंकृत कर देता है। भले ही ये कविताये कल्पना की स्याही से लिखी गयी हो, मगर जिस रंग से लिखी गयी है वह प्रेम का रंग है और जो खुशबू है वो वही जज़्बात है जो अक्सर हम प्रेम के मार्ग में अनुभव करते है। जितना मुझे लिख कर मिला, उम्मीद है, उतना ही आनंद आपको पढ़ने में मिलेगा।.
ISBN: 9789390006052
Pages: 100
Avg Reading Time: 2 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: भारत उत्सवों का देश है। यहाँ प्रत्येक महत्वपूर्ण अवसर को उत्सव के रूप में मनाया जाता है, जैसे जन्म होने पर उत्सव, और एक साल पूरी होने पर फिर से जन्मोत्सव। अब तो जन्मदिन मनाने का चलन बहुत लोकप्रिय हो गया है। पहले बच्चे जब पाठशाला जाते थे, तो कई परिवार अक्षरोत्सव भी मनाते थे। वसंतोत्सव भी मनती है। होली, दीवाली, दशहरा जैसी परंपरागत त्योहारों को तो छोड़ ही दीजिए; वे तो बड़े-बड़े उत्सव हैं। इन वर्षों में इश्कोत्सव भी प्रचलित हो रहा है। ‘वेलेंटाइन-डे’ के अवसर पर शहरों के बाजारों में खूब उत्साह दिखता है। विवाहोत्सव का तो ही बात छोड़ दीजिए। यह उत्सव व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक सभी स्तरों का है, और उससे भी अधिक यह एक आर्थिक उत्सव बन गया है, जिसमें सैकड़ों उद्योग फलते-फूलते हैं। परन्तु, एक उत्सव है जो अभी भी उपेक्षित है—मरणोत्सव। मैं सोचता हूँ, क्यों अभी तक यह उत्सव नहीं बन पाया? बाजार ने इस पर ध्यान क्यों नहीं दिया? कुछ पश्चिमी और पूर्वी देशों में बाजार इस ओर ध्यान दे रहा है। ज्ञात है कि यदि बाजार लगा लिया जाए तो क्या-क्या संभव है? जीवन बीमा भी इसी पर आधारित एक अरबों-खरबों रुपए का व्यवसाय है, जो मृत्यु की आशंका पर टिका है। मृत्यु से जुड़े अन्य उद्योग भी विकसित हो सकते हैं। शादी से कुछ लोग बच तो जाते हैं, लेकिन मरने से कोई नहीं बच सकता, इसलिए यह सबसे बड़ा बाजार है। यहाँ से हमें प्रसिद्ध व्यंग्यकार श्री दीनानाथ मिश्र का स्मरण होता है, जिनके व्यंग्यपूर्ण लेखों ने समाज में व्याप्त कुरीतियों और समस्याओं पर तीखा प्रहार किया। यह संग्रह उन्हीं का धारदार व्यंग्यों का संकलन है।
Boudam
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Fyodor Dostoyevsky
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- Description: Awating description for this book
Topi Shukla
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Rahi Masoom Raza
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Description:
‘आधा गाँव’ के ख्यातिप्राप्त रचनाकार की यह एक अत्यन्त प्रभावपूर्ण और मर्म पर चोट करनेवाली कहानी है। ‘टोपी शुक्ला’ ऐसे हिन्दुस्तानी नागरिक का प्रतीक है जो मुस्लिम लीग की दो राष्ट्रवाली थ्योरी और भारत विभाजन के बावजूद आज भी अपने को विशुद्ध भारतीय समझता है—हिन्दू-मुस्लिम या शुक्ला, गुप्त, मिश्रा जैसे संकुचित अभिधानों को वह नहीं मानता। ऐसे स्वजनों से उसे घृणा है जो वेश्यावृत्ति करते हुए ब्राह्मणपना बचाकर रखते हैं, पर स्वयं उससे इसलिए घृणा करते हैं कि वह मुस्लिम मित्रों का समर्थक और हामी है। अन्त में टोपी शुक्ला ऐसे ही लोगों से कम्प्रोमाइज नहीं कर पाता और आत्महत्या कर लेता है।
व्यंग्य-प्रधान शैली में लिखा गया यह उपन्यास आज के हिन्दू-मुस्लिम सम्बन्धों को पूरी सच्चाई के साथ पेश करते हुए हमारे आज के बुद्धिजीवियों के सामने एक प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
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