Kuchh Alpa Viraam
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‘कुछ अल्प विराम’ को साहित्य की किसी एक विधा के खाँचे में डालकर नहीं देखा जा सकता, क्योंकि यह विधाओं की परिधि को तोड़कर जिंदगी की सच्चाई से सीधा संबंध जोड़ती है। इसमें जीवन के उन सभी छोटे-बड़े प्रसंगों को इकट्ठा करने की कोशिश की है, जो गुदगुदाते हैं, हँसाते हैं, रुलाते हैं, कभी हल्की सी चपत लगाते हैं और कभी चिकोटी काट लेते हैं। सबकुछ उतना ही जितना जरूरी है, हमें हमारी असमय नींद या तंद्रा से जगाने के लिए काफी है। कभी लघुकथा के माध्यम से, तो कभी किस्से के माध्यम से और कभी-कभी संस्मरण के माध्यम से। जरूरी नहीं कि जिंदगी का हर सबक, हर समय किसी भारी भरकम शास्त्रीय किताब से ही सीखा जाए। जिंदगी के छोटे से प्रसंग भी कई बार बड़ा सबक सिखा जाते हैं। ऐसे ही प्रसंगों को जो हमारे जीवन में अल्प विराम की तरह हैं, बेहद सरल भाषा और सहज शैली में सँजोकर प्रस्तुत करने की कोशिश है, ‘कुछ अल्प विराम’।
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‘कुछ अल्प विराम’ को साहित्य की किसी एक विधा के खाँचे में डालकर नहीं देखा जा सकता, क्योंकि यह विधाओं की परिधि को तोड़कर जिंदगी की सच्चाई से सीधा संबंध जोड़ती है। इसमें जीवन के उन सभी छोटे-बड़े प्रसंगों को इकट्ठा करने की कोशिश की है, जो गुदगुदाते हैं, हँसाते हैं, रुलाते हैं, कभी हल्की सी चपत लगाते हैं और कभी चिकोटी काट लेते हैं। सबकुछ उतना ही जितना जरूरी है, हमें हमारी असमय नींद या तंद्रा से जगाने के लिए काफी है। कभी लघुकथा के माध्यम से, तो कभी किस्से के माध्यम से और कभी-कभी संस्मरण के माध्यम से। जरूरी नहीं कि जिंदगी का हर सबक, हर समय किसी भारी भरकम शास्त्रीय किताब से ही सीखा जाए। जिंदगी के छोटे से प्रसंग भी कई बार बड़ा सबक सिखा जाते हैं। ऐसे ही प्रसंगों को जो हमारे जीवन में अल्प विराम की तरह हैं, बेहद सरल भाषा और सहज शैली में सँजोकर प्रस्तुत करने की कोशिश है, ‘कुछ अल्प विराम’।
Book Details
-
ISBN9789352667406
-
Pages144
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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‘निर्मला’ प्रेमचन्द का एक मार्मिक उपन्यास है जिसमें उन्होंने बेमेल विवाह की विसंगतियों को बेहद संवेदनशील और नाटकीय कथा-तत्त्व के साथ उजागर किया है। उनके कई उपन्यासों के मुक़ाबले आकार में छोटा होने के बावजूद इसे उनकी महत्त्वपूर्ण रचनाओं में गिना जाता है और आज भी पाठकों में इसकी लोकप्रियता बरकरार है। एक टीवी धारावाहिक के अलावा दृश्य तथा श्रव्य माध्यमों में और भी कई तरह से इसका रूपान्तरण होता रहा है।
कहानी के केन्द्र में निर्मला नामक एक युवती है, जिसका विवाह उसके परिवार की विपरीत परिस्थितियों के चलते उससे उम्र में कई साल बड़े, विधुर और तीन लड़कों के पिता तोताराम से हो जाता है। निर्मला इस विवाह को स्वीकार करके तोताराम की पत्नी और उसके बच्चों की माँ के रूप में स्वयं को ढाल लेती है, लेकिन तोताराम स्वाभाविक नहीं रह पाता। यहाँ तक कि वह अपने बड़े बेटे के साथ उसके ग़लत रिश्तों तक का शक करने लगता है जिसके दूरगामी नतीजे होते हैं।
निर्मला के साथ अन्य पात्रों को भी उपन्यास में सन्तुलित ढंग से उभारा गया है जिसके कारण लगातार अवसाद और दुर्भाग्य के अँधेरे में चलते पाठक की रुचि कहीं भी भंग नहीं होती। बेमेल विवाह, दहेज-प्रथा और आज़ादी से पहले पारम्परिक भारतीय समाज में स्त्री की दारुण स्थिति के इर्द-गिर्द बुनी गई इस कथा की प्रासंगिकता आज भी है।
Siyasat
- Author Name:
Shivani Sibbal
- Book Type:

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Description:
निजी महत्त्वाकांक्षाओं, पारिवारिक सीमाओं और सामाजिक बदलावों की दिलचस्प कहानी!
एक ही घर में एक ही स्त्री के पाले अहान सिकन्द और राजेश कुमार बचपन के मित्र हैं लेकिन दोनों की दुनिया बहुत अलग है। अहान अमीर परिवार का इकलौता वारिस है जबकि राजेश उसी परिवार के ड्राइवर का लड़का। जैसे-जैसे वे बड़े होते हैं, बचपन की उनकी दोस्ती बदलने लगती है। आहान से यह आशा की जाती है कि वह उत्तराधिकार में मिले विरासत को आगामी पीढ़ी के लिए बचाकर रखे जबकि वहीं राजेश से दुनिया की यही आशा है कि वह अधिक से अधिक अपने पिता की तरह घरेलू नौकर बनकर न जिये। लेकिन उसकी योजनाएँ बड़ी हैं।
सियासत एक नई प्रतिभाशाली कलम के आगमन का एलान है जो नई दिल्ली के व्यावसायिक एवं राजनीतिक परिवारों की गोपन दुनिया का परीक्षण करती है।
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