Vikram Aur Vetaal Stories Hindi Translation of The Return of Vikram And Betaal
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Author:
Sunita Pant BansalPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Contemporary-fiction₹
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क्या जीवन आपको दूसरा मौका देता है वो भी बार-बार ? जस्टिस विक्रम अपने कॅरियर के शिखर पर हैं, जब दूत यानी यमराज उनसे मिलने आता है। धरती पर विक्रम का समय पूरा हो चुका है, लेकिन दूत सौदे के रूप में एक प्रस्ताव रखता है। विक्रम को कुछ उलझे मुकदमों को सुलझाना है। अगर दूत उनके फैसले को स्वीकार कर लेता है, तो विक्रम को जीने का एक नया मौका मिल जाएगा तब तक, जब तक कि दूत उन्हें दूसरा केस नहीं दे देता है। अगर विक्रम सही फैसले पर नहीं पहुँचे, तो उन्हें दूत के साथ जाना पड़ेगा। ये मुकदमे असामान्य, अकसर अप्रत्याशित फैसलों वाले वास्तविक आपराधिक मामलों पर आधारित हैं, जिन्हें सुलझाते हुए विक्रम अपने सगे-संबंधियों के साथ रिश्तों पर फिर से विचार करता है और उन गाँठों को सुलझाता है, जिन्होंने उन्हें जीवन से बाँध रखा है। अपने आप पर जस्टिस विक्रम का अंतिम फैसला क्या होगा ? जस्टिस विक्रम और दूत को विक्रम और वेताल के नए अवतार में पढ़ें।
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क्या जीवन आपको दूसरा मौका देता है वो भी बार-बार ?
जस्टिस विक्रम अपने कॅरियर के शिखर पर हैं, जब दूत यानी यमराज उनसे मिलने आता है। धरती पर विक्रम का समय पूरा हो चुका है, लेकिन दूत सौदे के रूप में एक प्रस्ताव रखता है।
विक्रम को कुछ उलझे मुकदमों को सुलझाना है। अगर दूत उनके फैसले को स्वीकार कर लेता है, तो विक्रम को जीने का एक नया मौका मिल जाएगा तब तक, जब तक कि दूत उन्हें दूसरा केस नहीं दे देता है। अगर विक्रम सही फैसले पर नहीं पहुँचे, तो उन्हें दूत के साथ जाना पड़ेगा। ये मुकदमे असामान्य, अकसर अप्रत्याशित फैसलों वाले वास्तविक आपराधिक मामलों पर आधारित हैं, जिन्हें सुलझाते हुए विक्रम अपने सगे-संबंधियों के साथ रिश्तों पर फिर से विचार करता है और उन गाँठों को सुलझाता है, जिन्होंने उन्हें जीवन से बाँध रखा है। अपने आप पर जस्टिस विक्रम का अंतिम फैसला क्या होगा ?
जस्टिस विक्रम और दूत को विक्रम और वेताल के नए अवतार में पढ़ें।
Book Details
-
ISBN9789355621405
-
Pages224
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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मीरा जायसवाल का बचपन और किशोरावस्था उत्तर प्रदेश के कस्बे, शहरों और गंगा की लहरों पर किलोल करते हुए बीता। उनकी रगों में कस्बाई भाषा, संस्कृति, मुहावरे और कजरी बसी हैं। बंसीलाल, अनंतलाल, प्रकाशवती, लता, स्वर्णा और नन्ही फूआ इसी मिट्टी से जुड़े किरदार हैं। नन्ही फूआ की बाल-सुलभ नादानी या बाल-विवाह जैसी कुरीतियों के कारण अच्छे दिनों ने साथ भले ही छोड़ दिया हो, पर कभी न खत्म होनेवाला पश्चात्ताप हमेशा उनका सहचर बना रहा। बंशीलाल, अनंतलाल, प्रकाशवती ऐसे किरदार हैं, जिन्होंने विलायत से उच्च शिक्षा प्राप्त की। सभी प्रतिष्ठित और धनाढ्य वर्ग के इन किरदारों के निजी जीवन का बदरंग चेहरा भी इसी कस्बाई मिट्टी से गढ़ा है। दीर्घायु और खिलाड़ी के जीवन का नीरजा के व्यक्तित्व पर इतना गहरा असर पड़ा कि जीवन भर बात-बात पर कहकहे लगानेवाली, लेकिन किसी भी प्रेमपत्र को देखकर आपे से बाहर हो जानेवाली उनकी अविश्वसनीय एवं नितांत विरोधी प्रवृत्ति लोगों की समझ से परे थी। स्विट्जरलैंड में रहने के बाद मीरा जायसवाल को फ्रेंच, जर्मन, इटैलियन और बेनेजुयेलियन संस्कृति को भी देखने-जानने का अवसर मिला। फ्रोसुआ, इसी स्विट्जरलैंड के रनो शहर के इर्द-गिर्द बसा एक किरदार है। अपने निष्कलुष, निश्छल और बाल-सुलभ चरित्र के बाँकपन के साथ वह भी यहाँ उपस्थित है। ‘येनांगविकारः’ कहानी किन्नरों के जीवन की उन परतों को उधेड़ती है, जिनसे हम कभी रूबरू हुए ही नहीं। इस कहानी के किरदार लता और मोहित उन अपराधों का दंड भुगत रहे हैं, जो उन्होंने किया ही नहीं, जबकि स्वर्णा अपनी झोली में आए उस अप्रत्याशित हर्ष के साथ हैं, जो किसी किन्नर के लिए अकल्पनीय है। अनुक्रम भूमिका—7 आभार—9 1. येनांगविकार: 2. सजनवा बैरी हो गए हमार—41 3. जोड़ियाँ जग थोड़ियाँ —64 4. समरथ को नहिं दोष गुसाईं?—80 5. मेरा सिनेमाई खत—99 6. सफरगाथा गोलगप्पों की —130 7. मिशियो फ्रोंसुआ शोजों —137 8. सराहना तेरो कितनो नाम!—156
Kargil Ke Paramvir Captain Vikram Batra
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G.L. Batra
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मैं या तो जीत का भारतीय तिरंगा लहराकर लौटूँगा या उसमें लिपटा हुआ आऊँगा, पर इतना निश्चित है कि मैं आऊँगा जरूर।’ कैप्टन बत्रा ने अपने साथी को यह कहकर किनारे धकेल दिया कि तुम्हें अपने परिवार की देखभाल करनी है और अपने सीने पर गोलियाँ झेल गए। कैप्टन बत्रा 7 जुलाई, 1999 को कारगिल युद्ध में अपने देश के लिए लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। बेहद कठिन चुनौतियों और दुर्गम इलाके के बावजूद, विक्रम ने असाधारण व्यक्तिगत वीरता तथा नेतृत्व का परिचय देते हुए पॉइंट 5140 और 4875 पर फिर से कब्जा जमाया। उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। विक्रम मात्र 24 वर्ष के थे। ‘कारगिल के परमवीर : कैप्टन विक्रम बत्रा’ में उनके पिताजी जी.एल. बत्रा ने अपने बेटे के जीवन की प्रेरणाप्रद घटनाओं का वर्णन किया है और उनकी यादों को फिर से ताजा किया है। उन्होंने आनेवाली पीढि़यों में जोश भरने और वर्दी धारण करनेवाले पुरुषों के कठोर जीवन का उल्लेख भी किया है।
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