Vartman Jaisa Ateet
(0)
Author:
Romila ThaparPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics₹
599
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Available
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अतीत के बारे में प्रचलित धारणाओं को तब तक ऐतिहासिक नहीं माना जा सकता जब तक उनकी आलोचनात्मक जाँच-पड़ताल न कर ली जाए। ‘वर्तमान जैसा अतीत’ किताब मुख्यतः यही करती है। उदाहरण के लिए ये कुछ सवाल—सोमनाथ मन्दिर पर हमले के बाद वास्तव में क्या हुआ? हम में से आर्य या द्रविड़ कौन हैं? भारतीय समाज का धर्मनिरपेक्ष होना क्यों ज़रूरी है? साम्प्रदायिकता ने एक विचारधारा के रूप में देश में कब अपने पैर जमाए? हमारी पितृसत्तात्मक मानसिकता ने महिलाओं के विरुद्ध हिंसा की संस्कृति को कैसे और कब बढ़ावा देना शुरू किया? इतिहास की पाठ्यपुस्तकों को फिर से लिखने के लिए कट्टरपन्थी इतने उत्सुक क्यों हैं? इन और इस तरह के अन्य प्रश्नों को लेकर उसी समय से विवाद और बहसें होती आई हैं जब इन्हें पहली बार पूछा गया था। प्रतिष्ठित इतिहासकार रोमिला थापर अकसर ही ऐसे प्रश्नों के मूल में स्थित ऐतिहासिक तथ्यों की जाँच, विश्लेषण और व्याख्या करती रही हैं। वे कहती हैं कि इतिहास में सिर्फ सूचनाएँ ही नहीं, उन सूचनाओं का विश्लेषण और व्याख्या भी शामिल होती है। चार उपखंडों के तहत विभिन्न प्रश्नों पर तथ्यात्मक और दृष्टि-सम्पन्न ढंग से विचार करने वाली यह पुस्तक ऐसे समय में निहायत ज़रूरी पाठ बन जाती है जब साम्प्रदायिकता, बनावटी ‘राष्ट्रवाद’ और ऐतिहासिक तथ्यों को धूमिल करना हमारे सार्वजनिक, निजी और बौद्धिक जीवन का अभिन्न अंग बनता जा रहा है।
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अतीत के बारे में प्रचलित धारणाओं को तब तक ऐतिहासिक नहीं माना जा सकता जब तक उनकी आलोचनात्मक जाँच-पड़ताल न कर ली जाए। ‘वर्तमान जैसा अतीत’ किताब मुख्यतः यही करती है। उदाहरण के लिए ये कुछ सवाल—सोमनाथ मन्दिर पर हमले के बाद वास्तव में क्या हुआ? हम में से आर्य या द्रविड़ कौन हैं? भारतीय समाज का धर्मनिरपेक्ष होना क्यों ज़रूरी है? साम्प्रदायिकता ने एक विचारधारा के रूप में देश में कब अपने पैर जमाए? हमारी पितृसत्तात्मक मानसिकता ने महिलाओं के विरुद्ध हिंसा की संस्कृति को कैसे और कब बढ़ावा देना शुरू किया? इतिहास की पाठ्यपुस्तकों को फिर से लिखने के लिए कट्टरपन्थी इतने उत्सुक क्यों हैं? इन और इस तरह के अन्य प्रश्नों को लेकर उसी समय से विवाद और बहसें होती आई हैं जब इन्हें पहली बार पूछा गया था।
प्रतिष्ठित इतिहासकार रोमिला थापर अकसर ही ऐसे प्रश्नों के मूल में स्थित ऐतिहासिक तथ्यों की जाँच, विश्लेषण और व्याख्या करती रही हैं। वे कहती हैं कि इतिहास में सिर्फ सूचनाएँ ही नहीं, उन सूचनाओं का विश्लेषण और व्याख्या भी शामिल होती है। चार उपखंडों के तहत विभिन्न प्रश्नों पर तथ्यात्मक और दृष्टि-सम्पन्न ढंग से विचार करने वाली यह पुस्तक ऐसे समय में निहायत ज़रूरी पाठ बन जाती है जब साम्प्रदायिकता, बनावटी ‘राष्ट्रवाद’ और ऐतिहासिक तथ्यों को धूमिल करना हमारे सार्वजनिक, निजी और बौद्धिक जीवन का अभिन्न अंग बनता जा रहा है।
Book Details
-
ISBN9789360868307
-
Pages392
-
Avg Reading Time13 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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Ramesh Pokhriyal 'Nishank'
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- Description: "युगांडा अफ्रीका का नैसर्गिक सुंदरता और जैव-विविधता से परिपूर्ण देश है जिसे ब्रिटिश प्रधानमंत्री विस्टन चर्चिल ने ‘अफ्रीका का मोती’ तक कहा है। यह नील नदी का स्रोत है, जो दुनिया की दूसरी सबसे लंबी नदी है। रंग-बिरंगी तितलियों से लेकर पहाड़ी गोरिल्ला, लुप्तप्राय प्रजातियों के घर के रूप में और एक वैश्विक पर्यटक केंद्र के रूप में युगांडा आकर्षक गंतव्य है। युगांडा के बारे में एक और महत्त्वपूर्ण बात यह है कि यह दुनिया भर के शरणार्थियों का स्वागत अत्यंत खुले मन से करता है। उत्तम बात यह है कि जहाँ शरणार्थी सामाजिक सेवाओं का आनंद लेते हैं, वही वह स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ सकते हैं और काम कर सकते हैं। एक राष्ट्र के रूप में युगांडा ने अपनी चुनौतियों से मुकाबला कर, अपने मुश्किलों से भरे हुए अतीत को छोड़ते हुए देश को एक सक्षम, समृद्ध राष्ट्र के रूप में स्थापित किया। एक अनुशासित, मेहनतकश राष्ट्र के रूप में युगांडा ने तमाम कठिनाइयों के बावजूद अपने लोगों को एक नई पारी के लिए न केवल तैयार किया, बल्कि एक नई जीवन-शैली के लिए प्रेरित किया। यह पुस्तक इस देश के विषय में समग्र जानकारी देती है। इसमें युगांडा की संस्कृति, अर्थव्यवस्था, रीति-रिवाज, इतिहास, भूगोल से लेकर वहाँ के पर्यटक स्थलों, शैक्षिक तंत्र, धार्मिक विविधता, भाषा, जैव-विविधता, राजनैतिक व्यवस्था की जानकारी सरल-सुबोध भाषा में दी है।
History Hunters: Chandragupta Maurya And Yunani Aakarman
- Author Name:
Shruti Garodia +1
- Book Type:

- Description: अगर आप आज से 2350 साल पहले के बिल्कुल नये संसार में पहुँच जाएँ तो क्या करेंगे? गोवा के एक सुंदर झरने के पास पिकनिक के लिये गए चार दोस्त- ज़ोया, नूर, अंश, रोहन और उनका बहुत प्यारा हाथी एल्फू । ये सब अचानक फँस गये दो हज़ार साल पीछे- रक्तरंजित युद्ध भूमि में, जहाँ मकदूनिया का सिकन्दर भारत की ओर कूच कर रहा है। एक नौजवान उन्हें बचाकर अपने गुरुकुल तक्षशिला ले जाता है। चारों दोस्तों के सामने कोई चारा नहीं है, सिवाए इसके कि रास्ते की मुश्किलों का सामना करते चलें । जहाँ गुस्सैल सैनिक हैं, खतरनाक साँप हैं और भैंसों की फूली हुई खाल नदी में तैर रही है। अनगिन अप्रत्याशित घटनाओं और ख़तरों से कैसे बचकर निकले ये किशोर साथी? क्या वे उस पुराने समय में हमेशा के लिये खो गये? क्या वो तेज़ी से घूमती घड़ी की सुईयों को हराकर अपने समय में लौट पाए? 'हिस्ट्री हंटर्स' के साथ देखिए । कैसे वे इस पहली सनसनीखेज़ और डरावनी यात्रा में हैं। वे भविष्य के सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य और किंगमेकर चाणक्य के युग में हैं। और अंत में- फैक्ट ट्रैकर मौर्यकाल से जुड़ी ज़रूरी जानकारियाँ!
Uttar-Mauryakaleen Bharat 200 Bc- Ad 300
- Author Name:
S. Irfan Habib
- Book Type:

- Description: ‘भारत का लोक इतिहास’ शृंखला की इस पुस्तक ‘उत्तर-मौर्यकालीन भारत’ का ताल्लुक़ उन पाँच सौ वर्षों से है जब भारत के राजनीतिक नक्शे पर इंडो-यूनानी, शकों, कुषाणों और सातवाहन वंशों का प्रभुत्व था। राजनीतिक घटनाक्रम के साथ-साथ इसमें उस अवधि की अर्थव्यवस्था का भी विवरण प्रस्तुत किया गया है। शिल्प-उत्पादन और विदेश-व्यापार के लिहाज़ से इस दौर में कई अहम परिवर्तन देखे गए थे। ‘उत्तर-मौर्यकालीन भारत’ में दी गई सभी सूचनाएँ और जानकारियाँ अद्यतन इतिहास-सामग्री पर आधारित हैं। शृंखला की अन्य पुस्तकों के अनुरूप ही इसमें भी चुनिन्दा शिलालेखों के अनुवाद तथा प्राचीन ग्रन्थों के अंश जोड़े गए हैं। पुराणों, संगम ग्रन्थों और कुषाण कालक्रम पर विशेष टिप्पणियाँ भी इसमें शामिल हैं जो पुस्तक को और भी प्रामाणिक बनाती है। कुछ टिप्पणियाँ मुद्राशास्त्र और अर्थशास्त्र की प्राथमिक अवधारणाओं पर भी जोड़ी गई हैं। सहायक नक्शों और चित्रों से सुसज्जित यह पुस्तक इतिहास में रुचि रखनेवाले पाठकों, छात्रों और अध्येताओं के लिए समान रूप से उपयोगी है। पुस्तक में प्रस्तुत सामग्री में उन विधियों को विशेष रूप में रेखांकित किया गया है जो आम जन-जीवन को प्रभावित करते हैं; और जो आज भी हमें एक विश्व-दृष्टि विकसित करने में सहायक हो सकते हैं।
Aadhunik Itihas Mein Vigyan
- Author Name:
Om Prakash Prasad
- Book Type:

-
Description:
भारत में आधुनिक विज्ञान का नक़्शा बनाने में हिन्दुओं से ज़्यादा मुसलमानों और मुसलमानों से ज़्यादा भूमिका अंग्रेज़ों की रही। आज़ादी के पूर्व से ही भारत जात-पाँत और ऊँच-नीच के दलदल में फँसा हुआ है। आधुनिक भारतीय इतिहास पर भारत में जितनी पुस्तकें लिखी गईं, उनमें से अधिकांश के लेखक हिन्दू रहे। उनके द्वारा अधिकांश पुस्तकें भारत के प्रमुख नेताओं के पक्ष में, अंग्रेज़ों के विरोध में, मुसलमानों के योगदान और वैज्ञानिक गतिविधियों को नज़रअन्दाज़ करते हुए लिखी गईं।
आधुनिक काल के क़रीब सभी भारतीय वैज्ञानिक इंग्लैंड से विज्ञान पढ़-लिख-जान कर आए। भारत के निवासियों को अंग्रेज़ों ने ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र अथवा छूत-अछूत अथवा हिन्दू-मुसलमान में कोई भेदभाव न कर सबको एक नाम भारतीय दिया। भारत का मानचित्र भी अंग्रेज़ों ने तैयार किया। अंग्रेज़ी शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाएँ, बैंक, प्रयोगशाला, रेलवे आदि सब अंग्रेज़ों की देन है। कलकत्ता में अंग्रेज़ों ने अपने कर्मचारियों को भारतीय भाषाओं से परिचित कराने के लिए फ़ोर्ट विलियम कॉलेज नमक विशेष विद्यालय की स्थापना की थी, जहाँ भारतीय भाषाओं में अनेक पाठ्य-पुस्तकों की रचना भी की गई। अठारहवीं सदी में महलों, सड़कों, पुलों आदि से युक्त अनेक नए नगर पैदा हुए। अठारहवीं सदी में भारत में विशेष रूप से बंगाल में यूरोपीय शैली के भवन भी बनने लगे थे। 1882 में टेलीफ़ोन आया। 1914 में प्रथम ऑटोमेटिक टेलीफ़ोन एक्सचेंज लगाया गया। अगस्त 1945 से लम्ब्रेटा स्कूटर बनना शुरू हुआ।
प्रस्तुत पुस्तक में आधुनिक वैज्ञानिकों पर संक्षेप में प्रकाश डाला गया है। इन सभी वैज्ञानिकों को सर्वाधिक प्रोत्साहन एवं प्रेरणा इंग्लैंड से मिली। प्रथम अध्याय में आधुनिक भारतीय वैज्ञानिक उपलब्धियों की चर्चा की गई है। प्रथम और द्वितीय महायुद्ध के दौरान भारत में विज्ञान की एक विशेष धारा दिखाई देती है। आधुनिक तकनीक और सामाजिक विकास से भारत किन-किन रूपों में प्रभावित हुआ, इसका विशद वर्णन दूसरे अध्याय में किया गया है। इसके अलावा 'द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान तकनीक एवं समाज’, 'द्वितीय महायुद्ध के उपरान्त’, 'विज्ञान एवं पेट्रोल’, 'प्लास्टिक और चलचित्र तकनीक’, 'आपदा प्रबन्धन’ और 'भारतीय विज्ञान एवं अंग्रेज़ों का योगदान’ आदि अध्यायों में आधुनिक भारत में विज्ञान के विभिन्न चरणों पर संक्षेप में प्रकाश डाला गया है।
Bhartiya Rajniti Aur Samvidhan : Vikas, Vivad Aur Nidan
- Author Name:
Subhash Kashyap
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Description:
हिन्दी-भाषी समाज के लिए यह स्थिति दुखद है कि देश की ज्वलन्त समस्याओं का परिप्रेक्ष्य स्पष्ट करनेवाली गम्भीर और व्यवस्थित सामग्री का हिन्दी में आज भी घोर अभाव है। प्रख्यात संविधान-विद् और पूर्व संसदीय सचिव सुभाष काश्यप की यह किताब राजनीति को प्रस्थान बिन्दु बनाते हुए भ्रष्टाचार अपराधीकरण, जातिवाद और साम्प्रदायिकता आदि जैसे विषयों पर संविधान और संसद की भूमिकाओं का एक विकास-क्रम में खुलासा करती है। पुस्तक चार भागों में विभाजित है—‘स्वाधीनता की अर्द्धशती’, ‘भारत का संविधान’, ‘भारत की संसद’ और ‘राज्यों में विधानपालिका’। इसमें जहाँ एक ओर संविधान- निर्माण, संविधान की आत्मा और संसद की बहुआयामी भूमिका जैसे मूलभूत प्रश्नों का गहराई के साथ विवेचन हुआ है, वहीं कुछ बिलकुल ताज़ा मुद्दों; जैसे—न्यायिक सक्रियता, लोकपाल, दल-बदल, राज्यपालों की भूमिका, राष्ट्रपति शासन और अनुच्छेद 356, सदन-अध्यक्ष की भूमिका और संसदीय विशेषाधिकार आदि जैसे मुद्दों पर भी प्रकाश डाला गया है।
Chocolate Ki Vaishvik Rajdhani Belgium
- Author Name:
Ramesh Pokhriyal 'Nishank'
- Book Type:

- Description: "बेल्जियम की एक समृद्ध ऐतिहासिक विरासत और संस्कृति रही है, जिसका चित्रों, संगीत, साहित्य, नक्शानवीसी और वास्तुकला में साक्षात् दर्शन कर सकते हैं। बेल्जियम भले ही सबसे छोटे यूरोपीय देशों में से एक है, फिर भी इसके पर्यटन स्थल पर्यटकों से भरे रहते हैं। ये पर्यटन स्थल इस देश के समृद्ध इतिहास और परंपराओं की कहानियाँ बयाँ करते हैं। बेल्जियम के बारे में कई अनूठी, बेजोड़ बातें हैं, जो अनायास ही सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लेती हैं। बेल्जियम में दुनिया की सबसे बड़ी संख्या में प्रति वर्गमीटर महल हैं। कुछ क्षेत्रों में प्रति गाँव दो महल भी हैं। इनमें से कुछ को यूनेस्को द्वारा धरोहर घोषित किया गया है। बेल्जियम में विश्व के श्रेष्ठ संस्थानों के कॉर्पोरेट मुख्यालयों की बड़ी संख्या है। बेल्जियम में समृद्ध विरासत एवं परपंराएँ, विश्वविद्यालय, स्थापत्य कला को समेटे भवन, शिक्षा के उत्कृष्ट केंद्र, युद्ध स्मारक, मनमोहक प्राकृतिक छटा के अतिरिक्त अत्यंत दोस्ताना संबंध वाले लोग हैं। प्रस्तुत पुस्तक बेल्जियम के विषय में एक हैंडबुक है जो वहाँ की संपूर्ण जानकारी कम शब्दों में, रोचक शैली में देती है। "
Bharat Ka Samvidhan : Sankshipt Parichay
- Author Name:
Subhash Kashyap
- Rating:
- Book Type:

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Description:
लोकतंत्र में हर नागरिक को अपने देश के संविधान को जानना चाहिए और समझना चाहिए कि हम किस प्रकार शासित हो रहे हैं। भारत के संविधान के मूल कर्तव्य सम्बन्धी भाग के अनुसार देश के हर नागरिक का सबसे पहला कर्तव्य है संविधान का पालन करना। परन्तु उसका पालन करने के लिए संविधान को जानना ज़रूरी है। दुर्भाग्यवश भारत में आज भी भयंकर संवैधानिक निरक्षरता है। ऐसी स्थिति में संविधान के बारे में बुनियादी जानकारी प्राप्त करने के लिए यह किताब अत्यन्त उपयोगी है। भारतीय संविधान के विश्वविख्यात विशेषज्ञ डॉ. सुभाष काश्यप ने सरल और सुगम शब्दों में पुस्तक तैयार की है इसका विशेष उद्देश्य यह है कि पाठक को भारतीय संविधान का संक्षिप्त परिचय मिले तथा वह इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, संविधान निर्माण की प्रक्रिया, तथा वह इसकी संविधान की आत्मा का समुचित ज्ञान प्राप्त सकते हैं।
वस्तुत: यह किताब आधुनिक भारत के इतिहास; एक लोकतंत्र के रूप में भारत के निर्माण और विकास तथा भारत के संविधान में दिलचस्पी रखने वाले हरेक छात्र और सामान्य पाठक के लिए समान रूप से उपयोगी है।
PVTGs In Jharkhand: An Anthropological Perspective (Particularly Vulnerable Tribal Groups)
- Author Name:
Dr. Birendra Prasad +2
- Book Type:

- Description: "India is home to hundreds of tribal communities, each with their own unique cultures, traditions and ways of life. Among these are the Particularly Vulnerable Tribal Groups (PVTGs), who are identified as being at risk of losing their distinct identities, livelihoods and traditional practices. This book takes an in-depth look at the PVTGs residing in the state of Jharkhand through the analytical lens of anthropology. It consists of untold stories on its indigenous people as a tribute to their reliance, wisdom and unwavering Spirit. Through a chronological exploration, the book aims to understand the pivotal role played in shaping regional identity with political historicity, livelihood practices, indigenous knowledge, dynamic interest with local life and to investigate the indigenous’ contribution. The authors evaluate current policies related to the preservation and empowerment of PVTGs. The book highlights the urgent need to protect and uplift these ancient but vulnerable communities before their irreplaceable cultures are lost forever."
Aaj Ke Aiene Mein Rashtravad
- Author Name:
Ravikant
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- Description: जब सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और थोथी देशभक्ति के जुमले उछालकर जेएनयू को बदनाम किया जा रहा था, तब वहाँ छात्रों और अध्यापकों द्वारा राष्ट्रवाद को लेकर बहस शुरू की गई। खुले में होनेवाली ये बहस राष्ट्रवाद पर कक्षाओं में तब्दील होती गई, जिनमें जेएनयू के प्राध्यापकों के अलावा अनेक रचनाकारों और जन-आन्दोलनकारियों ने राष्ट्रवाद पर व्याख्यान दिए। इन व्याख्यानों में राष्ट्रवाद के स्वरूप, इतिहास और समकालीन सन्दर्भों के साथ उसके ख़तरे भी बताए-समझाए गए। राष्ट्रवाद कोई निश्चित भौगोलिक अवधारणा नहीं है। कोई काल्पनिक समुदाय भी नहीं। यह आपसदारी की एक भावना है, एक अनुभूति जो हमें राष्ट्र के विभिन्न समुदायों और संस्कृतियों से जोड़ती है। भारत में राष्ट्रवाद स्वाधीनता आन्दोलन के दौरान विकसित हुआ। इसके मूल में साम्राज्यवाद-विरोधी भावना थी। लेकिन इसके सामने धार्मिक राष्ट्रवाद के ख़तरे भी शुरू से थे। इसीलिए टैगोर समूचे विश्व में राष्ट्रवाद की आलोचना कर रहे थे तो गांधी, अम्बेडकर और नेहरू धार्मिक राष्ट्रवाद को ख़ारिज कर रहे थे। कहने का तात्पर्य यह कि राष्ट्रवाद सतत् विचारणीय मुद्दा है। कोई अन्तिम अवधारणा नहीं। यह किताब राष्ट्रवाद के नाम पर प्रतिष्ठित की जा रही हिंसा और नफ़रत के मुक़ाबिल एक रचनात्मक प्रतिरोध है। इसमें जेएनयू में हुए तेरह व्याख्यानों को शामिल किया गया है। साथ ही योगेन्द्र यादव द्वारा पुणे और अनिल सद्गोपाल द्वारा भोपाल में दिए गए व्याख्यान भी इसमें शामिल हैं।
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