Tripura Ki Lokkathayen
Author:
Prof. Milanrani JamatiaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 200
₹
250
Available
प्रत्येक क्षेत्र के लोक-साहित्य में वहाँ की स्थानीय परंपराएँ, संस्कृति, लोकोक्तियाँ और तत्संबंधी अन्य विशिष्टताएँ समाहित होती हैं। लोक-साहित्य अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का बेहतरीन माध्यम है। कॉकबरक समेत आज तक त्रिपुरा की जनजातीय भाषाओं में मौजूद लोककथाओं का ठीक से संग्रह नहीं हुआ है; हिंदी में इन्हें लाना तो दूर की बात है। इस क्रम में ‘त्रिपुरा की लोककथाएँ’ शीर्षक पुस्तक का महत्त्व स्वयंसिद्ध है।
इस संग्रह में 37 लोककथाएँ संकलित हैं। इन लोककथाओं में पाठक त्रिपुरा का स्थानीय जीवन-दर्शन, इतिहास और परंपराओं का दिग्दर्शन करेंगे। इनमें सदियों से चली आ रही एक ऐसी लोकधारा है, जिसे यहाँ का जनजातीय समुदाय एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानांतरित करता रहा है। प्रस्तुत पुस्तक में त्रिपुरा में रहनेवाली लगभग सभी प्रमुख जनजातियों की लोककथाओं को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया है। ये कथाएँ यहाँ की जनजातियों की संस्कृति का भावानुवाद कही जाएँ तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। इस क्रम में राइमा-साइमा नदियों का बहता प्रवाह इसका अप्रतिम उदाहरण है, जिन्हें समेटने का प्रयास इस पुस्तक में किया गया है।
ISBN: 9789355210388
Pages: 160
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Description:
इस उपन्यास का नायक—केशव—हज़ारों साल पीछे छूट गई दुनिया से हमारी दुनिया में आया है। आया है एक लड़की से प्रेम करने की अटूट इच्छा लिये। वह लड़की उसे मिलती भी है, लेकिन त्रासदी यह कि वह उसकी हत्या कर डालता है!...
...तो जो व्यक्ति अपनी दुनिया से हमारी दुनिया में प्यार करने आया था, उसने हत्या क्यों की? यही है इस उपन्यास का मुख्य सवाल, जिसका जवाब प्रक्रिया में उनका यह बहुचर्चित उपन्यास वर्तमान सभ्यता के पूँजीवादी जीवन-मूल्यों पर तो प्रहार करता ही है, उन मूल्यों को उजागर करता है, जो मानव सभ्यता को निरन्तर गतिशील बनाए हुए हैं। उनकी मान्यता है कि पुरानी दुनिया के सिद्धान्तों से नई दुनिया को नहीं परखा जा सकता। नई दुनिया की स्त्री भी नई है—प्रेम के कबीलाई और सामन्ती मूल्य उसे स्वीकार नहीं। अब वह स्वतंत्र है। वास्तव में सतत परिवर्तनशील मूल्य-मान्यताओं का अन्त:संघर्ष इस कथाकृति को जो ऊँचाई सौंपता है, वह अपने प्रभाव में आकर्षक भी है और मूल्यवान भी।
'Ba' Se Bank
- Author Name:
Suresh Kant
- Book Type:

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Description:
हिन्दी के सुपरिचित कथाकार-व्यंग्यकार सुरेश कान्त का यह व्यंग्य-उपन्यास एक बैंक की अन्दरूनी कहानी कहता है, जिसके माध्यम से बैंक-कर्मचारियों के दैनंदिन क्रियाकलापों का जायज़ा लिया गया है। इसमें एक तरफ़ बैंक मैनेजर के अन्धविश्वासों पर चुटीली टिप्पणी है तो दूसरी ओर कर्मचारियों की कामचोरी के साथ ही उनकी समस्या और उनके सुख-दु:ख को भी लेखक ने अनदेखा नहीं किया है और बैंक का सारा कारोबार जिन ग्राहकों के बिना अधूरा है, उनकी परेशानियाँ और शिकायतें भी यहाँ मौजूद हैं। लेकिन सब कुछ इतना पूर्वग्रहमुक्त और सहज-स्फूर्त है कि व्यंग्य में कहीं कटुता नहीं आती, वह मीठी मार से अपना काम करता चलता है।
सुरेश कान्त बैंक में कार्यरत हैं, इसलिए स्वभावत: जिन घटनाओं और प्रसंगों का चित्रण उन्होंने यहाँ किया है, वे प्रामाणिक और विश्वसनीय तो हैं ही, लेखक की मानवीय दृष्टि का स्पर्श पाकर प्रभावोत्पादक भी हो गए हैं।
Pashchim Bengal Ki Lokkathayen
- Author Name:
Pankaj Saha
- Book Type:

- Description: लोक और जीवन के बीच अटूट संबंध है। अपनी परंपरा, सामाजिक व्यवस्था, राजनीतिक समझ, आर्थिक तंत्र और धार्मिक मान्यताओं से आबद्ध आम-जीवन ही लोक-जीवन है। लोक-जीवन में लोक-संस्कृति अपने विभिन्न रूपों में विद्यमान रहती है। कभी यह लोकाचार, कभी लोक-विश्वास, लोक-पर्व आदि के रूप में रहती है, तो कभी लोकगीत के रूप में, कभी लोककथा के रूप में, कभी लोकनाट्य और कभी सुभाषित के रूप में। लोक-साहित्य में लोककथाओं का विशेष महत्त्व है। भारत की समस्त लोक-भाषाओं में लोककथाएँ भरी पड़ी हैं। इन लोककथाओं में मानव-मूल्यों एवं मानवीय संवेदनाओं का सागर लहराता है। इन कथाओं में मानवीय समाज की विसंगतियों एवं त्रासदियों का गहराई से अवगाहन किया जा सकता है। जातक, पंचतंत्र, हितोपदेश, वृहत्कथा, कथासरितसागर भारत की प्राचीनतम एवं अत्यंत समृद्ध लोककथाएँ हैं। बंगाल की लोककथाएँ भी बहुत पुरानी एवं समृद्ध हैं। अन्य भारतीय भाषाओं की तरह इनका भी जन्म मुख्यतः दादी एवं नानी के मुख से ही हुआ है। इस पुस्तक में संकलित समस्त लोककथाएँ बंगाल (पूर्व एवं पश्चिम) के हृदय का दर्पण हैं। इन लोककथाओं में बंगाल के लोक-जीवन की धड़कनें सुनाई पड़ती हैं।
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