Bharat Ka Swatantrata Sanghrash
Author:
Aditya Mukherjee, Mridula Mukherjee, Bipin ChandraPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics0 Ratings
Price: ₹ 479.2
₹
599
Available
‘भारत का स्वतंत्रता संग्राम’ नामक इस पुस्तक की रचना एक व्यापक रूपरेखा के तहत की गई है। यह एक सुदीर्घ शोधकार्य का नतीजा है, जिसका निर्देशन प्रो. बिपिन चंद्र ने किया। यह शोध केवल संग्रहालयों, निजी व संस्थाओं से प्राप्त सामग्री के आधार पर नहीं किया गया, बल्कि इसमें स्वतंत्रता आन्दोलन के समय के समाचार-पत्रों तथा आन्दोलन में आधार-स्तर पर शामिल रहे लोगों के अनुभवों, उनके साक्षात्कारों का भी उपयोग किया गया है। कह सकते हैं कि भारतीय इतिहास के इस विशिष्ट काल खंड, और उससे भी अधिक उस आन्दोलन के विषय में हमें यहाँ एक प्रचुर तथ्य प्राप्त होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप आज हम एक स्वतंत्र देश के नागरिक हैं।
यह पुस्तक भारत के स्वाधीनता आन्दोलन की उन विशेषताओं को ख़ासतौर पर रेखांकित करती है जिनके चलते यह मुहिम केवल असहमति और नकार की गतिविधि नहीं, बल्कि एक रचनात्मक और भविष्योन्मुखी, व्यापक मानवीय सरोकारों से प्रतिबद्ध सजग कार्रवाई थी।
लोकतंत्र, नागरिक स्वतंत्रता, धर्मनिरपेक्षता, आत्मनिर्भरता, समतावादी समाज-व्यवस्था, स्वतंत्र विदेश नीति, अभिव्यक्ति और संगठन की आज़ादी, समग्र आर्थिक विकास, ग़रीबों की पक्षधरता और व्यापक अन्तरराष्ट्रीय दृष्टिकोण के जिन मूल्यों को आधार बनाकर भारत का स्वाधीनता आन्दोलन चला, और जो स्वतंत्र भारत के आधार-मूल्य बने, उन्हें यह पुस्तक तथ्यों और सन्तुलित विश्लेषण के साथ रेखांकित करती है।
छात्रों के साथ-साथ आधुनिक भारत के इतिहास में रूचि रखने वाले पाठकों के लिए विशेष उपयोगी।
ISBN: 9789360860752
Pages: 512
Avg Reading Time: 17 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Keval Daliton Ke Masiha Nahi Hain Ambedkar
- Author Name:
Sukan Paswan Pragyachakshu
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Description:
बाबा साहब डॉ. अम्बेडकर ने सदियों से सभी तरह के अधिकार एवं सुविधा से वंचित जनसमूहों में यदि चेतना का संचार किया और उन्हें शिक्षित, संगठित होकर संघर्ष करने का मार्ग बताया तो यह उनका दलित-प्रेम नहीं; बल्कि सभी मूल, कुल, वंश, जाति, गोत्र, नस्ल, सम्प्रदाय, वर्ग, वर्ण के अधिकार-वंचितों की सच्ची सेवा का दुर्लभ उदाहरण है। सुविधा तथा अधिकार-वंचित मात्र दलित ही नहीं हैं, वे भी हैं जिनकी उन्नति तथा समृद्धि के सभी मुहानों को उद्धारक कहलाने वाले मायावी मानवों ने अवरुद्ध कर रखा है। इस पुस्तक का प्रणयन डॉ. अम्बेडकर के इन्हीं अवदानों को रेखांकित करने के लिए किया गया है।
श्रम-समस्या, नारी-उत्थान, धर्म, सामाजिक न्याय, उद्योग, कृषि, मानव-संसाधन, जल-संसाधन, बीमा उद्योग, मद्यनिषेध, शिक्षा, लोकतंत्र, कार्यपालिका, न्यायपालिका, व्यवस्थापिका, संघीय शासन प्रणाली, भाषायी प्रान्त और राष्ट्रभाषा आदि विषयों पर डॉ. अम्बेडकर के चिन्तन तथा सिद्धान्त आज भी प्रासंगिक हैं।
पुस्तक में इन विषयों के सन्दर्भ में उनके विचारों पर सविस्तार विचार किया गया है जिससे स्पष्ट होता है कि बाबा साहब के विचार समष्टिभावी हैं, व्यष्टिभावी नहीं।
Delhi Dange : Sazish ka Khulasa
- Author Name:
Aditya Bhardwaj +1
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- Description: सामने आ रहा है, दिल्ली दंगों का सच : धीरे-धीरे ‘अपनी योजना के तहत 24 फरवरी को हमने कई लोगों को बुलाया और उन्हें बताया कि कैसे पत्थर, पेट्रोल बम और एसिड बोतल फेंकने हैं। मैंने अपने परिवार को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया। 24 फरवरी, 2020 को दोपहर करीब 1.30 बजे हमने पत्थर फेंकना शुरू कर दिया।’ आम आदमी पार्टी से निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन के इस बयान को सुनकर वे लोग चौंक सकते हैं जो आम आदमी पार्टी के चरित्र से परीचित नहीं हो। आम आदमी पार्टी ने मसजिदों और मदरसों के अपने अच्छे नेटवर्क और ताहिर हुसैन अमानतुल्ला खान जैसे नेताओं के दम पर ही पूरी दिल्ली के एकएक मुसलमान का वोट हासिल कर लिया था। जिसके बदले में मानों उत्तरपूर्वी दिल्ली को आग में झोंक देने का लाइसेंस समुदाय विशेष को दे दिया था। अब जब उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों पर चार्जशीट दिल्ली पुलिस तैयार कर चुकी है। उसके बाद 23 फरवरी को मौजपुर से भड़के हिंदू विरोधी दंगों को याद करते हुए, जाफराबाद, मौजपुर, बाबरपुर, गोकुलपुरी, करावल नगर, भजनपुरा, यमुना विहार में आग की तरह फैली उस हिंसा को सी.ए.ए. के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा से अलग करके देखना भूल होगी। शाहीन बाग, जामिया नगर, सीलमपुर में सी.ए.ए. के विरोध में फैलाई गई हिंसा, वास्तव में बड़े दंगे का पूर्वाभ्यास ही थी। जिस बड़े दंगे को उत्तरपूर्वी दिल्ली में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आगमन पर 23-26 फरवरी, 2020 तक अंजाम दिया गया। इस हिंसा के लिए 4 फरवरी से ही कई घरों में कबाड़ी से शराब और कोल्ड ड्रिंक की खाली बोतलें, पत्थर लेकर छत पर इकट्ठा करना शुरू कर दिया गया था। मुस्लिम समुदाय ने अपनी गाडि़यों में फुल पेट्रोल, डीजल भरकर रख लिया था ताकि बोतलों में पेट्रोल डीजल भरकर बम की तरह उसे वक्त आने पर इस्तेमाल किया जा सके। मुस्लिम परिवारों में ऐसे परचे दंगों से पहले बाँट दिए गए जिसमें दंगों की स्थिति में हिंदूओं से निपटने की तरकीब लिखी गई थी। इन सारी बातों को देखने के बाद यह समझना कोई रॉकेट साइंस नहीं है कि उत्तर पूर्वी दिल्ली में होनेवाले दंगों के लिए यमुना पार का मुस्लिम समुदाय पहले से तैयार था। जबकि हिंदूओं को इससे सँभलने का बिलकुल मौका नहीं मिला। अब धीरे-धीरे दिल्ली दंगों की साजिश का सच सामने आ रहा है, जिसकी वजह से वामपंथी इको सिस्टम का झूठ चल नहीं पा रहा।
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