Nai Bhajapa Ke Shilpakaar
(0)
Author:
Sunil Trivedi, Ajay SinghPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics₹
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Available
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"अपनी स्थापना के लगभग 40 वर्षों में भारतीय जनता पार्टी विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन गई है और भारतीय राजनीति में अपनी स्थिति को निरंतर अधिक सुदृढ़ बनाती जा रही है। इस पार्टी का ऐतिहासिक अभ्युदय कुछ लोगों को सहज और स्वत:स्फूर्त लग सकता है, लेकिन 18 करोड़ सदस्यों के इस संगठन का मार्ग प्रशस्त करने के पीछे गहन आंतरिक विचार-विमर्शों और योजनाओं का योगदान रहा है। गहरे शोध तथा ठोस उदाहरणों के माध्यम से 'नई भाजपा के शिल्पकार' में पिछले दशकों के दौरान हुए पार्टी के कायाकल्प की व्याख्या की गई है। इस प्रसंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐसे योगदानों पर प्रकाश डाला गया है, जिनके बारे में लोग कम जानते हैं। संगठन निर्माण के पारंपरिक तरीकों से परे जाकर किए गए उनके प्रयोग, सूक्ष्मता के साथ हर आयाम पर उनकी पैनी नजर और पार्टी के जनाधार का विस्तार करने के लिए उनकी अभिनव पद्धतियों को यह पुस्तक उजागर करती है। पार्टी के संस्थापकों द्वारा सन् 1951 में अपनाई गई दृष्टि पर आधारित अतीत के विश्लेषण के साथ-साथ अजय सिंह ने भाजपा के भविष्य की झलक भी दिखाई है। अनेक पार्टी कार्यकर्ताओं, नेताओं और समीक्षकों के साथ विस्तृत साक्षात्कारों पर आधारित विवरणों से पता चलता है कि किस प्रकार कैडर पर आधारित इस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी की सीमाओं को ध्यान में रखते हुए एक नितांत भारतीय मॉडल को विकसित किया, जिसके आधार पर अंतत: भाजपा चुनाव जीतने वाली एक मशीन के रूप में स्थापित हो गई है।"
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"अपनी स्थापना के लगभग 40 वर्षों में भारतीय जनता पार्टी विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन गई है और भारतीय राजनीति में अपनी स्थिति को निरंतर अधिक सुदृढ़ बनाती जा रही है। इस पार्टी का ऐतिहासिक अभ्युदय कुछ लोगों को सहज और स्वत:स्फूर्त लग सकता है, लेकिन 18 करोड़ सदस्यों के इस संगठन का मार्ग प्रशस्त करने के पीछे गहन आंतरिक विचार-विमर्शों और योजनाओं का योगदान रहा है।
गहरे शोध तथा ठोस उदाहरणों के माध्यम से 'नई भाजपा के शिल्पकार' में पिछले दशकों के दौरान हुए पार्टी के कायाकल्प की व्याख्या की गई है। इस प्रसंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐसे योगदानों पर प्रकाश डाला गया है, जिनके बारे में लोग कम जानते हैं। संगठन निर्माण के पारंपरिक तरीकों से परे जाकर किए गए उनके प्रयोग, सूक्ष्मता के साथ हर आयाम पर उनकी पैनी नजर और पार्टी के जनाधार का विस्तार करने के लिए उनकी अभिनव पद्धतियों को यह पुस्तक उजागर करती है।
पार्टी के संस्थापकों द्वारा सन् 1951 में अपनाई गई दृष्टि पर आधारित अतीत के विश्लेषण के साथ-साथ अजय सिंह ने भाजपा के भविष्य की झलक भी दिखाई है। अनेक पार्टी कार्यकर्ताओं, नेताओं और समीक्षकों के साथ विस्तृत साक्षात्कारों पर आधारित विवरणों से पता चलता है कि किस प्रकार कैडर पर आधारित इस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी की सीमाओं को ध्यान में रखते हुए एक नितांत भारतीय मॉडल को विकसित किया, जिसके आधार पर अंतत: भाजपा चुनाव जीतने वाली एक मशीन के रूप में स्थापित हो गई है।"
Book Details
-
ISBN9789355218919
-
Pages200
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: भारत के हृदय में स्थित विंध्याचल और सतपुड़ा की उपत्यकाएँ सघन वनों और पर्वत श्रेणियों के कारण प्राचीनकाल से ही दुर्गम रही हैं और भारत के इतिहास में इस क्षेत्र का उपयुक्त ऐतिहासिक विवरण मुश्किल से मिलता है। इसकी भौगोलिक स्थिति के कारण इस पर उत्तर और दक्षिण की राजनीति का कम ही प्रभाव पड़ा। प्राचीनकाल में यहाँ मौर्यों, सातवाहनों, वाकाटकों, राष्ट्रकूटों, यादवों का आधिपत्य रहा। एक लम्बे अन्तराल के बाद खलजी और तुगलकों ने यादव सत्ता की चूलें हिला दीं। इसके बाद इस क्षेत्र में करीब दो सदियों तक कोई प्रबल सत्ता नहीं रही। दो सदियों के इस अंधकार युग के बाद चाँदा राज्य का उदय हुआ। इस कृति में चाँदा राज्य के उत्थान और पतन का वर्णन करने हेतु नवीनतम सामग्री का उपयोग किया गया है। इस सामग्री में समकालीन और लगभग समकालीन फारसी अखबारात और मराठी पत्रों का स्थान महत्त्वपूर्ण है। इस कृति की विशेषता यह भी है कि चाँदा के गोंड राज्य की वंशावली तथा जल-आपूर्ति व्यवस्था पर इसमें विशेष चर्चा की गयी है जो विभिन्न दृष्टिकोणों से इन विषयों पर प्रकाश डालने का प्रयास करती है। चूँकि मूल फारसी मराठी स्रोतों में तथा सनदों में इसे चाँदा राज्य कहा गया है अतः इस कृति में इसे चाँदा राज्य ही कहा गया है।
Uttar Pradesh Ka Swatantrata Sangram : Sant Kabir Nagar
- Author Name:
Ajay K. Pandey
- Book Type:

- Description: संत कबीर नगर की भौगोलिक व सांस्कृतिक सीमा के अंतर्गत प्राचीनकाल से लेकर मध्यकाल और विशेष रूप से स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के दौरान ऐतिहासिक महत्त्व की अनेक घटनाएँ हुई हैं जिनका विवरण इस पुस्तक में दिया गया है। 1857 से लेकर 1947 तक इस क्षेत्र ने देश की आजादी के लिए लड़ी जा रही लड़ाई में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। इसके अलावा देश की सांस्कृतिक अस्मिता के लिहाज से भी इस जनपद का विशेष स्थान है। इस क्षेत्र में शृंगार के कवि रंग नारायण पाल 'रंगपाल' और रामदेव सिंह 'कलाधर' जैसी साहित्यिक विभूतियाँ भी रही हैं जिनकी विस्तृत जानकारी इस पुस्तक में दी गई है। इसके अलावा यहाँ के औद्योगिक तथा वाणिज्यिक परिदृश्य को भी इस अध्ययन में शामिल किया गया है ताकि स्वतंत्रता आंदोलन की गतिविधियों का संपूर्ण परिप्रेक्ष्य स्पष्ट हो सके। प्राचीन मंदिर और उनसे जुड़ी जनश्रुतियाँ भी इस परिदृश्य का अभिन्न अंग हैं।
Gupt Rajvansh Tatha Uska Yug
- Author Name:
Uday Narayan Rai
- Book Type:

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Description:
अपने शिखर काल में गुप्त साम्राज्य गुजरात से लेकर पूरब में बंगाल तक फैला था। सामाजिक, राजनीतिक अव्यवस्था को समाप्त कर, गुप्त राजाओं ने शासन का अनुकरणीय रूप प्रस्तुत किया। यही वजह है कि विदेशी लेखकों ने भी समृद्ध सामाजिक संरचना, बृहत्तर भारत की अवधारणा को क्रियान्वित करने के उनके सफल प्रयासों, धार्मिक सहिष्णुता और अर्थव्यवस्था के सुसंचालन की प्रशंसा की है।
राष्ट्र को विदेशी आक्रान्ताओं से मुक्त करने के लिए भी गुप्त शासकों की उपलब्धियों को उल्लेखनीय माना जाता है। कुषाणों और शकों के उन्मूलन तथा हूणों को पराजित करके उन्होंने अपनी सीमाओं को सुरक्षित किया।
यह पुस्तक विभिन्न ऐतिहासिक और साहित्यिक स्रोतों के साथ-साथ इस समय की पुस्तकों, यात्रा-वृत्तान्तों, शिलालेखों और मुद्राओं से प्राप्त साक्ष्यों की रोशनी में गुप्त सम्राटों और उनके समय का सहायक-सुग्राह्य वर्णन करती है।
विशेष तौर पर छात्रों के लिए तैयार की गई इस पुस्तक में इस समूचे काल को क्रमश: तथा उपलब्ध सूचनाओं को व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत किया गया है। स्कन्दगुप्त की मृत्यु के पश्चात् गुप्त साम्राज्य के पतन के कारणों और उसके बाद की परिस्थितियों पर भी प्रकाश डाला गया है। संस्कृत, पालि, प्राकृत आदि भाषाओं में उपलब्ध सामग्री के आधार पर लिखी गई यह पुस्तक इतिहास के क्षेत्रों के लिए अत्यन्त उपयोगी सिद्ध हुई है।
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