Cancer Ki Raat, Asha Ki Subah
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कैंसर रोग से ग्रस्त होने की पहली जानकारी जिस समय किसी स्त्री/पुरुष को मिलती है, उसके लिए उस दिन को भुला पाना संभव नहीं होता। लगभग हर किसी के लिए यह जीवन को बदल देनेवाला क्षण होता है। प्रसिद्ध कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. मीनू वालिया की यह पुस्तक जीवन में वापसी करने और पहले की ही तरह आपको आपके पैरों पर फिर से खड़ा करने में किसी मार्गदर्शक की तरह सहायता करने की क्षमता रखती है। लेखिका कहती हैं, ‘‘मैं ऐसे कई लोगों से मिल चुकी हूँ, उन्हें रोग का पता चलने के दिन रोते देखा है, पर इसके साथ ही इलाज पूरा होने पर उनके खुशी के आँसू भी देखे हैं। यह हिचकोले खाती उन भावनाओं की एक अभिव्यक्ति है, जिनकी मैं गवाह रह चुकी हूँ और उन मरीजों से अपने आप को जुड़ा हुआ महसूस किया है। हम सब अपनी गलतियों से सीखते हैं, लेकिन बुद्धिमान वही होते हैं, जो दूसरों की गलतियों से सबक लेते हैं। यह पुस्तक इलाज के दौरान पैदा होनेवाली भ्रांतियों, भय, सामाजिक लांछन को दूर करने का एक विनम्र प्रयास है। साथ ही, यह भी बताती है कि अंततः परिस्थितियों से कैसे मुकाबला करें और एक विजेता बन जाएँ।’’ कैंसर के भयावह रोग से ग्रस्त होने के बावजूद उसके उपचार के दौरान ‘करणीय-अकरणीय’ (dos & dont’s) बतानेवाली एक व्यावहारिक पुस्तक। यह आपको संबल देगी, आपको इस विपत्तिकाल से पार निकलने में सक्षम बनाएगी।
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कैंसर रोग से ग्रस्त होने की पहली जानकारी जिस समय किसी स्त्री/पुरुष को मिलती है, उसके लिए उस दिन को भुला पाना संभव नहीं होता। लगभग हर किसी के लिए यह जीवन को बदल देनेवाला क्षण होता है।
प्रसिद्ध कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. मीनू वालिया की यह पुस्तक जीवन में वापसी करने और पहले की ही तरह आपको आपके पैरों पर फिर से खड़ा करने में किसी मार्गदर्शक की तरह सहायता करने की क्षमता रखती है। लेखिका कहती हैं, ‘‘मैं ऐसे कई लोगों से मिल चुकी हूँ, उन्हें रोग का पता चलने के दिन रोते देखा है, पर इसके साथ ही इलाज पूरा होने पर उनके खुशी के आँसू भी देखे हैं। यह हिचकोले खाती उन भावनाओं की एक अभिव्यक्ति है, जिनकी मैं गवाह रह चुकी हूँ और उन मरीजों से अपने आप को जुड़ा हुआ महसूस किया है। हम सब अपनी गलतियों से सीखते हैं, लेकिन बुद्धिमान वही होते हैं, जो दूसरों की गलतियों से सबक लेते हैं। यह पुस्तक इलाज के दौरान पैदा होनेवाली भ्रांतियों, भय, सामाजिक लांछन को दूर करने का एक विनम्र प्रयास है। साथ ही, यह भी बताती है कि अंततः परिस्थितियों से कैसे मुकाबला करें और एक विजेता बन जाएँ।’’
कैंसर के भयावह रोग से ग्रस्त होने के बावजूद उसके उपचार के दौरान ‘करणीय-अकरणीय’ (dos & dont’s) बतानेवाली एक व्यावहारिक पुस्तक। यह आपको संबल देगी, आपको इस विपत्तिकाल से पार निकलने में सक्षम बनाएगी।
Book Details
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ISBN9789389982299
-
Pages236
-
Avg Reading Time8 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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