Bhagirathi
(0)
Author:
Jagdish Prasad SinghPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Contemporary-fiction₹
595
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“हर दस-पन्द्रह मिनटों में पचास-सौ लोगों की भीड़ जमा हो जाती। तब प्रेमशंकर कुर्मी से खड़ा हो जाता और उन्हें सम्बोधित करता- भाइयो और बहनो, आज हमारा देश एक महान् संकट में पड़ा है। हमारा पवित्र हिमालय आज घायल है, और उत्तर दिशा से पापी दुश्मन हमारी मातृभूमि को कैद करने का प्रयास कर रहा है। भाइयो और बहनो, हम यह कदापि नहीं होने देंगे। हम दुर्योधन की बाँहें काटकर द्रौपदी की मर्यादा की रक्षा करेंगे। हम अपना सर्वस्व देकर दुश्मनों को मातृभूमि से खदेड़ेंगे। आज हमारे सैनिकों को हथियार की जरूरत है। उन्हें बन्दूक चाहिए, तोप चाहिए, बम चाहिए, टैंक और हवाई जहाज चाहिए। हम अपने सारे गहने, सारा सोना-चाँदी, बेचकर अपने सैनिकों के लिए अच्छे-से-अच्छे हथियार खरीदेंगे ताकि वे विदेशियों को अपनी पवित्र मातृभूमि की सीमा से बाहर खदेड़ सकें। आप के बीच एक वीरांगना ने प्रण किया है कि वह तब तक प्रतिदिन सिर्फ एक शाम खाना खाएगी जब तक एक-एक विदेशी इस देश की धरती से खदेड़ नहीं दिया जाता। ” —इसी पुस्तक से
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“हर दस-पन्द्रह मिनटों में पचास-सौ लोगों की भीड़ जमा हो जाती। तब प्रेमशंकर कुर्मी से खड़ा हो जाता और उन्हें सम्बोधित करता- भाइयो और बहनो, आज हमारा देश एक महान् संकट में पड़ा है। हमारा पवित्र हिमालय आज घायल है, और उत्तर दिशा से पापी दुश्मन हमारी मातृभूमि को कैद करने का प्रयास कर रहा है। भाइयो और बहनो, हम यह कदापि नहीं होने देंगे। हम दुर्योधन की बाँहें काटकर द्रौपदी की मर्यादा की रक्षा करेंगे। हम अपना सर्वस्व देकर दुश्मनों को मातृभूमि से खदेड़ेंगे। आज हमारे सैनिकों को हथियार की जरूरत है। उन्हें बन्दूक चाहिए, तोप चाहिए, बम चाहिए, टैंक और हवाई जहाज चाहिए। हम अपने सारे गहने, सारा सोना-चाँदी, बेचकर अपने सैनिकों के लिए अच्छे-से-अच्छे हथियार खरीदेंगे ताकि वे विदेशियों को अपनी पवित्र मातृभूमि की सीमा से बाहर खदेड़ सकें। आप के बीच एक वीरांगना ने प्रण किया है कि वह तब तक प्रतिदिन सिर्फ एक शाम खाना खाएगी जब तक एक-एक विदेशी इस देश की धरती से खदेड़ नहीं दिया जाता। ”
—इसी पुस्तक से
Book Details
-
ISBN9788197802256
-
Pages128
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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