Kahin Aur Par Kahan By Neeraj Pandey
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क्षितिज को नहीं पता कि माया उसे जानती भी है या नहीं। स्कूल में वह उससे एक क्लास पीछे थी और क्षितिज उसे चुपके-चुपके पसंद करता था लेकिन लड़कपन में लिखा गया लव लेटर माया तक कभी नहीं पहुँचा। बीस साल बाद, जब उसका तीन साल का रिश्ता टूटा, पर यक़ीन खो दिया। मगर जब दोबारा तलाश शुरू की, तो माया याद आयी। उसे नहीं पता माया कहाँ है, कैसी है लेकिन इस बार क्षितिज को उसे ढूँढना ही है। -कहीं और पर कहाँ
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क्षितिज को नहीं पता कि माया उसे जानती भी है या नहीं। स्कूल में वह उससे एक क्लास पीछे थी और क्षितिज उसे चुपके-चुपके पसंद करता था लेकिन लड़कपन में लिखा गया लव लेटर माया तक कभी नहीं पहुँचा। बीस साल बाद, जब उसका तीन साल का रिश्ता टूटा, पर यक़ीन खो दिया। मगर जब दोबारा तलाश शुरू की, तो माया याद आयी। उसे नहीं पता माया कहाँ है, कैसी है लेकिन इस बार क्षितिज को उसे ढूँढना ही है। -कहीं और पर कहाँ
Book Details
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ISBN9789348497796
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Pages232
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Avg Reading Time8 hrs
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Age11-18 yrs
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Country of OriginIndia
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रिश्तों को समझ पाने में अक्सर हम चूक जाते हैं। जब तक समझ में आता है, देर हो जाती है और वक़्त मुट्ठी में से रेत सा फिसल जाता है। उपन्यास की नायिका शुभी के जीवन में ऐसे ही अनेक उतार चढ़ाव आए, कभी थकी, कभी लड़खड़ाई, कभी गिरी भी, फिर भी कुछ तो था जिसने उसकी जिजीविषा को समाप्त होने से बचाए रखा, क्या कारण था जो उसने आत्म हत्या का विचार किया? क्या हुआ शुभी के जटिल जीवन का अंत? क्या शुभी की तलाश को पूर्णता प्राप्त हुई? क्या अंज़ाम हुआ शुभी के जीवन का, जानने के लिये पढ़ें ये उपन्यास - "अनावरण".
Naulakhi Kothi
- Author Name:
Ali Akbar Natiq
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प्रस्तुत उपन्यास "नौलखी कोठी" हिन्दुस्तान में अग्रेज़ी सरकार के शासन और उसके बाद के दौर में बदलते सामाजिक हालात की कहानी है। इंग्लैंड में आठ लम्बे साल गुज़ारने के बाद विलियम विभाजन-पूर्व पंजाब में जलालाबाद के नवनियुक्त सहायक आयुक्त के रूप में हिंदुस्तान लौट आता है। वो अपने दादा द्वारा बनवाए गए आलीशान बंगले नौलखी कोठी में अपने 'घर' में लौटने का सपना देखता है, लेकिन घटनाओं का एक अपरिवर्तनीय मोड़ उसका इंतजार कर रहा है, जो न केवल उसकी क़िस्मत बदल देता है, बल्कि ज़मीन की क़िस्मत भी हमेशा के लिए बदल देता है। अली अकबर नातिक़ का ये उपन्यास, "नौलखी कोठी", उस समय की युगचेतना का एक व्यावहारिक चित्रण है। ये कहानी विभाजन से पहले के वर्षों में शुरू होती है और अस्सी के दशक तक चलती है।
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