🇮🇳 India’s home-grown full-stack ecosystem for Publishers, Authors, Writers, and Readers. 🎊🎊 Celebrate Your Language, Authors from Your Own Land, with Rachnaye!!! 🎊🎊 Enjoy 🎧 Audiobooks at Rachnaye, download the Rachnaye App from Play Store or App Store

Champaran Andolan 1917

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


About the book

चंपारन की संघर्ष-कथा जिस प्रकार राजकुमार शुक्ल के बिना पूरी नहीं हो सकती, उसी प्रकार ‘प्रताप’ के बिना भी पूरी नहीं हो सकती। ‘प्रताप’ ही वह पत्र है, जिसने पहली बार मोहनदास करमचंद गांधी को ‘महात्मा’ कहा था। 4 जनवरी, 1915 के अंक में ‘प्रताप’ ने चंपारन की पीड़ा सुनाते हुए कहा, ‘‘देश के एक भाग के सीधे-सादे शांतिप्रिय आदमियों की यह हालत है। विदेशों में भारतवासियों पर जो अत्याचार हुआ या हो रहा है, वह इस अत्याचार के मुकाबले में अधिक नहीं है।...बाहर के अत्याचार की जड़ उखाड़ फेंकने से घर के इस अँधेरे को दूर करना अधिक हितकर है। निःसंदेह जो अपनी सहायता आप नहीं करता, उसकी सहायता मनुष्य तो दूर रहा, परमात्मा भी नहीं करता। बिहार में क्रियाशीलता की कमी है, पर हम इस बात को कदापि नहीं भूल सकते कि च्यूँटी में भी दम है और बहुत तंग किए जाने पर वह काट खाती है।’’ महेश्वर प्रसाद के ‘बिहारी’ पत्र से विदा होने के पश्चात् चंपारन के दुःख को देश-दुनिया को सुनाने का दायित्व ‘प्रताप’ ने सँभाल लिया। ‘प्रताप’ को गांधी अपने सिद्धांत, व्यवहार, करुणा एवं परदुःखकातरता के लिए ‘प्रिय’ थे तो ‘चंपारन’ अपनी ‘ट्रेजडी’ के कारण। इस पुस्तक में ‘प्रताप’, ‘अभ्युदय’, ‘भारतमित्र’, ‘द बिहार हेराल्ड’, ‘हितवाद’, ‘पायोनियर’ जैसे पत्रों में प्रकाशित चंपारन से संबंधित समाचार-रिपोर्ट आदि संकलित हैं। चंपारन की अंतर्कथा को प्रामाणिकता से समझने के लिए यह प्राथमिक स्रोत है। निस्संदेह, भारतीय इतिहास के इस महत्त्वपूर्ण अध्याय को पढ़ने-समझने के लिए ‘चंपारन आंदोलन 1917’ एक पठनीय एवं संग्रहणीय पुस्तक है।

Read more

₹ 600

480 20% off

Unavailable

Rachnaye membership

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format

This Book is out of stock
Frequently bought together
Champaran Andolan 1917 This book ₹480
Rajneeti Aur Naitikta Ashutosh Partheshwar ₹500
Let The Heart Lead Priyal Bansal ₹120
3 books selected ₹1,220 ₹1,100
This Book is out of stock

100% Original

Fast Dispatch

Secure Payment

About the Book

चंपारन की संघर्ष-कथा जिस प्रकार राजकुमार शुक्ल के बिना पूरी नहीं हो सकती, उसी प्रकार ‘प्रताप’ के बिना भी पूरी नहीं हो सकती। ‘प्रताप’ ही वह पत्र है, जिसने पहली बार मोहनदास करमचंद गांधी को ‘महात्मा’ कहा था।
4 जनवरी, 1915 के अंक में ‘प्रताप’ ने चंपारन की पीड़ा सुनाते हुए कहा, ‘‘देश के एक भाग के सीधे-सादे शांतिप्रिय आदमियों की यह हालत है। विदेशों में भारतवासियों पर जो अत्याचार हुआ या हो रहा है, वह इस अत्याचार के मुकाबले में अधिक नहीं है।...बाहर के अत्याचार की जड़ उखाड़ फेंकने से घर के इस अँधेरे को दूर करना अधिक हितकर है। निःसंदेह जो अपनी सहायता आप नहीं करता, उसकी सहायता मनुष्य तो दूर रहा, परमात्मा भी नहीं करता। बिहार में क्रियाशीलता की कमी है, पर हम इस बात को कदापि नहीं भूल सकते कि च्यूँटी में भी दम है और बहुत तंग किए जाने पर वह काट खाती है।’’
महेश्वर प्रसाद के ‘बिहारी’ पत्र से विदा होने के पश्चात् चंपारन के दुःख को देश-दुनिया को सुनाने का दायित्व ‘प्रताप’ ने सँभाल लिया। ‘प्रताप’ को गांधी अपने सिद्धांत, व्यवहार, करुणा एवं परदुःखकातरता के लिए ‘प्रिय’ थे तो ‘चंपारन’ अपनी ‘ट्रेजडी’ के कारण।
इस पुस्तक में ‘प्रताप’, ‘अभ्युदय’, ‘भारतमित्र’, ‘द बिहार हेराल्ड’, ‘हितवाद’, ‘पायोनियर’ जैसे पत्रों में प्रकाशित चंपारन से संबंधित समाचार-रिपोर्ट आदि संकलित हैं। चंपारन की अंतर्कथा को प्रामाणिकता से समझने के लिए यह प्राथमिक स्रोत है। निस्संदेह, भारतीय इतिहास के इस महत्त्वपूर्ण अध्याय को पढ़ने-समझने के लिए ‘चंपारन आंदोलन 1917’ एक पठनीय एवं संग्रहणीय पुस्तक है।

Book details

Fast dispatchShips within 48 hours
Secure paymentOnline, or cash on delivery on eligible orders
100% OriginalGenuine copy from Prabhat Prakashan
Format
Hardbound
Publisher
Prabhat Prakashan
Weight
681 grams
ISBN-13
9789389982718
Pages
296
Reading time
~10 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 21.5 cm
Language
Hindi

Recommended for you

Customer reviews

Be the first to write a review

Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.

Offers

Loading offers…

whatsapp