Hindi Kahani
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Author:
Rajeev kumar, Rajiv KumarPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Contemporary-fiction₹
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यूजीसी (नेट/जेआरएफ) पाठ्यक्रम पर आधारित हिंदी कहानियों का संग्रह|
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About the Book
यूजीसी (नेट/जेआरएफ) पाठ्यक्रम पर आधारित हिंदी कहानियों का संग्रह|
Book Details
-
ISBN9788199312241
-
Pages336
-
Avg Reading Time11 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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‘तुम याद आओगे लीलाराम’ संग्रह वरिष्ठ कवि-कथाकार प्रकाश मनु की इधर लिखी गई, नई और ताजा कहानियों का संग्रह है। बिल्कुल अलहदा ढंग की कथन-शैली और गहरी मर्म पुकार लिये ये कहानियाँ अपनी अद्भुत किस्सागोई और अनौपचारिक लहजे के कारण अलग पहचान में आती हैं। सच तो यह है कि ‘तुम याद आओगे लीलाराम’ संग्रह प्रकाश मनुजी की कथा-यात्रा में एक सार्थक मोड़ की तरह है, और एक साथ कई विशेषताओं के कारण जाना जाएगा। संग्रह की कहानियाँ जिंदगी में इस कदर गहरे धँसकर अपनी बात कहती हैं कि पाठक चकित हुआ सा, खुद को अपनी तकलीफों, समूची वेदनाओं और आत्मिक द्वंद्वों के साथ इनमें पूरी तरह उपस्थित पाता है। लेखक और पाठक का इतना गहन तादात्म्य हिंदी कहानी के मौजूदा परिदृश्य में एक विरल चीज है। फिर अपने ही ढंग के ?विशिष्ट कथाकार प्रकाश मनुजी की ये कहानियाँ अकसर बतकही के-से अंदाज में अपनी बात कहती हैं। इनमें कविता सरीखी मर्म पुकार है तो आत्मकथा सरीखा निजत्व भी। कहानी और जिंदगी के फासलों को पाटनेवाली ये सादा और पुरअसर कहानियाँ अगर प्रेमचंद और मटियानी सरीखे दिग्गजों की याद दिलाएँ, तो कोई हैरत की बात नहीं। उम्मीद है, प्रकाश मनु की इन कहानियों की ताजगी पाठकों के दिलों में कभी फीकी न पड़नेवाली एक अलग छाप छोड़ेगी। और एक बार पढ़ने के बाद वे इन्हें कभी भूल नहीं पाएँगे।
Kargil Ke Paramvir Captain Vikram Batra
- Author Name:
G.L. Batra
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मैं या तो जीत का भारतीय तिरंगा लहराकर लौटूँगा या उसमें लिपटा हुआ आऊँगा, पर इतना निश्चित है कि मैं आऊँगा जरूर।’ कैप्टन बत्रा ने अपने साथी को यह कहकर किनारे धकेल दिया कि तुम्हें अपने परिवार की देखभाल करनी है और अपने सीने पर गोलियाँ झेल गए। कैप्टन बत्रा 7 जुलाई, 1999 को कारगिल युद्ध में अपने देश के लिए लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। बेहद कठिन चुनौतियों और दुर्गम इलाके के बावजूद, विक्रम ने असाधारण व्यक्तिगत वीरता तथा नेतृत्व का परिचय देते हुए पॉइंट 5140 और 4875 पर फिर से कब्जा जमाया। उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। विक्रम मात्र 24 वर्ष के थे। ‘कारगिल के परमवीर : कैप्टन विक्रम बत्रा’ में उनके पिताजी जी.एल. बत्रा ने अपने बेटे के जीवन की प्रेरणाप्रद घटनाओं का वर्णन किया है और उनकी यादों को फिर से ताजा किया है। उन्होंने आनेवाली पीढि़यों में जोश भरने और वर्दी धारण करनेवाले पुरुषों के कठोर जीवन का उल्लेख भी किया है।
Ramesh Pokhriyal ‘Nishank’ Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Ramesh Pokhriyal 'Nishank'
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रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ जी का साहित्य में एक महत्त्वपूर्ण स्थान है। समय और समाज की विद्रूपता को रेखांकित करना, विसंगतियों को उकेरना और विषमताओं पर कलम चलाना, निशंकजी के साहित्य सृजन का एक ऐसा पक्ष है, जो साहित्य को आमजन का साहित्य बनाता है। निशंकजी की कहानियों में समाहित यथार्थ एक बदली हुई रचनाशीलता का गहरा अहसास कराता है। ये कहानियाँ हर्ष, विषाद, सुख, दुःख, संघर्ष और जिजीविषा की कहानियाँ हैं। इन कहानियों में मानव-मन की उन अतल गहराइयों को नाप लेने की ताकत भी दिखलाई देती है, जिन्हें पाकर कोई भी लेखक ‘लेखक’ हो जाने का विश्वास सँजो सकता है। कोमल शरीर और सबल आत्मा की ये कहानियाँ पढ़कर विश्वास हो जाता है कि लेखक के पास केवल आज की भयावह दुनिया का सच ही नहीं है, बल्कि उस सच को काटने के लिए पैनी कलम भी है। इस संग्रह की कहानियाँ रचनाशीलता के तथाकथित साँचों को तोड़ते हुए अत्यंत सरल भाषा और वाक्य-विन्यास से भाषावादी तराश और पच्चीकारी को नकारती हैं। भाषा से अलग तंत्र, व्यवस्था, समाज और मनुष्य की निपट निरीहता को जितने सही संदर्भों में लेखक ने समझा है, उनकी वह चेतना और जागरूकता कहानी के स्तर पर हमें दंशित करती है और हमारी नागरिक तथा सामाजिक चेतना को बुरी तरह आहत भी करती है
Ramesh Pokhriyal ‘Nishank’ Ki Lokpriya Kahaniyan
Ramesh Pokhriyal 'Nishank'
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