Chalte To Achchha Tha
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‘चलते तो अच्छा था’ में ईरान और आज़रबाईजान के यात्रा-संस्मरण हैं। असग़र वजाहत ने केवल इन देशों की यात्रा ही नहीं की, बल्कि उनके समाज, संस्कृति और इतिहास को समझने का भी प्रयास किया है। उन्हें इस यात्रा के दौरान विभिन्न प्रकार के रोचक अनुभव हुए हैं। उन्हें आज़रबाईजान में एक प्राचीन हिन्दू अग्नि मिला। कोहे-क़ाफ़ की परियों की तलाश में भी भटके और तबरेज़ में एक ठग द्वारा ठगे भी गए।</p> <p>यात्राओं का आनन्द और स्वयं देखने तथा खोजने का सन्तोष ‘चलते तो अच्छा था’ में जगह-जगह देखा जा सकता है। असग़र वजाहत ने ये यात्राएँ साधारण ढंग से एक साधारण आदमी के रूप में की हैं जिसके परिणामस्वरूप वे उन लोगों से मिल पाए हैं, जिनसे अन्यथा मिल पाना कठिन है।</p> <p>भारत, ईरान तथा मध्य एशिया के बीच प्राचीन काल से लेकर मध्य युग तक बड़े प्रगाढ़ सम्बन्ध रहे हैं। इसके चलते आज भी ईरान और मध्य एशिया में भारत की बड़ी मोहक छवि बनी हुई है। लेकिन 19वीं और 20वीं शताब्दी में अपने पड़ोसी देशों के साथ भारत का रिश्ता शिथिल पड़ गया था। आज के परिदृश्य में यह ज़रूरी है कि पड़ोस में उपलब्ध सम्भावनाओं पर ध्यान दिया जाए।</p> <p>‘चलते तो अच्छा था’ यात्रा-संस्मरण के बहाने हमें कुछ गहरे सामाजिक और राजनीतिक सवालों पर सोचने के लिए भी मजबूर करता है।
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‘चलते तो अच्छा था’ में ईरान और आज़रबाईजान के यात्रा-संस्मरण हैं। असग़र वजाहत ने केवल इन देशों की यात्रा ही नहीं की, बल्कि उनके समाज, संस्कृति और इतिहास को समझने का भी प्रयास किया है। उन्हें इस यात्रा के दौरान विभिन्न प्रकार के रोचक अनुभव हुए हैं। उन्हें आज़रबाईजान में एक प्राचीन हिन्दू अग्नि मिला। कोहे-क़ाफ़ की परियों की तलाश में भी भटके और तबरेज़ में एक ठग द्वारा ठगे भी गए।</p>
<p>यात्राओं का आनन्द और स्वयं देखने तथा खोजने का सन्तोष ‘चलते तो अच्छा था’ में जगह-जगह देखा जा सकता है। असग़र वजाहत ने ये यात्राएँ साधारण ढंग से एक साधारण आदमी के रूप में की हैं जिसके परिणामस्वरूप वे उन लोगों से मिल पाए हैं, जिनसे अन्यथा मिल पाना कठिन है।</p>
<p>भारत, ईरान तथा मध्य एशिया के बीच प्राचीन काल से लेकर मध्य युग तक बड़े प्रगाढ़ सम्बन्ध रहे हैं। इसके चलते आज भी ईरान और मध्य एशिया में भारत की बड़ी मोहक छवि बनी हुई है। लेकिन 19वीं और 20वीं शताब्दी में अपने पड़ोसी देशों के साथ भारत का रिश्ता शिथिल पड़ गया था। आज के परिदृश्य में यह ज़रूरी है कि पड़ोस में उपलब्ध सम्भावनाओं पर ध्यान दिया जाए।</p>
<p>‘चलते तो अच्छा था’ यात्रा-संस्मरण के बहाने हमें कुछ गहरे सामाजिक और राजनीतिक सवालों पर सोचने के लिए भी मजबूर करता है।
Book Details
-
ISBN9788126714735
-
Pages144
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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Cinema Ki Duniya Aur Duniya Ka Cinema
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Vimal Chandra Pandey
- Book Type:

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विमल चन्द्र पाण्डेय का जन्म 20 अक्टूबर, 1981 को बनारस, उत्तर प्रदेश में हुआ। मूल रूप से गाँव कड़सर, जिला बलिया के निवासी। शुरुआती पढ़ाई बनारस में ही। फिर दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई और पाँच साल तक पत्रकारिता करने के बाद इस्तीफा। वर्तमान में फ्रीलांसिंग, लेखन और फिल्म-निर्देशन। उनकी प्रकाशित कृतियाँ हैं- ‘डर’, ‘मस्तूलों के इर्द-गिर्द’, ‘उत्तर प्रदेश की खिड़की’, 'मेरी प्रिय कहानियाँ' और ‘मारण मंत्र’ (कहानी-संग्रह); ‘भले दिनों की बात थी’ (उपन्यास); ‘ई इलहाब्बाद है भइया’ (संस्मरण)। उनकी कहानियों और कविताओं के अनुवाद कन्नड़, मराठी, मलयालम, तमिल, गुजराती, रूसी और अंग्रेज़ी भाषाओं में हुए हैं। उनकी पहली फ़िल्म है ‘द होली फिश’ जिसके निर्देशन के अलावा लेखन और निर्माण भी उन्होंने स्वयं ही किया। दूसरी फ़िल्म ‘धतूरा’ रिलीज के लिए तैयार है। उन्हें ‘भारतीय ज्ञानपीठ नवलेखन पुरस्कार’ और ‘मीरा स्मृति पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है।
Mahatirth Ke Antim Yatri (Lhasa—Kaliashnath—Mansarovar)
- Author Name:
Bimal Mitra +2
- Book Type:

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सन् 1956 में तिब्बत का दरवाज़ा विदेशियों के लिए लगभग बन्द हो चुका था और राजनैतिक कारणों से भारत के साथ तिब्बत का सम्पर्क भी लगभग टूट चुका था। उन्हीं दिनों, बिना किसी तैयारी के, बिमल दे घर से भागे और नेपाली तीर्थयात्रियों के एक दल में सम्मिलित हो ल्हासा तक जा पहुँचे। उस समय उनकी उम्र मात्र पन्द्रह वर्ष थी। यात्रियों में वह नवीन मौनी बाबा। ल्हासा में उन्होंने तीर्थयात्रियों का दल छोड़ा, और वहाँ से अकेले ही कैलास खंड की ओर कूच कर गए। 'महातीर्थ के अन्तिम यात्री' में उसी रोमांचक यात्रा-अनुभाव का वर्णन है। बिमल दे ने स्वयं इसे ‘एक भिखमंगे की डायरी’ कहा है। किन्तु इस पुस्तक में मिलेगा तिब्बत का दैनंदिन जीवन तथा महातीर्थ का पूर्ण विवरण।
Sud Me Harsud
- Author Name:
Vasant Sakargaye
- Book Type:

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travel
Shahargoi
- Author Name:
Geetashree
- Book Type:

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Book
Smrtiyon Me Ramte Hue
- Author Name:
Dr. Kamal Chaturvedi
- Book Type:

- Description:
Book
Samundaron Ke Paar
- Author Name:
Chaudhery Madan Mohan Samar
- Book Type:

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Book
Andar Ka School
- Author Name:
Dr. Manohat Agnani
- Book Type:

- Description:
In this fast paced world of ours, everyday life is a blur for many of us. We rarely stop to think, but Dr Manohar Agnani’ s book ‘Andar Ka School’ takes us back to the practice of valuing, cherishing and thinking about daily incidents; which has the power of transforming an ordinary incident into an extra ordinary and memorable lesson for life. As a master story teller he manages to keep the curiosity in us at the utmost level till the last paragraph of the story and then gives his frank opinion. And at times tells us the stark truth which many may not have the courage to put into words in public. The gender lens with which he very boldly examines himself, others and the society, gives an altogether different endearing flavour and makes the stories much more interesting and poignant Each story comes with its own characteristics and unique style but all of them have a winning combination of simplicity, curiosity and emotional appeal which make these stories super-readable. I was quite surprised to see my millennial friends reading, reciting and discussing the stories. The size of the stories is such that you hardly need 5-10 minutes to read one but then it leaves you with many thoughts and much emotion which keep lingering and coming back to you long after you have finished the book. These are the stories one would very much like to read time and again; simple and succinct; short yet very comprehensible, everyday but very touching… Thanks a lot for sharing your experiences. Eagerly awaiting the next book BY Mona
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