Hullugarike
(2)
Author:
Rajan Gawas, Chandrakant PokalePublisher:
Sahitya AkademiLanguage:
KannadaCategory:
Contemporary-fiction₹
135
₹ 112.05 (17% off)
Unavailable
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Kannada Translation by Chandrakant Pokale of Rajan Gawas's award-winning Marathi Novel Tanakat
Read moreAbout the Book
Kannada Translation by Chandrakant Pokale of Rajan Gawas's award-winning Marathi Novel Tanakat
Book Details
-
ISBN9788126030361
-
Pages250
-
Avg Reading Time8 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Kuber
- Author Name:
Dr. Hansa Deep
- Rating:
- Book Type:

- Description: Book
Sindbad Ki Antim Yatra
- Author Name:
Ravindranath Tyagi
- Book Type:

- Description: हिंदी की व्यंग्य-त्रयी में रवींद्रनाथ त्यागी का महत्त्वपूर्ण स्थान है। त्यागीजी ने अपने दो अन्य सहयात्रियों के साथ हिंदी-व्यंग्य को एक सुनिश्चित दिशा प्रदान की और उसे एक विधा के रूप में प्रतिष्ठा दिलाने में अप्रतिम योगदान दिया। इस व्यंग्य-त्रयी में रवींद्रनाथ त्यागी की व्यंग्य-दिशा पूर्णत: भिन्न थी। हरिशंकर परसाई का क्षेत्र राजनीतिक था, शरद जोशी में विषय का वैविध्य एवं नए प्रयोगों का कौशल था, जबकि त्यागीजी में साहित्य और लालित्य की प्रधानता थी। त्यागीजी का यह विशिष्ट रंग था, अपनी मौलिक सर्जनात्मकता थी और हिंदी-व्यंग्य को शिखर तक ले जाने की प्रतिभा थी। यही कारण है कि हिंदी-व्यंग्य में उनकी अपनी अलग पहचान है तथा व्यंग्य-त्रयी के अंग होने पर भी वे अपने जैसे अकेले ही हैं। हिंदी-व्यंग्य के इतिहास में उनका महत्त्वपूर्ण स्थान रहेगा और नई पीढ़ी के प्रेरणा-स्रोत बने रहेंगे। रवींद्रनाथ त्यागी ने विपुल मात्रा में व्यंग्य रचनाएँ कीं। संभव है, आज उनकी संपूर्ण व्यंग्य-कृतियाँ उपलब्ध न हों और पाठक उनकी प्रतिनिधि तथा उच्च कोटि की रचनाओं से वंचित रह जाएँ। इसी को ध्यान में रखकर रवींद्रनाथ त्यागी के संपूर्ण व्यंग्य-साहित्य में से कुछ चुनी हुई रचनाएँ इस पुस्तक में प्रकाशित की गई हैं। इससे पाठकों को उनके व्यंग्य-साहित्य की एक झलक मिल सकेगी और वे अपने इस प्रिय व्यंग्यकार की रचनाओं का रसास्वादन कर सकेंगे।
Rudali
- Author Name:
Usha Ganguli
- Book Type:

- Description: ‘रुदाली’ बांग्ला की विख्यात लेखिका महाश्वेता देवी की एक प्रसिद्ध कहानी पर आधारित नाटक है। अनेक मंचों पर सफलतापूर्वक खेले जा चुके इस नाट्य रूपांतर की लोकप्रियता आज भी उतनी ही है। नाटक का केन्द्रीय चरित्र सनीचरी है जिसे शनिवार के दिन पैदा होने के कारण यह नाम मिला है और इसके साथ मिली हैं कुछ सजाएँ - समाज मानता है कि वह असगुनी है और इसीलिए उसके परिवार में कोई नहीं बच पाया। एक-एक करके सब काल की भेंट चढ़ गए। लेकिन सनीचरी की आँखें कभी नम न हुईं। वह कभी नहीं रोई, जब बेटा मरा तब भी नहीं। लेकिन अंततः उसे रुदाली का काम करना पड़ता है, रुदाली यानी वह स्त्री जो भाड़े पर रोती है, मेहनताना लेकर मातम करती है। एक पात्र के रूप में सनीचरी उस तबके का प्रतिनिधित्व करती है जिसके पास न चुनाव की स्वतंत्रता होती है, न निश्चिंत होने के साधन, लेकिन वह कभी टूटती नहीं, उसकी जिजीविषा बराबर उसके साथ होती है। वह अपना सहारा खुद बनती है, जो जाहिर है कि उसका अन्तिम विकल्प होता है। समाज के निम्नतम वर्ग में स्त्री-जीवन की एक लोमहर्षक विडम्बना को रेखांकित करता यह नाटक शिल्प के स्तर पर भी एक सम्पूर्ण नाट्य-कृति है।
sanshodayu
- Author Name:
Mori Ogai
- Book Type:

- Description: ‘जापान’ का नाम सुनते ही आज आधुनिकता, समृद्धि और चकाचौंध का विचार कौंधता है। लेकिन सौ बरस पहले का जापान क़तई अलग था। इस संकलन में शामिल मोरी ओगाई (1862-1922) की तीन कहानियाँ तत्कालीन जापान की एक दूसरी तस्वीर पेश करती हैं। ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में रची गई ये कहानियाँ—‘सूर्योदय के देश’ के सामन्ती युग के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराती हैं। सानशोदायु, अँधेरे में एक नाव चलती थी और आख़िरी पंक्ति आपराधिक कथानकों के ज़रिए तत्कालीन राज और समाज की विद्रूपताओं को एक-एक कर सामने लाती हैं। लेकिन, ये कहानियाँ आपराधिक दृष्टान्त मात्र नहीं हैं। सानशोदायु और आख़िरी पंक्ति में आप पाएँगे कि किस तरह बाल चरित्र सामाजिक विसंगतियों से मुक़ाबले के लिए ऐसे वक़्त में उठ खड़े होते हैं, जब उनके अग्रज व्यवस्था के सामने हथियार डाल देते हैं। नन्हे चरित्र तत्क्षण महाकार ले लेते हैं। वे जापानी समाज को ‘आत्मबलिदान’ जैसी सर्वथा नई अवधारणाएँ सिखाते हैं। ‘अँधेरे में’ कहानी जापानी जनमानस पर बौद्ध मत के प्रभाव को ख़ासकर उकेरती है। इसलिए यह भारतीय पाठक को ख़ासकर अपील करेगी। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में अवतरित इन कहानियों के ज़रिए जापान के सांस्कृतिक तथा आध्यात्मिक जीवन-दर्शन को जानने का अवसर प्राप्त होगा। कहानियों के साथ प्रविष्ट टिप्पणियाँ पाठकों की जिज्ञासा के अनुरूप दी गई हैं।
Antajichi Bakhar
- Author Name:
Nanda Khare
- Book Type:

- Description: मग माझा पक्ष कोणता? तर वाटे, महाशयांचा पक्ष, पुरबीचा पक्ष. रामचंद्रपंत पंडितांचा पक्ष. वहिनींचा पक्ष. कविराज, गोपाळा, अगदी मोहंतीदेखील माझे पक्षकार होणेस लायक! परंतु हा तर केवळ जगणार्यांचा, जगूं पाहाणार्यांचा पक्ष! यांचे हातीं ना सत्ता, ना सैन्य. तर असा माझा नामर्दांचा पक्ष! एकामागोन एक नामर्दगीच भोगणें हातीं. वहिनीसाहेब जळाल्या. फिरंग्यास मध्यें पडणेसाठी हालचाल करावी, वाटलें. मज नाहीं. पंतांस खोटें नाटें सांगोन अलीवर्दीनें मारिलें. मज सूड घ्यावा, वाटलें नाहीं. सिराजानें नाहीं नाहीं तें केलें. त्यास रोखणेचें धैर्य वोट्सांत. क्लाईव्हांत. वाटसनांत. कूटांत. माझ्यांत नव्हे. तर आतां परते महाराष्ट्रांत जावोन मीठ विकावें, हें बरें! इतिहासाला भव्य-दिव्य आभासी विश्वातून जमिनीवर आणणारी तिरकस शैलीतील ऐतिहासिक कादंबरी... Antajichi Bakhar : Nanda Khare अंताजीची बखर : नंदा खरे
Garibnawaz
- Author Name:
Santosh Choubey
- Book Type:

- Description: ये इक्कीसवीं सदी की कहानियाँ हैं। यहाँ उत्तर-आधुनिक कहानी के इशारे हैं। ये पॉज़िटिवली हल्की-फुल्की हैं और बे-बोझ एवं प्रसन्न हैं। ये बड़ी बात का आडम्बर नहीं रचती हैं और न फालतू की पीड़ा का स्वाँग भरती हैं। इन कहानियों से हिन्दी में उत्तर-कहानी की शुरुआत हुई मानी जा सकती है। —सुधीश पचौरी संतोष चौबे की कहानियाँ यथार्थ की गहनता और व्याप्ति में जाकर सत्य को आख्यान में रूपान्तरित करने का जतन करती हैं। इस प्रक्रिया में वे कहानी कहने के अनेक अनुशासनों को नकारती हैं और यूँ अपनी तरह के कथानुशासन एवं शिल्प की निर्मिति करती हैं। ‘ग़रीबनवाज़’ की अधिसंख्य कहानियों में साहित्य, कला से जुड़े चरित्र उपस्थित हैं लेकिन कहानियाँ महज़ यहाँ से उड़ान भरती हैं, अन्तत: वे आर्थिक उदारीकरण से उपजी मूल्यहीनता, लालच, कपटीपन और क्षरणशील आधुनिकता का प्रत्याख्यान करती हैं। इन चीज़ों में इतनी निष्ठुरता है कि समाज की तमाम सुन्दरताएँ नष्ट हो रही हैं। संतोष चौबे की कहानियाँ पूँजी, तकनीक एवं ताक़त के सहमेल से उपजी विरूपता से मुठभेड़ करती अन्तत: जीवन के सुन्दरतम के पक्ष में खड़ी होती हैं। —अखिलेश
Manrangi
- Author Name:
Garima Mudgal
- Book Type:

- Description: राख बनकर बिखरने से पहले ख़ुशबू बनकर महक जाऊँ बस, इसी मौज के साथ लिखने की शुरुआत की थी। वैसे तो जो कुछ कहना था, इस कहानी के माध्यम से कह चुकी हूँ पर ‘मनरंगी’ के बारे में यह ज़रूर बताना चाहूँगी कि यह कहानी किसी नदी की तरह आगे बढ़ती है और नदी के जैसे ही हर पड़ाव पर इसकी तासीर अलहदा है। कहीं यह कहानी पहाड़ों से गुज़रती नदी की तरह अल्हड़ जान पड़ेगी तो कहीं निर्झर की तरह आवेग से खिलखिलाती। कहीं यह गहरी और शांत भी दिखाई देगी। एक नदी के सागर से मिलने के मानिंद यह तो तय है कि कहानी भी अपनी मंज़िल से मिलेगी, पर ख़ास वे रास्ते होंगे जहाँ से यह होकर गुज़रती है। और जैसे नदी को अपने साथ रखने की क़वा’इद में हम अपने पात्रों मे थोड़ी-सी नदी भर लेते हैं वैसे ही अगर अंजुली भर कहानी आपके ह्रदय-पात्र में जगह बना पाई तो मुझे लगेगा कि किताब के पन्नों से निकलकर कहानी अपने मुकाम तक पहुंच गई। किताब आपको कैसी लगी, जानने की प्रतीक्षा में ....
Gandhari Ki Atmakatha
- Author Name:
Manu Sharma
- Book Type:

- Description: गांधारी, अपने पुत्रों को समझाओ । द्वारकाधीश की माँग बहुत कम है । अब पाँच गाँव से और कम क्या हो सकता है?'' '' अब वे मेरे समझाने की सीमा में नहीं रहे । जब पानी सिर से ऊपर बहने लगा तब आप उसे बाँधने के लिए कहते हैं! आपसे अनेक अवसरों पर ओंर अनेक बार मैंने कहा है कि यह दुर्योधन बिना लगाम का घोड़ा हो गया है, उसपर नियंत्रण करिए; पर उस समय आपने बिलकुल ध्यान ही नहीं दिया । आज वह बात इस हद तक बढ़ गई कि यह घोड़ा जिस रथ में जुता है उसीको उलट देना चाहता है, तब आप मुझसे कहते हैं कि घोड़े की लगाम कसो! '' आपके पुत्रों ने पांडवों पर क्या-क्या विपत्ति नहीं ढाई! हर बार उन्हें समाप्त करने का प्रयत्न करते रहे । मैं हर बार तिलमिलाती रही और हर बार आपका मौन उन्हें प्रोत्साहन देता रहा । किसलिए? इस सिंहासन के लिए, जो न किसीका हुआ है और न किसीका होगा? इस धरती के लिए, जो आज तक न किसीके साथ गई है और न जाएगी? इस राजसी वैभव के लिए, जिसने हमें अहंकार के अतिरिक्त और कुछ नहीं दिया है ?'. .इसे आप अच्छी तरह जान लीजिए कि यदि कोई वस्तु हमारे साथ अंत तक रहेगी और इस संसार को छोड़ देने के बाद भी हमारे साथ जाएगी तो वह होगा हमारा धर्म, हमारा कर्म ।.. '' आपने उसीकी उपेक्षा की । मोह-माया, ममता, पुत्र-प्रेम और लोभ से ही घिरे रहे । इसी लोभ ने आपके पुत्रों को पांडवों के प्रति ईर्ष्यालु बनाया । अब जो कुछ हो रहा है, वह उसी ईर्ष्या का शिशु है । अब आप ही उसे अपने गोद में खिलाइए । मैं उसका जिम्मा नहीं लेती । मैंने कई बार कहा है कि हमारे दुर्भाग्य ने हमें संतति के रूप में नागपुत्र दिए हैं । वे जब भी उगलेंगे, विष ही उगलेंगे । इसलिए नागधर्म के अनुसार समय रहते हुए उनका त्याग कर दीजिए । '' -इसी पुस्तक में
Suraj Mere Saath Mein
- Author Name:
Smt. Kamna Singh
- Book Type:

- Description: सूरज मेरे साथ में’ चार उपन्यासों का संकलन है। बाल एवं किशोर मन की दैनंदिन समस्याओं से जुड़े ये चारों उपन्यास सचमुच सूरज की ऐसी उजली किरण हैं, जो बच्चों के पथ को प्रकाशित करने में समर्थ हैं। ‘परीक्षा के बाद’ गौरव का स्कूली परीक्षा के साथ-साथ जीवन के इम्तिहान में भी ऊँचे अंक लेकर सफलता पाने का किस्सा है। बच्चों के लिए पल-पल जिन रोचक-रोमांचक घटनाओं की पिटारी खुलती है, वे उन्हें चमत्कृत किए बिना नहीं रहतीं। ‘खट्टी-मीठी गोलियाँ’ में बाल-मजदूरी उन्मूलन की बात कही गई है। ‘मुझे तो पढ़ना है’ में शिक्षा के बाल अधिकार को एक निर्धन तदपि पढ़ने की ललक रखनेवाले बालक के माध्यम से दरशाया गया है। ‘सूरज मेरे साथ में’ भी कथानायक रोशन के हौसलों की उड़ान है, जो उसे सफलता दिलाती है। कुल मिलाकर चारों उपन्यास बच्चों को सद्गुणों से तो जोड़ते ही हैं, जीवन के प्रति समझ भी जगाते हैं। कदाचित् यही आज के समय की माँग भी है।
Mewat Ka Johad
- Author Name:
Rajendra Singh
- Book Type:

- Description: मेवात कैसे बना? मेवात का जनमानस आज क्या चाहता है? क्या कर रहा है? मेवात के संकट से जूझते लोग, बाज़ार की लूट, पानी और खेती की लूट रोकने की दिशा में हुए काम–––क़ुदरत की हिफ़ाज़त के काम हैं। इन क़ुदरती कामों में आज भी महात्मा गांधी की प्रेरणा की सार्थकता है। युगपुरुष बापू के चले जाने के बाद भी युवाओं द्वारा उनसे प्रेरित होकर ग्राम स्वराज, ग्राम स्वावलम्बन के रचनात्मक कार्यों से लेकर सत्याग्रह तक की चरणबद्ध दास्तान इस पुस्तक में है। यह पुस्तक देश–दुनिया और मेवात को बापू के जौहर से प्रेरित करके सबकी भलाई का काम जोहड़ बनाने–बचाने पर राज–समाज को लगाने की कथा है; जौहर से जोहड़ तक की यात्रा है। यह पुस्तक आज के मेवात का दर्शन कराती है। इसमें जोहड़ से जुड़ते लोग, पानी की लूट रोकने का सत्याग्रह, मेवात के 40 शराब कारख़ाने बन्द कराना तथा मेवात के पानीदार बने गाँवों का वर्णन है। मेवात के पानी, परम्परा और खेती का वर्णन बापू के जौहर से जोहड़ तक किया गया है। बापू क़ुदरत के करिश्मे को जानते और समझते थे। इसलिए उन्होंने कहा था, “क़ुदरत सभी की ज़रूरत पूरी कर सकती है लेकिन एक व्यक्ति के लालच को पूरा नहीं कर सकती है।” वे क़ुदरत का बहुत सम्मान करते थे। उन्हें माननेवाले भी क़ुदरत का सम्मान करते हैं। मेवात में उनकी कुछ तरंगें काम कर रही थीं। इसलिए मेवात में समाज–श्रम से जोहड़ बन गए। मेवात में बापू का जौहर जारी है। यह पुस्तक बापू के जौहर को मेवात में जगाने का काम करती है।
Bina Muradonwala Diya
- Author Name:
Rekha Jha
- Book Type:

- Description: ‘बिना मुरादों वाला दीया’ रेखा झा का लघु उपन्यास है जिसमें समस्तीपुर जिले के पूसा के साथ उन्होंने अपने बचपन के उन दिनों को याद किया है जिन्हें हम सब अपने जीवन में हमेशा अपनी यादों में जीते रहते हैं। छुम छुम बस में छुम-छुम ड्रेस पहनकर मुन्नी का पूसा जाना, वहाँ अपनी झुंड-भर मासियों की नन्ही बिल्ली बन जाना, और उनके साथ उस बड़ी दुनिया से परिचित होना जो उसके लिए अभी बिलकुल नई है। उसे बताया जाता है कि ‘मजार भी एक तरह का मन्दिर ही होता है। जिस तरह मन्दिर में भगवान होते हैं, मजार में पीर बाबा होते हैं।’ सिर्फ यही नहीं, पूसा में आम और लीची के बाग भी हैं जहाँ इतने किस्म के आम और इतनी किस्म की लीचियां हैं कि मुन्नी को स्कूल जाना भी नहीं अखरता। और फिर गुल्लू मासी तो हैं ही! एक मीठे बचपन की यह मीठी कहानी एक रौ में अपने-आपको पढ़वा लेती है; जिस माधुर्य और जीवन्तता के बारे में यह उपन्यासिका बताती है, वह मिठास और जीवन इसकी अपनी बुनावट का भी हिस्सा है।
Katra Katra Zindagi
- Author Name:
Mukesh Dubey
- Book Type:

- Description: Book
Koshish
- Author Name:
Gulzar
- Book Type:

- Description: साहित्य में ‘मंज़रनामा’ एक मुकम्मिल फ़ार्म है। यह एक ऐसी विधा है जिसे पाठक बिना किसी रुकावट के रचना का मूल आस्वाद लेते हुए पढ़ सकें। लेकिन मंज़रनामा का अन्दाज़े-बयाँ अमूमन मूल रचना से अलग हो जाता है या यूँ कहें कि वह मूल रचना का इंटरप्रेटेशन हो जाता है। मंज़रनामा पेश करने का एक उद्देश्य तो यह है कि पाठक इस फ़ार्म से रू-ब-रू हो सकें और दूसरा यह कि टी.वी. और सिनेमा में दिलचस्पी रखनेवाले लोग यह देख-जान सकें कि किसी कृति को किस तरह मंज़रनामे की शक्ल दी जाती है। टी.वी. की आमद से मंज़रनामों की ज़रूरत में बहुत इज़ाफ़ा हो गया है। ‘कोशिश’ गुलज़ार की सबसे चर्चित और नई ज़मीन तोड़नेवाली फ़िल्मों में से है। गूँगे-बहरे लोगों के विषय में एक जापानी फ़िल्म से प्रेरित होकर उन्होंने हिन्दी में ऐसी एक फ़िल्म बनाने का जोखिम उठाया और एक मौलिक फ़िल्म-कृति हिन्दी दर्शकों को दी। फ़िल्म में कलाकारों के अभिनय और संवेदनशील निर्देशन के कारण इस फ़िल्म को क्लासिक फ़िल्मों में गिना जाता है। यह इसी फ़िल्म का मंज़रनामा है।
Anna
- Author Name:
C. N. Annadurai
- Rating:
- Book Type:

- Description: Everyone regarded Anna as one of the most remarkable figures produced by Tamil Nadu. His greatness stems from the widespread acclaim he received from prominent leaders of his era. His various talents demonstrate his capabilities as an effective administrator, deep thinker, prolific writer, insightful journalist, and above all, a humanitarian that leaves us in awe of his literary contributions. He observed the living conditions of Tamils during his time and aimed to instigate change through his writing and speeches. Inspired by Periyar's thoughts and pride in Tamil heritage, he emerged as a towering advocate for humanism, dedicated to protecting the Tamil community and working toward their advancement. Anna once referenced influential figures like Shelley, Byron, Keats, Coleridge, Emerson, and Bacon, remarking that they are not foreigners in the truest sense. Is Tiruvalluvar simply a Tamil? They are all global citizens and educators, and Anna holds a similar esteemed position as a worldwide citizen. Anna is recognised as a pioneer in short stories that explore the tension between tradition and modernity. He is a relentless journalist and a guiding light as a dramatist. In addition to being a remarkable orator, his political acumen further defines him as the genius of his century. In summary, Anna is a true phenomenon.
Saga of a Nerdy Girl (Illustrated)
- Author Name:
Anushree Pandey
- Rating:
- Book Type:

- Description: Saga of a Nerdy Girl has been written by the geeky 11-year-old Anushree Pandey. This compilation of funny ways through which she faces obstacles life throws at her is bound to get the giggles out of all ages. She has indeed taken “when life gives you lemons make lemonade” to another level. This book is all about how her perspective to view the world. So, be prepared for the rollercoaster of emotions, fun and laughter.
Priywar
- Author Name:
Nimai Bhattacharya
- Book Type:

- Description: स्त्री-जीवन की विडम्बनाएँ हमेशा साहित्यिक चिन्ता को अपनी तरफ़ खींचती रही है। यह उपन्यास एक सफल भारतीय स्त्री के जीवन को उकेरते हुए बताता है कि कैसे भीतर से सुखी होने की उसकी चाहत क़दम-क़दम पर उन्हीं लोगों द्वारा छली जाती रही, जिनकी तरफ़ उसने उम्मीद की निगाह से देखा। उपन्यास की नायिका कविता चौधरी यूनाइटेड नेशंस में कार्यरत हैं, देश-विदेश के दौरों में उनका जीवन बीतता है। उनके पास सब कुछ है लेकिन भीतर एक ख़ालीपन है जो लगातार किसी तलाश में रहता है। ऐसी ही एक यात्रा में उसे एक पत्रकार मिलता है जिसके साथ उनका रिश्ता बड़ी बहन का बन जाता है। और फिर शुरू होता है पत्रों का एक सिलसिला जिसमें वे अपने अन्तस् को उघाड़कर अपने उस संवेदनशील छोटे भाई के सामने रख देती है। यह उपन्यास उन्हीं पत्रों को बुनकर तैयार किया गया है। इमसें भारतीय सामाजिक जीवन की नैतिक हिप्पोक्रेसी ख़ास तौर पर देखने लायक़ है जो नायिका की आन्तरिक पीड़ा के सामने और ज़्यादा ओछी लगती है।
Doktor Glass
- Author Name:
Hzalmar Soderberge
- Book Type:

- Description: Novel
Kabira Soi Peer Hai
- Author Name:
Pratibha Katiyar
- Book Type:

- Description: मूलतः एक संवेदनशील कवि के रूप में अपनी पहचान बनाने वाली प्रतिभा कटियार का यह पहला उपन्यास अपनी पठनीयता और अपने सरोकार दोनों वजहों से लगभग चकित करता है। उपन्यास एक कोचिंग सेंटर से शुरू होता है जहाँ अलग-अलग वर्गों के छात्र एक-सी महत्वाकांक्षा के साथ पहुँचते हैं। मगर वहाँ भी छात्रों की पसन्द-नापसन्द, उनकी मैत्री और उनके सम्बन्धों में एक स्पष्ट भेदभाव चला आता है। उपन्यास में ऐसे किरदार हैं जो इस भेदभाव को तोड़कर आगे बढ़ते हैं और बताते हैं कि दुनिया इन खानों से बड़ी है। जाहिर है, यह प्रेम और आपसी समझ के रसायन से बनी मनुष्यता है जो सामाजिक चाल-चलन पर भारी पड़ रही है। उपन्यास की नायिका दलित समाज से आती है और बचपन से ही देखती है कि उसकी प्रतिभा दूसरों की आँख का काँटा बनी हुई है। उसकी सफलता भी उसका अभिशाप है। जब उसे कोचिंग सेंटर में ऐसा दोस्त मिलता है जो बराबरी पर भरोसा करता है और उससे प्रेम करने लगता है तब वह कुछ बदलती दिखती है। उपन्यास अगर इसी दिशा में बढ़कर एक सुखान्त पर खत्म हो जाता तो तो शायद वह बराबरी की कामना का एक रूमानी बयान होकर रह जाता। यहाँ लेखिका साबित करती हैं कि उनके लहजे में चाहे जितनी रूमानियत हो, यथार्थ की उनकी समझ बहुत खरी है। वे घर-परिवार और समाज के सारे पूर्वग्रह और पाखंड जैसे तार-तार कर देने पर तुली हैं। वे एक पल के लिए भी इस बात को ओझल नहीं होने देतीं कि यह समाज बहुधा कुछ लोगों के प्रति बहुत अमानुषिक व्यवहार करता है और अगर यह भी न हो तो अपनी उदारता के चरम लम्हों में भी वह उनके अवसर छीनने में कोई कोताही नहीं करता, कोई हिचक नहीं दिखाता। इसमें सन्देह नहीं कि यह उपन्यास एक साँस में पढ़ा जा सकता है, लेकिन उसके बाद जिस गहरी और लम्बी साँस की ज़रूरत पड़ती है, वह कहीं हलक में अटकी रह जाती है। कई किरदारों और स्थितियों के बीच रचा गया यह उपन्यास हमारे समय की एक बड़ी विडम्बना पर उँगली रखता है और अपने छोटे कलेवर के बावजूद एक बड़ा वृत्तान्त रचता है। —प्रियदर्शन
Gulo
- Author Name:
Subhash Chandra Yadav
- Book Type:

- Description: Hindi Novel
Black Soil
- Author Name:
Ponneelan +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: Kannappan is posted to Perumalpuram as the new schoolteacher. The village lies in the black soil region of Tamil Nadu where the river Tamirabarani flows. He's an outsider in this village with Veerayyan, a local farmer, as his only guide and friend. Once settled in his role, Kannappan observes the everyday brutality faced by the farmers at the hands of the sadistic, all-powerful landlord-the Master. Child marriage is common in the village and so is the appalling practice of marrying young lads to older women who then serve as their father-in-law's consort. Through his gentle yet probing conversations with the villagers, Kannappan tries his best to show the villagers a better way of life. The farmers who had begun protesting the excesses meted out to them by the upper-caste landlord soon find an ally in Kannappan. The schoolteacher's sympathies for their cause bolster their waning spirits and replenishes their resolve to fight back. Ponneelan's first novel is a tour de force. Now translated for the first time, Black Soil lays bare the atrocities faced by the farmers and the human cost of building a better tomorrow.
Customer Reviews
Be the first to write a review...
4 out of 5
Book