Asim Hai Asman
Author:
Narendra JadhavPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies0 Ratings
Price: ₹ 180
₹
225
Unavailable
छुआछूत और जातीय अस्पृश्यता का कलंक भारत की 3500 वर्ष पुरानी जाति-व्यवस्था का शाप है, जो दुर्भाग्यवश आज भी जीवित है और समय-समय पर उफन पड़ता है। पर धीरे-धीरे यह स्पष्ट होता जा रहा है कि अब वह देश की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक तथा सांस्कृतिक गतिशीलता के सामने अधिक समय तक टिक नहीं सकेगी।</p>
<p>‘असीम है आसमाँ’ ऐसे ही एक परिवार की कहानी है, जिसने लगातार जाति-व्यवस्था, निरक्षरता, अज्ञान, अन्धविश्वास तथा ग़रीबी के विरोध में संघर्ष किया।</p>
<p>इसमें एक परिवार की तीन पीढ़ियों के संघर्ष की कथा है जिसकी पृष्ठभूमि में भारत के स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक तथा राजनीतिक परिवर्तन की विस्तृत झाँकी मिलती <br>है।</p>
<p>सन् 1993 में यह उपन्यास ‘आमचा बाप आणि आम्ही’ शीर्षक से मराठी में प्रकाशित हुआ, जो अत्यन्त लोकप्रिय रहा। तत्पश्चात् अंग्रेज़ी, फ़्रेंच तथा स्पेनिश जैसी विदेशी भाषाओं में तथा गुजराती, तमिल, कन्नड़, उर्दू और पंजाबी जैसे भारतीय भाषाओं में भी इसका अनुवाद प्रकाशित हुआ।
ISBN: 9788126711710
Pages: 239
Avg Reading Time: 8 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Sharad Pawar
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- Description: शरद पवार भारत की सर्वाधिक प्रभावशाली राजनैतिक हस्तियों में गण्य-मान्य हैं। पाँच दशक लम्बे अपने राजनैतिक जीवन में उन्होंने कभी कोई चुनाव नहीं हारा। चार बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे। देश के रक्षामंत्री और फिर कृषि मंत्री के रूप में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी। दो मौक़े ऐसे भी आए जब वे भारत के प्रधानमंत्री हो सकते थे। लोकप्रियता के ऊपर नीति और व्यावहारिकता को तरजीह देते हुए उन्होंने अक्सर सोच की नई धारा बनाई और अपने प्रशासनिक कौशल तथा सामंजस्यपूर्ण राजनीति के लिए प्रशंसा के पात्र बने। वे भारत और महाराष्ट्र के इतिहास को साठ के दशक से देख रहे हैं। इस पुस्तक में उन्होंने गठबन्धन की राजनीति, कांग्रेस के भीतर लोकतंत्र के क्षरण, कृषि और उद्योग की स्थिति और भावी भारत के लिए सामाजिक समरसता तथा उदार दृष्टिकोण की अहमियत पर अपने विचार प्रकट किए हैं। पुस्तक में वे देश पर आए संकट के कुछ क्षणों पर भी हमें दुर्लभ जानकारी देते चलते हैं, जिनमें आपातकाल और देश की क्षेत्रीय तथा राष्ट्रीय राजनीति पर उसके प्रभाव; 1991 में चन्द्रशेखर सरकार का पतन; राजीव गांधी और एच.एस. लोंगोवाल के बीच हुआ पंजाब समझौता; बाबरी मस्जिद ध्वंस; 1993 के मुम्बई दंगे; लातूर का भूकम्प; एनरॉन विद्युत परियोजना विवाद और श्रीमती सोनिया गांधी द्वारा प्रधानमंत्री पद न लेने का फ़ैसला आदि निर्णायक महत्त्व के मुद्दे शामिल हैं। भारतीय राजनीति के कुछ बड़े नामों का रोमांचकारी आकलन भी उन्होंने किया है, जिससे इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी, वाई.बी. चव्हाण, मोरारजी देसाई, बीजू पटनायक, अटल बिहारी वाजपेयी, चन्द्रशेखर, पी.वी. नरसिम्हा राव, जॉर्ज फर्नांडीज और बाल ठाकरे के व्यक्तित्वों पर नई रोशनी पड़ती है। 'अपनी शर्तों पर’ में न सिर्फ़ देश के सबसे अनुभवी और प्रभावशाली नेताओं में से एक, शरद पवार, के अन्तर्दृष्टिपूर्ण संस्मरण हैं, बल्कि इस पुस्तक से हमें भारत के आधुनिक इतिहास को भी समझने का अवसर मिलता है।
Smritiyon ke Indradhanush
- Author Name:
Sharda Shukla
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- Description: अतीत बड़ा सम्मोहक होता है, और अगर अतीत की यादें अपने पिता की हों तो वह उनकी उंगली पकड़कर गुजरे वक्त को दोबारा जीने जैसा होता है। इस पुस्तक पर काम करते हुए मैंने कुछ ऐसा ही अनुभव किया। हर एक संस्मरण के साथ अनेक छोटी-बड़ी कहानियाँ मेरे आगे परत-दर-परत खुलती चली गईं। इन कहानियों से जुड़े पात्र मेरे जेहन में अनायास ही जीवंत हो उठते। इनके जरिए मैंने उस कालखंड को जिया, उस वक्त के इतिहास, भूगोल, सामाजिक परिदृश्य और राजनीति को समझा। वैसे तो प्रत्येक व्यक्ति का जीवन एक उपन्यास की तरह होता है, जिसका हीरो वह स्वयं होता है। शेष सभी रिश्ते-नाते सहायक पात्रों की तरह आते और जाते रहते हैं। मेरे इस चरितात्मक उपन्यास के हीरो मेरे पापा हैं। हीरो भले ही एक हों पर नजरिए दो हैं। वो जो उन्होंने बताया या लिखा, दूसरा वो जो मैंने समझा या पाया। इस तरह यह पुस्तक एक सह प्रयास भी है। (इसी पुस्तक से)
Nicolaus Copernicus
- Author Name:
Vinod Kumar Mishra
- Book Type:

- Description: "19 फरवरी, 1473 को पोलैंड में जनमे निकोलस कोपरनिकस यूरोपिय खगोलशास्त्री व गणितज्ञ थे। उन्होंने यह क्रांतिकारी सूत्र दिया था कि पृथ्वी अंतरिक्ष के केंद्र में नहीं है। 1530 में कोपरनिकस की पुस्तक ‘डी रिवोलूशन्स’ प्रकाशित हुई, जिसमें बताया गया है कि पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती हुई एक दिन में चक्कर पूरा करती है और एक साल में सूर्य का चक्कर पूरा करती है। कोपरनिकस ने तारों की स्थिति ज्ञात करने के लिए प्रूटेनिक टेबिल्स की रचना की, जो अन्य खगोलविदों के बीच काफी लोकप्रिय हुई। खगोलशास्त्री होने के साथ-साथ कोपरनिकस गणितज्ञ, चिकित्सक, अनुवादक, कलाकार, न्यायाधीश, गवर्नर, सैन्य नेता और अर्थशास्त्री भी थे। उन्होंने मुद्रा पर शोध कर ग्रेशम के प्रसिद्ध नियम को स्थापित किया, जिसके अनुसार खराब मुद्रा अच्छी मुद्रा को चलन से बाहर कर देती है। कोपरनिकस के अंतरिक्ष के बारे में सात नियम बड़े प्रसिद्ध हैं। वह घंटों नंगी आँखों से अंतरिक्ष को निहारते रहते थे और गणितीय गणनाओं द्वारा सही निष्कर्ष प्राप्त करने की कोशिश करते रहते थे। 24 मई, 1543 को इस महान् खगोलविज्ञानी का निधन हो गया। "
Mud-Mudke Dekhta Hoon
- Author Name:
Rajendra Yadav
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- Description: यह मेरी आत्मकथा नहीं है? इन ‘अन्तर्दर्शनों’ को मैं ज़्यादा-से-ज़्यादा ‘आत्मकथांश’ का नाम दे सकता हूँ। आत्मकथा वे लिखते हैं जो स्मृति के सहारे गुज़रे हुए को तरतीब दे सकते हैं। लम्बे समय तक अतीत में बने रहना उन्हें अच्छा लगता है। लिखने का वर्तमान क्षण, वहाँ तक आ पहुँचने की यात्रा ही नहीं होता, कहीं-न-कहीं उस यात्रा के लिए ‘जस्टीफिकेशन’ या वैधता की तलाश भी होती है—मानो कोई वकील केस तैयार कर रहा हो। लाख न चाहने पर भी वहाँ तथ्यों को काट-छाँटकर अनुकूल बनाने की कोशिशें छिपाए नहीं छिपतीं : देख लीजिए, मैं आज जहाँ हूँ, वहाँ किन-किन घाटियों से होकर आया हूँ। अतीत मेरे लिए कभी भी पलायन, प्रस्थान की शरणस्थली नहीं रहा। ‘वे दिन कितने सुन्दर थे...काश, वही अतीत हमारा भविष्य भी होता’—की आकांक्षा व्यक्ति को स्मृतिजीवी, निठल्ला और राष्ट्र को सांस्कृतिक राष्ट्रवादी बनाती है। ज़ाहिर है इन स्मृति-खंडों में मैंने अतीत के उन्हीं अंशों को चुना है जो मुझे गतिशील बनाए रहे हैं। जो छूट गया है वह शायद याद रखने लायक नहीं था; न मेरे, न औरों के....कभी-कभी कुछ पीढ़ियाँ अगलों के लिए खाद बनती हैं। बीसवीं सदी के ‘उत्पादन’ हम सब ‘ख़ूबसूरत पैकिंग’ में शायद वही खाद हैं। यह हताशा नहीं, अपने ‘सही उपयोग’ का विश्वास है, भविष्य की फ़सल के लिए...बुद्ध के अनुसार ये वे नावें हैं जिनके सहारे मैंने ज़िन्दगी की कुछ नदियाँ पार की हैं और सिर पर लादे फिरने के बजाय उन्हें वहीं छोड़ दिया है। —भूमिका से
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