Tughluq Kaleen Bharat : Vol. 2
Author:
Saiyad Athar Abbas RizviPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics0 Ratings
Price: ₹ 760
₹
950
Unavailable
यह ग्रन्थ तुगलक़ बादशाहों के महत्त्वपूर्ण कालखंड सन् 1351 से 1398 ई. पर केन्द्रित है। इस दौर में शासन की बागडोर सुल्तान फ़ीरोज़ और उसके उत्तराधिकारियों के हाथों में थी। यह ग्रन्थ उस युग की अत्यन्त महत्त्वपूर्ण और प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध कराता है।</p>
<p>फ़ारसी, अरबी, अंग्रेज़ी और हिन्दी के विद्वान और इतिहासकार डॉ. सैयद अतहर अब्बास रिज़वी ने इस ग्रन्थ का सम्पादन-अनुवाद किया है। उन्होंने इस ग्रन्थ में तत्सम्बन्धी अरबी और फ़ारसी में उपलब्ध तमाम ऐतिहासिक दस्तावेज़ों और सामग्रियों का उपयोग किया है जिनमें ज़ियाउद्दीन बरनी, शम्स सिराज अफ़ीफ़, यहया, मुहम्मद बिहामद ख़ानी, शरफ़ुद्दीन अली यज़दी, सुल्तान फ़ीरोज़ शाह, निज़ामुद्दीन अहमद, मीर मुहम्मद मासूम, हमीद क़लन्दर, ऐनुलमुल्क तथा मुतहर कड़ा जैसे विद्वान लेखकों, इतिहासकारों के ग्रन्थ शामिल हैं।</p>
<p>अनुवाद में फ़ारसी, अरबी के प्रचलित नियमों को, जिनका पालन इतिहासकार करते रहे हैं, ध्यान में रखा गया है। साथ ही आवश्यक टिप्पणियाँ भी जगह-जगह दर्ज कर दी गई हैं ताकि पाठकों को विषय को समझने में सुविधा हो।</p>
<p>इतिहास के छात्रों, शिक्षकों, शोधार्थियों और इतिहासकारों के साथ-साथ इतिहास में रुचि रखनेवाले आम पाठकों के लिए भी ग्रन्थ संग्रहणीय है।
ISBN: 9788126714827
Pages: 480
Avg Reading Time: 16 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Kashmir Ka Sahitya
- Author Name:
Prof. Kripashankar Chaubey +1
- Book Type:

- Description: भारत की बहुभाषिकता भारत की शक्ति है तो भारतीय सृजनधर्मी साहित्य का सौंदर्य भी। कश्मीर का साहित्य वहां के जन की सृजनधर्मिता में विकसित हुई। लगभग 40 वर्षों से कश्मीर को दूर से देखा जा रहा था। इस दूर से देखने का असर कश्मीर में प्रस्फुटित साहित्य को देखने-जानने पर भी हुआ। परिणामतः कश्मीरी साहित्य विशेषतः कश्मीरी भाषा में लिखा गया। कश्मीर में रहकर जो कश्मीरी भाषा में लिखा जा रहा था, वह सब अपरिचित-सा हो गया। विस्थापित कश्मीरी समूह जहां विस्थापन की पीड़ा में सिमटकर रह गया, वही कश्मीर के अंदर जो लोग लिख रहे थे, घाटी में जो लोग लिख रहे थे, उनमें जाने-अनजाने कश्मीरियत की पहचान, ऐसी पहचान जो शेष भारत से अलग, अलहदा यह देखने लगा। और कश्मीर के लेखन में भारत अनुपस्थिति-सा हो गया। साहित्य में भारत लोग की और लोक मन की उपस्थिति है। स्वतंत्रता के पूर्व यहां तक की बीसवीं सदी में नब्बे के दशक के पूर्व तक के सृजनात्मक लेखन में यह लोक मन सर्वत्र परिलक्षित होता है और कश्मीर के वैशिष्ट्य के साथ भारतीयता का अनुरणन करता है पर नब्बे के बाद अलग, अलहदा कश्मीर और उस पर पांथिक उन््माद तथा आतंक की छाया ने सबकुछ खत्म कर दिया। संवेदना और सद्भाव, जो कुछ लिखा जा रहा था, उससे तिरोहित हो गया। नेह छोह नाते लुप्त हो गए। पर काल का परिवर्तन हुआ है। भारत का भारत के लिए कश्मीर का भाव जम्मू कश्मीर की आवोहवा में प्रसारित हुआ है। भारत के साथ एकात्म और अभिन्न भाव जम्मू कश्मीर के स्वर सब ओर गुंजरित हो रहे हैं। ऐसे में कश्मीर के साहित्यिक संसार का एक सम्यक् आकलन आवश्यक और अपरिहार्य प्रतीत हो रहा है। इस अपरिहार्यता को दृष्टिगत कर प्रस्तुत ग्रंथ कश्मीर के साहित्य संसार की संक्षिप्त समीक्षा है। कविता, कहानी, साहित्य, कश्मीर की भाषा की विशिष्टताओं को प्रतिनिधि तौर पर प्रस्तुत करने की यह कोशिश है.
Manjhinama | The True Story Of A Bonded Labourer Becoming A Union Minister | Minister Enterprises of India Jitan Ram Manjhi Book In Hindi
- Author Name:
Amreen Khan
- Book Type:

- Description: जीतन राम मांझी एक राजनीतिज्ञ हैं, जो केंद्र सरकार में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री हैं। वर्तमान में वे गया निर्वाचन क्षेत्र से संसद् सदस्य हैं। 20 मई, 2014 से 20 फरवरी, 2015 तक वे बिहार के 23वें मुख्यमंत्री भी रहे। इससे पहले उन्होंने नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री के रूप में कार्य किया। मांझी 1980 से बिहार विधानसभा के सदस्य हैं। मांझी का जन्म 6 अक्तूबर, 1944 को बिहार के गया जिले के खिजरसराय क्षेत्र के महकार गाँव में हुआ था। मगध विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने 13 साल तक गया टेलीफोन एक्सचेंज में काम किया। जीतन राम मांझी ने 1980 में राजनीति में प्रवेश किया। कांग्रेस पार्टी के टिकट पर फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। 1990 का चुनाव हारने के तुरंत बाद मांझी जनता दल में चले गए। 1996 से 2005 तक मांझी बिहार में आरजेडी राज्य सरकार में मंत्री थे। 2010 के बिहार चुनावों में वे जहानाबाद जिले के मखदुमपुर से राज्य विधानसभा के लिए चुने गए। 2015 में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद मांझी ने पार्टी से अलग होकर हिंदुस्तान आवाम मोर्चा सेक्युलर नाम से अपनी पार्टी बनाई और भाजपा के नेतृत्व वाली एन.डी.ए. में शामिल हो गए।
Dekho Hamri Kashi
- Author Name:
Hemant Sharma
- Book Type:

- Description: काशी ज्ञान की शलाका है और बनारस औघड़ों का ठहाका है। काशी रहस्यों की गहराई है, बनारस किस्सों की ठंडाई है। काशी दिव्य है, बनारस भव्य है। काशी प्रणम्य है, बनारस रम्य है | काशी मुक्ति है, विरक्ति है; लेकिन बनारस हेमंतजी की परम आसक्ति है। यदि काशी में बनारस की तलाश है तो “देखो हमरी काशी ' की उँगली पकड़िए'''रस-ही- रस। गद्य में पद्य का रस, राग और लय का आनंद इस पुस्तक की हर कथा की प्रत्येक पंक्ति में है। इन कथाओं में तथ्य, तर्क और भाव-प्रवाह भरपूर है। जैसा रस “बैताल पचीसी' की कथाओं में है कि उन्हें कोई सामान्य पाठक भी पढ़े तो उसका मनोरंजन होगा। कोई समझदार व्यक्ति पढ़े तो उसे जहाँ ज्ञान प्राप्त होगा, वहीं उसे जीवन जीने का मार्ग भी मिल सकता है। यही बात हेमंतजी की इन कथाओं में है । इसमें ऐसे पात्र हैं, जो हेमंतजी के या हमारे-आपके अपने रोजमर्रा के जीवन के ताने-बाने में गुँथे हुए हैं । वे इतने अभिन्न हैं कि उन्हें अलग-अलग देखना संभव नहीं हो पाता । यह पुस्तक संस्मरण विधा में एक नवोन्मेष है। यह संस्मरण काशी की संस्कृति और बनारसी जीवन का रंगमंच प्रतीत होता है। इसमें वर्णित व्यक्तियों के जरिए काशी की संस्कृति, परंपरा और जीवनधारा की खोज की गई है। जो सदियों से सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन के अपरिहार्य अंग रहे हैं । ऐसे लोगों को केंद्र में रखकर कथा बुनी गई है । इस पुस्तक के पात्र चाहे जो हों, वे सामाजिक जीवन में साधारण भले माने जाते हों, पर कथा में वे असाधारण हैं ।
Vivekanand Ke Sapano Ka Bharat
- Author Name:
Bajrang Lal Gupta +1
- Book Type:

- Description: "स्वामी विवेकानंद के सपनों का भारत गुरुभाइयों में सम्मानपूर्वक ‘स्वामीजी’ संबोधन प्राप्त करनेवाले नरेंद्रनाथ दत्त ने ऊहापोह की स्थिति में मठ छोड़कर भारत-भ्रमण करने का मन बनाया। अपने गुरुभाइयों को भी स्पष्ट निर्देश दिया कि अपना झोला उठाकर भारत का मानचित्र अपने साथ लो और भारत-भ्रमण के लिए निकल पड़ो। भारत को जानना एवं भारतवासियों को भारत की पहचान करा देना, यही हमारा प्रथम कार्य है। स्वामीजी ने धीर-गंभीर होकर कहा कि योगी बनना चाहते हो तो पहले उपयोगी बनो, भारतमाता के दुःख व कष्ट को समझो। उसे दूर करने के लिए अपने आपको उपयोगी बनाओ, तभी तो योगी बन पाओगे। आज की वर्तमान पीढ़ी भी वर्ष 2020 तक विश्व को नेतृत्व प्रदान करनेवाले भारत को अपने हाथों सँवारना चाहती है। भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन, गोरक्षा, गंगा की पवित्रता, कालेधन की वापसी, राममंदिर-रामसेतु आदि मानबिंदुओं के सम्मान की रक्षा के आंदोलन, आसन्न जल संकट, पर्यावरण, कानून, सीमा-सुरक्षा, सांप्रदायिक सौहार्द, संस्कार-युक्त शिक्षा, संस्कृति रक्षा, राष्ट्रवादी साहित्य, महिला गौरवीकरण आदि के लिए हो रही गतिविधियाँ भारत निर्माण की छटपटाहट का ही प्रकटीकरण हैं। इन सभी क्रियाकलापों को नेतृत्व प्रदान करनेवाले लोग कम या अधिक मात्रा में स्वामी विवेकानन्द से प्रेरणा पाकर उनके सपनों का भारत बनाने में लगे हैं। स्वामी विवेकानन्द के सपनों के स्वावलंबी, स्वाभिमानी, शक्तिशाली, सांस्कृतिक, संगठित भारत के निर्माण को कृत संकल्प कृति।
Singhbhum Ka Itihas: Pracheen Se Purv-Aupniveshik Kaal Tak
- Author Name:
Lalita Sundi
- Book Type:

- Description: औपनिवेशक पराधीनता झेल चुके समाजों का इतिहास जाने-अनजाने औपनिवेशक दृष्टिकोण के बोझ से दबा नजर आता है। भारत के आदिवासियों के सन्दर्भ में यह समस्या दोहरी रही है क्योंकि उनके सामने ब्रिटिश पराधीनता के साथ-साथ वर्चस्वशाली गैर-आदिवासी तबके का शोषण भी रहा है। दरअसल आदिवासियों का इतिहास भी अब तक ज्यादातर गैर-आदिवासी ही लिखते रहे हैं जिसमें उन्हें देखने के दो प्रमुख दृष्टिकोण रहे हैं। पहला, सब-आल्टर्न परिप्रेक्ष्य जिसमें इतिहास को नीचे से देखने अर्थात उपेक्षित-वंचित तबकों का इतिहास में समुचित उल्लेख करने और उन्हें वाजिब श्रेय देने पर जोर रहा है। और दूसरा, राष्ट्रवादी परिप्रेक्ष्य जिसमें मुख्य रूप से राष्ट्रीय स्वतंत्रता आन्दोलन में आदिवासियों की भूमिका को रेखांकित किया जाता रहा है। ये दोनों दृष्टिकोण भी आदिवासी समुदायों को अन्य और विशिष्ट सांस्कृतिक समूह मानने की औपनिवेशिक भ्रान्ति से मुक्त नहीं रह पाए। इसलिए इन दोनों तरह के इतिहासकारों के लेखन में प्राचीन और मध्यकालीन आदिवासी राजवंशों और गणराज्यों की प्रभावी उपस्थिति का जिक्र या आकलन न के बराबर मिलता है। ललिता सुंडी की यह पुस्तक उपरोक्त सीमाओं को लाँघकर आदिवासी इतिहास को बहुआयामी स्वरूप प्रदान करती है। इसमें सिंहभूम की भौगोलिक स्थिति, प्राचीन इतिहास, राजवंशों का उदय, राजनीतिक परिदृश्य, सामाजिक-सांस्कृतिक परम्पराएँ, पारम्परिक शासनप्रणाली, क्षेत्र के प्रमुख आदिवासी समुदायों का महत्व और उनका परस्पर सम्बन्ध आदि तमाम विषयों को समाहित किया गया है। इस ऐतिहासिक विवेचना में सिंहभूम के अर्थशास्त्रीय पक्ष को भी शामिल किया गया है। वस्तुतः यह पुस्तक सिंहभूम के हवाले से आदिवासियों के प्रति रूढ़ दृष्टिकोण को नकारने की एक शोधपरक पहल है जिसमें उन्हें सिर्फ जंगल और पिछड़ेपन से जोड़कर देखे जाने के विपरीत उनके समृद्ध इतिहास को प्रस्तुत किया गया है। इसका दस्तावेजी महत्त्व असंदिग्ध है।
RSS : Kaya Aur Maya
- Author Name:
Devanura Mahadeva
- Book Type:

- Description: अब सौ साल का हुआ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दरअसल है क्या? इसकी काया के पीछे छुपी माया क्या है? अब जबकि संघ से जुड़ी एक पार्टी सत्ता पर मज़बूती से क़ाबिज़ है, यह भारत को किस दिशा में ले जा रहा है? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिनके ग़ौरतलब जवाब देवनूर महादेव ने आर.एस.एस. : काया और माया में दिए हैं। मिथकों को आधुनिकता के और लोकवार्ताओं को गहरी राजनीतिक अन्तर्दृष्टि के बरअक्स रखकर देखने-परखने से हासिल इन जवाबों को पेश करते हुए, अपने ख़ास अन्दाज़ में वे पाठकों से आग्रह करते हैं : जब आर.एस.एस. का मायावी दानव भेष बदलकर हमारे दरवाज़े पर आता है, तब हमें उसकी बातों में नहीं आना चाहिए। ‘आज नक़द कल उधार’ की तर्ज़ पर हमें भी ग्रामवासियों की तरह अपने दरवाज़ों पर ‘नाले बा’ (कल आना) लिख देना चाहिए! कन्नड़ सहित अनेक भाषाओं में बिक्री के कीर्तिमान बना चुकी यह असाधारण किताब सांस्कृतिक आलोचना और ऐतिहासिक व्याख्या के साथ-साथ राजनीतिक कार्रवाई का आह्वान भी है।
Gandhi Aur Akathaniya : Satya Ke Sath Unka Antim Prayog
- Author Name:
James W. Douglass
- Book Type:

- Description: “इतिहास जब-तब जीवन की शक्तियों और मृत्यु की शक्तियों के बीच ऐसे संघर्षों का साक्षी बनता है जहाँ एक ओर, मृत्यु की शक्ति की हर पराजय असत्य पर सत्य की विजय में आस्था को बल प्रदान करती है तो दूसरी ओर, असत्य की हर कामयाबी में मनुष्यता के सम्पूर्ण विनाश की सम्भावना निहित होती है। अहिंसा में गाँधी की आस्था और उनके हत्यारों की पथभ्रष्ट विचारधारा पर आधारित जेम्स डॅगलॅस की यह गहन शोधपरक, छोटी-सी अद्भुत कृति उन दो परस्पर विरोधी फ़लसफ़ों की एक वाग्मितापूर्ण कहानी है जिनका सामना आज मानव-जाति कर रही है—एक ऐसी कहानी जो हमें ठहरकर सोचने के लिए विवश करती है।” —नारायण देसाई
Jharkhand Mein Vidroh Ka Itihas
- Author Name:
Shailendra Mahto
- Book Type:

- Description: झारखंड संघर्ष की धरती रही है। यहाँ के आदिवासियों ने अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता की पहली लड़ाई लड़ी थी। ‘झारखंड में विद्रोह का इतिहास’ नामक इस पुस्तक में 1767 से 1914 तक हुए संघर्ष का जिक्र है। धालभूम विद्रोह के संघर्ष से कहानी आरंभ होती है। उसके बाद चुआड़ विद्रोह, तिलका माझी का संषर्घ, कोल विद्रोह, भूमिज विद्रोह, संथाल विद्रोह, बिरसा मुंडा का उलगुलान आदि सभी संघर्ष-विद्रोहों के बारे में इस पुस्तक में विस्तार से चर्चा की गई है। संथाल विद्रोह के तुरंत बाद ही, यानी 1857 में झारखंड क्षेत्र में भी सिपाही विद्रोह हुआ। झारखंड के वीरों ने इस विद्रोह में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। राजा अर्जुन सिंह, नीलांबर-पीतांबर, ठाकुर विश्वनाथ शाही, पांडेय गणपत राय, उमरांव सिंह टिकैत, शेख भिखारी आदि उस विद्रोह के नायक थे। इस पुस्तक में उनके संघर्ष के बारे में विस्तार से वर्णन किया गया है। पुस्तक में चानकु महतो, तेलंगा खडि़या, सरदारी लड़ाई, टाना भगतो के आंदोलन, गंगानारायण सिंह, बुली महतो से संघर्ष का भी जिक्र है। बिरसा मुंडा के एक सहयोगी गया मुंडा और उनके परिवार के संघर्ष का जीवंत विवरण दिया गया है। प्रयास है कि झारखंड के वीरों और उनके संघर्ष की जानकारी जन-जन तक पहुँचे और किसी भी विद्रोह का इतिहास छूट न जाए। इस पुस्तक की खासियत यह है कि सभी विद्रोहों-संघर्षों का प्रामाणिक विवरण एक जगह दिया गया है। झारखंड में जल-जंगल-जमीन का अधिकार, अपनी अस्मिता और भारत मुक्ति आंदोलन की लड़ाई को भी समाहित किया गया है, ताकि पुस्तक का क्षेत्र और व्यापक हो जाए।
Vikasit Bihar Ki Khoj
- Author Name:
Nitish Kumar
- Book Type:

- Description: सन् 1957 में प्रधानमंत्री नेहरू ने श्री अटल बिहारी वाजपेयी के संदर्भ में लोकसभा में कहा था-' ' बोलने के लिए वाणी की जरूरत होती है, किंतु मौन के लिए वाणी और विवेक दोनों की जरूरत पड़ती है। '' बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के विषय में भी शायद पंडित नेहरू का यह वाक्यांश सटीक बैठता है। मुख्यमंत्री नीतीश बाबू चाहे प्रतिपक्ष में रहे या पक्ष में, सदन के एक-एक पल का उपयोग किया, ताकि संसदीय जनतंत्र मजबूत हो एवं जन- भागीदारी का यह मुखर मंच अपने मकसद में कामयाब हो। वे कर्पूरी ठाकुर की राजनीति के कायल रहे हैं। उन्होंने राजनीति में सिद्धांतों और मूल्यों की पैरवी की और इन्हें सही मायनों में अपनाया भी। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि उनके कार्यकाल में बिहार राज्य का कायाकल्प हो गया है। प्रस्तुत पुस्तक में नीतीश बाबू के बहुआयामी व्यक्तित्व एवं कार्यों का विवेचन किया गया है। एक राजनेता के रूप में वे अपनी वाणी से कुछ न कहकर अपना उत्तर रचनात्मक कार्यो के रूप में देते हैं। उनकी मान्यता है कि सुशासन का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। राजनीति में शुचिता और पारदर्शिता का प्रमाण देनेवाले इन लेखों से आम आदमी का राजनीतिज्ञों में और विकास के कामों में विश्वास बढेगा।
Aupniveshik Shasan : Unneesveen Shatabdi Aur Stree Prashn
- Author Name:
Rupa Gupta
- Book Type:

-
Description:
पिछली और वर्तमान सदी की आधुनिक स्त्री की समस्याएँ जब बार-बार परम्परा और संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में ही समाधान खोजती हैं तो सुदूर मानव इतिहास में न सही निकट के इतिहास में जाकर खोजबीन आवश्यक हो जाती है। उन्नीसवीं सदी नवजागरण की सदी है और आधुनिकता इसी नवजागरण का प्रतिफलन है। चूँकि ’आधुनिक स्त्री’ के जन्म का श्रेय भी इसी शती को दिया जाता है तो इक्सीसवीं सदी में आधुनिक स्त्री की समस्या का समाधान खोजने इसी शताब्दी के पास जाना होगा। यह पुस्तक इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक में भी आधुनिक स्त्रियों के सामने मुँह बाए खड़े प्रश्नों की जड़ तक पहुँचने की वह दृष्टि है जिसे विभिन्न घटकों से गुज़रते हुए व्याख्यायित करने की कोशिश की गई है।
पहले अध्याय में जहाँ 'भारतेन्दु युग : उन्नीसवीं शताब्दी और औपनिवेशिक परिस्थितियाँ’ में उन्नीसवीं सदी की औपनिवेशिक परिस्थितियों और हिन्दी नवजागरण के अन्तर्सम्बन्धों का विश्लेषण किया गया है, वहीं द्वितीय अध्याय ‘औपनिवेशिक आर्थिक शोषण, हिन्दी नवजागरण और भारतेन्दु हरिश्चन्द्र' में औपनिवेशिक शासन-काल में हिन्दी नवजागरण के बीज और उसके पल्लवन के परिवेश की प्रस्तुति का प्रयास है। तृतीय अध्याय में ‘धर्म, खंडित आधुनिकता एवं स्त्री' में केवल हिन्दी या भारतीय नहीं बल्कि पूरे विश्व की स्त्रियों के प्रति धर्म की विद्वेषपूर्ण भावना का एक विहंगम अवलोकन है। चतुर्थ अध्याय 'स्त्री और उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध का हिन्दी साहित्य’ में पैंतीस वर्षों के सामाजिक प्रश्नों में समाविष्ट स्त्री-प्रश्नों को सम्बोधित करने की जुगत है। ये पैंतीस वर्ष वस्तुत: भारतेन्दु के जीवन-वर्ष हैं। वहीं पंचम अध्याय ‘उन्नीसवीं सदी के अन्तिम डेढ़ दशक और स्त्री-प्रश्न' में उन्नीसवीं सदी के अन्तिम डेढ़ दशकों में सम्बोधित स्त्री-प्रश्नों को ‘मूल’ के साथ चिन्हित किया गया है।
कह सकते हैं कि पुस्तक में उन्नीसवीं शताब्दी के औपनिवेशिक शासन-काल में स्त्री-परिप्रेक्ष्य में धारणाओं-रूढ़ियों, भावनाओँ-पूर्वग्रहों, आग्रहों-दुराग्रहों, अनमेल विवाह, वर-कन्या विक्रय, स्त्री-दासता, स्त्री-अशिक्षा, स्त्री-परित्याग, छुआछूत आदि से टकराते तर्क और विश्लेषण की जो ज़मीन तैयार की गई है, वह अपने चिन्तन मेँ महत्त्वपूर्ण तो है ही, विरल भी है।
Vaishvik Yug Ka Bharat : Aarthik Sudhar Aur Samaveshi Vikas Ka Aadhar
- Author Name:
Dr. Vandna Dangi
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Sarabjit Singh ki Ajeeb Dastan
- Author Name:
Awaish Sheikh
- Book Type:

-
Description:
सरबजीत के मामले में अभियोजन पक्ष के सबूत बहुत ही कमज़ोर हैं। उसका नाम एफ़आईआर में भी दर्ज नहीं था।
—न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू; पूर्व अध्यक्ष, प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया, भारत के उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश और फ्री सरबजीत कमेटी के अध्यक्ष
सीमा के दोनों ओर इस तरह के कई मामले हैं। इन मामलों का पुनर्निरीक्षण होना चाहिए और अविलम्ब कैदियों की अदला-बदली होनी चाहिए। भारत और पाकिस्तान, दोनों को ही इस तरह के कैदियों की पहचान करके उन्हें जेनेवा कन्वेंशन के प्रावधानों के आधार पर छोड़ना चाहिए।
—कमल एम. मोरारका; पूर्व केन्द्रीय मंत्री, समाजसेवी एवं फ्री सरबजीत कमेटी के सदस्य
दोनों देशों की सरकारें एक दूसरे के नागरिकों के साथ बन्धकों जैसा व्यवहार करती हैं, यद्यपि लोग अच्छे पड़ोसियों की तरह रहने की कामना करते हैं। लोगों को सरकारों पर दबाव बनाने के लिए आगे आना चाहिए, ताकि भारत और पाकिस्तान में कोई दूसरा सरबजीत न हो।
संतोष भारतीय; प्रधान सम्पादक, ‘चौथी दुनिया’, साप्ताहिक अख़बार
सरबजीत के केस की निष्पक्ष सुनवाई नहीं हुई। यह विडम्बना है। अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्धों की विचित्रता और दोषपूर्ण न्याय-प्रणाली का आपसी मेल इस व्यक्ति के दुर्भाग्य का कारण बना।
—ज़ुबैदा मुस्तफ़ा; पॉपुलेशन इंस्टीट्यूट, वाशिंगटन, अमेरिका द्वारा दिए जानेवाले ‘ग्लोबल मीडिया अवार्ड फ़ॉर एक्सीलेंस’ 1986 व 2004 की विजेता
Price of the Modi Years
- Author Name:
Aakar Patel
- Book Type:

- Description: Columnist, author and political commentator, Aakar Patel has long been a close observer of the political scenario. In Price of the Modi Years, he seeks to explain the data and facts on India's performance under Narendra Modi. Modi's predecessor, Manmohan Singh, had once said that Modi would be a disaster as prime minister. This book shows how. It concedes Modi's popularity; this is an accounting of the damage he has wrought. It is the history of India since 2014, assessing the damage across the polity from the economy, national security, federalism, foreign relations, legislations and the judiciary to media and civil society. Our memories are not long, news cycles are transient and incidents are forgotten or misclassified as being only episodic, unless documented, unified and placed together as a record. And, therefore, this book-a history of these present times.
Maharaja Surajmal
- Author Name:
Kunwar Natwar Singh
- Book Type:

-
Description:
18वीं सदी में जब मुग़ल साम्राज्य पतन की ओर था, मराठों, सिखों और जाटों ने न केवल अपनी-अपनी प्रभावशाली राजसत्ता स्थापित कर ली थी, बल्कि दिल्ली सल्तनत को एक तरह से घेर लिया था। उन दिनों इन रियासतों में कुछ ऐसे शासक पैदा हुए जिन्होंने अपनी बहादुरी तथा राजनय के बल पर न केवल उस समय की सियासत, बल्कि समाज पर भी गहरा असर डाला। भरतपुर के जाट नरेश महाराजा सूरजमल इनमें अव्वल थे।
महज़ 56 वर्ष के जीवन-काल में उन्होंने आगरा और हरियाणा पर विजय प्राप्त करके अपने राज्य का विस्तार ही नहीं किया, बल्कि प्रशासनिक ढाँचे में भी उल्लेखनीय बदलाव किए। जाट समुदाय में आज भी उनका नाम बहुत गौरव और आदर के साथ लिया जाता है।
विद्वान राजनेता कुँवर नटवर सिंह ने प्रामाणिक सूचनाओं और दस्तावेज़ों को आधार बनाकर महाराजा सूरजमल की सियासत और संघर्ष की महागाथा लिखी है। अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हो चुकी इस पुस्तक का यह अनुवाद हिन्दी के पाठकों के सामने उनके प्रेरणादायी व्यक्तित्व को रखने का अपनी तरह का पहला उपक्रम है।
Main Lajpatrai Bol Raha Hoon
- Author Name:
Giriraj Sharan Agrawal
- Book Type:

- Description: महान् स्वतंत्रता सेनानी, धार्मिक सद्भाव के प्रणेता, संप्रदायवाद के विरोधी तथा राष्ट्र के लिए अपने प्राणों को बलिदान कर देनेवाले क्रांतिकारी नेता लाला लाजपतराय स्वप्नदर्शी नहीं थे। उन्होंने जिन योजनाओं की रूपरेखा बनाई, उन्हें पूर्ण करने के लिए अपना जीवन अर्पित कर दिया। लालाजी शांतिपूर्ण उपायों से स्वराज्य-प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील रहे। लेकिन उन्होंने आतंक और अत्याचार के सामने कभी सिर नहीं झुकाया। लालाजी राष्ट्रीय विचारों के प्रणेता थे। उनके लिए पूर्ण स्वराज्य आदर्श था और धर्म भी। सामाजिक जीवन में फैली निराशा और विकृत मनोवृत्तियों को समाप्त करने के उद्देश्य से लालाजी ने आर्यसमाज का आश्रय ग्रहण किया। उन्होंने शोषण को किसी रूप में स्वीकार नहीं किया, शोषण चाहे ब्रिटिश शासन का हो अथवा सबल जाति का निर्बल के प्रति। लालाजी शिक्षा को राष्ट्रीय स्वरूप देना चाहते थे। उनके अनुसार शिक्षा का प्रथम उद्देश्य स्वतंत्रता की अनुभूति कराना होना चाहिए। ऐसे महान् राजनीतिज्ञ, समाज-सुधारक, विचारक, स्वराज्य के उद्घोषक, आदर्शें के प्रति निष्ठावान् और सांप्रदायिक एकता के समर्थक लाला लाजपतराय की चिंतनधारा से अपने देश के भावी कर्णधारों को परिचित कराने का शुभ-संकल्प लेकर यह संकलन युवा पीढ़ी को समर्पित है।
Vikas Ki Rajneeti
- Author Name:
Vinay Sahasrabuddhe
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Gathbandhan Ki Rajneeti Speeches By Shri Atal Bihari Vajpayee
- Author Name:
Dr. N.M. Ghatate
- Book Type:

- Description: भारतीय राजनीति गठबंधन के दौर में में न केवल प्रवेश कर चुकी है, गठबंधन की सरकारों का गठन अब भारतीय लोकतंत्र का वर्तमान और आगामी अतीत नजर आ रहा है। राष्ट्रीय दलों ही नहीं, क्षेत्रीय दलों की पैठ मतदाताओं में जितनी गहरी होती जाएगी, यह चलन बढ़ेगा। क्षेत्रीय मुद्दों पर ही नहीं, राष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपने क्षेत्रीय दलों पर मतदाता का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। यही वजह है कि मतदाता चाहता है कि राष्ट्रीय स्तर पर भी उसका प्रतिनिधित्व उसके क्षेत्रीय दल करें। पिछले लगभग एक दशक से मतदाताओं ने गठबंधन की सरकारों के गठन का जनादेश दिया है। अपने प्रधानमंत्रित्व काल में श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जो उपलब्धियाँ हासिल की हैं, उन्हें सहज शब्दों में कहा जा सकता है-जो कहा, वह कर दिखाया। प्रधानमंत्री पद पर आसीन होने के बाद भी उनकी कथनी और करनी एक ही बनी रही। अपनी बात को स्पष्ट और दृढ़ शब्दों में कहना अटलजी जैसे निर्भय और सर्वमान्य व्यक्ति के लिए सहज और संभव रहा है। मुद्दा चाहे पड़ोसियों से संबंध सुधारने की दिशा में चीन यात्रा का हो, लाहौर बस यात्रा हो या कारगिल से दुश्मन को खदेड़ना, आगरा वार्ता हो या फिर से खेल संबंधों की बहाली, परमाणु परीक्षण हो या डब्ल्यू.टी.ओ. पर दो टूक राय या अमेरिका की मध्यस्थता को ठुकराने का फैसला। अटलजी के शासनकाल में देश की अर्थव्यवस्था ने नई ऊँचाइयों को छुआ। विदेशी मुद्रा भंडार, सूचना प्रौद्योगिकी, आउट सोर्सिंग, किसान बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, ग्रामीण सड़क योजना, स्वर्ण चतुर्भुज राजमार्ग, नदियों का एकीकरण, सागर माला, दूरसंचार सुविधाओं का विकास, ऊर्जा क्षेत्र का विस्तार जैसी दर्जनों योजनाएँ हैं, जो अटल जी के कार्यकाल में शुरू हुईं और जो आगामी अतीत में भारत को विकसित देशों की पंक्ति में स्थान दिलाने में सफल होंगी। भारतीय राजनीति को अटल जी का योगदान है- समन्वय की राजनीति, सामंजस्य की राजनीति, मिल- जुलकर राष्ट्रहित में आगे बढ़ने की दिशा देना।
END OF INDENTURE An Agonising Journey To Freedom
- Author Name:
Dr. Ruchi Verma +2
- Book Type:

- Description: Growing public outrage finally forced the abolition of the curse of slavery starting with the year 1833. An immensely welcome step soon brought to the fore another major challenge of severe labour shortages in the plantation colonies. The colonial rulers devised another deceptive tool of engaging large scale cheap labour for their plantations under the so-called ‘Indenture system’. The British carried out the largest such operation and mobilised close to 2 million workers from India and carried them to far off lands in the Caribbean, Africa and the Pacific. On the face of it, these workers were taken under a mutually agreed contract, called the ‘agreement’ which also led to the popular folklore of ‘girmit’. However, in terms of protection of the workers’ basic rights, this system was really no different from the erstwhile slavery. Generations of these workers struggled in agony for achieving the eventual liberation from this de-facto bondage. The plight of the indentured workers also deeply moved the Indian leadership especially Mahatma Gandhi who personally witnessed their sufferings in South Africa and Mauritius. Rising and loud criticism started demanding the abolition of indentureship in the plantation colonies, India and elsewhere. There was another unexpected pressure for able-bodied men for the First World War operations in Europe. These factors together forced the colonial powers to finally abolish the indenture system in the year 1917. Hence, the year 2017 marked the centenary of this landmark development widely celebrated along the entire 'indentured route' namely Mauritius, Fiji, Trinidad & Tobago, Guyana and Suriname. As in most of these countries, the majority of the populations are of Indian origin, this was also a cause for celebration in India. The Antar Rashtriya Sahayog Parishad with its 40 years of outreach with the Indian diaspora, especially the Girmitiya countries organised a special commemorative International conference on 20-22 April 2017 in collaboration with Indira Gandhi National Centre for the Arts (IGNCA) and Indian Council for Cultural Relations (ICCR). In addition to being addressed by Indian leadership, the conference was attended by over 100 experts from India and abroad. This book is a compilation of the proceedings, presentations and the outcomes of this important event. We hope that this publication would be useful to academics and scholars dealing with diaspora and history of the indentured system.
Madhyakaleen Bharat Islami Rajya Banam Muslim Rajya
- Author Name:
Zafar Raza
- Book Type:

- Description: प्रोफ़ेसर जाफ़र रज़ा की पुस्तक 'मध्यकालीन भारत : इस्लामी राज्य बनाम मुस्लिम राज्य' एक महत्त्वपूर्ण विषय पर एक विशिष्ट कृति है। उन्होंने साक्ष्यों के आधार पर यह प्रदर्शित किया है कि जहाँ इस्लामी राज्य इस्लाम के आदर्शों के अनुकूल राज्य व्यवस्था का नाम है, मुस्लिम राज्य मुसलमान शासकों की राज्य प्रणाली बनाता है। मुस्लिम राज्य साम्राज्यवादी था, जबकि इस्लामी राज्य अल्लाह को शासक मान एक प्रकार का जनतंत्र था, जिसमें धर्म और न्याय के सिद्धान्त माने जाते थे। भारत में मुस्लिम राज्य सर्वदा इस्लामी आदर्शों के अनुकूल नहीं था, वरन् मुसलमान शासकों का साम्राज्यवादी मुस्लिम राज्य था, किन्तु तो भी उसे सदा धर्मान्ध और कट्टर नहीं मानना चाहिए। मुस्लिम जनता का भारत में अन्य जातियों के साथ, एक बड़े देश की जनता के रूप में, सामाजिक और राजनैतिक अवदान प्रस्तुत रहा है। मुस्लिम अवदान के मूल्यांकन में शीआ और सूफ़ियों का अवदान भी महत्त्वपूर्ण रहा है। कुल मिलाकर लेखक ने इस्लाम की सही उदारतापूर्ण तस्वीर प्रस्तुत की है और मुस्लिम राज्य का विवेचनात्मक निरूपण किया है। इसके सामाजिक-सांस्कृतिक अनुषंगों पर पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत है। यह एक नए प्रकार की पुस्तक है, जिससे वर्तमान समस्याओं पर बहुमूल्य प्रकाश पड़ता है।
Mera Lahuluan Punjab
- Author Name:
Khushwant Singh
- Book Type:

-
Description:
बैसाख की पहली तिथि पंजाबी पंचांग के अनुसार नववर्ष दिवस के रूप में मनाई जाती है। इसी दिन 13 अप्रैल, 1978 को जरनैल सिंह भिंडरावाले ने धूम-धड़ाके से पंजाब के रंगमंच पर पदार्पण किया। इस घटना से न केवल पंजाब के जन-जीवन में तूफ़ान आया बल्कि पूरे देश के लिए इसके दूरगामी परिणाम हुए। पूरा पंजाब अशान्त और आतंकवाद के हाथों क्षत-विक्षत हो गया और धीरे-धीरे यह समस्या इतनी पेचीदा बन गई कि देश की अखंडता के लिए यह सचमुच का ख़तरा बनती दिखाई दी। सुप्रसिद्ध लेखक और पत्रकार खुशवंत सिंह की प्रस्तुत पुस्तक सुस्पष्ट रूप से इस समस्या का इतिहास दर्शाती है, स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद पंजाबियों के गिले-शिकवों और असन्तोष का विवरण देती है, और सभी प्रमुख घटनाओं पर रोशनी डालती है।
लेखक का व्यक्तिगत जुड़ाव पुस्तक को विशेष प्रामाणिकता प्रदान करता है, जो लगभग इसके प्रत्येक पृष्ठ पर प्रकट है। इसमें लेखक ने एक तरफ़ पंजाब की राजनीति तथा दूसरी ओर केन्द्र सरकार द्वारा जानबूझकर खेले जानेवाले शरारतपूर्ण राजनीतिक खेलों पर अपने विचार प्रकट किए हैं। इसका परिणाम यह हुआ कि भारत के सबसे उन्नतिशील राज्य की प्रगति के मार्ग में गत्यवरोध आ गया, यहाँ की कृषि और औद्योगिक अर्थव्यवस्था तहस-नहस होने लगी, इसका प्रशासन और न्यायपालिका पंगु बनकर रह गए। जो लोग इस गत्यवरोध को अधिक गहराई से समझना चाहते हैं, उनके लिए यह पुस्तक अवश्य पठनीय है।
Customer Reviews
0 out of 5
Book
Be the first to write a review...