Lucknow Ki Panch Raten
(0)
Author:
Ali Sardar JafriPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
199
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उर्दू के आधुनिक लेखक और कवि अली सरदार जाफ़री प्रगतिशील आन्दोलन के अगुआ रहे। न केवल स्वतंत्रता-सेनानी और आन्दोलन के कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने योगदान दिया, बल्कि कविता के अलावा गद्य-लेखन और विशेषकर भक्ति आन्दोलन पर मौलिक कार्य भी किया। सरदार जाफ़री विख्यात मानवतावादी कवि पाब्लो नेरूदा और तुर्की कवि के मित्र रहे। उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में जन्मे जाफरी ने दुनिया भी देखी और वक़्त के थपेड़े भी खाए। ‘लखनऊ की पाँच रातें’ यात्राओं, दोस्तियों और देश-विदेश में फैले जाने-अनजाने व्यक्तियों के बारे में लिखी किताब है। यह यात्रा-वृत्तान्त, संस्मरण, आत्म-स्मरण और रेखाचित्र—सबका मिला-जुला रूप है, लेकिन इसमें ज़बर्दस्त पठनीयता है। बलरामपुर से मुम्बई और विदेश तक के सफ़र में अलीगढ़ के पड़ाव पर के.एम. अशरफ़ जैसे शिक्षक, मुहम्मद हबीब, इरफ़ान हबीब जैसे इतिहासकार, सज्जाद जहीर, ख़्वाजा अहमद अब्बास तथा इस्मत चुग़ताई जैसे प्रसिद्ध लेखकों का संग-साथ मिला। लखनऊ के पड़ाव पर सिब्ते हसन, यशपाल, रशीद जहाँ और मजाज़ मिले। ‘लखनऊ की पाँच रातें’ एक तरह से मजाज़ पर है। दुर्लभ संस्मरणों की इस किताब में छोटे-छोटे मगर बड़ी अहमियत वाले प्रसंग आते जाते हैं तो उस सुनहरे दौर की रील आँखों के सामने घूम जाती है। रूसी डाक्टरनी गेलेना से लेकर काक्स बाज़ार की चेहरू माँझी जैसी बेमिसाल स्त्रियों को भुलाना मुश्किल है। यह छोटी-सी ख़ूबसूरत किताब हर घर की शान समझी जाएगी।
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उर्दू के आधुनिक लेखक और कवि अली सरदार जाफ़री प्रगतिशील आन्दोलन के अगुआ रहे। न केवल स्वतंत्रता-सेनानी और आन्दोलन के कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने योगदान दिया, बल्कि कविता के अलावा गद्य-लेखन और विशेषकर भक्ति आन्दोलन पर मौलिक कार्य भी किया।
सरदार जाफ़री विख्यात मानवतावादी कवि पाब्लो नेरूदा और तुर्की कवि के मित्र रहे। उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में जन्मे जाफरी ने दुनिया भी देखी और वक़्त के थपेड़े भी खाए। ‘लखनऊ की पाँच रातें’ यात्राओं, दोस्तियों और देश-विदेश में फैले जाने-अनजाने व्यक्तियों के बारे में लिखी किताब है। यह यात्रा-वृत्तान्त, संस्मरण, आत्म-स्मरण और रेखाचित्र—सबका मिला-जुला रूप है, लेकिन इसमें ज़बर्दस्त पठनीयता है।
बलरामपुर से मुम्बई और विदेश तक के सफ़र में अलीगढ़ के पड़ाव पर के.एम. अशरफ़ जैसे शिक्षक, मुहम्मद हबीब, इरफ़ान हबीब जैसे इतिहासकार, सज्जाद जहीर, ख़्वाजा अहमद अब्बास तथा इस्मत चुग़ताई जैसे प्रसिद्ध लेखकों का संग-साथ मिला। लखनऊ के पड़ाव पर सिब्ते हसन, यशपाल, रशीद जहाँ और मजाज़ मिले। ‘लखनऊ की पाँच रातें’ एक तरह से मजाज़ पर है।
दुर्लभ संस्मरणों की इस किताब में छोटे-छोटे मगर बड़ी अहमियत वाले प्रसंग आते जाते हैं तो उस सुनहरे दौर की रील आँखों के सामने घूम जाती है।
रूसी डाक्टरनी गेलेना से लेकर काक्स बाज़ार की चेहरू माँझी जैसी बेमिसाल स्त्रियों को भुलाना मुश्किल है। यह छोटी-सी ख़ूबसूरत किताब हर घर की शान समझी जाएगी।
Book Details
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ISBN9788126708628
-
Pages116
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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अरविन्द बंगाल की धरती की उपज थे, पर विचारधारा में वे तिलक, दयानन्द आदि के अधिक निकट प्रतीत होते हैं। बंगाल के विषय में स्वभावतः उनके मन में अनुराग था, पर वे जिस प्रकार का ‘मिशन’ लेकर आए थे, उसकी संसिद्धि शायद बंगाल में रहकर नहीं हो सकती थी। वे अनेक रूपों में बंगाली व्यक्तित्व के अतिरेकों से, अर्थात् स्वप्निल भावुकता आदि से बिलकुल अछूते थे। श्री अरविन्द का पांडिचेरी-गमन क्षेत्रीयता की संकुचित सीमाओं के ध्वंस का प्रतीक है।
वे देशकाल में बँधी खंडशः विभक्त मानवता के प्रतिनिधि बनने नहीं, बल्कि परस्पर सहयोग से पृथ्वी पर अवतरित होनेवाले दिव्य जीवन के निदेशक थे, इसलिए उनका प्रत्येक कार्य मनुष्य को विभाजित करनेवाली आसुरी शक्तियों के षड्यंत्र को असफल बनाने के उद्देश्य से परिचालित रहा। श्री अरविन्द ने राजनेता के रूप में ‘पूर्ण स्वराज्य’ की माँग की। श्री गांधी के दक्षिण अफ़्रीका से भारत आगमन के काफ़ी पहले ‘असहयोग आन्दोलन’ का सूत्रपात किया। कलकत्ते के नेशनल कॉलेज के प्रिंसिपल के रूप में एक नई शिक्षा-पद्धति की बात कही। ‘वन्देमातरम्’ और ‘कर्मयोगी’ के सम्पादक के रूप में भारतीय आत्मा को स्पष्ट करनेवाली नई पत्रकारिता का सूत्रपात किया। उग्रपन्थी विचारधारा को स्वीकार करते हुए भी विरोधी के प्रति सदाशय रहने का आग्रह किया। सत्य तो यह है कि स्वतंत्रता-पूर्व भारतीय राजनीति के सभी मूलभूत आदर्श, राष्ट्रीयता, स्वदेशी प्रेम, विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार, जनसंगठन और राष्ट्रीय शिक्षा-प्रणाली का आग्रह जैसे तत्त्व, जो बाद में गांधी जी के नेतृत्व में कांग्रेस के प्रेरणास्रोत बने, श्री अरविन्द के महान् व्यक्तित्व की देन हैं।
जवाहरलाल नेहरू ने ठीक ही लिखा है—“बंग-भंग के विरुद्ध उत्पन्न आन्दोलन ने अपने सभी सिद्धान्त और उद्देश्य श्री अरविन्द से प्राप्त किए और इसने महात्मा गांधी के नेतृत्व में होनेवाले महान आन्दोलनों के लिए आधार तैयार किया।”
Borunda Diary
- Author Name:
Malchand Tiwari
- Book Type:

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Description:
ऐसे लेखक बिरले होते हैं जो अपनी आधुनिकता/प्रगतिशीलता को सही विकल्प मानने के बावजूद उस अहंकार को जीत पाते हैं जो आधुनिकता और प्रगतिशीलता में कहीं बद्धमूल है। बिज्जी ऐसे बिरले आधुनिक लेखक थे। वे पूर्व-आधुनिक से उसकी वाणी नहीं छीनते, उसका ‘प्रतिनिधि’ बनने की, उसे अपने अधीन लाने की और इस तरह अपने को श्रेष्ठतर जताने की औपनिवेशिक कोशिश नहीं करते। जैसे ‘व्हाइट मेन’स बर्डन’ होता है वैसे ही एक ‘मॉडर्न मेनֹ’स बर्डन’ भी होता है। बिज्जी के कथा-लोक में उनकी ‘बातां री फुलवाड़ी’ में, जो उनके लेखन का सबसे सटीक रूपक भी है और उनका मैग्नम ओपस भी, पूर्व-आधुनिक भी फूल हैं, ‘पिछड़े’, ‘गँवार’ नहीं।
बिज्जी ताउम्र बोरूंदा में रहे, वहीं एक प्रेस स्थापित किया, प्रणपूर्वक राजस्थानी में लिखा और अपने गाँव में अपने प्रगतिशील, आधुनिक विचारों और नास्तिकता के बावजूद विरोधी भले माने गए हों, ‘बाहरी’ कभी नहीं माने गए।
चौदह खंडों में ‘बातां री फुलवाड़ी’ रचकर उन्होंने भारतीय और विश्वसाहित्य के इतिहास में जिस युगान्तकारी परिवर्तन का सूत्रपात किया था, वह अब भी हिन्दी पाठकों को अपनी समग्रता में उपलब्ध नहीं था। बिज्जी के स्नेहाधिकारी और द्विभाषी लेखक मालचन्द तिवाड़ी उसके बड़े हिस्से का अनुवाद करने के लिए एक साल तक बिज्जी के साथ बोरूंदा में रहे, वही एक साल जो बिज्जी के जीवन का अन्तिम एक साल सिद्ध हुआ। इस डायरी में बिज्जी का वह पूरा साल है जब वे शारीरिक रूप से परवश होकर अपनी स्वभावगत सक्रियता का अनन्त भार अपने मन पर सँभाले रोग-शय्या पर थे।
यह भी एक अर्थ-बहुल विडम्बना है कि बिज्जी के शाहकार का अनुवाद एक ऐसे लेखकीय आत्म के हाथों सम्पन्न हुआ जो इस डायरी-वृत्तान्त में एक आस्तिक ही नहीं, एक पूर्व-आधुनिक की तरह प्रस्तुत है। इस डायरी-वृत्तान्त को पढ़ना, डायरीकार को पढ़ना दरअसल बिज्जी के अपने रचे समाज को, उनके कथा-संसार को पढ़ना है जिसके साथ बिज्जी के द्वन्द्वात्मक लेकिन करुणामय सम्बन्ध का एक उदाहरण इस डायरीकार के साथ बिज्जी का—और बिज्जी के साथ डायरीकार का—अपना निजी, जटिल और रागात्मक सम्बन्ध है।
COLLEGE DROPOUT ARABPATIYON KI PRERAK KAHANIYAN
- Author Name:
Pradeep Thakur
- Book Type:

- Description: दुनिया के कुछ सबसे धनी और सबसे प्रभावशाली उद्यमी कॉलेज पूरा करने से पहले ही पढ़ाई छोड़कर बाहर हो गए। स्टीव जॉब्स, बिल गेट्सऔर मार्क जुकरबर्ग, सभी ने अपने डिप्लोमा लेने से पहले कॉलेज छोड़ दिया। माइकल डेल ने 19 साल की उम्र में ऑस्टिनमें टेक्सास विश्वविद्यालय से कॉलेज की पढ़ाई बीच ही में छोड़ दी। उन्होंने डेल टेक्नोलॉजीज की स्थापना की और अब इसकी कीमत 20.9 बिलियनडॉलर है। एप्पल के संस्थापक ने रीडकॉलेज तब छोड़ा, जब वे सिर्फ19 वर्षके थे। मार्क जुकरबर्ग ने हार्वर्ड से बीच में ही निकलकर फेसबुक की स्थापना की और दुनिया के 5वें सबसे धनी व्यक्ति बनगए। ‘द फेसबुक इफेक्ट’ पुस्तक के अनुसार, कॉलेज छोड़ने का निर्णय लेने में उन्हें सिर्फपाँच मिनटलगे। लैरी एलिसनएक सॉफ्टवेयर अरबपतिऔर ओरेकल के संस्थापक के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने वक्तसे पहले ही शिकागो विश्वविद्यालय में डॉक्टरी की पढ़ाई छोड़ दी। आज उनकी कंपनी की कीमत 55 बिलियनडॉलर से अधिक है। पुस्तक में ऐसी ही बहुत सी कहानियाँ हैं, जो हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।
Playing It My Way:Sachin Tendulkar
- Author Name:
Sachin Tendulkar
- Rating:
- Book Type:

- Description: The greatest run-scorer in the history of cricket, Sachin Tendulkar retired in 2013 after an astonishing 24 years at the top. The most celebrated Indian cricketer of all time, he received the Bharat Ratna Award - India's highest civilian honour - on the day of his retirement. Now Sachin Tendulkar tells his own remarkable story - from his first Test cap at the age of 16 to his 100th international century and the emotional final farewell that brought his country to a standstill. When a boisterous Mumbai youngster's excess energies were channelled into cricket, the result was record-breaking schoolboy batting exploits that launched the career of a cricketing phenomenon. Before long Sachin Tendulkar was the cornerstone of India's batting line-up, his every move watched by a cricket-mad nation's devoted followers. Never has a cricketer been burdened with so many expectations; never has a cricketer performed at such a high level for so long and with such style - scoring more runs and making more centuries than any other player, in both Tests and one-day games. And perhaps only one cricketer could have brought together a shocked nation by defiantly scoring a Test century shortly after terrorist attacks rocked Mumbai. His many achievements with India include winning the World Cup and topping the world Test rankings. Yet he has also known his fair share of frustration and failure - from injuries and early World Cup exits to stinging criticism from the press, especially during his unhappy tenure as captain. Despite his celebrity status, Sachin Tendulkar has always remained a very private man, devoted to his family and his country. Now, for the first time, he provides a fascinating insight into his personal life and gives a frank and revealing account of a sporting life like no other.
Mera Pariwar
- Author Name:
Mahadevi Verma
- Book Type:

- Description: प्रस्तुत पुस्तक में महादेवी वर्मा जी ने कुछ विशिष्ट मानवेतर प्राणियों के प्रति अपनी जिस सहज, सौहाद्र और एकांत आत्मीयता की अभिव्यंजना का जो अपूर्व कला-कौशल अपने इन चित्रों में व्यक्त किया है, वह केवल उनकी अपनी ही कला की विशिष्टता की दृष्टि से नहीं वरन् संसार-साहित्य की इस कोटि की कला के समग्र क्षेत्र में भी बेमिसाल और बेजोड़ हैं। ये कृतियाँ मानवीय भावज्ञता, संवेदना और कलात्मक प्रतिभा के अपूर्व निदर्शन की दृष्टि से शाब्दिक अर्थ में अपूर्व ओर अद्भुत कलात्मक चमत्कार के नमूने हैं।
Bhupen Khakhkhar : Ek Antrang Sansmaran
- Author Name:
Sudhir Chandra
- Book Type:

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Description:
भूपेन पर पहली किताब महेन्द्र देसाई ने लिखी। गाढ़े दोस्त थे भूपेन और महेन्द्र। लिखनेवाला हो महेन्द्र जैसा औघड़, और लिखा जा रहा हो भूपेन जैसे खिलन्दड़े और उसकी कला पर तो किताब असामान्य होनी ही थी। हुई। विलक्षण, मस्त, अपने विषय की आत्मा में प्रवेश करने को आतुर और, उसी कारण, अपनी विश्वसनीयता के प्रति लापरवाह। अकारण नहीं कि इससे बिलकुल उलट संवेदना से लैस अँग्रेज़ टिमथी हाइमन ने महेन्द्र की किताब से बहुत कुछ पाने के बावजूद महेन्द्र के वर्णन को 'गार्बल्ड’ कहा। काश! मैं भी देखने, सोचने और लिखने में महेन्द्र जैसा दुस्साहस बरत पाता।
भूपेन पर दूसरी किताब है इन्हीं टिमथी हाइमन की। ब्रिटिश कलाकार, कला मर्मज्ञ और भूपेन के परम मित्र। एक पारखी की पैनी नज़र है टिमथी की किताब में। ऐसी किताब भी नहीं लिख पाऊँगा मैं।
फिर भी लिख रहा हूँ। महेन्द्र जैसा फक्कड़ी सृजनशील न सही, दुस्साहस तो है ही मेरे इस प्रयास में। दोषी दरअसल भूपेन है। अपने जीते जी देश और विदेश में होनेवाली अपनी प्रदर्शनियों के आधे दर्जन ब्रोशर मुझसे लिखवाकर बगैर कुछ कहे समझा गया कि मण्डन मिश्र के तोता-मैना शास्त्रार्थ कर सकते थे तो मैं अपने दोस्त के अन्तरंग संस्मरण तो लिख ही सकता हूँ।
23 साल की निरन्तर गहराती दोस्ती रही भूपेन के साथ। अनेक रूप देखे उसके। उन सब के बेबाक विवरण हैं यहाँ। वह भी है जो इस किताब को लिखने के दौरान जाना : कि भूपेन नितान्त विलक्षण लेखक है और उसके साहित्य के साथ न्याय नहीं हुआ है। —इसी पुस्तक से
Asha Aur Vishwas : Ek Yatra
- Author Name:
Dr. C.P. Thakur
- Book Type:

- Description: डॉ.सी.पी. ठाकुर की ‘आशा और विश्वास : एक यात्रा’ उत्तर बिहार के एक गाँव में, एक साधारण किसान परिवार में पैदा हुए व्यक्ति की कहानी है। बचपन में वह अकसर बीमार रहते; हाई स्कूल में जाकर उन्हें ज्ञात हुआ कि वे कालाजार नामक रोग से पीडि़त हैं। बावजूद इसके, उन्होंने डॉक्टरी की शिक्षा प्राप्त की और लंदन और एडिनबरा, दोनों ही जगहों से एम.आर.सी.पी. परीक्षा में उत्तीर्ण हुए। भारत आकर बतौर डॉक्टर एवं वैज्ञानिक के रूप में उन्होंने अपार ख्याति प्राप्त की। कालाजार के क्षेत्र में उनके अग्रणी शोध ने उन्हें विश्वभर में पहचान दिलाई। ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ ने उन्हें ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ से सम्मानित किया। 1984 में उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कदम रखा और पटना से लोकसभा सांसद चुने गए। पूरी श्रद्धा और इमानदारी से वह जनसेवा में जुडे़ रहे।
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