🇮🇳 India’s home-grown full-stack ecosystem for Publishers, Authors, Writers, and Readers. 🎊🎊 Celebrate Your Language, Authors from Your Own Land, with Rachnaye!!! 🎊🎊 Enjoy 🎧 Audiobooks at Rachnaye, download the Rachnaye App from Play Store or App Store

Panch Parivartan: Rashtrotthan Ki Sangh Drishti

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


About the book

"पुस्तक 'पंच परिवर्तन : राष्ट्रोत्थान की संघ दृष्टि' आधुनिक भारत की आकांक्षाओं और भारतीय चिंतन की शाश्वत धारा के बीच सेतु का कार्य करती है। यह स्पष्ट करती है कि विकसित भारत का जो स्वप्न आज 140 करोड़ भारतीय देख रहे हैं, उसकी जड़ें 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के विचारों में अंकुरित हो चुकी थीं। भारतमाता के परम वैभव का जो स्वप्न संघ ने देखा, वही आज विश्वगुरु भारत की आशा और आकांक्षा के रूप में परिलक्षित हो रहा है। संघ शताब्दी सोपान पर इस पुस्तक का केंद्रीय विचार भी पंच परिवर्तन है, जिसमें सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, स्व-जागरण, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्यों की चेतना को राष्ट्रीय उत्थान के पाँच स्तंभों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। पूज्य गुरुजी ने भारत को एक सांस्कृतिक जीवसत्ता के रूप में देखा, जो अखंड, अविनाशी और धर्म-आधारित राष्ट्र है। उनके लिए देशभक्ति मात्र भौगोलिक निष्ठा न होकर राष्ट्र के सांस्कृतिक लक्ष्य के प्रति आध्यात्मिक समर्पण थी। आज पंच परिवर्तन का यह विचार इसी भाव को और पुष्ट करते हुए न केवल भारत अपितु वैश्विक स्तर पर मुँह बाए खड़ी चुनौतियों व समस्याओं का भी निदान प्रस्तुत करेगा।"

Read more

₹ 500

₹ 400 20% off

Available

Rachnaye membership

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format

Frequently bought together
Panch Parivartan: Rashtrotthan Ki Sangh Drishti This book ₹400
Heeron Ki Kheti Russell H. Conwell ₹95
3 books selected ₹945 ₹845

100% Original

Fast Dispatch

Secure Payment

About the Book

"पुस्तक 'पंच परिवर्तन : राष्ट्रोत्थान की संघ दृष्टि' आधुनिक भारत की आकांक्षाओं और भारतीय चिंतन की शाश्वत धारा के बीच सेतु का कार्य करती है। यह स्पष्ट करती है कि विकसित भारत का जो स्वप्न आज 140 करोड़ भारतीय देख रहे हैं, उसकी जड़ें 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के विचारों में अंकुरित हो चुकी थीं। भारतमाता के परम वैभव का जो स्वप्न संघ ने देखा, वही आज विश्वगुरु भारत की आशा और आकांक्षा के रूप में परिलक्षित हो रहा है।

संघ शताब्दी सोपान पर इस पुस्तक का केंद्रीय विचार भी पंच परिवर्तन है, जिसमें सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, स्व-जागरण, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक कर्तव्यों की चेतना को राष्ट्रीय उत्थान के पाँच स्तंभों के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

पूज्य गुरुजी ने भारत को एक सांस्कृतिक जीवसत्ता के रूप में देखा, जो अखंड, अविनाशी और धर्म-आधारित राष्ट्र है। उनके लिए देशभक्ति मात्र भौगोलिक निष्ठा न होकर राष्ट्र के सांस्कृतिक लक्ष्य के प्रति आध्यात्मिक समर्पण थी। आज पंच परिवर्तन का यह विचार इसी भाव को और पुष्ट करते हुए न केवल भारत अपितु वैश्विक स्तर पर मुँह बाए खड़ी चुनौतियों व समस्याओं का भी निदान प्रस्तुत करेगा।"

Book details

Fast dispatchShips within 48 hours
Secure paymentOnline, or cash on delivery on eligible orders
100% OriginalGenuine copy from Prabhat Prakashan
Format
Paperback
Publisher
Prabhat Prakashan
Weight
400 grams
ISBN-13
9788199335653
Pages
256
Reading time
~9 hrs
Age
18+
Country of origin
IN
Dimensions
16 × 21 cm
Language
Hindi

Recommended for you

Customer reviews

Be the first to write a review

Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.

Panch Parivartan: Rashtrotthan Ki Sangh Drishti establishes an intellectual bridge between Dr. Keshav Baliram Hedgewar's foundational ideas in 1925 and the contemporary aspiration of a Viksit Bharat shared by 140 crore Indians today. Published as the RSS approaches its centenary milestone, this work argues that the vision of Bharat Mata's supreme glory, conceived a century ago, now manifests as the nation's collective hope to reclaim its position as Vishwa Guru. The book's central thesis revolves around five transformations—panch parivartan—that the Sangh philosophy prescribes for national resurgence. By anchoring modern developmental discourse in the continuity of Indian civilisational thought, it offers a lens through which political aspiration and cultural identity converge. Each transformation is examined not as policy prescription but as a reimagining of collective purpose rooted in timeless principles.

यह पुस्तक पढ़कर मुझे किस तरह का अनुभव मिलेगा?

यह पुस्तक आपको वैचारिक यात्रा पर ले जाती है, जहाँ आप भारतीय राष्ट्रवाद की जड़ों को समझते हुए आधुनिक राजनीतिक आकांक्षाओं से जुड़ेंगे। इसका स्वर गंभीर और चिंतनशील है, जो पाठक को प्रेरित करता है कि वे राष्ट्र के सांस्कृतिक और सामाजिक परिवर्तन को गहराई से समझें। यह तेज़-तर्रार कथा नहीं, बल्कि एक दार्शनिक संवाद है।

यह पुस्तक किस तरह के पाठकों के लिए उपयुक्त है और इससे क्या अपेक्षाएँ रखनी चाहिए?

  • जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दर्शन और इतिहास को समझना चाहते हैं
  • राजनीतिक विचारधाराओं और सांस्कृतिक पुनर्जागरण में रुचि रखने वाले
  • जो विकसित भारत के स्वप्न की वैचारिक पृष्ठभूमि जानना चाहते हैं
  • भारतीय चिंतन परंपरा और समकालीन राजनीति के बीच संबंध खोजने वाले गंभीर पाठक

इस पुस्तक का विषय आज के भारतीय पाठकों के लिए सांस्कृतिक या ऐतिहासिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?

जब भारत वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है और विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य रख रहा है, तब यह पुस्तक उस आकांक्षा की वैचारिक जड़ों को उजागर करती है। यह दिखाती है कि आज की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा किस तरह एक सदी पुरानी सांस्कृतिक दृष्टि से जुड़ी है, जो समकालीन भारतीय पहचान और राजनीतिक चेतना को समझने के लिए आवश्यक है।

इस विषय पर लेखक का दृष्टिकोण क्या विशिष्ट बनाता है?

लेखक डॉ. हेडगेवार के 1925 के विचारों को सीधे आज के विकसित भारत के स्वप्न से जोड़ते हुए ऐतिहासिक निरंतरता स्थापित करते हैं। संघ शताब्दी के संदर्भ में पंच परिवर्तन का विश्लेषण करते हुए, वे आधुनिक विकास को शाश्वत भारतीय चिंतन धारा में स्थापित करते हैं, जो इस पुस्तक को केवल ऐतिहासिक वर्णन से आगे ले जाता है।

इस पुस्तक को पढ़ने के बाद पाठक के मन में क्या रह जाता है—भावनात्मक, बौद्धिक या सांस्कृतिक रूप से?

  • राष्ट्रीय आकांक्षाओं की गहरी वैचारिक समझ
  • सांस्कृतिक पहचान और राजनीतिक विकास के बीच संबंध की स्पष्टता
  • यह अनुभूति कि आज का भारत किस विरासत को आगे बढ़ा रहा है
  • सामूहिक उद्देश्य और परिवर्तन की दिशा में नई जागरूकता

View on Rachnaye →

Offers

Loading offers…

whatsapp