Price of the Modi Years
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Columnist, author and political commentator, Aakar Patel has long been a close observer of the political scenario. In Price of the Modi Years, he seeks to explain the data and facts on India's performance under Narendra Modi. Modi's predecessor, Manmohan Singh, had once said that Modi would be a disaster as prime minister. This book shows how. It concedes Modi's popularity; this is an accounting of the damage he has wrought. It is the history of India since 2014, assessing the damage across the polity from the economy, national security, federalism, foreign relations, legislations and the judiciary to media and civil society. Our memories are not long, news cycles are transient and incidents are forgotten or misclassified as being only episodic, unless documented, unified and placed together as a record. And, therefore, this book-a history of these present times.
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Columnist, author and political commentator, Aakar Patel has long been a close observer of the political scenario. In Price of the Modi Years, he seeks to explain the data and facts on India's performance under Narendra Modi.
Modi's predecessor, Manmohan Singh, had once said that Modi would be a disaster as prime minister. This book shows how. It concedes Modi's popularity; this is an accounting of the damage he has wrought. It is the history of India since 2014, assessing the damage across the polity from the economy, national security, federalism, foreign relations, legislations and the judiciary to media and civil society.
Our memories are not long, news cycles are transient and incidents are forgotten or misclassified as being only episodic, unless documented, unified and placed together as a record. And, therefore, this book-a history of these present times.
Book Details
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ISBN9780143463764
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Pages496
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Avg Reading Time17 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIN
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दूसरे लेख में पूर्वी लोक-चेतना में राष्ट्रवाद के प्रतिदर्श का अध्ययन और अखिल भारतीय राष्ट्रवाद से इसके सम्बन्धों के स्वरूप एवं द्वन्द्व को भी समझने का प्रयास किया गया है।
तीसरे लेख में दन्तकथाओं को इतिहास की संघटनाओं से जोड़कर देखने का प्रयत्न किया गया है।
बाद के अन्य लेख लोक-कवित्तों, मुहावरों, गीतों, लोकायनों तथा लोक-संस्कृति के विविध रूपों के माध्यम से लोक-चेतना में प्रवेश करने का प्रयास है।
यह पुस्तक इतिहास, सामाजिक विज्ञान, लोक-संस्कृति के अध्येताओं के छात्रों के लिए उपयोगी तो है ही, साथ ही साथ आम पाठकों के लिए भी बेहद महत्त्वपूर्ण है।
Purabiyon Ka Lokvritt Via Des-Pardes
- Author Name:
Zilani Bano
- Book Type:

- Description: एक गतिशील सांस्कृतिक संरचना है। वस्तुत: यह उस सामूहिक विवेकशील जीवन-पद्धति का नाम है जो सहज, सरल और भौतिकवादी होने के साथ-साथ अपनी जीवन्त परम्पराओं को अपने दैनिक जीवन के संघर्ष से जोड़ती चलती है। यह लोकमानस को आन्दोलित करने का सामर्थ्य रखती है। एक समाजशास्त्रीय अवधारणा के रूप में उसे समझने की चेष्टाएँ अक्सर उसकी अन्दरूनी गतिशीलता और परिवर्तनशीलता की अनदेखी करती चलती हैं। इसके चलते यह मान लिया जाता है कि लोकसंस्कृति प्राक्-आधुनिक समाज की संस्कृति है और इस समाज के विघटन के साथ लोक को भी अन्तत: विघटित होना ही है। समाजविज्ञानों के पास एक ऐसे लोक की कल्पना ही नहीं है जो आधुनिकता के थपेड़े खाकर भी जीवित रह सके। सच्चाई यह है कि वास्तविकता के धरातल पर लोक न सिर्फ़ विद्यमान है बल्कि अपार जिजीविषा के लिए सामाजिक-सांस्कृतिक बदलाव के साथ क़दम मिलाते हुए वह निरन्तर अपने को बदलने का प्रयत्न भी कर रहा है। लोक का सामना कामनाओं की बेरोक-टोक स्वतंत्रता पर आधारित जिस भोगमूलक संस्कृति से हो रहा है, उसके पीछे साम्राज्यवाद की अनियंत्रित ताक़त भी है। यह किसी भी समाज की बुनियादी मानवीय आकांक्षाओं को नकारकर अपने निजी हितों के अनुकूल, उसकी प्राथमिकताओं को मोड़ने में समर्थ है। इस पुस्तक में पूरबिया संस्कृति के अनुभवाश्रित विश्लेषण, उसकी जिजीविषा और कामकाज के सिलसिले में स्थानान्तरण के परिप्रेक्ष्य में उसके सामने मौजूद चुनौतियों का अध्ययन किया गया ह
Nagarikta Sanshodhan Adhiniyam (Tathya Evam Satya : Ek Bauddhik Vimarsh)
- Author Name:
Geeta Singh
- Book Type:

- Description: "भारत सदैव विश्व के सभी सताए हुए लोगों की शरणस्थली रहा, उसी के नागरिकों को उसी की भूमि पर अवसरवाद के इस खेल ने शरणार्थी बना दिया। आज हमें एक मजबूत इच्छाशक्ति वाली मानवतावादी सरकार मिली है, जो इन पीडि़तों एवं शोषितों को सहारा देने के लिए सर्वसम्मति से ‘नागरिकता संशोधन अधिनियम’ को पारित करवाकर लाई, तो अवसरवादी तुच्छ राजनीति करने वाले लोग फिर देश को गुमराह करने में लग गए हैं। समाज में हर तबके के अंदर देश के कोने-कोने में आज सी.ए.ए., एन.पी.आर. एवं एन.आर.सी. पर लोगों के मन में जहर घोलकर तरह-तरह की भ्रांतियाँ बैठा दी गई हैं। उन्हीं भ्रमों के निवारण के लिए तथा इन सभी अधिनियमों के सत्य को सामने लाने के लिए सी.पी.डी.एच.ई. (यू.जी.सी.एच. आर.डी.सी) दिल्ली विश्वविद्यालय के तत्त्वावधान में एक विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें राष्ट्र के अग्रणी चिंतक डॉ. इंद्रेश कुमारजी के सान्निध्य एवं संरक्षण में बौद्धिक विमर्श हुआ, जिसमें देश भर के विविध विश्वविद्यालयों से आए विभिन्न चिंतकों, प्राध्यापकों एवं शिक्षाविदों ने गंभीर विचार-विमर्श किया। उस वैचारिक मंथन से प्राप्त ज्ञान-सुधा को जन-जन तक पहुँंचाने के लिए यह पुस्तक प्रकाशित की गई है। केरल के राज्यपाल श्री आरिफ मोहम्मद खान की प्रस्तावना ने इस विषय के महत्त्व को दृढ़ता और प्रामाणिकता से रेखांकित किया है। "
Uttar Pradesh Ka Swatantrata Sangram : Mathura
- Author Name:
Dr. Umesh Chander Sharma
- Book Type:

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Description:
भारत की आजादी के लिए हुए अप्रतिम संघर्ष में मथुरा जनपद के महान योगदान की कहानी राष्ट्रीय प्रेम को समर्पित एक अनुपम गाथा है। 1856 में मथुरा के वनों में एक पंचायत हुई थी जो 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की तूफानी हलचल का संकेत था।
मथुरा जनपद में 1857 की क्रांति का विस्फोट मई माह के दूसरे सप्ताह में हुआ। 15 मई तक मथुरा के अंग्रेज स्त्रियों और बच्चों को आगरा पहुँचा दिया गया था। क्रांति की लपटें ग्रामीण अंचलों तक भी पहुँचीं। मांट तहसील का नौहझील क्षेत्र विशेष रूप से प्रभावित हुआ। कोसी और छाता के क्षेत्रों में भी विद्रोह का बिगुल बज उठा था। मांट क्षेत्र का बाजना विशेष रूप से गतिशील हुआ। नौहबारी के जाटों ने नौहझील के किले पर आक्रमण किया। और भी कई महत्त्वपूर्ण घटनाओं का साक्षी मथुरा जिला रहा जिसका विस्तृत विवरण इस पुस्तक में दिया गया है।
मथुरा जनपद में प्रतिरोध की परंपरा द्वापर तक जाती है जब श्रीकृष्ण ने गोपालकों को साथ लेकर कंस के शासन को समूल नष्ट कर दिया था। वही छवियाँ स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी हमें देखने को मिलीं।
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Book
1. What is Price of the Modi Years about?
It’s a comprehensive political history of India under Narendra Modi, analysing data-driven performance across governance, economy, media freedom, and more, and questioning the cost of this period on democratic institutions and social development.
2. Who should read Price of the Modi Years?
Readers interested in Indian politics, contemporary history, policy analysis, or critical examinations of governance and development since 2014 will find this book informative and thought-provoking.
3. Does the book include data and indices?
Yes — it references performance on global and national indices, showing comparisons over time to highlight trends in economic, social, and political indicators.
4.What is this book all about?
Once Upon a Curfew is a richly evocative novel by Srishti Chaudhary that transports readers to India in 1974, blending romance, ambition, and the socio-political climate of the Emergency era. The story follows Indu, a spirited young woman who inherits her grandmother’s flat and dreams of transforming it into a library for women — a symbol of learning, independence, and community. Along the way, her life becomes entangled with Rana, a witty young lawyer, and Rajat, her fiancé studying abroad. As India enters a period of curfew and uncertainty, Indu faces profound choices about love, identity, and the kind of life she truly wants to lead.