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Prem Ek Paltu Billi

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‘प्रेम एक पालतू बिल्ली’ की कहानियों में उदासी से भरी कायनात की गहरी तफ़सीलें चली आई हैं और इस दुनिया के जोखिम भरे अनुभव, उनके यथार्थ-बोध का हिस्सा बनते गए हैं। इनमें दर्ज हुए विषाद की वजह खोजें तो वहाँ हमें, भीतर-बाहर से जूझती हुई ज़िन्दगी मिलेगी। स्त्री-पुरुष दोनों के किरदार, अपनी रूह में जागे हुए-से शैतानी फ़ितरतों से मुकाबले में दिखाई देंगे। तब ‘शैतानी तुरही’ जैसी कहानी में उभर आए अँधेरे, कीच और लीच ही नहीं बल्कि गहन अकेलेपन को भी आप बहुत सारे सवालों की नींव उधेड़ते हुए महसूस करेंगे। ये कहानियाँ जीवन में पैवस्त हुए नैतिक-अनैतिक से कहीं अधिक मनुष्य होने के ज़रूरी आधारों को पुकारती हैं। इस तरह वे इनसानी रूह को रोगिल बना देने पर आमादा हुए अँधेरे के ज़हर से टकरा रही हैं और यह ज़हर कई रंग का है, किन्तु जहाँ भी है, दारुण है। इसके भीतर जीवन को अवरुद्ध करने वाला पतन है, असम्भव क़िस्म की वारदातें हैं, जीवन की सुन्दरताओं को नष्ट कर जाने वाला पाप-बोध का विषैला पुष्प है, और है मनुष्यता की ओर से जारी हुई एक अनवरत जिरह, जो न होती तो ये कहानियाँ अधूरी रह जातीं। निधि अग्रवाल की कहानियाँ, यथार्थ के प्रचलित इलाक़ों की कहानियाँ नहीं हैं और न ही शिल्प की ज़रा-सी भी सुस्ती इन्हें मंज़ूर है। ये जीवन के भीतर और बाहर को शिद्दत-भरी संवेदनशीलता में रचने में कामयाब हुई कहानियाँ हैं, जिनकी भाषा के भीतर झाँकने वाली ख़ूबी बेजोड़ है।

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‘प्रेम एक पालतू बिल्ली’ की कहानियों में उदासी से भरी कायनात की गहरी तफ़सीलें चली आई हैं और इस दुनिया के जोखिम भरे अनुभव, उनके यथार्थ-बोध का हिस्सा बनते गए हैं। इनमें दर्ज हुए विषाद की वजह खोजें तो वहाँ हमें, भीतर-बाहर से जूझती हुई ज़िन्दगी मिलेगी। स्त्री-पुरुष दोनों के किरदार, अपनी रूह में जागे हुए-से शैतानी फ़ितरतों से मुकाबले में दिखाई देंगे। तब ‘शैतानी तुरही’ जैसी कहानी में उभर आए अँधेरे, कीच और लीच ही नहीं बल्कि गहन अकेलेपन को भी आप बहुत सारे सवालों की नींव उधेड़ते हुए महसूस करेंगे।

ये कहानियाँ जीवन में पैवस्त हुए नैतिक-अनैतिक से कहीं अधिक मनुष्य होने के ज़रूरी आधारों को पुकारती हैं। इस तरह वे इनसानी रूह को रोगिल बना देने पर आमादा हुए अँधेरे के ज़हर से टकरा रही हैं और यह ज़हर कई रंग का है, किन्तु जहाँ भी है, दारुण है। इसके भीतर जीवन को अवरुद्ध करने वाला पतन है, असम्भव क़िस्म की वारदातें हैं, जीवन की सुन्दरताओं को नष्ट कर जाने वाला पाप-बोध का विषैला पुष्प है, और है मनुष्यता की ओर से जारी हुई एक अनवरत जिरह, जो न होती तो ये कहानियाँ अधूरी रह जातीं।

निधि अग्रवाल की कहानियाँ, यथार्थ के प्रचलित इलाक़ों की कहानियाँ नहीं हैं और न ही शिल्प की ज़रा-सी भी सुस्ती इन्हें मंज़ूर है। ये जीवन के भीतर और बाहर को शिद्दत-भरी संवेदनशीलता में रचने में कामयाब हुई कहानियाँ हैं, जिनकी भाषा के भीतर झाँकने वाली ख़ूबी बेजोड़ है।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
2nd
Publication year
2025
Weight
250 grams
ISBN-13
9789360865757
Pages
224
Reading time
~7 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
13 × 20 cm
Language
Hindi

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