Kanshiram : Bahujanon Ke Nayak
Author:
Badri NarayanPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies0 Ratings
Price: ₹ 239.2
₹
299
Available
एक दलित आइकॉन के रूप में कांशीराम (1934-2006) की प्रतिष्ठा, आज के समय में आंबेडकर के बाद के एकमात्र नेता के रूप में है। यह किताब उनकी पूरी यात्रा पर रोशनी डालती है। कांशीराम के शुरुआती वर्ष ग्रामीण पंजाब में बीते और पुणे में आंबेडकरवादियों के साथ मिलकर ‘बामसेफ’ की नींव डाली, जो व्यापक स्वरूप वाला ऐसा संगठन था जिसने पिछड़ी जातियों, अनुसूचित जातियों, दलितों और अल्पसंख्यकों को एकजुट किया और अन्ततोगत्वा 1984 में ‘बहुजन समाज पार्टी’ बनाई।
अनगिनत मौखिक और लिखित स्रोतों का सहारा लेकर बद्री नारायण ने दिखाया है कि कैसे कांशीराम ने अपने ठेठ मुहावरों, साइकिल रैलियों और विलक्षण ढंग से स्थानीय नायकों और मिथकों का इस्तेमाल करते हुए व उनके आत्मसम्मान को जगाते हुए दलितों को गोलबन्द किया और कैसे उन्होंने सत्ता पर कब्जा करने के लिए ऊँची जाति की पार्टियों से अवसरवादी गठबन्धन कायम किए। यह किताब कांशीराम की मृत्यु तक मायावती के साथ उनके असाधारण रिश्ते की कहानी भी कहती है। साथ ही उनके सपने को पूरा करने के लिए उनके जीवित रहते और उनकी मृत्यु के बाद मायावती की भूमिका को भी रेखांकित करती है।
दो लोगों के बीच के विरोधाभासी नज़रिए को आमने-सामने रखते हुए, नारायण रेखांकित करते हैं कि कैसे कांशीराम ने आंबेडकर के विचारों को भिन्न दिशा दी। जाति का उच्छेद चाहनेवाले आंबेडकर से उलट, कांशीराम ने जाति को दलित पहचान को उभारने के एक आधार और राजनीतिक सशक्तीकरण के एक स्रोत के रूप में देखा।
प्राधिकार और पैनी दृष्टि सृजित यह दुर्लभ शब्दचित्र उस आदमी का है, जिसने दलित समाज का चेहरा बदलकर रख दिया और वाकई भारतीय राजनीति का भी।
ISBN: 9789388933124
Pages: 207
Avg Reading Time: 7 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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भीमराव आंबेडकर हिन्दुओं में पहले दलित या निम्न जाति नेता थे जिन्होंने पश्चिम जाकर पीएच-डी. जैसे सर्वोच्च स्तर तक की औपचारिक शिक्षा हासिल की थी। अपनी इस अभूतपूर्व उपलब्धि के बावजूद वह अपनी जड़ों से जुड़े रहे और तमाम उम्र दलित अधिकारों के लिए लड़ते रहे। भारत के सबसे प्रखर और अग्रणी दलित नेता के रूप में आंबेडकर का स्थान निर्विवाद है। निम्न जातियों को एक अलग औपचारिक और क़ानूनी पहचान दिलाने के लिए आंबेडकर सालों तक भारत के सवर्ण हिन्दू वर्चस्व वाले समूचे राजनीतिक प्रतिष्ठान से अकेले लोहा लेते रहे। स्वतंत्र भारत की पहली केन्द्र सरकार में आंबेडकर को क़ानून मंत्री और संविधान का प्रारूप तैयार करनेवाली समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इन पदों पर रहते हुए उन्हें भारतीय राजनय पर गांधीवादी प्रभावों पर अंकुश लगाने में उल्लेखनीय सफलता मिली।
क्रिस्तोफ़ जाफ़्रलो ने उनके जीवन को समझने के लिए तीन सबसे महत्त्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला है : एक समाज वैज्ञानिक के रूप में आंबेडकर; एक राजनेता और राजनीतिज्ञ के रूप में आंबेडकर; तथा सवर्ण हिन्दुत्व के विरोधी एवं बौद्धधर्म के एक अनुयायी व प्रचारक के रूप मे आंबेडकर।
Banjare Ki Chitthiyaan
- Author Name:
Sumer Singh Rathore
- Book Type:

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Description:
सुमेर सिंह राठौड़ रेत के समन्दर और अंधड़ में खेलकर बड़े हुए हैं। अपने रचनात्मक तनाव में वे उसी खिलाड़ी जज्बे से आगे बढ़ते दिखते हैं। जहाँ शब्द साथ नहीं होते, वहाँ सुमेर दृश्यों में अपनी बात कह गुज़रते हैं। जब विचारों की दौड़ लगती है, तब उनके शब्द आज़ाद परिन्दों की तरह तमाम बन्दिशों से होड़ लेते हैं।
कहने को 'बंजारे की चिट्ठियाँ' डायरी विधा की किताब है। लेकिन यह इस पीढ़ी की मन:स्थिति के एक ऐसे स्कैन रिपोर्ट की तरह है जो आने वाले समय का एक साहित्यिक दस्तावेज़ भी है। चाह-बिछोह, लाग-लपेट, सफलता-सार्थकता, विफलता-कशमकश—जो कुछ जीवन में है, वह सुमेर के लेखन में देखने को मिलता है।
खुरदुरी ज़िन्दगी का एक बेहद कोमल आख्यान है यह किताब; जिसे पढ़ना अपने किसी-न-किसी अक्स को भी देखने जैसा है।
Dhara Ke Vipreet
- Author Name:
Govind Mishra
- Book Type:

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Description:
साहित्य के शीर्षस्थ सम्मानों से विभूषित और कई चर्चित-बहुपठित उपन्यासों-कहानियों के सर्जक गोविन्द मिश्र यहाँ प्रथम पुरुष में अपने पाठकों यानी हम सबसे सम्बोधित हैं। ‘धारा के विपरीत' उनकी आत्मकथा है। एक पारदर्शी और सहज मनुष्य की आत्मकथा जिसने अपनी संवेदना, मानवीय मूल्यों की तरफ़दारी और अपने आसपास फैले सुख-दुख को शब्द-बद्ध करने के लिए लेखक होना चुना।
पेशे से आयकर विभाग में उच्च पदों पर रहने वाले गोविन्द मिश्र का बचपन और किशोरावस्था सुख-सुविधा के अत्यल्प साधनों के बावजूद उदारता, अपनेपन और सामाजिक सौहार्द के जिस वातावरण में बीता, अपनी प्राकृतिक संवेदनशीलता और उचित-अनुचित के सहजबोध ने जो अनुभव उन्हें उस दौरान दिये, वे उनकी रचनात्मकता का स्थायी आधार बने। इस आत्मकथा में वे अपने जीवन से जुड़े लोगों का ज़िक्र करते हुए अपनी उन कृतियों का भी जिक्र करते चलते हैं जिनका विषय वे लोग रहे। और इनमें बचपन ही नहीं उनके वयस्क और पेशेवर जीवन में आये लोग और घटनाएँ भी हैं! प्राथमिक अनुभवों ने ही उन्हें लिखने के लिए प्रेरित किया, किसी विचार, खेमे या आग्रह ने नहीं!
आज़ादी से तकरीबन एक दहाई पहले जन्मे गोविन्द जी ने अपने भीतर एक साधारण भारतीय मनुष्य को हर हाल में बचाए रखा! वह मनुष्य जो अपनी मुठभेड़ों में रोज़ कुछ बड़ा होता है। लोगों की असलियतों से मिले विस्मय को संपदा की तरह सहेजकर रखता है और किसी कड़वाहट से ख़ुद को विषैला नहीं होने देता। साधारण की इस मौजूदगी को वे साहित्य सर्जना की पहली शर्त मानते भी हैं जो इस आत्मकथा में भी उपस्थित है। ‘सच बता दो तो वह कितने कलुष धो डालता है। सच में वजन होता है।’ एक जगह वे कहते हैं।
यह एक कल्मषरहित जीवन का निर्भार वृत्तांत है जो अपने उद्गम से समुद्र की ओर तीव्र गति से जाती नदी की तरह बहता है और उत्तरोत्तर सान्द्र होता जाता है। इसमें लेखक अपनी रचनाओं के बारे में, अफ़सर अपनी चुनौतियों के बारे में, प्रेमी अपने प्रेम के बारे में, पुरुष उन स्त्रियों के बारे में जिनका स्त्रीत्व उसे बरबस मोह लेता है, पति और पिता अपने परिवार के बारे में, दोस्त अपने दोस्तों के बारे में, साहित्यकार अपने साहित्यिक परिवेश की ख़ूबियों-खामियों के बारे में और मनुष्य अपनी मनुष्यता के बारे में अकुंठ भाव से सबकुछ बताता चलता है। और उस समय के बारे में भी जो अपनी तमाम तकनीकी, बौद्धिक और आर्थिक समृद्धि के बावजूद ठीक उसी जगह पर संकरा और कम पड़ जाता है, जहाँ उसे बड़ा और उदात्त होना चाहिए।
Sunita Williams
- Author Name:
Kali Shankar +1
- Book Type:

- Description: "सुनीता विलियम्स एक असाधारण महिला की अदम्य इच्छाशक्ति, समर्पण, उत्साह तथा आत्मविश्वास का पर्याय है। इन्हीं गुणों ने एक पशु-चिकित्सक बनने की महत्त्वाकांक्षा रखनेवाली छोटी बालिका सुनीता विलियम्स को एक अंतरिक्ष-विज्ञानी, एक आदर्श प्रतिमान बना दिया। अंतरिक्ष में अपने छह माह के प्रवास के दौरान सुनीता विलियम्स दुनिया भर के लाखों लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। 29 घंटे 17 मिनट में कुल चार स्पेस वॉक (अंतरिक्ष में चलने का कार्य) पूरा करके उन्होंने महिलाओं के लिए ‘असाधारण वाहनीय गतिविधि’ का एक विश्व कीर्तिमान स्थापित किया। सुनीता के अंतरिक्ष प्रवास ने विश्व में भारत का सम्मान और बढ़ा दिया। सुनीता समुद्रों में तैराकी कर चुकी हैं, महासागरों में गोताखोरी कर चुकी हैं, युद्ध और मानव-कल्याण के कार्य के लिए उड़ानें भर चुकी हैं; अंतरिक्ष तक पहुँच चुकी हैं और अंतरिक्ष से अब वापस धरती पर आ चुकी हैं; सचमुच, एक जीवित किंवदंती हैं वे। पे्ररणादायी सुनीता के जीवन से हर बालक-बालिका प्रेरणा लेकर किसी भी क्षेत्र के आकाश को छुए, यही इस पुस्तक के प्रकाशन का उद्देश्य है।
Banda Singh Bahadur
- Author Name:
Maj Gen Suraj Bhatia
- Book Type:

- Description: "बंदा बहादुर ने अपना प्रारंभिक जीवन एक वैरागी के रूप में बिताया। यह लगभग सत्रह वर्ष चला। अधिकांश समय उन्होंने दक्षिण भारत में गोदावरी नदी पर स्थित नंदेड़ नामक नगर में अपने आश्रम में तपश्चर्या करते बिताया। उन्होंने हिंदू शास्त्रों तथा योग एवं प्राणायाम विद्याओं का गहन अध्ययन किया। कुछ लोग मानते हैं कि वे तंत्र विद्या के भी ज्ञाता थे। गुरु गोविंद सिंह ने उन्हें गले से लगाया, उन्हें अमृत छकाकर सिख बनाया, उनका नाम बंदा सिंह बहादुर रखा और उन्हें पंजाब से मुगल राज्य की जड़ें उखाड़ फेंकने की जिम्मेदारी सौंपी। इसके बाद उन्होंने पंजाब में मुगलों के शहर, गढ़ और किले आक्रमण करके अपने अधीन करने का कार्यक्रम शुरू किया। बंदा ने ऐलान किया कि वे जमींदारों को हटाकर सभी जमीन खेतिहर गरीब किसानों में बाँटेंगे। महमूद गजनी और मुहम्मद गौरी के दिनों के बाद इतनी सदियाँ बीत जाने के बाद पहली बार उत्तर भारत में किसी गैर-मुसलमानी शक्ति ने एक बड़े और बेशकीमती भू-भाग पर अपना आधिपत्य जमाया। अंततः मुगलों ने बंदा बहादुर को पकड़कर बेडि़यों में डाल लोहे के पिंजड़े में बंद कर दिया गया। हथकडि़यों और पाँव की साँकलों में बंदा को महीनों तक जेल में बंद रख, मुसलमान जल्लादों के हाथों जो अमानवीय यातनाएँ दी गईं, वे अनुमान और कल्पना से परे हैं। वीर, क्रांतिकारी, हुतात्मा, धर्मपारायण, राष्ट्रनिष्ठ वीर बंदा सिंह बहादुर की जाँबाजी और पराक्रम का गौरवगान करती यह पुस्तक हर राष्ट्राभिमानी के लिए पढ़नी आवश्यक है। "
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