Kahin Aur Par Kahan By Neeraj Pandey
(0)
₹
299
₹ 248.17 (17% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
क्षितिज को नहीं पता कि माया उसे जानती भी है या नहीं। स्कूल में वह उससे एक क्लास पीछे थी और क्षितिज उसे चुपके-चुपके पसंद करता था लेकिन लड़कपन में लिखा गया लव लेटर माया तक कभी नहीं पहुँचा। बीस साल बाद, जब उसका तीन साल का रिश्ता टूटा, पर यक़ीन खो दिया। मगर जब दोबारा तलाश शुरू की, तो माया याद आयी। उसे नहीं पता माया कहाँ है, कैसी है लेकिन इस बार क्षितिज को उसे ढूँढना ही है। -कहीं और पर कहाँ
Read moreAbout the Book
क्षितिज को नहीं पता कि माया उसे जानती भी है या नहीं। स्कूल में वह उससे एक क्लास पीछे थी और क्षितिज उसे चुपके-चुपके पसंद करता था लेकिन लड़कपन में लिखा गया लव लेटर माया तक कभी नहीं पहुँचा। बीस साल बाद, जब उसका तीन साल का रिश्ता टूटा, पर यक़ीन खो दिया। मगर जब दोबारा तलाश शुरू की, तो माया याद आयी। उसे नहीं पता माया कहाँ है, कैसी है लेकिन इस बार क्षितिज को उसे ढूँढना ही है। -कहीं और पर कहाँ
Book Details
-
ISBN9789348497796
-
Pages232
-
Avg Reading Time8 hrs
-
Age11-18 yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Ranu Aur Bhanu
- Author Name:
Sunil Gangopadhyay
- Book Type:

-
Description:
— रवीन्द्रनाथ को प्रतिदिन पूरे भारत से सैकड़ों चिट्ठियाँ मिलती थीं। वे यथासम्भव उनका जवाब भी देते थे। एक दिन एक पत्र पाकर कवि को बड़ा कौतुक महसूस हुआ। उस पत्र को वाराणसी से रानू नामक एक बालिका ने लिखा था। इसी उम्र में वह कवि का काफ़ी साहित्य पढ़ चुकी थी। वे ही उसके सबसे क़रीबी व्यक्ति हो गए थे। उसकी शिकायत थी कि कवि इन दिनों इतनी कम कहानियाँ क्यों लिख रहे हैं। कवि ने उस बालिका के पत्र का जवाब दे दिया।
अपने गृहस्थ जीवन में रवीन्द्रनाथ को कभी मानसिक सुख-शान्ति नहीं मिली थी। अचानक एक दिन लम्बी बीमारी भोगने के बाद कवि की प्रिय बड़ी बेटी माधुरी लता का देहावसान हो गया। कवि टूट गए। उसी दिन अशान्त चित्त से एक भाड़े की गाड़ी लेकर वे भवानीपुर पहुँचे। नम्बर ढूँढ़कर एक घर के सामने रुककर उन्होंने पुकारा—रानू! रानू!
अपना नाम सुनते ही तेज़ी से एक बालिका नीचे उतर आई। कवि अपलक उसे देखते रह गए। यह वे किसे देख रहे थे? यह परी थी या स्वर्ग की कोई अप्सरा! उसी दिन अट्ठावन वर्षीय कवि से उस बालिका का एक विचित्र रिश्ता क़ायम हो गया। रानू कवि के खेल की संगिनी बन गई। नई रचनाओं की प्रेरणादात्री, उनकी खोई ‘बउठान’।
और रानू के लिए कवि हो गए उसके प्रिय भानु दादा।
कवि के चीन-भ्रमण के समय उनकी अनुपस्थिति में रानू की शादी तय हो गई। रानू अब सर राजेन मुखर्जी के पुत्र वीरेन की पत्नी बन गई। दो सन्तानों की माँ।
कवि अब वृद्ध थे। उन्हें जीवन के अन्तिम दिनों में रानू से क्या मिला? वह क्या सिर्फ़ ‘आँसुओं में दु:ख की शोभा’ बनी रह गई?
सुनील गंगोपाध्याय की क़लम से एक अभिनव और अतुलनीय उपन्यास।
Inteha
- Author Name:
Ramendra Kumar
- Book Type:

- Description: टूटी फूटी इक ख्वाइश है मेरी। इक हल्की सी गुज़ारिश है मेरी । बेइंतेहा चाहतों में लिपटी, इक सहमी सी सिफ़ारिश है मेरी ... रमेन्द्र कुमार (रमेन) राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित लेखक हैं। इन्होंने लेखन की प्रायः हर विधा जैसे फ़िक्शन, व्यंग, यात्रा संस्मरण एवं कविताओं के लेखन का कार्य किया है। इन्होंने अब तक कुल 28 पुस्तकें लिखी हैं जिनका अनुवाद कई भारतीय और विदेशी भाषाओं मे किया जा चुका है। इनकी रचनाएँ अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कर चुकी हैं एवं संग्रहीत हैं। 2014 में प्रकाशित इनके उपन्यास 'मोहिनी' का प्रथम संस्करण मात्र एक हफ्ते में ही पूर्ण रूप से बिक गया। इनकी प्रथम नॉन-फ़िक्शन रचना 'इफेक्टिव पेरेंटिंग' भी काफी सराही जा रही है। रमेन अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कथा वाचक और प्रेरणात्मक वक्ता हैं जो श्रोताओं के बीच अपनी अमिट छाप छोड़ने की क्षमता रखते हैं। इन्होंने 'जगन्नाथ संस्कृति' पर देश-विदेश में अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया है। 'इंतेहा' इनके गीत एवं ग़ज़ल का प्रथम संग्रह है।
Sanskar
- Author Name:
U.R. Ananthamurthy +1
- Book Type:

- Description: यू.आर. अनन्तमूर्ति के इस कन्नड़ उपन्यास को युगान्तरकारी उपन्यास माना गया है। ब्राह्मणवाद, अन्धविश्वासों और रूढ़िगत संस्कारों पर अप्रत्यक्ष लेकिन इतनी पैनी चोट की गई है कि उसे सहना सनातन मान्यताओं के समर्थकों के लिए कहीं–कहीं दूभर होने लगता है। ‘संस्कार’ शब्द से अभिप्राय केवल ब्राह्मणवाद की रूढ़ियों से विद्रोह करनेवाले नारणप्पा के दाह–संस्कार से ही नहीं है। अपने लिए सुरक्षित निवास–स्थान, अग्रहार आदि के ब्राह्मणों के विभिन्न संस्कारों पर भी रोशनी डाली गई है—स्वर्णाभूषणों और सम्पत्ति–लोलुपता जैसे संस्कारों पर भी! ब्राह्मण–श्रेष्ठ और गुरु प्राणेशाचार्य तथा चन्द्री, बेल्ली और पद्मावती जैसे अलग और विपरीत दिखाई देनेवाले पात्रों की आभ्यन्तरिक उथल–पुथल के सारे संस्कार अपने असली और खरे–खोटेपन समेत हमारे सामने उघड़ आते हैं। धर्म क्या है? धर्मशास्त्र क्या है? क्या इनमें निहित आदेशों में मनुष्य की स्वतंत्र सत्ता के हरण की सामर्थ्य है, या होनी चाहिए? ऐसे अनेक सवालों पर यू.आर. अनन्तमूर्ति जैसे सामर्थ्यशील लेखक ने अत्यन्त साहसिकता से विचार किया है, और यही वैचारिक निष्ठा इस उपन्यास को विशिष्ट बनाती है।
Aakhiri Sawal
- Author Name:
Sharatchandra
- Book Type:

-
Description:
इस उपन्यास में शरतचन्द्र ने स्त्री–पुरुष के मन को लेकर जो आख़िरी सवाल, मुख्यत: मनोरमा और अजित तथा कमल और अविनाश के सम्बन्धों के माध्यम से उठाया है, उसका जवाब आज तक किसी ने नहीं दिया है। सवाल यह है कि क्या किसी भी विधि–विधान से विवाह कर लेने के बाद स्त्री–पुरुष के मन का मेल चिरस्थायी हो जाता है? क्या विवाह के बाद पति या पत्नी का मन क्रमश: परस्त्री और परपुरुष के प्रति आकर्षित नहीं होता है? और अगर ऐसा होता है, तो क्या यह अस्वाभाविक है? अगर यह अस्वाभाविक है, तो भटका मन लिए जीवन-भर कुढ़–कुढ़कर जीना स्वाभाविक है? अगर यह स्वाभाविक है तो फिर जीवन सुन्दर कैसे है? और अगर जीवन सुन्दर नहीं है, तो जीने का सुख और आनन्द क्या है? विवाह एक समझौता है, एक अनुबन्ध है। जब तक चलता है, ठीक है, नहीं चलता है, तो भी ठीक है। इसमें नैतिकता नहीं ढूँढ़ी जानी चाहिए। मन का मेल नैतिकता के आधार पर नहीं होता है। मन का मेल रुचि, पसन्द और विचार के आधार पर होता है। मनोरमा अजित की वाग्दत्ता है। कमल और अविनाश का विवाह वैदिक रीति से नहीं, अन्य रीति से हुआ है। इसलिए लोग उन्हें हेय दृष्टि से देखते हैं। देखनेवालों में मनोरमा और अजित भी शामिल हैं। पर मन का खेल अजीब है। एक समय आता है जब मनोरमा अविनाश से विवाह कर लेती है और अजित कमल से विवाह करना चाहता है। कमल विवाह–संस्कार को महत्त्व नहीं देती है। वह मन के मेल को तरजीह देती है। वह अजित के साथ बिना विवाह किए जीवन-भर साथ रहने को राजी हो जाती है। स्त्री–पुरुष के मन को लेकर समाज में बार–बार यह सवाल उठाया जाता है कि क्या नैतिक है और क्या अनैतिक? यही तो आखिरी सवाल है। पाठक अपने मन के अनुसार आख़िरी सवाल का जवाब इस उपन्यास में पा जाएँगे।
—विमल मिश्र
Love Beyond Words
- Author Name:
Himanshika Sharma
- Book Type:

- Description: A girl with disability and a boy with perfect life. Nerdy looks of the girl attracted the boy and he requested cupid to do something. Cupid played its role in their life several times. Will cupid shower its blessings on them? Will they make it to the end?
Cliff Hanger
- Author Name:
P Sawhney
- Book Type:

- Description: This collection of short stories explores the cynical and frenzied side of human behaviour. Read this book today.
Mayapuri
- Author Name:
Shivani
- Book Type:

-
Description:
लखनऊ की मायापुरी और उसमें पालतू बिल्ली-सी घुरघुराती नरमाई लिए प्रतिवेशी प्रवासी परिवार में पहाड़ के सुदूर ग्रामीण अंचल से आई शर्मीली सुन्दरी शोभा का आना बड़े उत्साह का कारण बना, विशेषकर घर की बेटी मंजरी के लिए। पर पिता के बाल्यकालीन मित्र के उस परिवार में घर के बेटे सतीश के विदेश से लौटने पर लहरें उठने लगीं। शोभा और सतीश, अविनाश और मंजरी, युवा जोड़ों के बीच आकर्षण-विकर्षण की रोचक घुमेरियों से भरी ‘मायापुरी’ की कहानी में नकचढ़ी मंत्री दुहिता एक झंझा की तरह प्रवेश करती है, और देखते-देखते सतीश उसकी दुनिया का भाग बनने लगता है। पर क्या नेह-छोह के बन्धन सहज टूटते हैं? नैनीताल वापस लौटी शोभा के जीवन को रुक्की, रामी, रानीसाहिबा और उनके रहस्यमय जीवन की परछाइयाँ कैसे घेरने लगती हैं?
स्त्री-पुरुष के चिरन्तन आकर्षण की मरीचिकामय मायापुरी तथा जीवन की कठोर वास्तविकता के टकराव से भरा यह उपन्यास आज भी अपनी अलग पहचान रखता है।
Nashtar
- Author Name:
Hasan Shah
- Book Type:

-
Description:
‘नश्तर’ को पहला भारतीय उपन्यास कहा जा सकता है। सन् 1790 में जब हसन शाह ने इसे लिखा था तब तक हमारे यहाँ अंग्रेज़ी तर्ज़ के ‘नॉवेल’ का प्रादुर्भाव नहीं हुआ था।
यह वो ज़माना था जब भारत में नवाबी शानो-शौक़त अपने उतार पर थी और अंग्रेज़ों ने जगह-जगह अपनी जड़ें जमाना शुरू कर दिया था। अब वे ही स्वयं को नवाब समझने लगे थे और यहाँ की नाचने-गाने वाली स्त्रियों से अपना मनोरंजन करना उनका शौक़ बन गया था। इसके चलते इस व्यवसाय से जुड़ी स्त्रियों के समूह भी रोज़ी-रोज़गार के सिलसिले में अंग्रेज़ी दरबारों से जुड़ने लगे थे।
‘नश्तर’ का कथानायक ऐसे ही एक समूह की एक लड़की के प्रेम में पड़ जाता है जिसका अंजाम किसी ग्रीक ट्रेजेडी से कम नहीं होता। खानम जान के मोहक लेकिन सशक्त व्यक्तित्व ने उस ट्रेजेडी को जो गरिमा प्रदान की है, वह अद्भुत है।
‘नश्तर’ एक आत्मकथात्मक उपन्यास है। एक प्रेमकथा। एक त्रासदी...किन्तु यह केवल प्रेम की नहीं, बल्कि नृत्य-संगीत और कला-संस्कृति से जुड़ी एक पूरी ज़िन्दगी, पूरी परम्परा की भी त्रासदी है।
मूलत: फ़ारसी भाषा में रची गई अठारहवीं शताब्दी की इस कृति में शिल्प के स्तर पर आधुनिकता के अनेक लक्षणों को भी देखा जा सकता है।
Kissa Besir-pair
- Author Name:
Prabhat Tripathi
- Book Type:

-
Description:
यह उपन्यास स्मृतियों की क़िस्सागोई है जिसके केन्द्र में इतिहास प्रवर्तक घटनाएँ और व्यक्तित्व नहीं हैं। हो भी नहीं सकते; क्योंकि वे हमारे दैनिक जीवन से दूर कहीं, वाक़ई इतिहास नाम की उस जगह में रहते होंगे, जहाँ तनखैये इतिहासकार बग़ल में काग़ज़-क़लम-कूची लेकर बैठते होंगे। हमारे इस जीवन में जिनकी मौजूदगी, बस कुछ डरावनी छायाओं की तरह दर्ज होती चलती है। हम यानी लोग, जिनके ऊपर जीवन को बदलने की नहीं, सिर्फ़ उसे जीने की ज़िम्मेदारी होती है।
यह उन्हीं हममें से एक के मानसिक भूगोल की यात्रा है, जिसमें हम दिन-दिन बनते इतिहास को जैसे एक सूक्ष्मदर्शी की मदद से, उसकी सबसे पतली शिराओं में गति करते देखते हैं। जो नंगी आँखों दिखाई नहीं देती। वह गति, जिसका दायित्व एक व्यक्ति के ऊपर है, वही जिसका भोक्ता है, वही द्रष्टा। वह गति जो उसकी भौतिक-सामाजिक-राजनीतिक उपस्थिति के इहलोक से उधर एक इतने ही विराट संसार की उपस्थिति के प्रति हमें सचेत करती है।
लेखक यहाँ हमारे इहलोक के अन्तिम सिरे पर एक चहारदीवारी के दरवाज़े-सा खड़ा मिलता है, जो इस वृत्तान्त में खुलता है; और हमें उस चहारदीवारी के भीतर बसी अत्यन्त जटिल और समानान्तर जारी दुनिया में ले जाता है, जो हम सबकी दुनिया है, अलग-अलग जगहों पर खड़े हम उसके अलग-अलग दरवाज़े हैं।
उन्हीं में से एक दरवाज़ा यहाँ इन पन्नों में खुल रहा है।
अद्भुत है यहाँ से समय को बहते देखना।
यह उपन्यास सोदाहरण बताता है कि न तो जीना ही, केवल शारीरिक प्रक्रिया है, और न लिखना ही।
Hemant Ka Panchhi
- Author Name:
Suchitra Bhattacharya
- Book Type:

-
Description:
क़ामयाब पति, दो-दो बुद्धिमान बेटे और अपनी घर-गृहस्थी में डूबी अदिति, उम्र के चालीसवें के मध्य तक पहुँचते-पहुँचते अचानक महसूस करती है कि वह भयंकर अकेली है। पति अपनी नौकरी में व्यस्त है, दोनों बेटे भी अपने-अपने आकाश में पंख फैलाए उड़ने लगे हैं। अकेली अदिति अब अपने दिन या तो अपने आपसे या पिंजरे की मैना से बातें करती हुई गुज़ारती है। उन्हीं दिनों उसकी ज़िन्दगी में हेमेन मामा दाख़िल होते हैं, उन्हीं की प्रेरणा से जाग उठती है—एक नई अदिति धीरे-धीरे वह अपनी रची-गढ़ी दुनिया में मग्न हो जाती है। ब्याह से पहले वह लेखन के क, ख, ग से परिचित हो चुकी थी। अब वह दुबारा लिखना शुरू करती है। अब जब वह अपने पति, सन्तान और गृहस्थी को नई निगाह से तौलना-परखना शुरू कर देती है, तो शुरू होता है—ज़बर्दस्त टकराव। भयंकर दर्द के काले बादल घिर आते हैं।
अदिति क्या सिर्फ़ सुप्रतिम की पत्नी-भर है? मात्रा बच्चों की माँ है? वह क्या सिर्फ़ ख़ून-मांस की मशीन-भर है, जिससे सिर्फ़ यह अपेक्षित है कि बेहद सहज-स्वाभाविक तरीक़े से गृहस्थी की गाड़ी आगे बढ़ाती रहे? इस दायरे से बाहर क्या अदिति का कोई अस्तित्व नहीं?
सुचित्रा भट्टाचार्य की सशक्त क़लम ने ‘हेमन्त का पंछी’ में औरत के इसी सच की बेचैन तलाश को उकेरा है।
Raavi Likhata Hai
- Author Name:
Abdul Bismillah
- Book Type:

-
Description:
पाश्चात्य और भारतीय सभ्यता-संस्कारों के बीच पुल बनाता, एक संवेदनशील तथा शालीन मुस्लिम परिवार का मार्मिक दस्तावेज़। लेखक ने वर्तमान के माध्यम से अतीत के कथाचित्र का सजीव चित्रण किया है और साहित्य की एक सशक्त प्रविधि 'फैंटेसी' का बख़ूबी प्रयोग करते हुए उपन्यास को एक नए सौन्दर्यशास्त्र से सृजित किया है।
उपन्यास में एक निम्न मध्यवर्गीय लेकिन कर्मशील मुस्लिम परिवार की कई पीढ़ियों की जीवनगाथा का रोचक ब्योरा प्रस्तुत किया गया है। उनकी संस्कृति व सामाजिक सरोकारों के साथ-साथ यह उपन्यास ग्रामीण जीवन की गहनता, प्रकृति प्रेम, खेत-खलिहानों के दृश्यों का भी सफ़र करता है। भारतीयता की जड़ें कितनी सशक्त, गहरी और शाश्वत हैं और उनका प्रभाव कितना दूरगामी है, यह उपन्यास इस सच्चाई को स्थापित करता है। पाश्चात्य संस्कृति में पले बच्चे जिन्हें देशी रहन-सहन, खानपान, भाषा और अपनी दुर्व्यवस्था से अजीब-सा परहेज़ था, उनका सहज रूपान्तरण एक ख़ूबसूरत प्रक्रिया है।
लेखक ने नए और पुराने जीवन और समाज को बिना किसी टकराहट के एक शृंखला में बाँधने और सामंजस्य बनाने का एक सार्थक और अनिवार्य कार्य किया है जो आज के समय की आवश्यकता भी है।
इस उपन्यास में आज की कम्प्यूटर, मैसेज, ई-मेल की इलेक्ट्रॉनिक दुनिया और तेज़ रफ़्तार भौतिक जीवन के बीच सम्बन्धों, रिश्तों और संवेदनाओं को कैसे जीवित रखा जा सकता है, इन पहलुओं को भी सरल भाषा में सँजोया गया है। भाषा की रवानगी कृति की पठनीयता को बढ़ाती है और पाठक के अन्तर्मन से एक रिश्ता भी बनाती है।
Lopamudra
- Author Name:
K. M. Munshi
- Book Type:

-
Description:
गुजराती के सुविख्यात उपन्यासकार के.एम. मुंशी के इस महत्त्वपूर्ण उपन्यास में गाधिपुत्र विश्वरथ (जो बाद में ऋषि विश्वामित्र के रूप में विख्यात हुए) के जन्म और बाल्यकाल की मुग्धकारी कथा वर्णित है। उनका अगस्त्य ऋषि के पास विद्याध्ययन, दस्युराज शंबर द्वारा अपहरण, शंबर-कन्या उग्रा से प्रेम-सम्बन्ध, फलस्वरूप एक लम्बा विचार-संघर्ष और इस समूचे घटनाक्रम में अत्यन्त तेजस्वी, अनिंद्य सुन्दरी तथा ऋषि-पद प्राप्त लोपामुद्रा की रचनात्मक भूमिका का इसमें प्रभावी अंकन हुआ है। साथ ही महर्षि अगस्त्य से लोपा का प्रेम, जो समूची कथा में अन्तःस्रोत की तरह प्रवाहित है, पाठक को कुछ नए मूल्य भी सौंपता है।
वस्तुतः आर्यावर्त्त की महागाथा का यह एक ऐसा कीर्तिमान अध्याय है जिसमें हमारी सभ्यता और संस्कृति के कितने ही दुर्लभ रत्न बिखरे पड़े हैं। इसमें जो एक ताप विद्यमान है, उसमें हमें निरन्तर एक नया युग ढलता दिखाई देता है। दूसरे शब्दों में, यह कथा आर्यजाति के महोत्कर्ष के उन प्रतीकों की है, जो आज भी परिवर्तनशील दौर से गुज़रते इस महादेश के सन्दर्भ में एकदम प्रासंगिक हैं। वीरता और शौर्य, साधना और संघर्ष, प्रेम और बलिदान के वे सारे प्रसंग और जीवन-मूल्य, जो लोपामुद्रा और विश्वामित्र का प्रभामंडल बनाते हैं, आज की भी सर्वोच्च प्राथमिकता बनकर उभरते हैं। निश्चय ही, मुंशी जी की यह कथाकृति इतिहास को तीव्र राग की तरह और जिजीविषा को गंध-समान प्रस्तुत करती है।
Iliad
- Author Name:
Homer
- Book Type:

-
Description:
‘इलियड’ विश्वप्रसिद्ध रचनाकार होमर की अनुपम कृति है। यह एक ऐसा ग्रन्थ है जिसने अपने रचयिता को प्राचीन यूरोप में लोकप्रियता के शिखर पर पहुँचा दिया। ‘इलियड’ में अप्रतिम सौन्दर्य की मल्लिका हेलेन के कारण हुए ट्रॉय-युद्ध के एक अंश का जीवन्त चित्रण है।
ट्रॉय-युद्ध के इस अंश में एकिलीज आवेश में आकर स्वयं को युद्ध से विरत कर लेता है। इसके कारण यवनों को पराजय का सामना करना पड़ता है। युद्ध में एकिलीज के मित्र पेट्रोक्लस का वध हेक्टर कर देता है। मित्र के वध की सूचना से उद्वेलित होकर एकिलीज पुनः युद्ध में शामिल होता है और हेक्टर का वध करता है।
प्रतिकार और प्रतिशोध की इस कथा में यवनों की सम्पूर्ण जीवनशैली और प्रक्रिया समाई हुई है। क़िस्सागोई का कमाल है कि पाठक का औत्सुक्य निरन्तर बना रहता है।
होमर के मुग्धकारी रचनाशिल्प की यह विशेषता है कि एकिलीज के क्रोध और अन्ततः हेक्टर के वध की छोटी-सी कहानी में ट्रॉय ही नहीं, अपितु समस्त मानव जीवन के भाग्य, उद्देश्य और उसके मूल अर्थ की व्याख्या समा जाती है।
कम शब्दों में घटनाओं का सही चित्र उकेर देने की क्षमता ने इस ग्रन्थ को विश्वसाहित्य में उत्कृष्टता प्रदान की है।
‘इलियड’ की चुस्त एवं सघन संरचना चकित करनेवाली है।
Ek Yahoodi Ladki Ki Talash
- Author Name:
Patrick Modiano
- Book Type:

-
Description:
डोरा ब्रूडर, उम्र पन्द्रह साल, यहूदी। स्कूल के रजिस्टर में उसके नाम के आगे ‘जाने की तारीख़ और कारण’ का सिर्फ़ यह विवरण मिलता है : ‘14 दिसम्बर, 1941; शिष्या भाग गई है।’ यह उपन्यास उसी की तलाश की कहानी है जिसे लेखक लगभग पाँच दशक बाद पेरिस पर जर्मन क़ब्ज़े के बचे-खुचे दस्तावेज़ों में करता है।
कड़ी से कड़ी जुड़ती जाती है, और अन्त में पता चलता है कि स्कूल से निकलने के बाद वह जर्मनों की पकड़ में आ गई, और उसे आउशवित्ज़ के लिए रवाना कर दिया गया जहाँ एक पूरी क़ौम को ख़त्म करने के लिए नाज़ियों ने तमाम अमानवीय इन्तज़ाम कर रखे थे।
डोरा ब्रूडर इस उपन्यास की मुख्य पात्र है, लेकिन असल नायक वह माहौल है जो पेरिस पर जर्मन क़ब्ज़े के बाद वहाँ पैदा हुआ, और जिसे लेखक ने अत्यन्त कौशल के साथ यहाँ पुन:सृजित किया है। एक ऐसा दौर जब अनेक मनुष्यों के लिए न सूरज के पास रोशनी बची थी, न आकाश के पास हवा, न घर उन्हें छिपा पाते थे, न सड़कें कहीं पहुँचा पाती थीं। उन्हें कभी भी कहीं भी पकड़ा जा सकता था, उनके लिए नियम बन गए थे, जो उन्हें उनके ही जैसे मनुष्यों के बीच कम-मनुष्य बनाते थे। उन्हें निर्धारित समय पर निकलना था, निर्धारित इलाक़ों में रहना था, निर्धारित बसों में चलना था, और हर समय अपनी पहचान को ज़ाहिर रखना था।
दिसम्बर की बर्फ़ीली रात में निकली डोरा के साथ कब क्या हुआ, कब वह कहाँ रही, यह खोजते हुए जैसे-जैसे लेखक आगे बढ़ता है इस माहौल की भयावहता हमारे सामने साकार होती जाती है, हम भीतर से ठंडे और सुन्न पड़ते जाते हैं और सहसा चौंककर अपने आज के वातावरण को देखने लगते हैं...
Guzara Hua Zamana
- Author Name:
Krishna Baldev Vaid
- Book Type:

-
Description:
‘गुज़रा हुआ ज़माना’ कृष्ण बलदेव वैद की रचनाशीलता का एक विशेष आयाम है। 1957 में प्रकाशित उनका पहला उपन्यास ‘उसका बचपन’ आज भी अपने शिल्प और शैली के आधार पर हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ उपन्यासों में गिना जाता है। उसमें श्री वैद ने एक अति संवेदनशील बच्चे के दृष्टिकोण से पश्चिमी पंजाब के एक निर्धन परिवार की कलह और पीड़ा का संयत और साफ़ चित्रण करके कथा साहित्य को एक नई गहराई दी थी, एक नया स्वर दिया था।
1981 में प्रकाशित ’गुज़रा हुआ ज़माना’ उसी उपन्यास की अगली कड़ी है। इसमें ‘उसका बचपन’ का केन्द्रीय पात्र बीरू अपने परिवार की सीमाओं से बाहर की दुनिया को भी देखता है, उससे उलझता है। इसमें अनेक घटनाओं, पात्रों और पीड़ाओं से एक प्यारे और पेचीदा कस्बे का सामूहिक चित्र तैयार किया गया है। इस चित्र को देखकर दहशत भी होती है और श्री वैद की निराली नज़र के दर्शन भी। इसमें देश-विभाजन सम्बन्धी साम्प्रदायिक पागलपन को उभारा भी गया है और लताड़ा भी। ‘गुज़रा हुआ ज़माना’ देश-विभाजन को लेकर लिखे गए उपन्यासों में एक अलग और विशिष्ट स्थान पिछले दो दशकों से बनाए हुए है। इसका यह संस्करण, आशा है, उस स्थान को और स्थिरता प्रदान करेगा।
Kale-Ujale Din
- Author Name:
Amarkant
- Book Type:

-
Description:
वस्तुतः हमारा आज का जीवन कई खंडों में बिखरा हुआ-सा नज़र आता है। सामाजिक ढाँचे में असंगतियाँ और विषमताएँ हैं, जिनकी काली छाया समाज के प्रत्येक सदस्य के व्यक्तिगत जीवन पर पड़े बिना नहीं रहती। इसीलिए एक बेपनाह उद्देश्यहीनता और निराशा आज हरेक पर छाई हुई है। स्वस्थ, स्वाभाविक और सच्चे जीवन की कल्पना भी मानो आज दुरूह हो उठी है।
इस कथानक के सभी पात्र ऐसे ही अभिशापों से ग्रस्त हैं। मूल नायक तो बचपन से ही अपने सही रास्ते से भटककर ग़लत रास्तों पर चला जाता है। उसके माता-पिता और परिजन भी तो भटके हुए थे। लेकिन वह अपने भटकाव में ही अपनी मंज़िल को पा लेता है। क्या इस तरह इस कथानक का सुखद अन्त होता है? नहीं। आँसू का अन्तिम क़तरा तो सूखता ही नहीं। संयोग और दुर्घटना का सुखान्त कैसा? मानव-जीवन कोई दुर्घटनाओं और संयोगों की समष्टि मात्र नहीं है! जब तक सारी सामाजिक व्यवस्था बदल नहीं जाती, जब तक हमारा जीवन-दर्शन आमूल बदल नहीं जाता, तब तक ऐसी दुर्घटनाएँ होती रहेंगी—चाहे उनका परिणाम दुःखद हो या सुखद।
आज की समाज-व्यवस्था के परिवर्तन के साथ नारी की स्वतंत्रता का प्रश्न भी जुड़ा हुआ है। क्रान्ति का त्यागमय जीवन उसके जीवन-काल में क्या मर्यादा पा सका? उसके आदर्श को क्या उचित मूल्य मिला? रजनी का त्याग भी क्या सम्मान पा सका? उसकी सहानुभूति, ममता और प्रेम-भावना क्या आँसू से भीगी नहीं हैं? क्या उसके जीवन का सुख किसी और के दुःख पर आश्रित नहीं है?
इन्हीं सब प्रश्नों की गुत्थियाँ अमरकान्त का यह उपन्यास खोलता है।
Vaidhanik Galp
- Author Name:
Chandan Pandey
- Book Type:

-
Description:
गहरी राजनैतिक, सामाजिक पक्षधरता का गद्य होते हुए भी चन्दन का ‘वैधानिक गल्प’ तीव्र आन्तरिक भावनाओं और संवेदनाओं का साथ नहीं छोड़ता। इस मुश्किल जगह से रचे जाने के बावजूद कमाल यह भी है कि यह गल्प के पारम्परिक तत्त्वों जैसे–रहस्य, रोचकता और अन्तत: पठनीयता को बचाए रखता है। प्यार, क्रूरता और प्रतिरोध चन्दन के यहाँ अपने सूक्ष्म और समकालीन रूपों में प्रकट होते हैं जो न सिर्फ़ चकित करता है बल्कि पाठक की चेतना में कुछ सकारात्मक जोड़ जाता है।
—महेश वर्मा
चन्दन पाण्डेय की लेखकी को समकाल के पूर्ण साहित्यिक विनियोग के रूप में देखा-रखा जा सकता है। चन्दन का कथाकार क़िस्से में ग़ाफ़िल नहीं, बल्कि सतर्क व अचूक है, जिससे समकाल के अद्यतन संस्करण का भी प्रवेश उनके कथादेश में सहज ही सम्भव है। कहन की साहिबी उन्हें ईर्ष्या का पात्र बनाती है।
—कुणाल सिंह
Zaharbaad
- Author Name:
Abdul Bismillah
- Book Type:

- Description: ‘झीनी-झीनी बीनी चदरिया’ के प्रख्यात रचनाकार अब्दुल बिस्मिल्लाह का यह उपन्यास प्रकाशन-क्रम की दृष्टि से तीसरा किन्तु लेखन-क्रम से पहला है। इसकी कथाभूमि मध्य प्रदेश के एक पूर्वी छोर पर स्थित मंडला अंचल है। वहाँ के ग्रामीण परिवेश में रचे गए इस उपन्यास में ऐसे चरित्रों का निरूपण हुआ है जो आज़ाद हिन्दुस्तान की बड़ी-बड़ी विकास योजनाओं से एकदम अछूते और अपरिचित हैं और ग़रीबी की रेखा के बहुत नीचे का जीवन जी रहे हैं। उनके माध्यम से लेखक ने समाज की विसंगतियों, वर्जनाओं और दारुण विषमताओं को मार्मिक ढंग से उकेरा है। संक्षेप में कहें तो यह उपन्यास रोज़-रोज़ मरकर जीनेवाले अनगिनत पति-पत्नियों, पुत्रों और प्रेमी-प्रेमिकाओं की, उनके दुःख-दर्द की ऐतिहासिक महागाथा है। साथ ही लेखक ने ग्रामीण परिवेश का चित्रण इतनी सशक्त भाषा में किया है कि वह सब आँखों के सामने से गुज़रता हुआ प्रतीत होता है। संवादों में मंडला की बोली के प्रयोग ने पात्रों को सम्भव और विश्वसनीय बनाया है।
Ahasas-E-Ishtiyara
- Author Name:
Tanuj Kumar
- Book Type:

- Description: इस काव्य-संकलन के माध्यम से रचनाकार तनुज कुमार ने जीवन के भिन्न-भिन्न आयामों को शायरी, गजलों एवं कविताओं द्वारा अभिव्यक्त करने का प्रयास किया है। रचनाकार ने अहसासों एवं हालातों को कलम के जरिए मूर्त रूप दिया है, ताकि इसे पढक़र आम जनमानस अपने अंदर छिपी हुई भावनाओं को स्वत: अनुभव कर सके। रचनाकार ने भाषाई सीमाओं को लाँघते हुए हिंदी, उर्दू, अरबी, फारसी एवं अंग्रेजी के शब्दों का न्यायोचित उपयोग करते हुए अपनी रचनाओं को प्रभावशाली एवं दिल को छूने वाली बनाया है। इस कविता-संग्रह के माध्यम से रचनाकार ने अपने निजी अनुभवों को सर्वमान्य बनाने का प्रयास किया है। पुस्तक ‘अहसास-ए-इश्तियारा’—जैसा नाम से विदित है—में रचनाकार ने इनसानी अहसासों को रूपक के माध्यम से रेखांकित किया है, जिसमें जीवन के कटु अनुभवों, सामाजिक व्यवस्थाओं एवं प्रेमानुकूल भावनाओं का यथासंभव चित्रण किया है। इस पुस्तक की कई रचनाएँ एक तरफ जहाँ हमें भाव-विभोर करती हैं, वहीं दूसरी तरफ आत्मचिंतन को भी विवश कर देती हैं। सुधी पाठकगण जब लेखक की रचनाओं का पठन करेंगे तो निश्चित तौर पर कोई अपने बिछड़े प्रेम को याद करेगा तो कोई अपने साथ हुए अन्याय को याद करेगा तो किसी के अंदर नई ऊर्जा का प्रादुर्भाव होगा।
Yogeshwar
- Author Name:
Shakuntala Mishra
- Book Type:

- Description: योगेश्वर अर्थात श्रीकृष्ण के अनेक रूप जनमानस में अंकित हैं—माखन-चोर से लेकर गीता-उपदेशक तक जिन्हें भारतवासियों ने कई कोणों से देखा और प्रेम किया। यह आख्यान उन्हीं श्रीकृष्ण को एक समग्र व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत करने का कथात्मक प्रयास है। उनके वंश-इतिहास और जीवन की हर घटना के साथ। कथाकार का मानना है कि कृष्ण के चरित्र को पूरी तरह समझने के लिए हमें चमत्कारों और भावुकता की मन:स्थिति से निकलकर उन्हें एक ऐसे युगपुरुष के रूप में देखना होगा जिसके जीवन का हर क्षण मानवता के लिए एक बहुमूल्य सन्देश है। यह कथा कृष्ण के माता-पिता और उनके भी पूर्वजों की पृष्ठभूमि के वर्णन से आरम्भ होती है जिसमें देवकी और वसुदेव के तप, उनके सुदीर्घ कष्ट और कंस द्वारा उनके छह पुत्रों की हत्या के लोमहर्षक विवरण हमें देखने को मिलते हैं। कृष्ण के बाल्यकाल और छात्र-जीवन को भी कथाकार ने विभिन्न स्रोतों के आधार पर यहाँ पुनर्सृजित किया है। कृष्ण के जीवन में आए विभिन्न पात्रों के माध्यम से चलती यह कथा भगवान श्रीकृष्ण को एक सम्पूर्ण मनुष्य के रूप में स्थापित करती है—एक ऐसा मनुष्य जो एक समय इस पृथ्वी पर अपने दुर्लभ और असाधारण गुणों के साथ उपस्थित था।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book