Lockdown Ke Dauran Maut Ka Zindaginama

(0)

Author:

Pragya Sharma

Language:

Hindi

149

₹ 119.2 (20% off)

Available

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


प्रस्तुत किताब 'रेख़्ता हर्फ़-ए-ताज़ा’ सिलसिले के तहत प्रकाशित उर्दू और हिंदी की संधि-रेखा पर स्थित ज़बान को अभिव्यक्ति का माध्यम बनाने वाली प्रज्ञा शर्मा का ताज़ा काव्य-संग्रह है| इस किताब में लॉकडाउन के दौरान इंसानी मन-मस्तिष्क में उभरने वाली विभिन्न भावनाओं एवं आशंकाओं को अभिव्यक्त किया गया है| यह किताब देवनागरी लिपि में प्रकाशित हुई है और पाठकों के बीच ख़ूब पसंद की गई है|

Read more

ISBN
9789391080006
Pages
120
Avg Reading Time
4 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

Piracy Free

Express Delivery

Secure Payment

About the Book

प्रस्तुत किताब 'रेख़्ता हर्फ़-ए-ताज़ा’ सिलसिले के तहत प्रकाशित उर्दू और हिंदी की संधि-रेखा पर स्थित ज़बान को अभिव्यक्ति का माध्यम बनाने वाली प्रज्ञा शर्मा का ताज़ा काव्य-संग्रह है| इस किताब में लॉकडाउन के दौरान इंसानी मन-मस्तिष्क में उभरने वाली विभिन्न भावनाओं एवं आशंकाओं को अभिव्यक्त किया गया है| यह किताब देवनागरी लिपि में प्रकाशित हुई है और पाठकों के बीच ख़ूब पसंद की गई है|

Book Details

  • ISBN
    9789391080006
  • Pages
    120
  • Avg Reading Time
    4 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

Recommended For You

Customer Reviews

Be the first to write a review...

(0)

0 out of 5

Book

Lockdown Ke Dauran Maut Ka Zindaginama is not a chronicle of events but a record of what those events did to the human interior. Published as part of the Rekhta Harf-e-Taaza series, Pragya Sharma writes in a language poised between Urdu and Hindi, honoring the shared inheritance of both traditions. The collection confronts the emotional residue of India's lockdown months: mortality as a suddenly proximate presence, solitude as both refuge and torment, the paradox of confinement sharpening consciousness. Sharma does not dramatize; she observes the small collapses and unexpected clarities that arise when time slows and the world contracts. Written in Devanagari script, the poems function as both witness and companion to a moment when vulnerability became universal and isolation a shared experience across the nation.

यह किताब पढ़ते समय पाठक को किस तरह का अनुभव होगा?

यह संग्रह आपको लॉकडाउन की उस आंतरिक यात्रा में ले जाता है जहां भय, अकेलापन और मृत्यु का साक्षात्कार होता है। प्रज्ञा शर्मा नाटकीयता से बचकर छोटी-छोटी भावनाओं को स्पर्श करती हैं — वह क्षण जब समय ठहर जाता है और मन अपने भीतर मुड़ता है। यह काव्य-संग्रह धीमा, चिंतनशील और भावनात्मक रूप से सच्चा है, जो उन पाठकों को संतुष्ट करेगा जो काव्य में ईमानदारी और मानसिक सूक्ष्मता की तलाश करते हैं।

यह किताब किस तरह के पाठकों के लिए उपयुक्त है और यह पाठक से क्या अपेक्षा रखती है?

  • उन पाठकों के लिए जो उर्दू-हिंदी की संधि-रेखा पर स्थित भाषा की सूक्ष्मता और लालित्य का आनंद लेते हैं
  • समकालीन भारतीय काव्य में रुचि रखने वाले जो लॉकडाउन के मनोवैज्ञानिक प्रभाव को समझना चाहते हैं
  • जो पाठक विचारशील, धीमी गति की कविता को समय देने के लिए तैयार हैं
  • यह किताब उन लोगों से संवाद करती है जिन्होंने अलगाव और अनिश्चितता को निकट से महसूस किया है

इस किताब का विषय आज के भारतीय पाठकों के लिए सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?

लॉकडाउन ने भारतीय समाज में सामूहिक आघात, आर्थिक असमानता और मानसिक स्वास्थ्य संकट को उजागर किया। यह संग्रह उस समय की भावनात्मक सच्चाई को दर्ज करता है — वह दौर जब अस्तित्व की नाज़ुकता सार्वभौमिक हो गई थी। प्रज्ञा शर्मा की कविताएं केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि सांस्कृतिक दस्तावेज़ भी हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को यह बताएंगी कि उस अभूतपूर्व काल में भारतीय मन किन प्रश्नों और भय से गुज़रा।

प्रज्ञा शर्मा का इस विषय पर दृष्टिकोण क्या विशिष्ट बनाता है?

प्रज्ञा शर्मा उर्दू और हिंदी की साझा विरासत को सम्मान देते हुए दोनों के बीच की भाषा में लिखती हैं, जो रेख़्ता हर्फ़-ए-ताज़ा सिलसिले का हिस्सा है। उनकी आवाज़ नारेबाज़ी से मुक्त है — वे छोटे-छोटे क्षणों, आंतरिक संवादों और मौन की परतों को पकड़ती हैं। देवनागरी में प्रकाशित यह संग्रह भाषाई और भावनात्मक दोनों स्तरों पर सुलभ है, फिर भी काव्यात्मक गहराई बनाए रखता है।

यह किताब पाठक के साथ लंबे समय तक भावनात्मक, बौद्धिक या सांस्कृतिक रूप से क्या छोड़ जाती है?

यह संग्रह पाठक को यह याद दिलाता है कि संकट केवल घटनाओं का नहीं बल्कि मन की स्थिति का भी होता है। यह उन भावनाओं को शब्द देता है जो अक्सर अव्यक्त रह जाती हैं — भय, अस्तित्व का प्रश्न, समय की अनुभूति। पढ़ने के बाद पाठक अपने भीतर उस दौर की स्मृति को एक भाषा के साथ संजोए रखेगा, जो उस अनुभव को मान्यता और गरिमा देती है।

View on Rachnaye →

Hurry! Limited-Time Coupon Code

WORDPOWER
* Terms and Conditions applied.

Offers

Best Deal

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua. Ut enim ad minim veniam, quis nostrud exercitation ullamco laboris nisi ut aliquip ex ea commodo consequat.

whatsapp