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Upanyas Ka Kavyashastra

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आज का उपन्यास चुनौती देता है। आलोचक इस चुनौती को स्वीकार करता हुआ पुराने समीक्षात्मक पैटर्न को तोड़कर नया पैटर्न तलाशता है। 'उपन्यास का काव्यशास्त्र' में आलोचनात्मक सिद्धान्तों की कसौटी पर उपन्यासों और कहानियों की परख नहीं की गई है, बल्कि उपन्यासों-कहानियों की कसौटी पर सिद्धान्तों को देखा-कसा गया है। समय के अन्तराल के साथ-साथ पाठकों-आलोचकों के विचार और आस्वाद में परिवर्तन आ जाता है। वे साहित्य को देशकाल की नई ‘कंडिशनिंग’ में देखने के लिए बाध्य होते हैं। ‘गोदान’, ‘सुनीता’, ‘बाणभट्ट की आत्मकथा’, ‘शेखर : एक जीवनी’, ‘झीनी-झीनी बीनी चदरिया’, ‘कितने पाकिस्तान’ और ‘काशी का अस्सी’ आदि औपन्यासिक प्रतिमानों को तोड़ने-गढ़ने वाले उपन्यासों के अलावा इस किताब में कुछ कहानियों पर भी विचार किया गया है। सिद्धान्तों की कसौटी कहानियों को भी मान्य नहीं है। इस पुस्तक में पाँच कहानियाँ विवेचित हैं—‘उसने कहा था’, ‘एक रात’, ‘शतरंज के खिलाड़ी’, ‘कफ़न’ और ‘एक राजा निरबंसिया’। मूलतः पुस्तक में सिद्धान्त बरक्स रचना का विवेचन है। विभिन्न उपन्यासों और कहानियों को यहाँ पर एक दृष्टिकोण से विवेचित किया गया है। प्रबुद्ध पाठक इससे टकरा भी सकते हैं और इसे आगे भी बढ़ा सकते हैं।

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आज का उपन्यास चुनौती देता है। आलोचक इस चुनौती को स्वीकार करता हुआ पुराने समीक्षात्मक पैटर्न को तोड़कर नया पैटर्न तलाशता है।

'उपन्यास का काव्यशास्त्र' में आलोचनात्मक सिद्धान्तों की कसौटी पर उपन्यासों और कहानियों की परख नहीं की गई है, बल्कि उपन्यासों-कहानियों की कसौटी पर सिद्धान्तों को देखा-कसा गया है। समय के अन्तराल के साथ-साथ पाठकों-आलोचकों के विचार और आस्वाद में परिवर्तन आ जाता है। वे साहित्य को देशकाल की नई ‘कंडिशनिंग’ में देखने के लिए बाध्य होते हैं। ‘गोदान’, ‘सुनीता’, ‘बाणभट्ट की आत्मकथा’, ‘शेखर : एक जीवनी’, ‘झीनी-झीनी बीनी चदरिया’, ‘कितने पाकिस्तान’ और ‘काशी का अस्सी’ आदि औपन्यासिक प्रतिमानों को तोड़ने-गढ़ने वाले उपन्यासों के अलावा इस किताब में कुछ कहानियों पर भी विचार किया गया है।

सिद्धान्तों की कसौटी कहानियों को भी मान्य नहीं है। इस पुस्तक में पाँच कहानियाँ विवेचित हैं—‘उसने कहा था’, ‘एक रात’, ‘शतरंज के खिलाड़ी’, ‘कफ़न’ और ‘एक राजा निरबंसिया’।

मूलतः पुस्तक में सिद्धान्त बरक्स रचना का विवेचन है। विभिन्न उपन्यासों और कहानियों को यहाँ पर एक दृष्टिकोण से विवेचित किया गया है। प्रबुद्ध पाठक इससे टकरा भी सकते हैं और इसे आगे भी बढ़ा सकते हैं।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Hardbound
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
2nd
Publication year
2008
Weight
434 grams
ISBN-13
9788183611992
Pages
236
Reading time
~8 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 22 cm
Language
Hindi

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