Abhi Hum Tumhare Hain
About the book
अभी हम तुम्हारे हैं' एक ऐसी नई विधा है, जो दिल से दिल और मुहब्बत से मुहब्बत के संवाद का सफ़र है। ये किताब दो ऐसे किरदारों के संवाद पर आधारित है, जिनका कोई नाम नहीं है। उनमें से एक आप हैं और दूसरा वो, जिससे आप मोहब्बत करते हैं; यानी कि दोनों ही आप हैं। इस किताब को समझने के लिए आपको किसी वैज्ञानिक नज़रिए की नहीं बल्कि उन जज़्बात की ज़रूरत है, जो मुहब्बत के साज़ पर धड़कना जानते हैं। ये संवाद मुहब्बत के मौसम का मुकम्मल बयान हैं जिन्हें पढ़ कर आप बोझलपन का शिकार नहीं होते। उर्दू-पंजाबी की मक़बूल शायरा, नस्र-निगार और रेडियो-टीवी ऐंकर अलमास शबी का जन्म पाकिस्तान में हुआ। उनकी पत्रकारिता में एम. ए. और होम्योपैथिक मेडिकल की शिक्षा कराची, पाकिस्तान में हुई। उसके बाद वो अमेरिका चली गईं और वहीं से Cosmetology में डिग्री हासिल की। उनकी दो किताबें "अभी हम तुम्हारे हैं" (मुकालमा) और "मुहब्बत अज़ाब" (पंजाबी शायरी) प्रकाशित हो चुकी हैं और दो किताबें "देर सवेर तो हो जाती है" (उर्दू शायरी) और "कभी हम तुम्हारे थे" (मुकालमा) प्रकाशनाधीन हैं। वो पंज रेडियो, अमेरिका की चीफ़ एग्ज़ीक्यूटिव और फ़ाउंडर हैं और एक तवील मुद्दत से "बज़्म-ए-अलमास शबी" प्रसारित कर रही हैं जिसमें कई शायर और अदीब शिरकत करते हैं। अपने अदबी सफ़र के दौरान वो कई सारे पुरस्कारों से सम्मानित हो चुकी हैं। इन दिनों टेक्सास, अमेरिका में रह कर अदबी ख़िदमात अंजाम दे रही हैं।
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About the Book
अभी हम तुम्हारे हैं' एक ऐसी नई विधा है, जो दिल से दिल और मुहब्बत से मुहब्बत के संवाद का सफ़र है। ये किताब दो ऐसे किरदारों के संवाद पर आधारित है, जिनका कोई नाम नहीं है। उनमें से एक आप हैं और दूसरा वो, जिससे आप मोहब्बत करते हैं; यानी कि दोनों ही आप हैं। इस किताब को समझने के लिए आपको किसी वैज्ञानिक नज़रिए की नहीं बल्कि उन जज़्बात की ज़रूरत है, जो मुहब्बत के साज़ पर धड़कना जानते हैं। ये संवाद मुहब्बत के मौसम का मुकम्मल बयान हैं जिन्हें पढ़ कर आप बोझलपन का शिकार नहीं होते। उर्दू-पंजाबी की मक़बूल शायरा, नस्र-निगार और रेडियो-टीवी ऐंकर अलमास शबी का जन्म पाकिस्तान में हुआ। उनकी पत्रकारिता में एम. ए. और होम्योपैथिक मेडिकल की शिक्षा कराची, पाकिस्तान में हुई। उसके बाद वो अमेरिका चली गईं और वहीं से Cosmetology में डिग्री हासिल की। उनकी दो किताबें "अभी हम तुम्हारे हैं" (मुकालमा) और "मुहब्बत अज़ाब" (पंजाबी शायरी) प्रकाशित हो चुकी हैं और दो किताबें "देर सवेर तो हो जाती है" (उर्दू शायरी) और "कभी हम तुम्हारे थे" (मुकालमा) प्रकाशनाधीन हैं। वो पंज रेडियो, अमेरिका की चीफ़ एग्ज़ीक्यूटिव और फ़ाउंडर हैं और एक तवील मुद्दत से "बज़्म-ए-अलमास शबी" प्रसारित कर रही हैं जिसमें कई शायर और अदीब शिरकत करते हैं। अपने अदबी सफ़र के दौरान वो कई सारे पुरस्कारों से सम्मानित हो चुकी हैं। इन दिनों टेक्सास, अमेरिका में रह कर अदबी ख़िदमात अंजाम दे रही हैं।
Book details
- Format
- Paperback
- Publisher
- Rekhta Publications
- Publication year
- 2024
- Weight
- 400 grams
- ISBN-13
- 9789394494220
- Pages
- 190
- Reading time
- ~6 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 15 × 22 cm
- Language
- Hindi
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Abhi Hum Tumhare Hain invents its own form: a book-length dialogue between two nameless presences—one the reader, one the beloved—who are ultimately both aspects of the same heart. This is not a novel with plot or a poetry collection with stanzas, but a sustained muhabbat (conversation of love) that moves through the seasons of longing, recognition, and presence. Rooted in jazzbaat—the currents of feeling that resist scientific explanation—the text asks to be read not for story but for resonance. Each exchange is brief, direct, unadorned, as if overheard rather than composed. The absence of character names is deliberate: the beloved is a mirror, and the dialogue a way of thinking through intimacy as a meeting of self and other. Drawing on Urdu-Punjabi lyric traditions, the work extends the emotional idiom of ghazal and nazm into prose without losing their intensity. This is literature as listening—a form that trusts emotion over explanation.
यह किताब पढ़ते समय मुझे किस तरह का अनुभव मिलेगा?
यह किताब आपको एक अंतरंग बातचीत के बीच में ले जाएगी, जहां आप खुद से और अपने प्रेम से मुखातिब होंगे। संवाद छोटे, सीधे और भावनाओं से भरे हुए हैं, जो किसी कहानी की बजाय एक जज़्बाती सफ़र की तरह महसूस होते हैं। यह भारी नहीं है—बल्कि एक ऐसी लय में बहता है जो दिल को छूता है और सोचने पर मजबूर करता है।
यह किताब किसके लिए सबसे उपयुक्त है और पाठक से क्या अपेक्षा करती है?
- जो पाठक उर्दू-पंजाबी शायरी की भावनात्मक दुनिया से परिचित हैं और ग़ज़ल, नज़्म की तरह गहरी अनुभूति चाहते हैं
- जो कथानक से ज़्यादा जज़्बात और आत्म-चिंतन को महत्व देते हैं
- जो प्रेम को सिर्फ़ रोमांस नहीं, बल्कि खुद से मिलन की यात्रा मानते हैं
- जो प्रयोगात्मक विधाओं के लिए खुले हैं
आज के भारतीय पाठकों के लिए इस किताब की सांस्कृतिक या ऐतिहासिक प्रासंगिकता क्या है?
आज के समय में जब रिश्ते तेज़ी से बदल रहे हैं और भावनाओं को अभिव्यक्त करना कठिन हो गया है, यह किताब प्रेम को भाषा देने का एक पारंपरिक लेकिन नया तरीका प्रस्तुत करती है। उर्दू-पंजाबी शायरी की विरासत को गद्य संवाद में ढालकर, यह उस भावनात्मक संस्कृति को जीवित रखती है जो आधुनिक भारत में धीरे-धीरे खो रही है।
इस विषय पर लेखिका का दृष्टिकोण क्या विशिष्ट बनाता है?
लेखिका ने नाम रहित किरदारों का इस्तेमाल करके एक ऐसा रूप बनाया है जहां पाठक खुद को और अपने प्रेम को एक साथ देख सकता है। कथानक या कविता की बजाय शुद्ध संवाद का यह प्रयोग हिंदी साहित्य में दुर्लभ है। उर्दू-पंजाबी शायरी की संवेदनशीलता को गद्य में लाना उनकी अनूठी पहचान है।
किताब खत्म होने के बाद पाठक के मन में क्या रह जाता है?
यह किताब पाठक को प्रेम के बारे में नए सिरे से सोचने पर मजबूर करती है—न सिर्फ़ किसी और के प्रति, बल्कि खुद के प्रति भी। संवादों की सादगी और गहराई लंबे समय तक मन में गूंजती रहती है। यह एक भावनात्मक दर्पण छोड़ जाती है, जिसमें आप अपनी मुहब्बत की परछाईं देखते रहते हैं।

