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नए प्रयोगों का साहस व्यंग्य बहुत लिखा जा रहा है, पर क्या सच में व्यंग्य बहुत लिखा जा रहा है? व्यंग्य के नाम पर झऊआ भर के शब्द ठेलने का प्रचलन इतना ज़्यादा हो गया है कि अब वही व्यंग्य बहुतायत में हैं। व्यंग्य में नए प्रयोगों की क्षमता, साहस और विवेक अब विकट तरह से अनुपस्थित दिखता है। जयजीत अकलेचा उन बहुत कम व्यंग्यकारों में है, जिनके पास व्यंग्य के नए प्रयोगों की क्षमता, साहस और विवेक सब है। 'पाँचवा स्तंभ' में जयजीत जो कुछ रचते हैं, उसका एक सिरा पत्रकारिता से और दूसरा सिरा साहित्य से जुड़ता है। इस व्यंग्य संग्रह में एक बहुत सशक्त रचना है- 'नो वन किल्ड कोविड पेशेंट'। इन पंक्तियों पर ध्यान दीजिए- 'सरकार ने संसद में बताया कि कोरोना की दूसरी लहर में कोई भी व्यक्ति ऑक्सीजन की कमी से नहीं मरा। कल इंजेक्शन की कमी से कोई ना मरेगा, तो स्साला आदमी मरेगा कैसे?' इसी तरह नीरो की ऐतिहासिक बंसी से इंटरव्यू भी एक विशिष्ट प्रयोग है।फ़ॉर्म और कथ्य के स्तर पर नवोन्मेष रचनात्मक कामों में ज़रूरी है। एक ही ढर्रे पर कही गई बात अपनी अर्थवत्ता खोती जाती है। हम सब व्यंग्यकारों को जयजीत से सीखना चाहिए कि नए-नए फॉर्म में अपनी बात कैसे रखी जाए। -आलोक पुराणिक (नए प्रयोगों के अग्रणी व्यंग्यकार )

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नए प्रयोगों का साहस व्यंग्य बहुत लिखा जा रहा है, पर क्या सच में व्यंग्य बहुत लिखा जा रहा है? व्यंग्य के नाम पर झऊआ भर के शब्द ठेलने का प्रचलन इतना ज़्यादा हो गया है कि अब वही व्यंग्य बहुतायत में हैं। व्यंग्य में नए प्रयोगों की क्षमता, साहस और विवेक अब विकट तरह से अनुपस्थित दिखता है। जयजीत अकलेचा उन बहुत कम व्यंग्यकारों में है, जिनके पास व्यंग्य के नए प्रयोगों की क्षमता, साहस और विवेक सब है। 'पाँचवा स्तंभ' में जयजीत जो कुछ रचते हैं, उसका एक सिरा पत्रकारिता से और दूसरा सिरा साहित्य से जुड़ता है। इस व्यंग्य संग्रह में एक बहुत सशक्त रचना है- 'नो वन किल्ड कोविड पेशेंट'। इन पंक्तियों पर ध्यान दीजिए- 'सरकार ने संसद में बताया कि कोरोना की दूसरी लहर में कोई भी व्यक्ति ऑक्सीजन की कमी से नहीं मरा। कल इंजेक्शन की कमी से कोई ना मरेगा, तो स्साला आदमी मरेगा कैसे?' इसी तरह नीरो की ऐतिहासिक बंसी से इंटरव्यू भी एक विशिष्ट प्रयोग है।फ़ॉर्म और कथ्य के स्तर पर नवोन्मेष रचनात्मक कामों में ज़रूरी है। एक ही ढर्रे पर कही गई बात अपनी अर्थवत्ता खोती जाती है। हम सब व्यंग्यकारों को जयजीत से सीखना चाहिए कि नए-नए फॉर्म में अपनी बात कैसे रखी जाए। -आलोक पुराणिक (नए प्रयोगों के अग्रणी व्यंग्यकार )

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Mandrake Publications
Format
Paperback
Publisher
Mandrake Publications
Weight
200 grams
ISBN-13
9789390540853
Pages
146
Reading time
~5 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 21.2 cm
Language
Hindi

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