Bharat Ka Itihas
Author:
Romila ThaparPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics0 Ratings
Price: ₹ 796
₹
995
Available
प्रस्तुत पुस्तक में लगभग 1000 ई.पू. में आर्य संस्कृति की स्थापना से लेकर 1526 ई. में मुग़लों के आगमन और यूरोप की व्यापारिक कम्पनियों के प्रथम साक्षात्कार तक प्रायः 2500 वर्षों के दौरान भारत के आर्थिक तथा सामाजिक ढाँचे का विकास प्रमुख राजनीतिक एवं राजवंशीय घटनाओं के प्रकाश में दर्शाया गया है। मुख्य रूप से <br />डॉ. थापर ने धर्म, कला और साहित्य में, विचारधाराओं और संस्थाओं में व्यक्त होनेवाले भारतीय संस्कृति के विविध रूपों का रोचक वर्णन किया है।</p>
<p>यह इतिहास वैदिक संस्कृति के साथ प्रारम्भ होता है, इसलिए नहीं कि यह भारतीय संस्कृति का प्रारम्भ-बिन्दु है, वरन् इसलिए कि भारतीय संस्कृति के प्रारम्भिक चरणों पर, जो आदिम-ऐतिहासिक और हड़प्पा काल में दृष्टिगोचर होने लगे थे, सामान्य पाठकों को उपलब्ध अनेक पुस्तकों में पहले ही काफ़ी कुछ लिखा जा चुका है। इस प्रारम्भिक चरण का उल्लेख ‘पूर्वपीठिका’ वाले अध्याय में है। यूरोपवासियों के आगमन से भारत के इतिहास में एक नवीन युग का सूत्रपात होता है। समाप्ति के रूप में 1526 ई. इसीलिए रखी गई है।</p>
<p>लेखिका ने पहले अध्याय में अतीत के विषय में लिखनेवाले इतिहासकारों पर प्रमुख बौद्धिक प्रभावों को स्पष्ट करने की चेष्टा की है। इससे अनिवार्यता नवीन पद्धतियों एवं रीतियों का परिचय मिल जाता है जिन्हें इतिहास के अध्ययन में प्रयुक्त किया जा रहा है और जो इस पुस्तक में भी परिलक्षित हैं।</p>
<p>
ISBN: 9788126705689
Pages: 333
Avg Reading Time: 11 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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यह पुस्तक भारत में ब्रिटिश साम्राज्यवाद और उसके विरुद्ध हुए भारतीयों के विभिन्न संग्रामों का विवरण है। आरम्भ में अंग्रेज़ों के भारत में सर्वोपरि ताक़त के रूप में उभरने का विवरण है, साथ ही अंग्रेज़ों की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध भारतीय प्रायद्वीप के विभिन्न अंचलों में हुए विद्रोहों का उल्लेख है। तत्पश्चात् 1857 में हुई महान क्रान्ति का व्यापक उल्लेख, भारतीय राष्ट्रवाद की भावना का उदय और उसके बाद हुए आन्दोलनों एवं क्रान्तिकारी गतिविधियों का विशद विवरण है। इस प्रकार पुस्तक से जहाँ एक ओर भारत के प्रथम स्वाधीनता संग्राम (1857) और आज़ादी की लड़ाई में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और अन्य क्रान्तिकारियों की भूमिका के बारे में पता चलता है, वहीं पाठकों को स्थानीय विद्रोहों एवं उनके नायकों जैसे मजनूशाह, वेलु थम्पी, चेनम्मा, तीतू मीर, सीधु व कानू, बिरसा मुंडा आदि के बारे में भी जानकारी प्राप्त होती है। भारत के मध्ययुगीन परम्पराओं से बाहर निकलने एवं नई चेतना के विकास के लिए विभिन्न महापुरुषों के सत्प्रयासों का भी विवरण पुस्तक में है।
भारत की आज़ादी का अनिवार्य प्रसंग है देश का विभाजन। बीसवीं सदी के प्रारम्भ में पनपे मुस्लिम पृथकतावाद को समझने की कोशिश करते हुए पाकिस्तान के निर्माण के कारणों पर चर्चा पुस्तक का प्रमुख आकर्षण है। साथ ही दोनों विश्वयुद्धों, जिनमें ब्रिटिश मुख्य खिलाड़ी था पर भारत को जबरन उसके दुष्परिणाम भुगतने पड़े, के बारे में भी आवश्यक जानकारियाँ पाठकों तक पहुँचाई गई हैं।
पुस्तक अत्यन्त ही सरल भाषा में लिखी गई है जिसमें अंग्रेज़ों की भारत में उपस्थिति का सारगर्भित वृत्तान्त है। पुस्तक छात्रों, शोधकर्ताओं, इतिहासकारों, लेखकों एवं उन सबके लिए उपयोगी सिद्ध होगी जो भारत की ब्रिटिश साम्राज्यवाद से स्वतंत्रता के बारे में जानने के इच्छुक हैं। यह पुस्तक विशेष तौर पर आज की पीढ़ी के लिए लिखी गई है।
Azadi Ke Baad Ka Bharat
- Author Name:
Mridula Mukherjee +2
- Book Type:

- Description: ‘आज़ादी के बाद का भारत’ देश के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य का विस्तृत अवलोकन है। इसमें हमें न सिर्फ़ इस कालखंड की निर्णायक घटनाओं की जानकारी मिलती है, बल्कि उन्हें देखने के लिए एक सन्तुलित दृष्टिकोण भी प्राप्त होता है। प्रो. बिपिन चंद्र और उनके सहयोगी लेखकों द्वारा लिखित चर्चित पुस्तक ‘भारत का स्वतंत्रता संग्राम’ की अगली कड़ी के रूप में प्रकाशित यह पुस्तक संविधान के निर्माण, रियासतों के एकीकरण, प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के दौर में अपनाई गई राजनीतिक-आर्थिक नीतियों, पंचवर्षीय योजनाओं, हरित क्रान्ति और अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण आदि विषयों की चर्चाओं के अलावा उन समस्याओं को देखने का प्रयास भी करती है जो लम्बे औपनिवेशिक दौर के बाद आज़ाद भारत ने अपने सामने पाई, जैसे कि साम्प्रदायिकता और बड़े पैमाने पर ग़रीबी। इस पुस्तक को विशेषतः तथ्यों की स्पष्टता, प्रामाणिकता और समग्रता के लिए जाना जाता है जिसके पीछे एक व्यापक शोध परियोजना का परिश्रम है। विद्वानों, सामान्य पाठकों और छात्रों के बीच समान रूप से स्वीकृत ‘आज़ादी के बाद का भारत’ आधुनिक भारत को समझने और जानने के सन्दर्भ में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण पुस्तक है।
Ek Doosre Shikhar se
- Author Name:
Chandrashekhar
- Book Type:

- Description: यह तीसरा खंड पूर्व के दोनों खंडों से इसलिए भी भिन्न है क्योंकि इस दौरान चन्द्रशेखर देश के मुख्य कार्यकारी की भूमिका में हैं। इस दौरान वे देश की जनता की बुनियादी समस्याओं के बारे में कैसा रुख रखते हैं और इनके निदान के लिए उनके पास क्या कार्यक्रम है, इसकी झलक इस खंड के साक्षात्कारों से मिलती है। प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए उन्होंने धर्म, सांप्रदायिकता, राजनीति, राष्ट्रीय सरकार, समाजवाद, विदेश नीति तथा अनेक राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मसलों पर खुलकर अपना पक्ष रखा है। प्रधानमंत्री के रूप में दिए गए चन्द्रशेखर के साक्षात्कारों की विशेषता है कि वे दृढ़ता से भारत का पक्ष रखते हैं। भेंटवार्ताओं में विभिन्न बुनियादी मुद्दों पर चन्द्रशेखर के विचार अनायास व्यक्त हुए हैं। विभिन्न मुद्दों पर चन्द्रशेखर की मान्यताओं से उनकी अंतर्दृष्टि का भी पता चलता है। उन्हें और मूलभूत राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय प्रश्नों को जानने-समझने में भी ये साक्षात्कार मदद पहुँचाते हैं। सत्तर के दशक से शुरू हुआ विमर्श पूर्व-पक्ष है तो इस तीसरे खंड का विमर्श उत्तर-पक्ष।
America 2020 : Ek Banta Hua Desh
- Author Name:
Avinash Kalla
- Book Type:

- Description: अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव का आँखों-देखा हाल बयान करती यह किताब दुनिया के सबसे विकसित और शक्तिशाली देश के उस चेहरे का साक्षात्कार कराती है जो उसकी बहुप्रचारित छवि से अब तक प्रायः ढँका रहा है। 42 दिनों की यात्रा में लेखक ने कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण के दौर में 34 दिन कार चलाकर लगभग 18 हजार किलोमीटर का जमीनी सफर तय किया। नतीजा यह किताब है जिसमें लेखक ने उस अमेरिका पर रौशनी डाली है जो हमारी कल्पनाओं से मेल नहीं खाता, लेकिन जो वास्तविक है और काफी हद तक भारत के अधिसंख्य लोगों की तरह रोजी-रोटी और सेहत की चिन्ताओं से बावस्ता है। यह किताब एक ओर अमेरिका और उसके राष्ट्रपति के सर्वशक्तिमान होने के मिथक को उघाड़ती है तो दूसरी ओर उन संकटों और दुविधाओं को भी उजागर करती है जिनसे ‘दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र’ आज जूझ रहा है। यह अमेरिका के बहाने आगाह करती है कि लोकतंत्र सिर्फ़ हार-जीत या व्यवस्था का मसला नहीं है, बल्कि मानवीय उसूलों और साझे भविष्य के लिए किया जाने वाला सतत प्रयास है। इसके प्रति कोई भी उदासीनता किसी भी देश और उसके नागरिकों को आपस में बाँट कर सकती है।
Dekho Hamri Kashi
- Author Name:
Hemant Sharma
- Book Type:

- Description: काशी ज्ञान की शलाका है और बनारस औघड़ों का ठहाका है। काशी रहस्यों की गहराई है, बनारस किस्सों की ठंडाई है। काशी दिव्य है, बनारस भव्य है। काशी प्रणम्य है, बनारस रम्य है | काशी मुक्ति है, विरक्ति है; लेकिन बनारस हेमंतजी की परम आसक्ति है। यदि काशी में बनारस की तलाश है तो “देखो हमरी काशी ' की उँगली पकड़िए'''रस-ही- रस। गद्य में पद्य का रस, राग और लय का आनंद इस पुस्तक की हर कथा की प्रत्येक पंक्ति में है। इन कथाओं में तथ्य, तर्क और भाव-प्रवाह भरपूर है। जैसा रस “बैताल पचीसी' की कथाओं में है कि उन्हें कोई सामान्य पाठक भी पढ़े तो उसका मनोरंजन होगा। कोई समझदार व्यक्ति पढ़े तो उसे जहाँ ज्ञान प्राप्त होगा, वहीं उसे जीवन जीने का मार्ग भी मिल सकता है। यही बात हेमंतजी की इन कथाओं में है । इसमें ऐसे पात्र हैं, जो हेमंतजी के या हमारे-आपके अपने रोजमर्रा के जीवन के ताने-बाने में गुँथे हुए हैं । वे इतने अभिन्न हैं कि उन्हें अलग-अलग देखना संभव नहीं हो पाता । यह पुस्तक संस्मरण विधा में एक नवोन्मेष है। यह संस्मरण काशी की संस्कृति और बनारसी जीवन का रंगमंच प्रतीत होता है। इसमें वर्णित व्यक्तियों के जरिए काशी की संस्कृति, परंपरा और जीवनधारा की खोज की गई है। जो सदियों से सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन के अपरिहार्य अंग रहे हैं । ऐसे लोगों को केंद्र में रखकर कथा बुनी गई है । इस पुस्तक के पात्र चाहे जो हों, वे सामाजिक जीवन में साधारण भले माने जाते हों, पर कथा में वे असाधारण हैं ।
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