(0)
Author:
KamleshwarPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Language-linguistics₹
195
₹ 156 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
एक शानदार अतीत कुत्ते की मौत मर रहा है, उसी में से फूटता हुआ एक विलक्षण वर्तमान रू-ब-रू खड़ा है—अनाम, अरक्षित, आदिम अवस्था में। और आदिम अवस्था में खड़ा यह मनुष्य अपनी भाषा चाहता है, आस्था चाहता है, कविता और कला चाहता है, मूल्य और संस्कार चाहता है; अपनी मानसिक और भौतिक दुनिया चाहता है...।' यह है नयी कहानी की भूमिका—इस कहानी को शास्त्र और शास्त्रियों द्वारा परिभाषित करने की जब-जब कोशिश हुई है, कहानी और कहानीकार ने विद्रोह किया है। इस कहानी को केवल जीवन के सन्दर्भों से ही समझा जा सकता है, युग के सम्पूर्ण बोध के साथ ही पाया जा सकता है। नयी कहानी के प्रमुख प्रवक्ता तथा समान्तर कहानी आन्दोलन के प्रवर्तक कमलेश्वर ने छठे दशक के कालखंड में जीवन के उलझे रेशों और उससे उभरनेवाली कहानी की जटिलताओं को गहरी और साफ़ निगाहों से विश्लेषित किया है। साहित्य का यह विश्लेषण बिना स्वस्थ सामाजिक दृष्टि के सम्भव नहीं है। कमलेश्वर की यह पुस्तक इसलिए ऐतिहासिक महत्त्व की है कि यह समय और साहित्य को पारस्परिक समग्रता में समझने की दृष्टि देती है। 'नयी कहानी की भूमिका' अपने समय के साहित्य की अत्यन्त विशिष्ट दस्तावेज़ है; पाठकों, लेखकों और अध्येताओं के लिए अपरिहार्य पुस्तक है।
Read moreDon’t Miss Out
Pick a membership and see exactly what it gets you
- 15 Free Deliveries
- 1 Free Book up to ₹500 MRP
- 0% off every book, every time
Subscribed already? Continue to your
benefits Login
You pay ₹1,499/Year
You will be auto-charged ₹1,499 every year. Cancel auto-charge anytime.
Benefits with Rachnaye Connoisseur
1 Free Physical Book up to ₹500 MRP
Personal Recommendations
15 Free Deliveries Per Year
Format:
Piracy Free
Express Delivery
Secure Payment
About the Book
एक शानदार अतीत कुत्ते की मौत मर रहा है, उसी में से फूटता हुआ एक विलक्षण वर्तमान रू-ब-रू खड़ा है—अनाम, अरक्षित, आदिम अवस्था में। और आदिम अवस्था में खड़ा यह मनुष्य अपनी भाषा चाहता है, आस्था चाहता है, कविता और कला चाहता है, मूल्य और संस्कार चाहता है; अपनी मानसिक और भौतिक दुनिया चाहता है...।'
यह है नयी कहानी की भूमिका—इस कहानी को शास्त्र और शास्त्रियों द्वारा परिभाषित करने की जब-जब कोशिश हुई है, कहानी और कहानीकार ने विद्रोह किया है। इस कहानी को केवल जीवन के सन्दर्भों से ही समझा जा सकता है, युग के सम्पूर्ण बोध के साथ ही पाया जा सकता है।
नयी कहानी के प्रमुख प्रवक्ता तथा समान्तर कहानी आन्दोलन के प्रवर्तक कमलेश्वर ने छठे दशक के कालखंड में जीवन के उलझे रेशों और उससे उभरनेवाली कहानी की जटिलताओं को गहरी और साफ़ निगाहों से विश्लेषित किया है। साहित्य का यह विश्लेषण बिना स्वस्थ सामाजिक दृष्टि के सम्भव नहीं है।
कमलेश्वर की यह पुस्तक इसलिए ऐतिहासिक महत्त्व की है कि यह समय और साहित्य को पारस्परिक समग्रता में समझने की दृष्टि देती है। 'नयी कहानी की भूमिका' अपने समय के साहित्य की अत्यन्त विशिष्ट दस्तावेज़ है; पाठकों, लेखकों और अध्येताओं के लिए अपरिहार्य पुस्तक है।
Book Details
-
ISBN9788126728596
-
Pages192
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Wahi Baat
- Author Name:
Kamleshwar
- Book Type:

- Description:
इस उपन्यास में एक नए दृष्टिकोण से कहानी को उठाया गया है। उपन्यास के केन्द्र में महत्त्वाकांक्षी पति और उसकी पत्नी का द्वन्द्व है। वह पत्नी लगातार दमित महसूस करती है। पति के तबादले के बाद पत्नी का एकान्त निरन्तर गहरा होता जाता है। ऐसी अवस्था में भावनावश वह पत्नी अपने उस एकान्त को ख़त्म कर लेती है। वह एक साहसिक फ़ैसला लेती है, और फिर तलाक़ हो जाता है। उसके बाद वह दोबारा विवाह करती है और पहला पति अपनी महत्त्वाकांक्षाओं की दुनिया में लौट जाता है। इस कथा-सूत्र को लेकर चलनेवाले इस उपन्यास में स्त्री की इच्छा-शक्ति और पुरुष की महत्त्वाकांक्षा के द्वन्द्व को बड़ी गहराई से पहचाना गया है। कथा की परिणति में जो दूसरा रास्ता पत्नी ने निकाला है, उसे एक नवीन नारी-क्रान्ति की संज्ञा दी जा सकती है। यहाँ स्त्री की भावना को दमित न रखने का एक कोण भी सामने आता है। यदि वह उपेक्षित और अकेलापन महसूस करती है तो इसकी दोषी निश्चित तौर पर पुरुष की महत्त्वाकांक्षा ही है, ऐसी हालत में स्त्री को क्या अपना ख़ालीपन भर लेने की आज़ादी नहीं होनी चाहिए?
Jange-Azadi
- Author Name:
Kamleshwar
- Book Type:

- Description:
‘जंगे-आज़ादी’ दृश्यों-गीतों और फ्रीज तकनीक पर आधारित एक सिलसिलेवार बाल नाटक है। इस बाल नाटक में स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े कई चरित्रों को पात्र बनाया गया है। भारत का स्वतंत्रता संग्राम इस बाल-नाटक की विषयवस्तु का केन्द्र है। इस तरह यह नाटक एेतिहासिक घटनाक्रम बाल-सुलभ रूप में प्रस्तुत करता है।
Kamleshwar Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Kamleshwar
- Book Type:

- Description:
भारतीय कथाकारों में कमलेश्वर की लोकप्रियता का कोई जवाब नहीं। न तो उनसे पहले, न ही उनके बाद वैसी लोकप्रियता किसी और को हासिल हो सकी। उन्होंने आरंभ में ही ‘दूरदर्शन’ में लोकप्रिय कार्यक्रम ‘परिक्रमा’ शुरू किया। बाद में ‘दूरदर्शन’ के महानिदेशक भी बने। आँधी, मौसम, डाक बँगला, द बर्निंग ट्रेन, राम-बलराम जैसी सौ के करीब फिल्में और चंद्रकांता संतति जैसे तमाम सीरियल लिखनेवाले कमलेश्वर ने ‘सारिका’, ‘कथायात्रा’, ‘गंगा’ और ‘श्रीवर्षा’ जैसी पत्रिकाओं का संपादन किया। जीवन के आखिरी समय तक अखबारों में कॉलम लिखनेवाले कमलेश्वर की कलम उनके हाथ से कभी छूटी नहीं। कमलेश्वर की पहली कहानी ‘फरार’ सन् 1946 में कानपुर से प्रकाशित होने वाले साप्ताहिक ‘जय भारत’ में छपी थी, जबकि ‘कॉमरेड भारती’ सन् 1948 में छपी, जिसे उनकी पहली कहानी मान लिया गया था। उन्होंने ढेर सारी कहानियाँ लिखीं, जिनमें से उनकी कुछ लोकप्रिय कहानियाँ इस संग्रह में प्रस्तुत हैं। कहानियाँ अलग-अलग आस्वाद लिये हुए हैं। आशा है सुधी पाठकों को ये कहानियाँ रुचेंगी और अपनी सी लगेंगी।
Pati-Patani Aur Woh
- Author Name:
Kamleshwar
- Book Type:

- Description:
वरिष्ठ उपन्यासकार कमलेश्वर का यह उपन्यास समकालीन समाज में पुरुष मानसिकता को उघाड़कर रख देता है। देहलोलुप पुरुषों की लिप्सा और कुंठा इस उपन्यास का केन्द्रीय विषय है। पत्नी हो या प्रेमिका, स्त्री हर तरह से पुरुषों द्वारा छली जाती है। इस उपन्यास का कथ्य भले ही रोमांटिक और हलका-फुलका लगे, लेकिन यह साधारणता ही इसकी खास विशेषता है। समकालीन जीवन की कार्यालयी संस्कृति में स्त्रियों की नियति और पुरुष की लोलुपता को लेखक ने इस उपन्यास में गहरी आन्तरिकता से रेखांकित किया है। पूँजीवादी समाज के प्रतिस्पर्द्धामूलक परिवेश की विडम्बनाओं और अन्तर्विरोधों को उजागर करनेवाला यह उपन्यास शिल्प व भाषा की सहजता के लिए भी याद किया जाएगा।
Aagami Ateet
- Author Name:
Kamleshwar
- Book Type:

- Description:
आगामी अतीत का कथ्य रोमांटिक ज़रूर लग सकता है, परन्तु इसमें निहित रोमांटिकता के भीतर भी जो गहरी टीस व्याप्त है, उसके सन्दर्भ ख़ास तौर से सामाजिक-आर्थिक निर्भरताओं से जुड़े हुए हैं। यानी रिश्ते भी किस तरह मूर्छित हो जाते हैं या किस तरह का रूप मानसिक मजबूरियों की वजह से ले जाते हैं, इसीलिए इस उपन्यास में रोमांटिकता को रोमांटिकता से ही काटने का प्रयास दिखाई देता है। जब इस उपन्यास का धारावाहिक प्रकाशन हुआ था, तब इसके उद्देश्य को लेकर गहरी बहस भी सामने आई थी और अन्ततः पाठकों ने यह पाया था कि परम्परावादी रोमांटिक कहानियों से अलग यह उपन्यास एक नए कथ्य को सामने लाता है। पूँजीवादी समाज के स्पर्धामूलक परिवेश की विडम्बना और अन्तर्विरोध ही इस उपन्यास का मुख्य कथ्य है। सन् 1973-74 के आसपास लिखे गए इस उपन्यास की सार्थकता आज के भूमंडलीकरण के दौर में सामने आ चुकी है। आर्थिक आपाधापी के कारण टूट रहे स्त्री-पुरुष सम्बन्धों को इस उपन्यास में पहले ही हमारे सामने रख दिया गया था। और, उस नारी की पीड़ा को भी जो इस दौर की विकृतियों को सह रही है।
Amma
- Author Name:
Kamleshwar
- Book Type:

- Description:
वरिष्ठ उपन्यासकार कमलेश्वर का यह उपन्यास एक आदर्श सामाजिक व्यवस्था की वकालत करता है जिसमें अपने बेरियों के लिए भी स्नेह व सम्मान की गुंजाइश हो। इस उपन्यास का कथा-फ़लक यों तो विस्तृत है लेकिन कमलेश्वर जी ने अपने रचनात्मक कौशल से इसे जिस तरह कम शब्दों में सम्भव किया है, वह क़ाबिले-तारीफ़ है। 'अम्मा' में स्वाधीनता के संघर्षकाल से लेकर सती-प्रथा विरोध तक की अनुगूँजें सुनी जा सकती हैं। इसमें अंग्रेज़ सिपाहियों की क्रूरता और रूढ़िवादी पारम्परिक समाज में विधवा स्त्री की त्रासद स्थिति का बड़ा ही मार्मिक चित्रण हुआ है जो पाठको के मन में करुणा का भाव जगाता है। लोकप्रिय रचनाकार की क़लम से निकली एक अनूठी कृति।
Anbita Vyatit
- Author Name:
Kamleshwar
- Book Type:

- Description:
'देखिए मैं आपकी पत्नी ज़रूर हूँ लेकिन मैं एक औरत भी हूँ…जिस दुनिया में आप रहते हैं, वह भी सही है और जिस दुनिया में मैं रह सकती हूँ? वह भी सही है...मेरा शरीर सन्तृप्त होता रहे और मेरा मन मृत होता रहे, यह मुझे आपके साथ बहुत दूर तक नहीं ले जा सकता...मैं जानती हूँ? पंछियों के केमिकल से युक्त भूसा-भरे शरीरों के करोड़ों रुपए के बिजनेस को छोड़ना या बन्द करना आपके लिए मुमकिन नहीं होगा...लेकिन मेरे लिए यह मुमकिन होगा कि मैं मुर्दों की इस दुनिया से बाहर चली जाऊँ।'' (इसी उपन्यास से) 1947 के बाद सामन्ती युग का पतन, पर्यावरण, पक्षियों से प्रेम तथा सहज मानवीय कोमल सम्बन्धों की यह कहानी बरबस ही आपको अपनी ओर आकर्षित कर लेगी।
Laute Huye Musafir
- Author Name:
Kamleshwar
- Book Type:

- Description:
कहानी-लेखन में अपनी विशिष्ट पहचान के साथ कमलेश्वर ने अपने छोटे कलेवर के उपन्यासों में मध्यवर्गीय जीवन के चित्रण को लेकर छठे-सातवें दशक के हिन्दी परिदृश्य में अपना अलग स्थान बनाया। देश-दुनिया, समाज-संस्कृति और राजनीति से जुड़े विषय भी अक्सर उनकी कथा-रचनाओं के विषय बने हैं। ‘काली आँधी’ और ‘कितने पाकिस्तान’ जैसी रचनाओं के लिए विशेष रूप से ख्यात कमलेश्वर की लेखनी मध्यवर्गीय जीवन की विडम्बनाओं पर ही ठहरती है। वर्ष 1961 में प्रकाशित इस उपन्यास ‘लौटे हुए मुसाफिर’ में स्वतंत्रता के आगमन के साथ गम्भीर रूप धारण करती साम्प्रदायिकता की समस्या और भारत विभाजन के नाम पर बेघर-बार हुए मुस्लिम समाज के मोहभंग और उनकी वापसी की विवशता को दर्शाया गया है। यह इस उपन्यास की प्रभावशाली रचनात्मकता और इतिहास-बोध के कारण ही सम्भव हुआ कि इस छोटे से उपन्यास का उल्लेख भारत-विभाजन पर केन्द्रित गिने-चुने हिन्दी उपन्यासों में प्रमुखता के साथ किया जाता है। अपनी आवेशयुक्त शैली में कमलेश्वर ने इस कृति में आज़ादी और विभाजन के ऊहापोह में फँसे हिन्दुओं और मुसलमानों की मनःस्थिति के साथ भारत के सामाजिक ताने-बाने में आए निर्णायक बदलाव को भी रेखांकित किया है।
Kharia Ka Ghera
- Author Name:
Bertolt Brecht +1
- Book Type:

- Description:
प्रख्यात नाटककार बर्टोल्ट ब्रेष्ट के बहुचर्चित नाटक ‘कॉकेशियन चाक सर्किल’ का हिन्दी अनुवाद है : ‘खड़िया का घेरा’। अनुवादक हैं हिन्दी के प्रसिद्ध कथाकार कमलेश्वर। प्रस्तुत नाटक जिस तरह की, और जिस संक्रान्ति की दुनिया हमारे सामने पेश करता है, उसकी अनुगूँज हमें अपने इतिहास और वर्तमान में मिलने लगती है। इस नाटक में वे सामन्त हैं जो सर्वहारा की क्रान्ति को कुचल देना चाहते हैं...हमारे यहाँ सत्ताधारी राजनीतिज्ञों का वर्ग है, जो जनता के नाम पर अपनी सत्ता को स्थापित कर रहा है। इस नाटक के काज़बेकी, काज़बेकी का भतीजा, डॉक्टर, किसान और स्वयं अजूदक—कहीं-न-कहीं हमें और हमारी स्थितियों को मूर्तिमान करते दिखाई देते हैं। भ्रष्टाचार, पतन, मूल्यहीनता, अवसरवादिता, पदलोलुपता, जनता के नाम पर जनता का शोषण, न्यायहीनता और अन्धापन—जो इस नाटक में व्याप्त हैं, वे भारतीय प्रजातंत्र के संत्रास को भी उजागर कर रहे हैं। संस्थाओं, वर्गों और व्यक्तियों के नाम दूसरे हैं पर जनता एक ही तरह से अभिशप्त और संत्रस्त है। संक्रान्ति और सन्ताप का जो अनुभव यह नाटक देता है, वही आज के भारतीय का जीवन-अनुभव भी है। अनेक देशों में सदियों से चली आती एक लोककथा को आधुनिक सन्दर्भ दिया है ब्रेष्ट ने। कई भाषाओं में अनूदित और मंचित एक पठनीय नाट्य-कृति!
Samudra Mein Khoya Hua Aadmi
- Author Name:
Kamlesh +1
- Book Type:

- Description:
“समुद्र में लापता हुए लोग भी बरसों बाद लौटकर आए हैं...” हरबंस उन्हें समझाने लगा—“बहुत बार समुद्रों में तूफ़ान आ जाते हैं। जहाज टूट जाते हैं। लोग समुद्र में खो जाते हैं...तैरते-तैरते वे अनजानी जगहों पर जा लगते हैं...” लेकिन बीरन न कहीं पहुँचा, न उसने किसी का दरवाज़ा खटखटाया, पहुँची सिर्फ़ उसके हमेशा के लिए विलीन हो जाने की ख़बर। अवाक् खड़ा रह गया, अपनी दैनंदिन चुनौतियों में उलझा-फँसा उसका परिवार। बीरन जिसे हमेशा अपने बाबूजी की बेबसी और मायूसी सताती रहती थी, जो कॉलेज के दिनों में शाम को ही अपनी ड्रेस धोकर सूखने के लिए डाल देता था, जूतों पर खड़िया फेर लेता था और जिसका भार, जिसकी मौजूदगी घर में किसी को महसूस नहीं होती थी, वही बीरन अपने बोझ से सबको मुक्त कर गया। मध्यवर्गीय जीवन के सफल चितेरे कमलेश्वर ने एक मार्मिक कथा के जरिए इस उपन्यास में दो समुद्रों की तरफ़ इशारा किए हैं—एक पानी का वह असीम सागर, जिसमें बीरन खो गया और दूसरा महानगर की ठंडी, उदासीन भीड़ का पराया समुद्र, जिसमें उसके पिता श्यामलाल और मासूम बहनें अपनी अलक्षित जिजीविषा के साथ तैरने की कोशिश करते रहे। आधुनिक सभ्यता के अथाह समुद्र में आज का मध्यवर्गीय व्यक्ति अपनी सीमाओं और विडम्बनाओं के साथ किस तरह लुप्त हो जाता है, यही इस उपन्यास का केन्द्रीय विषय है।
Enni Pakistanulu
- Author Name:
Kamleshwar +1
- Book Type:

- Description:
ఎన్ని పాకిస్తానులు? ఈ నవలలో నాయకుడో, మహానాయకుడో ఎదురుగాలేడు. అందువల్ల కాలాన్నే నాయకుడుగా, మహానాయకుడుగా, విలన్గా ఊహించుకున్నాడు రచయిత శ్రీకమలేశ్వర్. "ఆగ్రా నా రాజధాని. ఆలోచించండి. ఆసమయంలో హిందువులు కృష్ణుణ్ని దేవునిగా, అవతార పురుషునిగా కొలిచేవారు. అతని జన్మస్థానం మధుర. నా రాజధాని ఆగ్రానుండి కేవలం యాభై కిలోమిటర్ల దూరం. కూల్చాలనుకొంటే కృష్ణుని జన్నస్థానం కూల్చలేనా? పరుగెత్తి పరుగెత్తి అయోధ్యవరకు వెళ్లి రాముని జన్మస్థానాన్ని ఎందుకు కూలుస్తా? నలుగురు పిచ్చోళ్ల గురించి నేను తెలుసుకున్న సమాచారం గురించి విన్నవిస్తాను వినండి. అందరికంటే పెద్ద పిచ్చోడు మహాత్మాగాంధీ. రెండో పిచ్చోడు నేతాజీ సుభాష్ చంద్రబోసు. మూడో పిచ్చోడు ఖాన్ అబ్దుల్ గఫార్ ఖాన్. నాలుగో పిచ్చోడు ఒక అదీబ్". వయోవృద్ధ బోధివృక్షం మాట్లాడ సాగింది - ఆర్యుల వర్ణవాదం అప్రాకృతికమైన సిద్ధాంతం. ఎందుకంటే బ్రాహ్మణుల భార్యలు కూడా నెలనెలా బహిష్టుతో బాధ పడుతున్నవారే. వాళ్లూ గర్భవతులవుతున్నారు. వాళ్లూ పిల్లల్ని కంటున్నారు. వాళ్లకు పాలిస్తూ పోషిస్తున్నారు. బ్రాహ్మణులు స్త్రీల గర్భంలో జన్మించినప్పటికీ బ్రహ్మనోటిలో జన్మించామని వాదిస్తారు. బ్రహ్మనోటిలో గర్భాశయం ఎక్కడుంది? రాత్రిసమయంలో ఔరంగజేబు తన విశ్వసనీయుడైన హంతకుడు నజర్ కుతీ బేగును పిలిపించారు. ఆ గూనివాడు వచ్చి నమస్కరిస్తే, "ఖవాసుపుర భవనంలోకి వెళ్లి, సిపిహర్షికోను తండ్రి నుండి వేరు చేయి. ఆ కాఫిర్ దారాషికో తలనరికి, ఆ తల తెచ్చి నాకు చూపించు" అన్నారు ఔరంగజేబు. హంతకుడు నజర్ బేగును చూసి, "ఈ వేళప్పుడు నువ్వు ఇక్కడకు ఎందుకు వచ్చావు?" అన్నాడు దారాషికో. “సిపిహర్షికోను నీనుండి వేరు చేయమని ఉత్తర్వు". అన్నాడు నజర్ బేగు. ఈ మాట విన్న సిపిహర్ షికో జాగరూకుడయ్యాడు. “మమ్మల్ని చంపడానికి నిన్ను పంపారా?" దార కఠినంగా అడిగాడు. హంతకులిద్దరూ బయట నిరీక్షిస్తున్న సైనికులకు సిపిహర్షికోను అప్పగించి దారాషికో ఉన్న గదిలోకి వెళ్ళి తలుపు మూశారు. బయట సిపిహర్షికో వేస్తున్న కేకలు వినిపిస్తున్నాయి. అప్పుడే కోర్టు మీద చీకటి అలముకోసాగింది.
Hindi Sufi Kavya Ka Samgra Anushilan
- Author Name:
Shivsahay Pathak
- Book Type:

- Description:
चौदहवीं शताब्दी ईसवी से लेकर 20वीं शताब्दी ईसवी तक के छह सौ वर्षों की सुदीर्घ अवधि में शताधिक सूफी काव्यों से हिन्दी-साहित्य समृद्ध हुआ है। साहित्य और संस्कृति की अनेकानेक धाराएँ हिन्दी सूफी काव्य में अनुस्यूत हैं। अनेक परम्पराओं, धर्म, दर्शनों, साधनाओं आदि ने सूफी काव्य को अनुप्राणित किया है। हिन्दी सूफी काव्य का अध्ययन स्वयं में अत्यन्त मनोरंजक और महत्त्वपूर्ण विषय है। सूफी संतों ने धर्म और मजहब से ऊपर मनुष्यत्व का परिचय दिया है। इनके काव्यों में प्रेम-पीर की स्निग्ध पुकार है, विरह की प्रशान्त-गम्भीर तड़प है, आत्मसमर्पण का परम पुनीत आग्रह है। इसीलिए ये काव्य हमारे हृदयों को सहज ही छूकर झंकृत कर देते हैं। इन संतों का उद्देश्य संकीर्णताओं से ऊपर उठकर आत्मशुद्धि और जनजीवन में प्रेम-सन्देश का सम्प्रसार था। इसी उद्देश्य का सुफल सूफी काव्य है। सूफीमतवाद की विशेषता रही है कि वह कभी जीवन की उपेक्षा करके नहीं चला। सूफी कवि सही अर्थों में जनकवि थे। उत्तरी हिन्दी के सूफी कवियों ने ठेठ अवधी– जनता की बोली को काव्य की भाषा के रूप में प्रतिष्ठित किया है। पन्द्रहवीं शताब्दी ईसवी से बीसवीं शताब्दी ईसवी तक की जीवन्त अवधी भाषा इनके काव्य का आधार- शृंगार है। इस पुस्तक में एक नवीन दृष्टि से हिन्दी सूफी काव्यों पर विचार किया गया है। फारसी में लिखे गए प्रमुख सूफी काव्यों और अंग्रेजी-फारसी-उर्दू में लिखे गए इस विषय के प्रामाणिक ग्रन्थों के अध्ययन के अनन्तर ही लेखक ने इस शोध-कार्य को सम्पन्न किया। काव्य-परम्परा, प्रबन्ध-योजना, प्रतीक पद्धति, उपमान, कथानक-रूढ़ि, अध्यात्म और दर्शन आदि के फारसी, अरबी और भारतीय मूल प्रेरणास्रोतों का सन्धान करके और उन्हें दृष्टिपथ में रख करके किए गए इस अध्ययन (और निकाले गए निष्कर्षों) से हिन्दी सूफी काव्य-विषयक अनेक भ्रान्त धारणाओं का निराकरण भी लेखक ने किया है।
Vichar Ka Aina Kala Sahitya Sanskriti : Mahatma Gandhi
- Author Name:
Mahatma Gandhi +1
- Book Type:

- Description:
विचार का आईना शृंखला के अन्तर्गत ऐसे साहित्यकारों, चिन्तकों और राजनेताओं के ‘कला साहित्य संस्कृति’ केन्द्रित चिन्तन को प्रस्तुत किया जा रहा है जिन्होंने भारतीय जनमानस को गहराई से प्रभावित किया। इसके पहले चरण में हम मोहनदास करमचन्द गांधी, रवीन्द्रनाथ ठाकुर, प्रेमचन्द, जयशंकर प्रसाद, जवाहरलाल नेहरू, राममनोहर लोहिया, रामचन्द्र शुक्ल, सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’, महादेवी वर्मा, सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ और गजानन माधव मुक्तिबोध के विचारपरक लेखन से एक ऐसा मुकम्मल संचयन प्रस्तुत कर रहे हैं जो हर लिहाज से संग्रहणीय है। मोहनदास करमचन्द गांधी ऐसे जननेता हैं जो वैश्विक उपस्थिति रखते हैं। वे भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के ऐसे नायक हैं जिन्होंने इसे जनता का आन्दोलन बना दिया। औपनिवेशिक सत्ता का प्रतिरोध करते हुए उन्होंने सत्य और अहिंसा को अपनी लड़ाई का केन्द्रीय शिल्प बनाया। उन्होंने साध्य ही नहीं साधन की भी पवित्रता की बात की, बेलगाम उपभोग की संस्कृति का विरोध किया। सत्याग्रही के रूप में विरोधी के प्रति भी किसी तरह की कटुता न रखने की बात कही। अपने समय के शीर्ष लेखकों, चिन्तकों और कलाकारों पर गांधी के विचारों का गहरा असर रहा। वे लोगों से निरन्तर संवादरत रहे और अपने विचारों को मजबूती से रखते रहे। हमें उम्मीद है कि उनके कला, साहित्य और संस्कृति सम्बन्धी लेखन को पढ़ते हुए इस कठिन समकाल से जूझने की अनेक राहें रोशन होंगी।
Sahitya Siddhant
- Author Name:
Rene Wellek +2
- Book Type:

- Description:
प्रसिद्ध अमेरिकी आलोचकों ‘रेने वेलेक और आस्टिन वारेन’ की यह कृति अपने विषयगत वैज्ञानिक विवेचन एवं शैलीगत सहजता के कारण अभूतपूर्व लोकप्रियता प्राप्त कर चुकी है। विद्वान् लेखकों ने एक ओर तो काव्यशास्त्र और अलंकारशास्त्र (जिसकी परम्परा अरस्तू से शुरू होकर ब्लेयर, कैम्पबेल और केम्स तक आई हुई है) के विभिन्न पक्षों का सम्यक् विवेचन प्रस्तुत किया है और दूसरी ओर ललित साहित्य की विधाओं और शैलीशास्त्र तथा साहित्यालोचन के प्रमुख सिद्धान्तों से भी पाठकों को परिचित कराया है। इसके साथ ही अनुसन्धान, साहित्य का इतिहास, साहित्य का मूल्यांकन, कॉलेजों में साहित्य का अध्ययन जैसी ज्वलन्त समस्याओं का समाधान भी सुझाने का सफल प्रयास किया है। प्रस्तुत पुस्तक में ‘काव्यशास्त्र’ (या साहित्य-सिद्धान्त) और ‘आलोचना (साहित्य का मूल्यांकन) को पांडित्य (अनुसन्धान) और साहित्यिक इतिहास (सिद्धान्त और आलोचना के रूढ़पथ के विपरीत, साहित्य के गतिशील पक्ष) से भी जोड़ना चाहा है। शब्दावली, टोन और बल में निःसन्देह दोनों लेखकों में थोड़ी-बहुत असंगतियाँ रह गई हैं। परन्तु वे यह भी सोचते हैं कि इस कमी की पूर्ति इस रूप में हो जाती है कि दो व्यक्ति मूलत: एक ही निष्कर्ष पर पहुँचे हैं।
Sher Behtar Kaise Hua?
- Author Name:
Akash Arsh
- Book Type:

- Description:
"Sher Behtar Kaise Hua" is a documentation of the classical tradition in Urdu poetry, in which masters would guide their disciples by correcting flaws in their verses. Through this gradual process, the students were introduced to the finer nuances—both strengths and weaknesses—of poetic craft. This book is a compilation of such corrections (islaah) offered by great poets like Mir, Ghalib, Nasikh, and Daagh on the verses of their disciples. Through these curated islaahs and their interpretations, the book teaches readers how to recognise and refine errors in Urdu poetry. It serves as an essential reference for students, lovers, and aspiring poets of Urdu literature. Aakash ‘Arsh’ (Aakash Tiwari) was born on May 2, 2001, in Sultanpur, Uttar Pradesh. He received his early education in Jagraon, Punjab. He holds a deep interest in the literature of four languages—Urdu, Hindi, English, and Punjabi. Alongside writing poetry in Urdu and Punjabi, he is also actively engaged in translation and editorial work. Currently, he serves as an editor at the Rekhta Foundation.
Urdu Shabdon Ka Guldasta
- Author Name:
Azra Naqvi
- Book Type:

- Description:
उर्दू अपनी खूबसूरती, नफ़ासत और बेहतरीन शब्द-भंडार के लिए जानी जाती है। "उर्दू शब्दों का गुलदस्ता" रेख़्ता फ़ाउंडेशन की एक अनोखी पहल है, जो आपको मज़ेदार और आसान तरीके से उर्दू शब्द सीखने में मदद करती है। पारंपरिक शब्दकोश के बजाय, यह किताब कहानियों के ज़रिए उर्दू शब्द पेश करती है, जिससे शब्द सीखना और भी मज़ेदार हो जाता है। शब्दों को संदर्भ के अनुसार बांटा गया है ताकि सीखने वाले एक ही मूल शब्द से जुड़े दूसरे शब्द भी सीख सकें। हर अध्याय के आखिर में जल्दी दोहराने के लिए अभ्यास दिए गए हैं। यह किताब उर्दू शायरी में आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले शब्दों और बातचीत के बुनियादी हुनर में महारत हासिल करने के लिए एक बेहतरीन गाइड है। कृपया इस किताब के बारे में अपनी राय और सुझाव दें। 'वर्ड पावर मेड ईज़ी' की तर्ज़ पर बनी यह किताब आपको तेज़ी से अपना उर्दू शब्द-भंडार बढ़ाने और बेहतर बनाने में मदद करती है। इसमें कई तरह के विषय शामिल हैं, जैसे अभिवादन, प्यार, ज्ञान, रिश्ते, लोग, घर की चीज़ें, कपड़े, स्वाद, रंग, शरीर के अंग, बाज़ार, यात्रा, पेशे, शायरी, मयख़ाने, बाग़-बगीचे और प्रकृति। अध्यायों के दौरान, आप आम गलतियों, सही उच्चारण और वर्तनी के बारे में जानेंगे, और शब्दों के मूल रूप, उनके अलग-अलग रूप और बहुवचन बनाने के नियम समझेंगे। साथ ही, आप अलग-अलग मौकों पर अभिवादन करने, मेहमाननवाज़ी करने और आभार व्यक्त करने के तरीके भी सीखेंगे। आसान व्याख्या, बुनियादी व्याकरण और अध्याय-वार अभ्यास के साथ, यह किताब उर्दू बोलने में आपका आत्मविश्वास बढ़ाती है। आखिर में, यह किताब आपको उर्दू भाषा और तहज़ीब की बेहतर समझ विकसित करने में मदद करेगी।
Urdu Shayari Ka Shabd Sansar
- Author Name:
Azra Naqvi
- Book Type:

- Description:
उर्दू कई तहज़ीबों और भाषाओं के मेल से बनी है और शायरी की रिवायत (काव्य-परम्परा) में फ़ारसी, अरबी, संस्कृत और तुर्की के रंग शामिल हैं। ये किताब एक शब्दकोश न हो कर उर्दू शायरी में आने वाले विभिन्न विषयों पर ख़ूबसूरत शेरों के संकलन पर आधारित है। शायरी की दुनिया की सैर कराते हुए ये किताब आपको नए-नए शब्दों और उनके उपयोग की बारीकियों के बारे में बताती है और शायरी में इस्तेमाल होने वाले अहम लफ़्ज़ों, तरकीबों और तल्मीहात के मानी और उनके विभिन्न सन्दर्भों को विस्तार से समझाया गया है। ये किताब शायराना लफ़्ज़ों के कलात्मक इस्तेमाल और उनके गहरे अर्थों को समझने में मददगार होगी, और उर्दू शायरी के अथाह ख़ज़ाने का भरपूर लुत्फ़ उठाने का मौक़ा देगी।
Saat Bhumikayen
- Author Name:
Mahadevi Verma +1
- Book Type:

- Description:
छायावाद की यशस्वी रचनाकार महादेवी वर्मा का लेखन किसी न किसी रूप में पाठकों व आलोचकों को आन्दोलित करता आया है। कभी उनकी रचनाओं में उनके जीवन के बिखरे सूत्र रेखांकित किए जाते हैं तो कभी उनके जीवन में रचनाओं के स्रोत खोजे जाते हैं। महादेवी द्वारा लिखित प्रत्येक शब्द स्वयं को ध्यान से पढ़े जाने का आग्रह करता है। सात भूमिकाएँ’ में ‘रश्मि’, ‘सांध्यगीत’, ‘आधुनिक कवि’, ‘दीपशिखा’, ‘बंग–दर्शन’, ‘सप्तपर्णा’ एवं ‘हिमालय’ कविता–संग्रहों की भूमिकाएँ हैं। महादेवी वर्मा लिखित इन भूमिकाओं का ऐतिहासिक महत्त्व है। ये भूमिकाएँ उनकी तत्कालीन मन:स्थिति को प्रकट करने के साथ उनके समग्र लेखन पर एक ‘अन्त:साक्ष्य’ की भाँति हैं। ‘सात भूमिकाओं’ के सम्पादक दूधनाथ सिंह का सम्पादकीय ‘छायावाद : व्यथा का सवेरा’ अत्यन्त विचारोत्तेजक है। अपनी विशिष्ट ‘तर्कसंगत पद्धति’ से दूधनाथ सिंह ने महादेवी के रचनाकर्म को विवेचित किया है—‘उनके वाक्य स्पष्ट, पारदर्शी व निर्भ्रान्त हैं, ‘महादेवी की आलोचनाएँ शब्द–अलंकृति अधिक हैं, आलोचनाएँ कम। उनका सारा वैचारिक गद्य–लेखन लगभग ऐसा ही है। उनमें तर्क और विश्लेषण का अभाव है। अपनी हर अगली बात के लिए महादेवी तर्क की जगह कोई प्रतीक–बिम्ब ढूँढ़ने लगती हैं।’ दूधनाथ सिंह के सम्पादकीय के प्रकाश में महादेवी की इन सात भूमिकाओं को पढ़ना एक आलोचनात्मक अनुभव है। तब और भी जब महादेवी के चुटीले ‘सुरक्षात्मक वाक्य’ उनकी प्रत्येक भूमिका में हैं। ‘रश्मि’ संग्रह की ‘अपनी बात’ का पहला ही वाक्य, ‘अपने विषय में कुछ कहना प्राय: बहुत कठिन हो जाता है, क्योंकि अपने दोष देखना अपने आपको अप्रिय लगता है और इनको अनदेखा कर जाना औरों को...।’ एक संग्रहणीय पुस्तक।
Shabd Purush Agyey
- Author Name:
Naresh Mehta
- Book Type:

- Description:
आधुनिक हिन्दी साहित्य के लिए यह एक ऐतिहासिक संयोग था कि उसे ‘अज्ञेय’ जैसा विशिष्ट व्यक्ति मिला, जो न केवल अपने निजी लेखन से ही महत्त्वपूर्ण था, बल्कि साहित्य के सभी क्षेत्रों और विषयों पर भी चिन्तातुर था। शायद भारतेन्दु के बाद ऐसी प्रामाणिक साहित्यिक चिन्ता वात्स्यायन में ही दिखलाई देती है। वस्तुत: यह आलेख उनके लेखन और व्यक्ति का आकलन नहीं, बल्कि स्मरण है, और वह भी संस्मरणात्मक आत्मीय भूमि पर से ही किया गया है। साथ ही एक अग्रज समकालीन को जिस सम्यकता से देखा जाना चाहिए, की चेष्टा है।
Kavya Bhasha Par Teen Nibandh
- Author Name:
Ramswaroop Chaturvedi +1
- Book Type:

- Description:
काव्य-भाषा सम्बन्धी चिन्तन समकालीन आलोचना के केन्द्र में आ गया है। हिन्दी में, इस विषय पर मौलिक दृष्टि से लिखी गई पुस्तकें बहुत कम हैं। प्रख्यात आलोचक डॉ. रामस्वरूप चतुर्वेदी के आलोचनात्मक चिन्तन का प्रमुख प्रतिमान काव्य-भाषा रही है। इस पुस्तक में उन्हीं के लिखे हुए तीन निबन्ध संकलित हैं जिनकी हिन्दी आलोचना में प्रशंसा होती रही है। इस विषय पर इन निबन्धों का ऐतिहासिक और वैचारिक महत्त्व है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book