Covid-19 : Sabhyata Ka Sankat Aur Samadhan
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Author:
Kailash SatyarthiPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics₹
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"इस पुस्तक में मैंने कोविड-19 महामारी से उपजे ‘सभ्यता के संकट’ के कारणों, परिणामों और समाधानों की विवेचना करने का प्रयास किया है। मेरा जोर, महामारी से उपजे संकट के तात्कालिक उपायों के अलावा मुख्य रूप से स्थायी समाधानों पर है। ये समाधान करुणा, कृतज्ञता, उत्तरदायित्व और सहिष्णुता के सार्वभौमिक मूल्यों पर आधारित हैं। मैं मानता हूँ कि इन मूल्यों को व्यवहार में लाने के आसान तरीके खोजे जाने चाहिए। उपदेश और उपचार का अलग-अलग महत्त्व होता है। उपदेश आसान होते हैं और उपचार मुश्किल। कोरोना वायरस की वैक्सीन तो देर-सवेर ढूँढ़ ही ली जाएगी और इस महामारी का अंत भी हो जाएगा। लेकिन, समाज की चेतना में लगी बीमारियों को दूर करने के लिए ठीक-ठीक उपचार ढूँढ़कर उन्हें उपयुक्त ढंग से लागू करना होगा। इस पुस्तक में मैंने ऐसे ही कुछ उपचार और समाधान ढँूढ़ने का कोशिश की है। —कैलाश सत्यार्थी "
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"इस पुस्तक में मैंने कोविड-19 महामारी से उपजे ‘सभ्यता के संकट’ के कारणों, परिणामों और समाधानों की विवेचना करने का प्रयास किया है। मेरा जोर, महामारी से उपजे संकट के तात्कालिक उपायों के अलावा मुख्य रूप से स्थायी समाधानों पर है। ये समाधान करुणा, कृतज्ञता, उत्तरदायित्व और सहिष्णुता के सार्वभौमिक मूल्यों पर आधारित हैं। मैं मानता हूँ कि इन मूल्यों को व्यवहार में लाने के आसान तरीके खोजे जाने चाहिए। उपदेश और उपचार का अलग-अलग महत्त्व होता है। उपदेश आसान होते हैं और उपचार मुश्किल। कोरोना वायरस की वैक्सीन तो देर-सवेर ढूँढ़ ही ली जाएगी और इस महामारी का अंत भी हो जाएगा। लेकिन, समाज की चेतना में लगी बीमारियों को दूर करने के लिए ठीक-ठीक उपचार ढूँढ़कर उन्हें उपयुक्त ढंग से लागू करना होगा। इस पुस्तक में मैंने ऐसे ही कुछ उपचार और समाधान ढँूढ़ने का कोशिश की है।
—कैलाश सत्यार्थी
"
Book Details
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ISBN9789390378333
-
Pages128
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Avg Reading Time4 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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- Description: ग्राम सभा, जिसे संविधान के अनुच्छेद 243(बी) में परिभाषित किया गया है, पंचायती राज व्यवस्था में लोकतंत्र का आधार है, जो स्थानीय स्तर पर लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करती है और उन्हें शासन में शामिल करती है
Krishna Ki Leelabhumi : 21vin Sadi Mein Vrindavan
- Author Name:
John Stratton Hawley
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Description:
कृष्ण की लीलाभूमि : 21वीं सदी में वृन्दावन एक अत्यन्त प्यारे स्थान के बारे में है—कई लोग इसे भारत की आध्यात्मिक राजधानी भी कहते हैं। दिल्ली से कोई सौ मील की दूरी पर यमुना नदी के एक नाटकीय मोड़ पर स्थित वृन्दावन वह स्थान है जहाँ माना जाता है कि भगवान कृष्ण ने अपना बचपन और युवावस्था बिताई थी। हिन्दुओं के लिए यह युवावस्था का प्रतीक रहा है—प्रेम और सुन्दरता का एक क्षेत्र जो दुनिया के बोझ और कठोरता को त्यागने में सक्षम बनाता है। हालाँकि, अब दुनिया वृन्दावन को निगल रही है। दिल्ली का महानगरीय फैलाव दिन-ब-दिन करीब आ रहा है—आधा शहर एक विशाल अचल सम्पत्ति के रूप में विकसित हो चुका है—और यमुना का पानी पीने तो क्या नहाने के लिए भी सुरक्षित नहीं है। मन्दिर अब खुद को थीम पार्क के रूप में बदल रहे हैं और कृष्ण के स्वर्गिक चरागाह में दुनिया की सबसे ऊँची धार्मिक इमारत निर्माणाधीन है।
क्या होता है जब एंथ्रोपोसीन युग हर चीज को वर्चुअल बना देता है? क्या होता है जब स्वर्ग को जोता जाता है? हमारे इस पूरे दौर की तरह, वृन्दावन शक्तिशाली ऊर्जा से सराबोर है, लेकिन क्या खतरे के संकेत धीरे-धीरे सामने नहीं आ रहे?
Sanasdeeya Pranali
- Author Name:
Arun Shourie
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- Description: हमारे 99 फीसदी विधायक अल्पमत निर्वाचकों द्वारा चुने जाते हैं, उनमें से कई डाले गए वोटों का महज 15-20 फीसदी वोट पाकर निर्वाचित हो जाते हैं—यह आबादी का बमुश्किल 4-6 फीसदी बैठता है। तो हमारी संसदीय प्रणाली कितनी प्रतिनिधि प्रणाली है? लोकसभा में 39 पार्टियों के साथ, 14 पार्टियों से मिलकर बनी सरकार के साथ, क्या यह प्रणाली मजबूत, संशक्त और प्रभावी सरकारें प्रदान कर रही हैं, जिसकी हमारे देश को जरूरत है? क्या यह प्रणाली ऐसे व्यक्तियों के हाथों में सत्ता सौंप रही है, जिनके पास मंत्रालयों को चलाने की, विधायी प्रस्तावों का आकलन करने की, वैकल्पिक नीतियों का मूल्यांकन करने की क्षमता, समर्पण और निष्ठा है? या यह खराब-से-खराब लोगों को विधायिका और सरकार में ला रही है? जब वे सत्ता में होते हैं तो क्या यह उन्हें लोगों का भला करने के लिए प्रेरित करती है, या यह उन्हें कहती है कि कार्य-प्रदर्शन मायने नहीं रखता है, कि ‘गठबंधनों’ को बनाए रखना कार्य-प्रदर्शन का स्थानापन्न है? क्या यह प्रतिरोधी और बाधा खड़ी करनेवाली राजनीति को अपरिहार्य नहीं बनाती है? इससे पहले कि हम यह निष्कर्ष निकालें कि इस प्रणाली का समय पूरा हो गया है, शासन का कितना पूजन हो, ताकि हमें लगे कि हमें अवश्य ही विकल्प तैयार करना चाहिए? वह विकल्प क्या हो सकता है? तब क्या होता है, जब ये विधायक ‘संप्रभुता’ का दावा करते हैं और उसे अपना बना लेते हैं? न्यायपालिका ने जो बाँध खड़ा किया है—कि संविधान के आधारभूत ढाँचे को बदला नहीं जा सकता— राजनीतिक वर्ग के खिलाफ एक आवश्यक सुरक्षा नहीं है? लेकिन क्या कोई वैकल्पिक प्रणाली तैयार की जा सकती है, जो इस आवश्यक बाँध को तोड़ेगी नहीं, उसका उल्लंघन नहीं करेगी? उस विकल्प का मार्ग कौन प्रशस्त करेगा? उसकी अगुवाई कौन करेगा? इस झुलसानेवाली समालोचना में अरुण शौरी इन सवालों और अन्य मुद्दों को उठाते हैं। हमारे वक्त के लिए अनिवार्य। हमारे देश की दृढता के लिए आवश्यक।
Surgical Strike
- Author Name:
Ish Kumar Gangania
- Book Type:

- Description: "माना जाता है कि कथा-साहित्य का उदय संभवत: कहानी-लेखन से संभव हो सका है। यह भी माना जाता है कि उपन्यास का उदय लंबी कहानियों के लेखन के प्रादुर्भाव के साथ-साथ हुआ है, किंतु कहानी और उपन्यास के बीच जो खास अंतर है, उसे समझने के लिए ज्यादा उलझन का सामना नहीं करना पड़ता। दरअसल कहानी जीवन तथा समाज के किसी विशेष भाग को विश्लेषित करती है, जबकि अर्नेस्ट ए. बेकर ने उपन्यास की परिभाषा देते हुए उसे गद्यबद्ध कथानक के माध्यम द्वारा जीवन तथा समाज की व्याख्या का सर्वोत्तम साधन बताया है। उपन्यास लिखने के पीछे समाज में कुछ ऐसी अप्रिय व हिंसक घटनाओं का बढ़ जाना है, जो लोकतंत्र को सीधे चुनौती देती नजर आती हैं, लेकिन शासन-प्रशासन की गतिविधियाँ इनके निराकरण की अपेक्षा एक प्रकार से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इनका समर्थन करती नजर आती हैं। उपन्यास 'सर्जिकल स्ट्राइक' लोकतंत्र और लोकतांत्रिक मूल्यों के समर्थन में एक जज्बाती जंग है। उपन्यास में पुलवामा के आतंकी हमले की पृष्ठभूमि मौजूद है, यह हकीकत है। उपन्यास का घटनाक्रम फरवरी से मई के पूर्वार्ध 2019 तक सिमटा है। बेहद रोमांचक एवं कथारस से भरपूर एक उपन्यास।"
RASHTRA SAMAJ EVAM CHHATRA (PB)
- Author Name:
Raj Kumar Bhatia
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- Description: शिशुकाल से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सृष्टि में पले-बढ़े लेखक ने अपनी छह दशकों से अधिक की सामाजिक सक्रियता के काल में अनेक प्रकार का लेखन किया, जिसे इस पुस्तक में 5 खंडों में प्रस्तुत किया गया है। “व्यक्तित्व” एवं “राष्ट्र समाज और राजनीति” के खंडों में उनकी वैचारिक भूमि के दर्शन होते हैं। चार दशकों से अधिक की उनकी सक्रियता अखिल भारतीय विध्यार्थी परिषद् में रही; अतः 'शिक्षा' एवं 'छात्र-जगत' के खंडों में उनका सहज चिंतन व्यक्त हुआ है। 'सामाजिक संगठन और कार्यकर्ता' उनकी विशेष रुचि का विषय रहा; इसलिए उस खंड में उनके तत्संबंधी लेख दिए गए हैं। राष्ट्र और समाज के निर्माण एवं विकास में सामाजिक संगठनों और छात्रों की सक्रिय सहभागिता पर प्रकाश डालती विचारोत्तेजक लेखों का पठनीय संकलन।
Samvidhan, Sanskriti Aur Rashtra
- Author Name:
Kalraj Mishra
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