Pankh Se Chhuta
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प्रज्ञा पांडेय के इस उपन्यास में वल्लरी और उसकी बेटी अन्ना की यह कथा सिर्फ़ माँ-बेटी की कथा नहीं है। मानवीय संबंधों के सर्पिल पेंचदार गलियों से गुजरती इस कथा में मन के अनगिन गवाक्ष हैं और इन गवाक्षों में छिपा जीवन पाठकों को विलक्षण जीवनानुभव सौंपता है। प्रेम में चोटिल होने के बावजूद वल्लरी अपने गर्भ की रक्षा करती है और अन्ना को जन्म देती है। वह इसे अपने लिए केवल प्रकृति का उपहार नहीं मानती, बल्कि स्त्री-जीवन की गरिमा की रक्षा के लिए लिया गया निर्णय मानती है. अन्ना का जन्म उसके अंतःकरण को नई शक्ति देता है.
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प्रज्ञा पांडेय के इस उपन्यास में वल्लरी और उसकी बेटी अन्ना की यह कथा सिर्फ़ माँ-बेटी की कथा नहीं है। मानवीय संबंधों के सर्पिल पेंचदार गलियों से गुजरती इस कथा में मन के अनगिन गवाक्ष हैं और इन गवाक्षों में छिपा जीवन पाठकों को विलक्षण जीवनानुभव सौंपता है। प्रेम में चोटिल होने के बावजूद वल्लरी अपने गर्भ की रक्षा करती है और अन्ना को जन्म देती है। वह इसे अपने लिए केवल प्रकृति का उपहार नहीं मानती, बल्कि स्त्री-जीवन की गरिमा की रक्षा के लिए लिया गया निर्णय मानती है. अन्ना का जन्म उसके अंतःकरण को नई शक्ति देता है.
Book Details
-
ISBNshivna20252
-
Pages166
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age11-18 yrs
-
Country of OriginIndia
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