Gandhi Ka Saintalis
Author:
Pushya MitraPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics0 Ratings
Price: ₹ 360
₹
450
Available
‘गांधी का सैंतालीस’ यानी आज़ादी के साल में गांधी की कथा। वैसे तो यह कहानी गांधी के जीवन के आख़िरी साल की है, जो अक्टूबर, 1946 में उनकी नोआखाली यात्रा से शुरू होती है और वहाँ से बिहार, दिल्ली, कलकत्ता और फिर दिल्ली आकर जनवरी, 1948 में उनकी शहादत के साथ ख़त्म होती है। मगर यह उनके आख़िरी साल का रोज़नामचा नहीं है, यह उनकी आख़िरी लड़ाई की कहानी है।
डायरेक्ट एक्शन के बाद भारत में साम्प्रदायिक दंगे शुरू हुए, जो बँटवारे के फ़ैसले पर मुहर लगने के बाद और बढ़ गए। इन दंगों ने लाखों की जान ली और करोड़ों को विस्थापित होने के लिए मजबूर कर दिया। उस समय एक गांधी ही थे, जो नफ़रत की इस आग को बुझाने में लगे थे। उन्हें बस एक ही चिन्ता थी कि इस देश की आत्मा कैसे बचे; वह देश जो पिछले तीस साल से अहिंसक तरीक़े से आज़ादी की लड़ाई लड़ रहा था, आज़ादी के ठीक पहले हिंसा से भर उठा था। लोग अपने पड़ोसियों के ख़ून के प्यासे हो गए थे।
इस लड़ाई में 77 साल के गांधी ने अपना सब कुछ झोंक दिया—नंगे पाँव यात्रा करते, पीड़ितों के ज़ख़्मों पर मरहम लगाते, उनके हृदय में साहस भरते और दंगाइयों को सच्चे हृदय से पश्चात्ताप करने के लिए प्रेरित करते हुए। उन्होंने संवाद, साहस और प्रेम के औज़ारों से यह लड़ाई लड़ी और अपने आख़िरी हथियार शहादत के ज़रिये इस महान लक्ष्य को हासिल किया।
यह भी कहना ज़रूरी है कि यह कहानी गांधी के जीवन के इस सर्वश्रेष्ठ दौर की गौरवगाथा भर नहीं है। कोशिश की गई है कि यह कहानी हमारे सामने एक बोधपाठ की तरह खुले ताकि हम देख सकें कि क्या गांधी की इस आख़िरी लड़ाई के तौर-तरीक़ों में कुछ ऐसा भी है जिसे हम आज के भारत में प्रयोग कर सकें!
ISBN: 9789360869861
Pages: 320
Avg Reading Time: 11 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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भारत में ऐसे राजनेता बहुत कम रहे हैं जिन्होंने अपने विचारों को लिखित रूप में लगातार अपने समकालीनों और पाठकों तक पहुँचाया और इस प्रकार न सिर्फ़ अपना पक्ष स्पष्ट किया बल्कि लोगों को शिक्षित भी किया। चन्द्रशेखर उनमें अग्रणी हैं। वे लम्बे समय तक ‘यंग इंडियन’ का सम्पादन-प्रकाशन करते रहे, और देश, राजनीति और समाज को प्रभावित करनेवाली हर घटना पर बिना किसी पूर्वग्रह और स्वार्थ के लिखते रहे। यह साप्ताहिक ‘यंग इंडियन’ में उनके लिखे सम्पादकीय का संग्रह है। इस खंड में 1971 से 2001 तक की तीन दशकों की अवधि में लिखी सम्पादकीय टिप्पणियों को शामिल किया गया है। कहने की आवश्यकता नहीं कि यह पूरा दौर भारतीय राजनीति में बड़ी घटनाओं और फेर-बदल का समय रहा है। इसी दौर में भारत-पाक युद्ध और तदुपरान्त बांग्लादेश का अभ्युदय हमने देखा, इंदिरा गांधी का ‘ग़रीबी हटाओ’ आन्दोलन इसी दौर में चला; 1971 के लोकसभा चुनावों में उनकी जीत, उसके बाद जनता पार्टी सरकार, उसका भंग होना और पुन: इंदिरा गांधी की वापसी इसी कालखंड में हुई।
जिन मुद्दों और घटनाओं पर राजनेता और विचारक चन्द्रशेखर के विचार आप यहाँ पढ़ेंगे, उनमें उपरोक्त के अलावा आपातकाल, इंदिरा गांधी की हत्या, उसके बाद राजीव गांधी का प्रधानमंत्री बनना, बोफोर्स मामले के बाद उनका सत्ता से हटना और वी.पी. सिंह का प्रधानमंत्री बनना, स्वयं चन्द्रशेखर का अल्पकालिक प्रधानमंत्रित्व, राजीव हत्याकांड और नरसिम्हा राव शासन का आरम्भिक दौर आदि शामिल हैं। बतौर नेता और राजनीतिक चिन्तक चन्द्रशेखर को स्वतंत्र विचार के लिए जाना जाता है। इस पूरे दौर को उन्होंने निष्पक्ष भाव से देखते हुए, क्या सोचा और देशहित में क्या चाहा, उस सबका निरूपण वे लगातार अपने सम्पादकीय में करते रहे। इन सम्पादकीय लेखों से गुज़रना सिर्फ़ चन्द्रशेखर के विचारों से ही नहीं, उस दौर के इतिहास से भी गुज़रना है।
Tughluq Kaleen Bharat : Vol. 2
- Author Name:
Saiyad Athar Abbas Rizvi
- Book Type:

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Description:
यह ग्रन्थ तुगलक़ बादशाहों के महत्त्वपूर्ण कालखंड सन् 1351 से 1398 ई. पर केन्द्रित है। इस दौर में शासन की बागडोर सुल्तान फ़ीरोज़ और उसके उत्तराधिकारियों के हाथों में थी। यह ग्रन्थ उस युग की अत्यन्त महत्त्वपूर्ण और प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध कराता है।
फ़ारसी, अरबी, अंग्रेज़ी और हिन्दी के विद्वान और इतिहासकार डॉ. सैयद अतहर अब्बास रिज़वी ने इस ग्रन्थ का सम्पादन-अनुवाद किया है। उन्होंने इस ग्रन्थ में तत्सम्बन्धी अरबी और फ़ारसी में उपलब्ध तमाम ऐतिहासिक दस्तावेज़ों और सामग्रियों का उपयोग किया है जिनमें ज़ियाउद्दीन बरनी, शम्स सिराज अफ़ीफ़, यहया, मुहम्मद बिहामद ख़ानी, शरफ़ुद्दीन अली यज़दी, सुल्तान फ़ीरोज़ शाह, निज़ामुद्दीन अहमद, मीर मुहम्मद मासूम, हमीद क़लन्दर, ऐनुलमुल्क तथा मुतहर कड़ा जैसे विद्वान लेखकों, इतिहासकारों के ग्रन्थ शामिल हैं।
अनुवाद में फ़ारसी, अरबी के प्रचलित नियमों को, जिनका पालन इतिहासकार करते रहे हैं, ध्यान में रखा गया है। साथ ही आवश्यक टिप्पणियाँ भी जगह-जगह दर्ज कर दी गई हैं ताकि पाठकों को विषय को समझने में सुविधा हो।
इतिहास के छात्रों, शिक्षकों, शोधार्थियों और इतिहासकारों के साथ-साथ इतिहास में रुचि रखनेवाले आम पाठकों के लिए भी ग्रन्थ संग्रहणीय है।
Uttar Pradesh Ki Nai Udaan
- Author Name:
Srijan Pal Singh +1
- Book Type:

- Description: उत्तर प्रदेश—वह भूमि, जहाँ मानवीय कल्पनाएँ और दृढ निश्चय असाधारण कुशल श्रमिकों से लेकर किस्से बयान करते स्मारकों तथा विभिन्न धर्मों के संगम और भरपूर प्रकृति तक के विभिन्न रूप लेते हैं। ऐतिहासिक दस्तावेजों में उत्तर प्रदेश को मूल भारतीय सभ्यता का केंद्र बताया गया है। इसकी आध्यात्मिक प्राचीनता और अधिक गहरी है। बहुत से लोग इसे मनुष्य की उत्पत्ति के समय से पल्लवित होने पर विश्वास करते हैं। अपने प्रत्येक रूप में यह अनंत संभावनाओं की भूमि है। लखनऊ के निकट एक छोटा सा शहर अयोध्या, जो भगवान् विष्णु के अवतार श्रीराम की जन्म-स्थली है। पश्चिमी भाग में ताजमहल का शहर आगरा स्थित है। राजधानी दिल्ली तथा इसके उपनगर नोएडा व गाजियाबाद के निकट होने के चलते हाई-टेक उद्योग तथा आई.टी. व मीडिया कारोबार के पनपने से यहाँ भारतीयों की नई पीढ़ी की गहमागहमी रहती है। बनारस के गंगा घाट से पूर्व की ओर त्वरित गति से निर्मित हो रहे मॉल और पश्चिम की ओर सड़कों के ऊपर से लगभग उड़ती हुई शीघ्रगामी मेट्रो उत्तर प्रदेश में आधुनिकता व परंपरा की मिलन-स्थली का प्रतिनिधित्व करते हैं। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे निर्विवाद रूप से देश का सबसे बेहतरीन सुपर हाई-वे है, जहाँ केवल कारें ही नहीं दौड़तीं, बल्कि लड़ाकू जेट विमान भी उतारे जा सकते हैं। उत्तर प्रदेश की विकास-गाथा है यह पुस्तक, जो इस प्रदेश के माहात्म्य और संभावनाओं को समग्रता में प्रस्तुत करती है।
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