Ek Jindagi Kafi Nahi
Author:
Kuldeep NayarPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies0 Ratings
Price: ₹ 399.2
₹
499
Available
यह किताब उस दिन से शुरू होती है जब 1940 में ‘पाकिस्तान प्रस्ताव' पास किया गया था। तब मैं स्कूल का एक छात्र मात्र था, लेकिन लाहौर के उस अधिवेशन में मौजूद था जहाँ यह ऐतिहासिक घटना घटी थी। यह किताब इस तरह की बहुत-सी घटनाओं की अन्दरूनी जानकारी दे सकती है, जो किसी और तरीक़े से सामने नहीं आ सकती—बँटवारे से लेकर मनमोहन सिंह की सरकार तक।
अगर मुझे अपनी ज़िन्दगी का कोई अहम मोड़ चुनना हो तो मैं इमरजेंसी के दौरान अपनी हिरासत को ऐसे ही एक मोड़ के रूप में देखना चाहूँगा, जब मेरी निर्दोषिता को हमले का शिकार होना पड़ा था। यही यह समय था जब मुझे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के हनन का अहसास होना शुरू हुआ। साथ ही, व्यवस्था में मेरी आस्था को भी गहरा झटका लगा था।
पाकिस्तान और बांग्लादेश में बहुत-से लोगों के साथ मेरे व्यक्तिगत सम्बन्ध हैं और मुझे इन सम्बन्धों पर गर्व है। मेरा विश्वास है कि किसी दिन दक्षिण एशिया के सभी देश यूरोपीय संघ की तरह अपना एक साझा संघ बनाएँगे। इससे उनकी अलग-अलग पहचान पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
मैं पूरी ईमानदारी से कह सकता हूँ कि नाकामयाबियाँ मुझे उस रास्ते पर चलने से रोक नहीं पाई हैं जिसे मैं सही मानता रहा हूँ और लड़ने लायक़ मानता रहा हूँ।
ज़िन्दगी एक लगातार बहती अन्तहीन नदी की तरह है, बाधाओं का सामना करती हुई, उन्हें परे धकेलती हुई, और कभी-कभी ऐसा न कर पाते हुए भी।
यह बता पाना बस से बाहर है कि पिछले आठ दशकों से कौन सी चीज़ मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रही है—नियति या संकल्प? या ये दोनों ही? आख़िर तमाशा जारी रहना चाहिए। मैं इस मामले में महान उर्दू शायर ग़ालिब से पूरी तरह सहमत हूँ—शमा हर रंग में जलती है सहर होने तक।
—भूमिका से
ISBN: 9788126723386
Pages: 472
Avg Reading Time: 16 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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इस आत्मकथा को स्त्री के अपने चुनाव की कहानी भी कहा जा सकता है। पटियाला के बड़े मिलिटरी अफ़सर की ज़िद्दी और अपने मन का करनेवाली लड़की जो अपनी हरकतों से बार-बार बाप और उनके परिवार को असुविधाओं में डालती है, खुली मीटिंगों में उनके सामन्ती दोमुँहेपन पर प्रहार करती है, विभाजन की त्रासदी झेलती मुस्लिम महिलाओं की आवाज़ बनकर जवाब माँगती है और फिर अपने मन से क्षत्रिय (राजपूत) परिवार छोड़कर अन्य जाति के लड़के (गुप्ता) से शादी करके बिहार (झारखंड समेत) चली आती है। यहाँ आकर पति से विद्रोह करके मज़दूरों-कामगारों के बीच उनके संघर्ष का जीवन चुनती है।
इस आत्मकथा को सामन्तवाद और लोकतन्त्र के खुले द्वन्द्व की तरह भी पढ़ा जा सकता है।
इन्हीं तूफ़ानी झंझावातों से गुज़रकर आई है रमणिका गुप्ता। आर्य समाज, कांग्रेस, समाजवादी और कम्युनिस्ट होने की उनकी यह यात्रा भारतीय राजनीति के नाटकीय मोड़ों का इतिहास भी है और विकास भी।
Mera Pariwar
- Author Name:
Mahadevi Verma
- Book Type:

- Description: प्रस्तुत पुस्तक में महादेवी वर्मा जी ने कुछ विशिष्ट मानवेतर प्राणियों के प्रति अपनी जिस सहज, सौहाद्र और एकांत आत्मीयता की अभिव्यंजना का जो अपूर्व कला-कौशल अपने इन चित्रों में व्यक्त किया है, वह केवल उनकी अपनी ही कला की विशिष्टता की दृष्टि से नहीं वरन् संसार-साहित्य की इस कोटि की कला के समग्र क्षेत्र में भी बेमिसाल और बेजोड़ हैं। ये कृतियाँ मानवीय भावज्ञता, संवेदना और कलात्मक प्रतिभा के अपूर्व निदर्शन की दृष्टि से शाब्दिक अर्थ में अपूर्व ओर अद्भुत कलात्मक चमत्कार के नमूने हैं।
Das Hazar Crore Se Aage
- Author Name:
Sanjeev Chopra
- Book Type:

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Description:
राज्य का सामाजिक एवं प्राकृतिक वातावरण औद्योगिक निवेश के अनुकूल है। ऐसे में उद्यमियों को राज्य की परिस्थितियों का लाभ उठाना चाहिए। संजीव चोपड़ा द्वारा लिखित पुस्तक से राज्य में निवेश करने के इच्छुक उद्यमियों को काफी मदद मिलेगी।
माननीय राज्यपाल, दैनिक जागरण; 1 जून, 2004
यह पुस्तक मुख्यमंत्री के नेतृत्व में 'टीम उत्तरांचल' द्वारा कई मुख्य क्षेत्रों में तीव्र औद्योगिक प्रगति का सरल एवं ईमानदार विवरण है।
माननीय राज्यपाल, हिन्दुस्तान टाइम्स; 1 जून, 2004
पुस्तक ने औद्योगिक परिषदों के समन्वयात्मक प्रयासों का अभिलेखन किया है, जिससे राज्य आज प्रगति की उड़ान के लिए तत्पर है।
एलाइन्स दर्पण; जुलाई 15-अगस्त 15, 2004
लेखक ने औद्योगिक विकास की प्रक्रिया में राज्य द्वारा चुनौतियों का सामना करने और मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी द्वारा परिकल्पित प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन के विषय में सविस्तार लिखा है। उद्योग विभाग का जोर था कि राज्य में मजबूत अर्थतन्त्र की स्थापना हो और साथ ही युवा लोगों को रोजगार मिले।
द पायानियर; 2 जून, 2004
‘दस हजार करोड़’ राज्य के लिए सामाजिक-आर्थिक लक्ष्य निर्धारित करती है, जो भावी नियोजकों और विकासकर्ताओं एवं प्रशासकों के लिए निर्देश सिद्ध होंगे।
द टाइम्स ऑफ इंडिया; 19 जून, 2004
डायरी स्वरूप में लिखित पुस्तक में नीति-निर्धारण की प्रक्रिया और उसमें संलग्न व्यक्तियों का रोचक विवरण होता है। इस संदर्भ में ‘दस हजार करोड़ से आगे’ पूर्णरूपेण सफल है।
गढ़वाल पोस्ट; 6-12 जून, 2004
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