James Watt
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Author:
Gopi Krishna KunwarPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
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Book Details
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ISBN9789393111029
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Pages168
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Avg Reading Time6 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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- Description: "रामानुजन एक ऐसा नाम है, जिन्होंने अपनी पीढ़ी के गणितज्ञों को प्रेरणा प्रदान की और 21वीं सदी में ऐसे बहुत से गणित-प्रेमी हैं, जो उनके गणित के शोध कार्यों का अभी भी अनुसरण कर रहे हैं। ऐसा कोई भी व्यक्ति, जिसे गणित से प्रेम है, उसके लिए रामानुजन के परिचय की आवश्यकता नहीं है। फ्रीमैन डायसन ने रामानुजन के लिए कहा था, ‘‘उन्होंने बहुत कुछ ढूँढ़ा है और अपने बगीचे में दूसरे लोगों के ढूँढ़ने के लिए और भी बहुत कुछ छोड़ दिया है। हर बार, जब मैं रामानुजन के बगीचे में आता हूँ, तब मैंने वहाँ कुछ नए खिले फूल देखे हैं।’’ इस पुस्तक की रोचकता बरकरार रखने के लिए इसे नौ अलग-अलग वर्गों में बाँट दिया गया है। रामानुजन के व्यक्तित्व एवं कृतित्व तथा गणित को उनके अवदान को प्रश्नोत्तर शैली में प्रस्तुत किया गया। इस रूप में विद्यार्थी-शिक्षार्थी एवं शोधार्थी गणित को बड़ी सहजता से हृदयंगम कर सकेंगे।
Kal Ke Hastakshar
- Author Name:
Shivani
- Book Type:

- Description: कथाकार और उपन्यासकार के रूप में शिवानी की लेखनी ने स्तरीयता और लोकप्रियता की खाई को पाटते हुए एक नई जमीन बनाई थी जहाँ हर वर्ग और हर रुचि के पठक सहज भाव से विचरण कर सकते थे। उन्होंने मानवीय संवेदनाओं और सम्बन्धगत भावनाओं की इतने बारीक और महीन ढंग से पुनर्रचना की कि वे अपने समय में सबसे ज्यादा पढ़े जानेवाले लेखकों में एक होकर रहीं। कहानी, उपन्यास के अलावा शिवानी ने संस्मरण और रेखाचित्र आदि विधाओं में भी बराबर लेखन कियाक। अपने संपर्क में आए व्यक्तियों को उन्होंने करीब से देखा, कभी लेखक की निगाह से तो कभी मनुष्य की निगाह से, और इस तरह उनके भूरे-पूरे चित्रों को शब्दों में उकेरा और कलाकृति बना दिया। इस पुस्तक में कोयलिया मत कर पुकार, बांधीश ना आर मायार डोरे, ताजमहल, अमरूद या भाभी ललिता, काल के हस्ताक्षर, सीमन्तेर सिन्दूर, एक अनाघ्रात पुष्प, आपबीती, कीर्ति-स्तम्भ, बिन्नू, आमि जे बनलता, भूली कहाँ हूँ, शुचि स्मिता, अरुंधती सुशीला, वह जीवन-भर कविता ही तो लिखती रही आदि रचनाएँ शामिल हैं। आशा है, शिवानी के कथा-साहित्य के पाठकों की उनकी ये रचनाएँ भी पसंद आएँगी।
Karpuri Thakur
- Author Name:
Dr. Ranjana Kumari
- Rating:
- Book Type:

- Description: जननायक कर्पूरी ठाकुर की ख्याति मुख्यमंत्री के रूप में कम और 'विपक्ष के प्राण' के रूप में ज्यादा थी। समाजवादी धारा के अग्रणी नेता के रूप में कर्पूरीजी भारतीय राजनीति में प्रतिष्ठित रहे हैं। संसदीय मर्यादा और विधाओं के भरपूर पालन तथा संसदीय व्यवस्था में कर्पूरीजी की अटूट आस्था थी। बिहार विधानसभा तथा लोकसभा में उनकी भागीदारी अत्यन्त उच्चकोटि की रही है। इस पुस्तक में विभिन्न संसदीय विधाओं, राज्यपाल के अभिभाषण, प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, बजट, वाद-विवाद, लोक महत्त्व के विषयों, प्रस्तावों तथा अविश्वास प्रस्ताव आदि में नेता विपक्षी दल के रूप में कर्पूरीजी की भागीदारी का निरूपण किया गया है। इसके अतिरिक्त विभिन्न संसदीय विधाओं के सैद्धान्तिक पक्ष का अनुशीलन करते हुए उन सिद्धान्तों की कसौटी पर कर्पूरीजी की भूमिका का परीक्षण किया गया है। कर्पूरीजी की सदन के अन्दर नेता विपक्षी दल के रूप में निभाई गई भूमिका का विस्तृत विवरण देनेवाली यह पुस्तक भारतीय राजनीति के कुछ महत्त्वपूर्ण बिन्दुओं की सूचना भी देती है।
Zakir Saheb Ki Kahani Unki Beti Ki Zubani
- Author Name:
Syeda Khursheed Alam
- Book Type:

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Description:
ज़ाकिर साहब के जीवन के अनेक पहलुओं को उजागर करनेवाली पुस्तक : ‘ज़ाकिर साहब की कहानी : उनकी बेटी की ज़ुबानी।’
लेखिका ने ज़ाकिर साहब को बहुत निकट से देखा है और उनके अन्तरंग जीवन को बड़े आदर के साथ परखा है।
प्रस्तुत पुस्तक में ज़ाकिर साहब की जीवनी प्रारम्भ से लेकर अन्त तक दी गई है। उनकी ज़िन्दगी के अनेक उतार-चढ़ाव को मार्मिक स्पर्श दिया गया है। जहाँ इसमें ज़ाकिर साहब की चरित्रगत विशेषताओं पर प्रकाश डाला गया है, वहीं उनके कुछ महत्त्वपूर्ण संस्मरणों को भी रेखांकित किया गया है, जिनके माध्यम से ज़ाकिर साहब का व्यक्तित्व अपनी सम्पूर्ण आभा के साथ प्रस्फुटित होता है।
इस पुस्तक की सबसे बड़ी ख़ूबी है रोचकता के साथ इसकी प्रस्तुति। कहने का ढंग इतना निराला कि पढ़ते ही बनती है। हर आयु का व्यक्ति इसको पढ़कर ज़रूर आनन्द ले सकता है। किशोरों के लिए तो यह विशेष रूप से उपयोगी है। यह पुस्तक निश्चित रूप से उन्हें बहुत कुछ सोचने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा के साथ-साथ देश का अच्छा और सच्चा नागरिक बनने की सूझबूझ, व्यापक उदार दृष्टि और राष्ट्रप्रेम प्रदान करेगी।
An Unsuitable Boy
- Author Name:
Karan Johar +1
- Book Type:

- Description: Karan Johar is synonymous with success, panache, quick wit, and outspokenness, which sometimes inadvertently creates controversy and makes headlines. KJo, as he is popularly called, has been a much-loved Bollywood film director, producer and actor. With his flagship Dharma Production, he has constantly challenged the norms, written and rewritten rules, and set trends. But who is the man behind the icon that we all know? Baring all for the first time in his autobiography, An Unsuitable Boy, KJo reminisces about his childhood, the influence of his Sindhi mother and Punjabi father, obsession with Bollywood, foray into films, friendships with Aditya Chopra, SRK and Kajol, his love life, the AIB Roast, and much more. In his trademark frank style, he talks about the ever-changing face of Indian cinema, challenges and learnings, as well as friendships and rivalries in the industry. Honest, heart-warming and insightful, An Unsuitable Boy is both the story of the life of an exceptional film-maker at the peak of his powers and of an equally extraordinary human being who shows you how to survive and succeed in life.
Kursi Pahiyonwali
- Author Name:
Naseema Hurjuk
- Book Type:

- Description: ‘कुर्सी पहियोंवाली’ एक ऐसी विकलांग महिला के जीवन की अन्तरंग कथा है, जिसने अपनी उम्र के आरम्भिक सोलह साल एक स्वस्थ और सामान्य व्यक्ति की तरह बिताए और उसके बाद पक्षाघात से सहसा व्हीलचेयर उसका सम्बल बनी। किसी भी विकलांग व्यक्ति के भीतर इतनी जिजीविषा हो, ऐसा विरले ही दिखाई देता है। आरम्भिक बदहवासी के दौर में आत्महत्या तक कर लेने का विचार था, फिर उससे उबरने की कोशिश और उत्कर्ष! यह एकदम नए सिरे से उठने जैसी परिवर्तनकामी कथा है, जो अपनी विकलांगता की व्यथा को दूसरे विकलांग जन की पीड़ा में परिवर्तित करती है। यह कहानी एक ज़िन्दा स्त्री के संघर्ष की है। नौकरशाहों का विकलांगों के प्रति होनेवाला व्यवहार विश्वास की सीमा से परे अव्यावहारिक एवं अमानवीय रहा है। इसके बरअक्स, नसीमा एक प्रसिद्ध कार्यकर्ता बनकर उभरती हैं। एक बड़ा क़द और रोशनी बनकर सामने आती हैं। वह विकलांगों के लिए आशा की किरण हैं। पहियेवाली कुर्सी पर बैठकर भी वह हम जैसे स्वस्थ जनों को अस्वस्थ, बेचैन कराने की क्षमता रखती हैं। यह पुस्तक पहले मराठी भाषा में छपी, उसके बाद इसका अनुवाद अंग्रेज़ी, गुजराती, कन्नड़ तथा तेलगू भाषा में हुआ और उपर्युक्त भाषाओं के पाठकों ने इसे बेहद पसन्द किया। हमें विश्वास है, हिन्दी में भी नसीमा की यह कहानी वही अनुभव दोहराएगी। नसीमा हुरजूक की यह कहानी सिर्फ़ उनके अकेले की नहीं, बल्कि भारत के अनगिनत विकलांग जन का सच बयान करती है। इस क्रम में नसीमा एक बेहद अलग और निराला व्यक्तित्व हैं। उन्होंने विकलांगता के बावजूद न केवल अपने जीने की राह बनाई, बल्कि वह अपने चरम उत्कर्ष तक पहुँचीं। उन्होंने दूसरे विकलांग लोगों के सामने एक मिसाल रखी और उन सबको पाठ पढ़ाया। —जावेद आबिदी; निदेशक, ‘डिसेबल्ड राइट्स ग्रुप’ मैं अपने जीवन में नसीमा जैसी किसी महिला से पहले कभी नहीं मिला। उन्होंने अपने तथा दूसरों के जीवन के उत्कर्ष की राह में अपनी विकलांगता को पूरी तरह बेमानी कर दिया। उन्होंने विकलांगता को एकदम नई नज़र से देखा और मंत्र दिया, ‘...कि तुममें कोई कमी नहीं है, बस, तुम दूसरों से अलग हो...’ सचमुच, यह बहुत ही प्रेरक और अनुकरणीय पुस्तक है। —अनन्त दीक्षित; सम्पादक ‘दैनिक लोकमत’, पुणे
Sainik Sannyasi Swami Vivekanand
- Author Name:
Indranath Choudhuri
- Book Type:

- Description: तैंतीस करोड़ देवी-देवताओं में विश्वास रखते हुए भी यदि अपने में विश्वास नहीं है तो तुम्हें नास्तिक ही माना जाएगा।–यह कहकर स्वामी विवेकानन्द ने हमारे सामने कर्म और इहलौकिक सक्रियता का आह्वान किया था। मानव-मन में जीवन के प्रति उठनेवाली उमंग की राह में सबसे बड़ी बाधा मृत्यु का भय है। यह सोचकर कि अन्ततः एक दिन हम यहाँ नहीं होंगे, कितने ही प्रयास संकुचित रह जाते हैं। स्वामी विवेकानन्द ने इसी संकोच को विशेष तौर पर सम्बोधित किया और मृत्यु से, मृत्यु के भय से प्रेम करने को कहा ताकि जीवन के रूप में जितना समय हमारे पास है, उसका उपयोग वृहद् मनुष्यता और उसके भविष्य के लिए उत्सर्ग किया जा सके। यही विवेकानन्द का सैनिक भाव है–मृत्यु को साक्षात् देखते हुए जीवन की आराधना। इसीलिए रोम्याँ रोलाँ ने उन्हें ‘वारियर प्रोफेट’ कहा था। धर्म को व्यापक मानवीय अनुभव के रूप में परिभाषित करते हुए उन्होंने अध्यात्म को कर्मपथ पर अग्रसर देखना चाहा। इस पुस्तक में विवेकानन्द के जीवन और दर्शन को कथा की सी सहजता के साथ प्रस्तुत करते हुए उनके दार्शनिक-वैचारिक विकास की प्रक्रिया और उनके विचारों, विश्वासों तथा भारतीय मनीषा में उनके योगदान को रेखांकित किया गया है। भारत और विश्व की उनकी यात्राओं के रोचक विवरण और इस दौरान राष्ट्रवाद, धर्म और मानव-कल्याण के सन्दर्भ में चल रही उनकी भीतरी खोज-यात्रा के विभिन्न पड़ाव भी इसमें सँजोए गए हैं। विभिन्न विषयों, व्यक्तियों, सामाजिक समस्याओं और प्रश्नों पर उनके विचारों की प्रस्तुति इसका विशेष आकर्षण है जिससे विवेकानन्द के भावी अध्येता एक सम्पूर्ण बोध के साथ अपनी यात्रा शुरू कर सकते हैं।
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