Europ Mein Antaryatrayen
(0)
Author:
Karan Singh ChauhanPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Travelogues₹
695
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Available
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हम जो हैं वह हमारे ध्यान में नहीं रहता। हमें जैसा होना चाहिए इसी पर सब टिक गया है। जीवन जो है वह नहीं, उसे जैसा होना चाहिए। यानी 'कैसा होना चाहिए' में हमारी एकमात्र दिलचस्पी रह गई है। इसलिए सब कुछ वांछित और हवाई हो गया है। वास्तव कुछ नहीं रह गया। वास्तविकता से अधिक स्वप्न, भविष्य, जीवनेतर महत्त्वपूर्ण हो गया है। वह एक तरफ शरीर से अधिक आत्मा के सरोकारों, इहलोक से अधिक परलोक की चिन्ताओं के फलते-फूलते आध्यात्मिक भ्रष्टाचार में व्यक्त हो रहा है। दूसरी तरफ किसी भावी आदर्श समाज की स्थापना के वादों, स्वप्न के भ्रमजाल के सिद्धान्तों में। ये सब शक्ति के खेल में शामिल गतिविधियाँ हैं जो अब की वास्तविकता को झुठलाती हैं। यात्राएँ इस वास्तविकता के बीच ही होती हैं और वह जैसी भी हैं, उसका उसी रूप में साक्षात्कार करती हैं। <br>यात्राएँ की जा सकती हैं, उन्हें लिखना एक इतर काम है। जिस दिन मनुष्य जीवन से एकमेक हो जाएगा शायद उस दिन कुछ कहने की आवश्यकता महसूस न करे। लिखने के लिए एक तरह की 'इन्नोसेंस' चाहिए, दुनियादारी के नाम पर पसरे विचारों में आस्था चाहिए, कुछ होने की भ्रान्ति का सहारा चाहिए। लिखा तभी जा सकता है।
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हम जो हैं वह हमारे ध्यान में नहीं रहता। हमें जैसा होना चाहिए इसी पर सब टिक गया है। जीवन जो है वह नहीं, उसे जैसा होना चाहिए। यानी 'कैसा होना चाहिए' में हमारी एकमात्र दिलचस्पी रह गई है। इसलिए सब कुछ वांछित और हवाई हो गया है। वास्तव कुछ नहीं रह गया। वास्तविकता से अधिक स्वप्न, भविष्य, जीवनेतर महत्त्वपूर्ण हो गया है। वह एक तरफ शरीर से अधिक आत्मा के सरोकारों, इहलोक से अधिक परलोक की चिन्ताओं के फलते-फूलते आध्यात्मिक भ्रष्टाचार में व्यक्त हो रहा है। दूसरी तरफ किसी भावी आदर्श समाज की स्थापना के वादों, स्वप्न के भ्रमजाल के सिद्धान्तों में। ये सब शक्ति के खेल में शामिल गतिविधियाँ हैं जो अब की वास्तविकता को झुठलाती हैं। यात्राएँ इस वास्तविकता के बीच ही होती हैं और वह जैसी भी हैं, उसका उसी रूप में साक्षात्कार करती हैं। <br>यात्राएँ की जा सकती हैं, उन्हें लिखना एक इतर काम है। जिस दिन मनुष्य जीवन से एकमेक हो जाएगा शायद उस दिन कुछ कहने की आवश्यकता महसूस न करे। लिखने के लिए एक तरह की 'इन्नोसेंस' चाहिए, दुनियादारी के नाम पर पसरे विचारों में आस्था चाहिए, कुछ होने की भ्रान्ति का सहारा चाहिए। लिखा तभी जा सकता है।
Book Details
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ISBN9788183610469
-
Pages200
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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अण्णा भाऊ ने मनुष्य को मनुष्य के रूप में देखा, समझा और प्रस्तुत किया है। यह दृष्टि उन्हें मार्क्सवादी दर्शन से प्राप्त हुई है।
मेरी रूस यात्रा शीर्षक यात्रा वर्णन में उन्होंने अपने साहचर्य में आए पात्रों का बहुत ही सुन्दर एवं संवेदनापूर्ण चित्रण किया है। इस चित्रण में उनके भीतर बसा हुआ साहित्य-सर्जक बहुत ही उच्चकोटि का दिखता है। अण्णा भाऊ को महाराष्ट्र की मिट्टी के प्रति बहुत लगाव था, आत्मीयता का भाव था। इसका भी परिचय इस यात्रा-वर्णन में प्राप्त होता है। उन्होंने मॉस्को में पहला भाषण मराठी में दिया। अण्णा भाऊ की भाषा व्यंग्यपूर्ण है। सहज, सरल भाषा में वे गहरा व्यंग्य-प्रहार करने में कुशल हैं।
यात्रा वर्णन के अन्त में अण्णा भाऊ ने पूर्वदीप्ति शैली का सुन्दर प्रयोग किया है। ताशकन्द से दिल्ली विमान यात्रा के दौरान वे पूर्वदीप्ति शैली में भूत और वर्तमान को अभिव्यक्ति देते हैं, जो इस यात्रा-वर्णन को अत्यन्त प्रभावी एवं रसमय बनाता है, चरमोत्कर्ष पर ले जाता है।
अण्णा भाऊ की कलम में स्वानुभूति की धार है, भाषा में लोक जीवन की महक है, वे शब्दों के जादूगर हैं, सहज-सरल, प्रवाही भाषा द्वारा चरित्र-चित्रण को मनोवैज्ञानिक आधार पर प्रस्तुत करने में माहिर और सजग लेखक हैं। उनमें निरीक्षण की अद्भुत क्षमता है, जो उनके जीवनानुभवों से सिद्ध हुई है। कहीं पर भी वर्णन में अतिशयोक्ति एवं अस्वाभाविकता नहीं है। मनुष्य को सार्वकालिक दृष्टि से देखने का उनका नजरिया विशेष है।
Mahatirth Ke Antim Yatri (Lhasa���Kaliashnath���Mansarovar
- Author Name:
Bimal Dey
- Book Type:

- Description: सन् 1956 में तिब्बत का दरवाज़ा विदेशियों के लिए लगभग बन्द हो चुका था और राजनैतिक कारणों से भारत के साथ तिब्बत का सम्पर्क भी लगभग टूट चुका था। उन्हीं दिनों, बिना किसी तैयारी के, बिमल दे घर से भागे और नेपाली तीर्थयात्रियों के एक दल में सम्मिलित हो ल्हासा तक जा पहुँचे। उस समय उनकी उम्र मात्र पन्द्रह वर्ष थी। यात्रियों में वह नवीन मौनी बाबा। ल्हासा में उन्होंने तीर्थयात्रियों का दल छोड़ा, और वहाँ से अकेले ही कैलास खंड की ओर कूच कर गए। 'महातीर्थ के अन्तिम यात्री' में उसी रोमांचक यात्रा-अनुभाव का वर्णन है। बिमल दे ने स्वयं इसे ‘एक भिखमंगे की डायरी’ कहा है। किन्तु इस पुस्तक में मिलेगा तिब्बत का दैनंदिन जीवन तथा महातीर्थ का पूर्ण विवरण।
Sudhiyan Us Chandan Ke Van Ki
- Author Name:
Vishnukant Shastri
- Book Type:

- Description: मैं इस दृष्टि से भाग्यवान् हूँ कि मुझे विविध क्षेत्रों के सत्पुरुषों का स्नेह-सौहार्द मिलता रहा है। जिन विशिष्ट व्यक्तियों के संपर्क से या स्थानों के भ्रमण से जीवन समृद्ध हुआ है, उनकी याद बार-बार आती ही है। हर बार लगता है कि उस याद ने अपनी सुगन्ध से जीवन को पुन: सुरभित कर दिया। वस्तुत: घटनाएँ जब घटती हैं तब उनका प्रभाव किन-किन स्तरों पर कितनी गहराई से पड़ रहा है, इसका सम्यक बोध नहीं हो पाता। उन प्रीतिकर स्मृतियों का रोमन्थन ही स्पष्ट करता है कि उन व्यक्तियों या घटनाओं ने जीवन को कितनी प्रेरणा और स्पूâर्ति प्रदान की थी। उनके प्रति कृतज्ञता-बोध ही मुझे उनकी स्मृतियों को लिपिबद्ध करने को उत्साहित करता रहा है। इस तरह ये संस्मरण लिखे जाते रहे।
Battees Sal Ka Safar
- Author Name:
Krishn Bihari
- Book Type:

- Description: This book has no description
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