🇮🇳 India’s home-grown full-stack ecosystem for Publishers, Authors, Writers, and Readers. 🎊🎊 Celebrate Your Language, Authors from Your Own Land, with Rachnaye!!! 🎊🎊 Enjoy 🎧 Audiobooks at Rachnaye, download the Rachnaye App from Play Store or App Store

Alka

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


About the book

इस उपन्यास में निराला ने अवध क्षेत्र के किसानों और जनसाधारण के अभावग्रस्त और दयनीय जीवन का चित्रण किया है। पृष्ठभूमि में स्वाधीनता आंदोलन का वह चरण है जब पहले विश्वयुद्ध के बाद गांधीजी ने आंदोलन की बागडोर अपने हाथों में ली थी। यही समय था जब शिक्षित और संपन्न समाज के अनेक लोग आंदोलन में कूदे जिनमें वकील-बैरिस्टर और पूँजीपति तबके के नेता मुख्य रूप से शामिल थे। इन लोगों की प्रतिबद्धता स्वतंत्रता आंदोलन से बेशक गहरी रही, लेकिन किसानों और मजदूरों की तकलीफों से इनका ज्यादा वास्ता नहीं था। कहा जा सकता है कि इनका मुख्‍य उद्देश्‍य अपने लिए आजादी हासिल करना था, इसलिए नेतृत्व का एक हिस्सा किसानों-मजदूरों के आंदोलन को उभरने देने के पक्ष में नहीं था। निराला ने इस उपन्यास में इस निहित वर्गीय स्वार्थ का स्पष्ट उल्लेख किया है। जमींदारों के विरुद्ध किसानों के विद्रोह का जैसा अंकन यहाँ निराला ने किया है, वह अपनी यथार्थवादिता के नाते दुर्लभ है। इस उपन्यास में उनकी भाषा भी पहले उपन्यास ‘अप्सरा’ से ज्यादा वयस्क है।

Read more

₹ 199

₹ 159.2 20% off

Available

Rachnaye membership

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format

Frequently bought together
Alka This book ₹159
Bela Suryakant Tripathi 'Nirala' ₹495
Billesur Bakariha Suryakant Tripathi 'Nirala' ₹199
3 books selected ₹893 ₹853

100% Original

Fast Dispatch

Secure Payment

About the Book

इस उपन्यास में निराला ने अवध क्षेत्र के किसानों और जनसाधारण के अभावग्रस्त और दयनीय जीवन का चित्रण किया है। पृष्ठभूमि में स्वाधीनता आंदोलन का वह चरण है जब पहले विश्वयुद्ध के बाद गांधीजी ने आंदोलन की बागडोर अपने हाथों में ली थी। यही समय था जब शिक्षित और संपन्न समाज के अनेक लोग आंदोलन में कूदे जिनमें वकील-बैरिस्टर और पूँजीपति तबके के नेता मुख्य रूप से शामिल थे। इन लोगों की प्रतिबद्धता स्वतंत्रता आंदोलन से बेशक गहरी रही, लेकिन किसानों और मजदूरों की तकलीफों से इनका ज्यादा वास्ता नहीं था। कहा जा सकता है कि इनका मुख्‍य उद्देश्‍य अपने लिए आजादी हासिल करना था, इसलिए नेतृत्व का एक हिस्सा किसानों-मजदूरों के आंदोलन को उभरने देने के पक्ष में नहीं था। निराला ने इस उपन्यास में इस निहित वर्गीय स्वार्थ का स्पष्ट उल्लेख किया है। जमींदारों के विरुद्ध किसानों के विद्रोह का जैसा अंकन यहाँ निराला ने किया है, वह अपनी यथार्थवादिता के नाते दुर्लभ है। इस उपन्यास में उनकी भाषा भी पहले उपन्यास ‘अप्सरा’ से ज्यादा वयस्क है।

Book details

Fast dispatchShips within 48 hours
Secure paymentOnline, or cash on delivery on eligible orders
100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
6th
Publication year
2007
Weight
182 grams
ISBN-13
9788126713738
Pages
154
Reading time
~5 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
15 × 22 cm
Language
Hindi

Recommended for you

Customer reviews

Be the first to write a review

Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.

Offers

Loading offers…

whatsapp