A Corner of a Foreign Field
Author:
Ramchandra GuhaPublisher:
Penguin IndiaLanguage:
EnglishCategory:
History-and-politics0 Reviews
Price: ₹ 545.22
₹
699
Available
A Corner of a Foreign Field seamlessly interweaves biography with history, the lives of famous or forgotten cricketers with wider processes of social change. C. K. Nayudu and Sachin Tendulkar naturally figure in this book but so, too, in unexpected ways, do B. R. Ambedkar, Mahatma Gandhi and M. A. Jinnah. The Indian careers of those great British cricketers, Lord Harris and D. R. Jardine, provide a window into the operations of Empire. The remarkable life of India’s first great slow bowler, Palwankar Baloo, provides an arresting new perspective on the struggle against caste discrimination. Later chapters explore the competition between Hindu and Muslim cricketers in colonial India and the destructive passions now provoked when India plays Pakistan.
For this new edition, Ramachandra Guha has added a fresh introduction as well as a long new chapter, bringing the story up to date to cover, among other things, the advent of the Indian Premier League and the Indian team’s victory in the World Cup of 2011, these linked to social and economic transformations in contemporary India.
A pioneering work, essential for anyone interested in either of those vast themes, cricket and India, a Corner of a Foreign Field is also a beautifully written meditation on the ramifications of sport in society at large.
ISBN: 9780143427681
Pages: 568
Avg Reading Time: 19 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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संविधान सभा की बहस आजादी आन्दोलन के महानायकों के अवचेतन मन का दर्शन है और यह दर्शन ही भारतीय संविधान की आत्मा है, जिसे जानने-समझने में ‘भारतीय संविधान की निर्माण-यात्रा’ पुस्तक मार्गदर्शक का काम करती है। लेखक ने इस पुस्तक में न केवल संविधान-निर्माण के सम्पूर्ण कार्य को समाहित किया है बल्कि लगभग साढ़े छह हजार पृष्ठों में विस्तृत दुर्लभ संविधान सभा बहस—जिसका हिन्दी अनुवाद : 10484 पृष्ठों में प्रकाशित है—को सरल भाषा में प्रामाणिकता के साथ प्रस्तुत किया है।
शासन-प्रणाली, संघवाद, नागरिकता, राष्ट्रध्वज, मूल अधिकार, आरक्षण, अल्पसंख्यकों के लिए राजनीतिक आरक्षण, समान नागरिक संहिता, पर्सनल लॉ संरक्षण, गौवध, शराबबन्दी, काम का अधिकार, आर्थिक लोकतंत्र, दासता, ऐतिहासिक स्मारकों की सुरक्षा, आपातकाल, राष्ट्रपति-शासन, न्यायपालिका एवं अन्य संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता, भाषाई-विवाद, अनुच्छेद 370, संविधान-संशोधन, उद्देशिका जैसे तमाम जटिल मुद्दों पर हमारे संविधान-निर्माताओं की क्या मंशा थी और वे एक निर्णय पर पहुँच पाने में कैसे सफल हुए? इन सवालों का जवाब देने के साथ-साथ यह कृति, प्रेरक संवैधानिक उद्धरणों का आदर्श संकलन भी मुहैया कराती है।
संविधान-चक्र क्या है और संविधान के अन्तर्गत यह कैसे कार्य करता है, भारतीय संविधान एक सामाजिक दस्तावेज क्यों है, विविधताओं वाले भारत राष्ट्र को एकसूत्र में बाँधे रखने के लिए संविधान में क्या-क्या उपाय किए गए हैं, ऐसी कई जिज्ञासाओं का समाधान करती यह पुस्तक, ‘स्वराज’ को अक्षुण्ण बनाए रखने और ‘सुराज’ को हासिल करने के लिए प्रत्येक नागरिक को प्रेरित-प्रोत्साहित करने में सक्षम है।
Rashtrapita Mahatma Gandhi
- Author Name:
Mahesh Sharma
- Book Type:

- Description: देश की आजादी तथा दु:खी मानवता के उद्धार के लिए गांधीजी जीवन भर संघर्षरत रहे। उनकी यात्रा पोरबंदर से आरंभ होकर राजकोट, इंग्लैंड, डरबन, जोहांसबर्ग, अहमदाबाद और कलकत्ता आदि से गुजरती हुई दिल्ली में समाप्त हुई। वे अंत समय तक देश-निर्माण, सांप्रदायिक सौहार्द, एकता-अखंडता के लिए कार्य करते रहे। अहिंसा गांधीजी का अचूक अस्त्र था, जो एटम बम से भी ज्यादा ताकतवर था। अंग्रेज सरकार उनके सत्याग्रह और अहिंसा से बहुत खौफ खाती थी। उन्होंने खादी को घर-घर पहुँचाया और स्वदेशी को प्रोत्साहन दिया। स्वयं अछूतें के साथ रहकर उनके दु:ख-दर्द को महसूस किया और उन्हें बराबरी का दर्जा दिलाने के लिए संघर्ष किया। उन्हें अनेक बार जेल-यात्रा करनी पड़ी। सत्याग्रह की ताकत ने गांधीजी को महात्मा बनाया और इसके बल पर उन्होंने आजादी के समर में प्रत्येक देशवासी को एक सिपाही के रूप में बदल दिया। सत्यवादिता ने उनमें आत्मिक शक्ति भर दी थी कि उनके एक आह्वान पर लाखों लोग सिर कटाने को तैयार हो जाते थे। गांधीजी के बारे में जितना लिखा-पढ़ा जाए, कम है। कृतज्ञ राष्ट्र ने अपने प्यारे बापू को ‘राष्ट्रपिता’ के सम्मान से विभूषित किया। एक युगपुरुष और महान् व्यक्ति के अंतहीन कार्यों की ब्योरेवार जानकारी देती एक प्रेरणादायी पुस्तक।
Vikas Ki Rajneeti
- Author Name:
Vinay Sahasrabuddhe
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Vinashparva (Hindi)
- Author Name:
Prashant Pole
- Book Type:

- Description: यह विडंबना ही है कि स्वतंत्रता पाने के बाद जिन तथ्यों को लेखनीबद्ध करके देश की भावी पीढि़यों के लिए सहेजा जाना चाहिए था, वह कार्य आज भी अधूरा है। भारत की शिक्षा-व्यवस्था, भारत की स्वास्थ्य सेवाएँ और भारत के उद्योग, इन सबका हृस अंग्रेजी शासन में कैसे होता गया, इस पर विस्तार से कभी नहीं लिखा गया। अंग्रेजों की क्रूरता, बर्बरता, निर्ममता और भारतीयों पर किए हुए उनके अन्याय व अत्याचार के साथ ही अंग्रेजों द्वारा भारत की लूट का तथ्यपूर्ण विवरण इस पुस्तक में संकलित हैं। साथ ही अंग्रेजों के आने के पहले भारत की स्थिति क्या थी, अंग्रेजों ने कैसे भारत की जमी-जमाई व्यवस्थाओं को छिन्न-भिन्न किया और उनके जाने के बाद भारत की स्थिति क्या रही इस पर विस्तार से प्रकाश डालनेवाली यह पुस्तक अपनी सहज-सरल प्रस्तुति तथा प्रवाहपूर्ण भाषा-शैली के चलते नई पीढ़ी को अपनी ओर अवश्य आकर्षित करेगी।
Dilli Chalo
- Author Name:
Renu Saini
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
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