Meri New York Diary
(0)
Author:
Dr. Shantwana Dubey TiwariPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Travelogues₹
350
₹ 280 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
‘मेरी न्यूयॉर्क डायरी’ एक यात्रा का अनुभव है। शान्त्वना दूबे तिवारी ने अपने एक माह के अमरीका-प्रवास के दौरान अपनी आँखों से जो कुछ, जितना कुछ देखा और अपने मन-मस्तिष्क से जो कुछ, जैसा कुछ अनुभव किया उन्हें ही इस पुस्तक में शब्दों में प्रस्तुत किया है। इस बात से शायद ही किसी को असहमति होगी कि अमेरिका पश्चिमी सभ्यता-संस्कृति का एक प्रमुख देश है—आधुनिक और भौतिक समृद्धि का प्रमाण और न्यूयॉर्क अमेरिका का एक प्रतिनिधि शहर जो उसकी तमाम विशेषताओं को समेटे हुए है। इसलिए शान्त्वना जब इस पुस्तक में अपनी न्यूयॉर्क-यात्रा को दर्ज करती हैं तब वे उसके जरिये पाठक को अपनी यात्रा का सहभागी तो बनाती ही हैं, प्रकारान्तर से अमेरिकी सभ्यता-संस्कृति और उपलब्धि की झलक भी दिखला देती हैं। इस पुस्तक में न्यूयॉर्क का रंग-बिरंगा चित्र मिलता है, जिसमें विशालकाय स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से लेकर मनोरम शान्ति से परिपूर्ण सेंट्रल पार्क और न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी से लेकर कोलम्बिया यूनिवर्सिटी तक शामिल हैं। वास्तव में यह पुस्तक गागर में सागर की तरह पाठक को थोड़े में काफी कुछ बता-दिखा देती है।
Read moreAbout the Book
‘मेरी न्यूयॉर्क डायरी’ एक यात्रा का अनुभव है। शान्त्वना दूबे तिवारी ने अपने एक माह के अमरीका-प्रवास के दौरान अपनी आँखों से जो कुछ, जितना कुछ देखा और अपने मन-मस्तिष्क से जो कुछ, जैसा कुछ अनुभव किया उन्हें ही इस पुस्तक में शब्दों में प्रस्तुत किया है।
इस बात से शायद ही किसी को असहमति होगी कि अमेरिका पश्चिमी सभ्यता-संस्कृति का एक प्रमुख देश है—आधुनिक और भौतिक समृद्धि का प्रमाण और न्यूयॉर्क अमेरिका का एक प्रतिनिधि शहर जो उसकी तमाम विशेषताओं को समेटे हुए है। इसलिए शान्त्वना जब इस पुस्तक में अपनी न्यूयॉर्क-यात्रा को दर्ज करती हैं तब वे उसके जरिये पाठक को अपनी यात्रा का सहभागी तो बनाती ही हैं, प्रकारान्तर से अमेरिकी सभ्यता-संस्कृति और उपलब्धि की झलक भी दिखला देती हैं।
इस पुस्तक में न्यूयॉर्क का रंग-बिरंगा चित्र मिलता है, जिसमें विशालकाय स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से लेकर मनोरम शान्ति से परिपूर्ण सेंट्रल पार्क और न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी से लेकर कोलम्बिया यूनिवर्सिटी तक शामिल हैं।
वास्तव में यह पुस्तक गागर में सागर की तरह पाठक को थोड़े में काफी कुछ बता-दिखा देती है।
Book Details
-
ISBN9789347043987
-
Pages174
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Sharnarthi Shivir Mein Viwah-Geet
- Author Name:
Lalit Surjan
- Book Type:

-
Description:
ललित सुरजन के साथ कहीं घूमने-फिरने का अनुभव अपने आपमें अनूठा है। वे हिन्दी के महत्त्वपूर्ण कवि, पत्रकार, संवेदनशील चिन्तक तो हैं ही परन्तु इन सभी भूमिकाओं से बढ़कर एक सरल प्रकृति के दिलचस्प आदमी हैं जो तमाम जगहों में घूमते हैं और वहाँ की प्राकृतिक छटा, ऐतिहासिक वैभव और वर्तमान की तमाम तामीरों पर गौर करते हैं, और इससे भी ज़्यादा इन जगहों को आबाद करनेवाले लोगों के साथ एक सतत आशिकाना सलूक करते हुए चलते हैं।
साधारण-से-साधारण चीजशें या लोगों की मौजूदगी या बर्ताव से वे पूरे देश के एक होने को दर्शा देते हैं वहीं छोटी-से-छोटी जगहों में भी ऐसी विविधताएँ ढूँढ़ लेते हैं कि आप देखते रह जाते हैं। पूरी दुनिया की छोटी-बड़ी जगहें इस किताब में सजीव हो उठी हैं। इस संकलन में सम्मिलित सारे यात्रा-वृत्तान्त ‘देशबंधु’ में प्रकाशित हुए हैं। वे किसी जगह अकेले नहीं जाते हैं, अपने साथ लिये जाते हैं ‘देशबंधु’ के पाठकों को और उन पाठकों के माध्यम से जो भी हिन्दी-भाषी हैं, उन सभी को लगातार आमंत्रण देते हुए चलते हैं। ऐसा करते हुए वे अपने चिन्तक या कवि होने को कभी भी अपने नज़रिए या लेखन पर इस तरह हावी नहीं होने देते कि एक सामान्य पाठक का साथ छूट जाए या वे स्वयं किसी भी जगह पर जाने के मज़े से वंचित हो जाएँ। ये सारे वृत्तान्त बहुत ही मज़े में लिखे गए हैं। इस तरह का मज़े में लेखन हिन्दी में लगभग गायब हो गया है और ज़्यादातर लेखक कुछ-न-कुछ प्रमाणित करने में जुट गए हैं। ललित सबको केवल यह बताते हुए चलते हैं कि आसपास देखो, घूमो और तमाम जीती जा रही ज़िन्दगियों के साथ नए रिश्ते ढूँढ़ो क्योंकि कोई भी जगह महज़ पर्यटकों के लिए नहीं है, वहाँ साकिन लोगों के लिए रची या बसाई गई है। उनका विस्मय कभी ख़त्म नहीं होता। ललित सुरजन के साथ घूमकर चश्मे-हैराँ की हैरानी नहीं जाती।
Mahatirth Ke Antim Yatri (Lhasa���Kaliashnath���Mansarovar
- Author Name:
Bimal Dey
- Book Type:

- Description: सन् 1956 में तिब्बत का दरवाज़ा विदेशियों के लिए लगभग बन्द हो चुका था और राजनैतिक कारणों से भारत के साथ तिब्बत का सम्पर्क भी लगभग टूट चुका था। उन्हीं दिनों, बिना किसी तैयारी के, बिमल दे घर से भागे और नेपाली तीर्थयात्रियों के एक दल में सम्मिलित हो ल्हासा तक जा पहुँचे। उस समय उनकी उम्र मात्र पन्द्रह वर्ष थी। यात्रियों में वह नवीन मौनी बाबा। ल्हासा में उन्होंने तीर्थयात्रियों का दल छोड़ा, और वहाँ से अकेले ही कैलास खंड की ओर कूच कर गए। 'महातीर्थ के अन्तिम यात्री' में उसी रोमांचक यात्रा-अनुभाव का वर्णन है। बिमल दे ने स्वयं इसे ‘एक भिखमंगे की डायरी’ कहा है। किन्तु इस पुस्तक में मिलेगा तिब्बत का दैनंदिन जीवन तथा महातीर्थ का पूर्ण विवरण।
Ek Baar Ayowa
- Author Name:
Manglesh Dabral
- Book Type:

- Description: हमारे समय के प्रमुख कवि मंगलेश डबराल की यह यात्रा-पुस्तक केवल यात्रा-वृतान्त नहीं है; यह एक कैनवस की तरह है जिसमें हमें अमेरिका दीखता है, उस चीरफाड़ के साथ जिसे यात्रा करते हुए कवि ने अपने ढंग से, अंजाम दिया—शायद अमेरिका को कुछ ज़्यादा अच्छे ढंग से समझने के लिए ही। इसमें वह आतंक नहीं है जो वर्तमान अमेरिका जैसे लगभग मिथक बन चुके देश में भारत के एक संवेदी मन को हो सकता था, नएपन का अहसास जरूर है; जिस पर लेखक ने कई जगह ख़ास जोर भी दिया है। एक अच्छे गद्य के अलावा यह पुस्तक हमें अमेरिका के बारे में, उसके दैनिक जीवन, सांस्कृतिक और सामाजिक वातावरण के बारे में कुछ प्रामाणिक सूचनाएँ भी देती है।
Dilli Se Karachi Via Rawalpindi
- Author Name:
Sabuha Khan
- Book Type:

- Description: This book has no description
Ghat Ghat Ka Pani
- Author Name:
Ambrish Kumar
- Book Type:

- Description: कहते हैं कि यात्राएँ हमें पुनर्जीवन देती हैं। शहरों में बसने और वहाँ की दैनिक आवाजाही में अनेक लोगों को पता ही नहीं चल पाता कि जीवन कब बीत गया और कितनी बड़ी धरती उनकी कल्पना से भी अछूती रह गई। वे सौभाग्यवान होते हैं जिन्हें जीवन अवसर भी देता है और हौसला भी कि वे रोज़मर्रा की चक्की को रोककर बीच-बीच में कभी प्रकृति के विशाल वैभव से एकाकार हो जाएँ और कभी सुदूर नगरों में ही अपने ही जैसे लेकिन भिन्न ढंग से जीते-मरते लोगों से अपने सुख-दु:ख बाँट आएँ। इस पुस्तक के लेखक उन्हीं सौभाग्यवान और हौसलामन्द लोगों में हैं। घूमने का संस्कार उन्हें बचपन में ही मिल गया था जिसका निर्वाह वे अब तक कर रहे हैं। देश के लगभग हर हिस्से में हो आए हैं। यह पुस्तक उनकी उन्हीं यात्राओं का लेखा-जोखा है। अपनी सहज और अनुभवों से पकी भाषा में यहाँ वे अपने शुद्ध यात्री-रूप में उपस्थित हैं। उनकी इन यात्राओं को पढ़ते हुए उन लोगों को भी अपनी पहुँच से बाहर पड़ी उस विशाल प्रकृति, उस विराट जीवन का अनुभव होगा जो अब तक बस सोचते रहे हैं कि यार, कहीं घूम आया जाए। इस पुस्तक को पढ़कर वे अपने इरादों को और स्थगित नहीं कर पाएँगे।
Sarthwah Himalaya
- Author Name:
Ajoy Sodani
- Book Type:

-
Description:
अजय सोडानी जानते हैं कि देखे हुए को दिखाया कैसे जाए। जैसे कि सफ़र के दौरान अगर एक कैमरा उनके हाथ में है तो एक भीतर भी है जो बाहर के चित्रों को शब्दों की शक्ल में कहीं अंकित करता चलता है। यही कारण है कि उनके यात्रा-वृत्तान्त, ख़ासकर जब वे हिमालय के बारे में लिखते हैं, सिर्फ़ हमारा ज्ञान नहीं बढ़ाते, अनुभूति की सतह पर हमें एक गहरा अनुभव देते हैं। एक समग्र यात्रा-अनुभव जिसमें भूगोल, इतिहास, परम्परा, लोक, समकालीन समाज, साहित्य, आत्मचिंतन, प्रकृति-चिन्ता, भविष्य-दृष्टि तथा रोमांच, सब एकसाथ शामिल होता है।
हिमालय को वे सागर, नदी, देवता, पशु आदि चराचर की तरह अपना और हम सबका सहोदर कहते हैं। उसकी विराटता के सम्मुख हमारे अस्तित्व की गौणता का एक विचित्र, सजीव लेकिन लोमहर्षक समीकरण बनता है जब उनके जैसा कोई हिमालय प्रेमी हमें गिरिराज के रहस्यों के सफ़र पर लेकर निकलता है।
‘दर्रा दर्रा हिमालय’ और ‘दरकते हिमालय पर दर-ब-दर’ के बाद हिमालय पर यह उनकी तीसरी किताब है। हिमालय जो बकौल उनके, पहली ही निगाह में देखने वाले के रक्त में घुलने लगता है, उसके अस्तित्व-बोध का अंश हो जाता है। उनके इन सफ़रनामों को पढ़कर भी हमारे साथ कुछ ऐसा ही घटित होता है।
Har Barish Mein
- Author Name:
Nirmal Verma
- Book Type:

-
Description:
निर्मल वर्मा अपनी इस पुस्तक और इसके निबन्धों को भी, दो पूर्ण बिन्दुओं के बीच की कड़ी मानते थे। विधा के रूप में भी ये आलेख यात्रावृत्त और निबन्ध के बीच कहीं ठहरते हैं, ‘जहाँ न भोग का सुख है, न समाधान का निश्चय’। अपने दूसरे यूरोप प्रवास के दौरान उन्होंने यूरोप की धड़कन, उसके गौरव और शर्म के क्षणों को बहुत नज़दीक से देखा-सुना था। इस लिहाज से यह पुस्तक एक ऐसी नियतिपूर्ण घड़ी का दस्तावेज़ है, जब बीसवीं शती के अनेक काले-उजले पन्ने पहली बार खुले थे। दुब्चेक काल का प्राग-वसन्त, सोवियत-स्वप्न का मोह-भंग, पेरिस के बेरिकेडों पर उगती आकांक्षाएँ—ऐसी अभूतपूर्व घटनाएँ थीं, जिन्हें हमारी ढलती शताब्दी की छाया में निर्मल वर्मा ने पकड़ने की कोशिश की, किसी बने-बनाए आइने के माध्यम से नहीं बल्कि सम्पूर्णतया अपनी नंगी आँखों के सहारे।
शायद यही कारण है कि इस पुस्तक के निबन्ध कभी-कभी एक ऐसे ‘निर्वासित’ लेखक के रिपोर्ताज जान पड़ते हैं, जिनमें उन्होंने ‘युद्ध’ के मोर्चे पर घायल संस्कृतियों के घावों को जैसा देखा, वैसा ही आँकने की कोशिश की और भारतीय आत्मसन्तोष से हटकर, ख़ुद अपने देश की व्यवस्था को इन घावों में रिसते देखा।
वैज्ञानिक प्रगति के अकल्पनीय चरणों को पार करने के बाद आज भी जब हम देखते हैं कि इतिहास से न राजनीति ने कुछ सीखा है, न संस्कृतियों और धर्मों ने, तो इन निबन्धों को पढ़ना, इनकी अन्तर्दृष्टि तक पहुँचना और ज़रूरी जान पड़ता है।
The Rich Culture and History of Kyrgyzstan
- Author Name:
Askar Beshimov +1
- Book Type:

- Description: Kyrgyzstan, located in Central Asia, is a landlocked country renowned for its stunning natural beauty and rich cultural heritage. Bordered by Kazakhstan to the north, China to the east, Tajikistan to the south, and Uzbekistan to the west, Kyrgyzstan is often referred to as the "Switzerland of Central Asia" due to its majestic mountain landscapes. Kyrgyzstan has a diverse cultural heritage, shaped by its nomadic history and influences from various ethnic groups. The Kyrgyz people, known for their warm hospitality, still practice traditional customs like nomadic yurt dwelling and horsemanship. Kyrgyzstan's tourism industry is growing as more travelers discover its charms. Visitors can explore historical sites like the Silk Road caravanserais, engage in trekking and horseback riding adventures, and immerse themselves in the unique Kyrgyz culture. In conclusion, Kyrgyzstan's natural beauty, cultural richness, and hospitable people make it a hidden gem for travelers seeking an off-the-beaten-path experience in Central Asia.
Cinema Ki Duniya Aur Duniya Ka Cinema
- Author Name:
Vimal Chandra Pandey
- Book Type:

- Description: This book has no description
Swarg Yatra : Ek Lok Se Doosare Lok
- Author Name:
Manoj Singh
- Book Type:

-
Description:
प्रकृति में पर्वत मुझे विशेष रूप से आकर्षित करते हैं। और सौभाग्य से हिमालय हमारे पास है! फिर और क्या चाहिए। यह कश्मीर से अरुणाचल प्रदेश तक न जाने किस-किस नाम और रूप में फैला हुआ है। मध्य में स्थित हिमाचल प्रदेश में कुछ एक साल रहने का अवसर मिला था तो उस दौरान किन्नौर से लेकर लाहौल स्पीती, रोहतांग पास की यात्रा कर चुका हूँ। यहाँ लद्दाख़ के बारे में बहुत कुछ सुनने को मिला था। कुछ ऐसे तथ्यों की जानकारी हुई कि उत्सुकतावश वहाँ जाने की इच्छा हुई थी।
लद्दाख़ वो क्षेत्र है जो आज भी दुर्गम है। आम भारतीय पर्यटक की कल्पना और चाहत से बाहर। मगर इस क्षेत्र में सदियों से विदेशी आ रहे हैं। ख़ासकर यह जानकर अचम्भा होता है कि यूरोप के कई विद्वान यहाँ तब से आ रहे हैं, जब यहाँ कोई भी साधन नहीं था। हज़ारों साल से यह पश्चिम एशिया से लेकर मध्य एशिया और आगे यारकंड व तिब्बत के बीच व्यापार का एक प्रमुख मार्ग रहा है। बौद्ध भिक्षु ईसा पूर्व इस क्षेत्र में आने लगे थे। और यही नहीं, इस क्षेत्र को उन्होंने बुद्धमय कर दिया था। सोचिए, एक ऐसा प्रदेश जो आज भी दूर दिखाई देता है वहाँ शताब्दियों से बौद्धधर्म विराजमान है। इन सब धार्मिक व बौद्धिकजनों के साथ-साथ व्यापारियों और सेनाओं का काफ़िला, कश्मीर से होता हुआ ही आता-जाता रहा। कश्मीर और लद्दाख़, हिमालय की दो विशिष्ट घाटियाँ हैं। दो पारम्परिक व समृद्ध सभ्यताएँ। प्राचीन संस्कृति और प्राकृतिक सौन्दर्य के दो अति महत्त्वपूर्ण केन्द्र, इतने नज़दीक!!! इसे प्रकृति और मानवीय इतिहास का संयोग ही कहेंगे।
संक्षेप में कहूँ तो यह यात्रा प्रकृति के बीच क़दमताल करने जैसी थी। मुश्किलों से सामना हुआ, तो क्या!! प्रकृति भी तो अपने नग्न रूप में उपस्थित हुई। मूल रंग में। पूरे वैभव के साथ। विराट। मुश्किल इस बात की हुई है कि सौन्दर्य को देखते ही मन-मस्तिष्क स्थिर हो गया। उठ रहे विचारों का अहसास तो हुआ मगर व्यक्त कर पाना मुमकिन न हो सका। विस्तार इतना कि वर्णन सम्भव नहीं। असल में आँखें ही देख सकती हैं, कैमरे व्यर्थ हो जाते हैं।
Qaidi, Cricket Aur Kangaruon Ke Swarnim Desh Mein
- Author Name:
Meena Jha
- Book Type:

- Description: Travelouge
Hindi Yatra-Sahitya
- Author Name:
Shashi Shekhar Tiwari
- Book Type:

- Description: मनुष्य की सृजनात्मक कृतियों में यात्रा संस्मरणों की बहुमूल्य सहभागिता और अक्षय अवदान को पाश्चात्य साहित्य के साथ - साथ हिन्दी साहित्य में भी स्वीकार किया गया है । किन्तु हिन्दी में , उसे अपेक्षित प्रतिष्ठा नहीं मिली है । निःसन्देह यह अपने बलबूते एक स्वतन्त्र विधा होने का सामर्थ्य रखता है । इसके कई कारणों में एक भारतीयों की आत्ममुग्धाता न होकर , उनका वह जीवन दर्शन है , जिसमें परम देव - सत्ता को ही सब - कुछ मान लिया जाता है । ' सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज , श्रीमद्भगवद्गीता , 18 वाँ अध्याय किन्तु इस महान् देश की चेतना और संवेदना , समस्त सृष्टि में परिव्याप्त सत्यम् शिवम् और सुन्दरम् को भी अपनी स्पन्दित स्मृतियों में सँजोती - सँवारती रही है । फलस्वरूप आधुनिक हिन्दी साहित्य में गद्य का विकास , आवागमन और मुद्रण की सुविधा एवं पत्र पत्रकारिता के प्रसार के साथ भूमण्डलीय सम्पर्क तथा संचार साधनों की वृद्धि के कारण हुआ । इससे , विशेषतः हिन्दी - साहित्य के अन्तर्गत , यात्रा संस्मरण के लेखन - क्षेत्र में निरन्तर अपूर्व सक्रियता दिखायी देती रही है । निःसन्देह हिन्दी का यात्रा - साहित्य भी काल क्रम में हिन्दी का ही नहीं , राष्ट्र की बहुमूल्य निधि के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है ।
Khushhali Ka Panchnama
- Author Name:
Parveen Jha
- Book Type:

- Description: ‘ख़ुशहाली का पंचनामा’ एक यात्रा संस्मरण नही प्रवास संस्मरण है। प्रवास संस्मरण संस्कृति का हिस्सा बन कर लिखा जाता है जबकि यात्रा संस्मरण संस्कृति को बाहर से देखने की क़वायद है। यह पुस्तक मैंने नॉर्वे की संस्कृति के आकलन पर लिखी है। मेरे सामने प्रश्न यह था कि क्या वाक़ई ख़ुशहाली परिभाषित की जा सकती है। नॉर्वे जैसे देश जो सबसे खुशहाल देशों में माने जाते हैं, क्या वे वाक़ई खुशहाल हैं? अगर हैं, तो उनके सूत्र क्या हैं? अगर नहीं हैं, तो आख़िर कहे किस आधार पर जाते हैं? यह डायरी चूँकि एक भारतीय की लिखी है, इस कारण दोनों संस्कृतियों की तुलना भी की गयी है। कई सूत्र एक जैसे हैं, तो कई भिन्न ध्रुवों पर है। उन्हें जानने के लिए यह किताब एक रोचक यात्रा हो सकती है।
Are Yayavar Rahega Yaad?
- Author Name:
Sachchidananda Hirananda Vatsyayan 'Ajneya'
- Book Type:

-
Description:
कोई भी यात्रा मात्र व्यक्ति की यात्रा नहीं होती। अगर वह जिस रास्ते पर चल रहा है वह रास्ता भी यात्रा में शामिल है तो–और रास्ते शामिल हैं तो क्या कुछ नहीं शामिल! अरे यायावर रहेगा याद? अज्ञेय का एक ऐसा ही यात्रा-संस्मरण है जिसमें रास्ते शामिल हैं। इसलिए यह पुस्तक अपने काल के भीतर और बाहर एक प्रक्रिया, एक विचार और एक विमर्श भी है।
बग़ैर उद्घोष की यात्रा प्रकृति और भूगोल से गुज़रती हुई संस्कृति, समाज और सभ्यता से भी गुज़र रही होती है। अज्ञेय की यह पुस्तक इस मायने में एक कालातीत मिसाल लगती है कि इसके बहाने द्वितीय विश्वयुद्ध से लेकर पूरे हिन्दुस्तान की आज़ादी तक का वह भूगोल और कालखंड सामने आते हैं जहाँ जितने अधिक सपने थे उतने ही यातनाओं के मंजर भी। यह पुस्तक एक व्यक्ति के विपरीत नहीं, बल्कि समक्ष एक नागरिक और उसके एक मनुष्य होने की भी यात्रा-पुस्तक है।
अज्ञेय अपनी यात्रा में लाहौर, कश्मीर, पंजाब, औरंगाबाद, बंगाल, असम आदि प्रदेशों की प्रकृति और भूमि से गुज़रते हुए अपनी कथात्मक शैली और भाषा की ताज़गी से सिर्फ़ सौन्दर्य को ही नहीं रचते बल्कि सदियों हम जिनके ग़ुलाम रहे, उनके इतिहास के पन्ने भी पलटते हैं। वैज्ञानिकता और आधुनिकता के परिप्रेक्ष्य में उनके विकास, विस्तार और विध्वंस के गणित को हल करने का द्वन्द्व और अथक उद्यम इस पुस्तक को विरल कृति बनाते हैं।
पुस्तक में एलुरा, एलिफांटा, कन्याकुमारी, हिमालय आदि की यात्रा करते मिथकों, प्रतीकों और मूर्तियों की रचना को अपने यथार्थ और अयथार्थ के केन्द्र में देखा-परखा गया है जहाँ लेखक को पुराणों और इतिहास की वह सच्चाई नज़र आती है जो युगों तक गाढ़े रंगों के पीछे रही। अनदेखे और अछूते को यात्रा की अभिव्यक्ति और उसकी कला में मूर्त करना कोई सीखे तो अज्ञेय से सीखे।
अज्ञेय की यह दृष्टि ही थी कि यात्रा, भ्रमण के बजाय एक ऐसी घटना बन सकी जिसकी क्रिया-प्रतिक्रिया में अपना कुछ अगर खो जाता है तो बहुत कुछ मिल भी जाता है। अपना बहुत कुछ खोने, पाने और सृजन करने का नाम है–अरे यायावर रहेगा याद ?
Sudhiyan Us Chandan Ke Van Ki
- Author Name:
Vishnukant Shastri
- Book Type:

- Description: मैं इस दृष्टि से भाग्यवान् हूँ कि मुझे विविध क्षेत्रों के सत्पुरुषों का स्नेह-सौहार्द मिलता रहा है। जिन विशिष्ट व्यक्तियों के संपर्क से या स्थानों के भ्रमण से जीवन समृद्ध हुआ है, उनकी याद बार-बार आती ही है। हर बार लगता है कि उस याद ने अपनी सुगन्ध से जीवन को पुन: सुरभित कर दिया। वस्तुत: घटनाएँ जब घटती हैं तब उनका प्रभाव किन-किन स्तरों पर कितनी गहराई से पड़ रहा है, इसका सम्यक बोध नहीं हो पाता। उन प्रीतिकर स्मृतियों का रोमन्थन ही स्पष्ट करता है कि उन व्यक्तियों या घटनाओं ने जीवन को कितनी प्रेरणा और स्पूâर्ति प्रदान की थी। उनके प्रति कृतज्ञता-बोध ही मुझे उनकी स्मृतियों को लिपिबद्ध करने को उत्साहित करता रहा है। इस तरह ये संस्मरण लिखे जाते रहे।
Yayawari Yadon Ki
- Author Name:
Neeraj Goswami
- Book Type:

- Description: Book
Prithvi Gandhmayi Tum
- Author Name:
Anurag Chaturvedi
- Book Type:

- Description: ’पृथ्वी गंधमयी तुम’ एक अलग तरह का यात्रा-वृत्त है जिसमें लेखक ने सिर्फ़ यायावर की आँख से नहीं, समाजशास्त्री और वैश्विक अर्थतंत्र के जानकार की तरह भी चीजों को देखा है। इसमें शामिल पन्द्रह यात्राएँ उस समय की हैं जब दुनिया का रूप-रंग और ढाँचा बदलाव से गुज़र रहा था। साम्यवाद और पूँजीवाद की बहस से निकल कर दुनिया एक नए ढंग की अर्थव्यवस्था की दिशा में बढ़ रही थी। अमेरिका और चीन, दो बड़ी ताक़तों के रूप में चर्चित हो रहे थे। उदारवाद, निजीकरण और वैश्वीकरण की प्रक्रिया को लेखक ने कई देशों में जाकर समझा और इस यात्रा-वृत्तान्त में दर्ज किया है। चीन और अमेरिका के साथ जापान, हांगकांग, कैरेबियन देशों, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के भारतीय समाज की अन्दरूनी जानकारी भी इस किताब में है और यूरोप के वर्तमान के साथ-साथ उसके अतीत से साक्षात्कार भी। निस्सन्देह एक बेहद पठनीय और सग्रहणीय किताब!
Siyahat Meri Syahi Se
- Author Name:
Atul Chaturvedi
- Book Type:

- Description: इस पुस्तक में कहानी है एक नौजवान की जिसने अपने घरेलू व्यापार से हटकर कुछ नया करने का स्वप्न देखा था। यह कहानी है उस कालखंड की जब भारत की अर्थव्यवस्था मुक्त अर्थव्यवस्था के शैशव काल में ही प्रवेश कर रही थी। यह यात्रा-संस्मरण भारत के हर उस नौजवान की इच्छाओं और आकांक्षाओं के प्रतीक हैं जो आगे बढ़कर अपनी हिम्मत से कुछ नया करना चाहते हैं। एक नया व्यापार-निर्यात व्यापार शुरू करने में क्या समस्याएँ आईं और उनको कैसे हल किया अर्थात् यह संस्मरण आपको निर्यात व्यापार की बारीकियों भी बताएगा तो साथ ही मध्य-पूर्व के देश जैसे दुबई, बहरीन, कतर, अफ्रीकी महाद्वीप के देश मिश्र अनेक यूरोपीय देश जैसे इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, स्विट्ज़रलैंड, हॉलैंड, बेल्जियम, इटली तथा अमेरिका आदि के विभित्र शहर, उनकी संस्कृति उनके सौन्दर्य, इतिहास, पर्यटन स्थल से भी परिचित कराएगा। यहाँ यह भी बताने की कोशिश की गई है कि कैसे एक समय था जब न तो यहाँ जानकारी थी न संसाधन और न ही अधिक विदेशी भी हमारे उत्पाद लेने को तैयार थे-अपनी दुकान में बैठाकर बात करने को भी तैयार नहीं थे। समय बदला और हमारे भारत के व्यापारियों ने विदेशों में अपने लिये एक सम्मानजनक स्थान बनाया। आज के दौर में जब देश के नौजवान रोज़गार के लिये परेशान हैं, वे सरकारी नौकरी या प्राइवेट सेक्टर में नौकरी के लिये भटकते हैं तो इस पुस्तक में उनके लिये यह सन्देश भी है कि आप एक सपना देखिए उद्यमी बनने का। हमारे देश में ऐसे सपने सच होते हैं। अपना सपना पूरा करके आप जॉब-सीकर के स्थान पर जॉब-गिवर बनिए।
Everest
- Author Name:
Jon Krakauers +1
- Book Type:

- Description: ಜಾನ್ ಕ್ರಾಕೌರ್ ಅಮೇರಿಕಾದ ಜನಪ್ರಿಯ ಲೇಖಕ ಮತ್ತು ಪರ್ವತರೋಹಿ. ಈತನ ಕೃತಿಯನ್ನು ಕನ್ನಡಕ್ಕೆ ತಂದವರು ವಸುಧೇಂದ್ರ. ’ಎವರೆಸ್ಟ್’ ಕೃತಿಯು ಪರ್ವತಾರೋಹಣದ ದುರಂತ ಕತೆಯಾಗಿದೆ. ಪರ್ವತಾರೋಹಣ ಮಾಡುವಾಗ ನಡೆದ ಘಟನೆಗಳು ಲೇಖಕರ ಬದುಕಿನ ಧೈರ್ಯವನ್ನು ನಿರಂತರವಾಗಿ ಕೆಣಕಿದ ಕಥಾನಕ ಅಂಶಗಳು ಈ ಕೃತಿಯಲ್ಲಿದೆ. ಲೇಖಕರಿಗೆ ಎವರೆಸ್ಟ್ ಹತ್ತುವ ಬಯಕೆಯು ಸಂಕೀರ್ಣವಾದ ಸಂಗತಿ, ಮತ್ತು ಅಪಾಯಕಾರಿ ವಿಸ್ಮಯ, ವಿಷಯಗಳು ತಿಳಿದಿದ್ದರೂ ಎವರೆಸ್ಟ್ ಹತ್ತಲೇಬೇಕೆನಿಸಿದ ಲೇಖಕರ ತೊಳಲಾಟದ ಪರಿಯನ್ನೂ, ಕಹಿ ಸತ್ಯದ ಮುಖಗಳನ್ನು ಒಂದೆಡೆ ಕೃತಿ ತೆರೆದಿಡುತ್ತದೆ.
Uttar Ki Yatrayen
- Author Name:
Matsuo Basho
- Book Type:

-
Description:
‘जापानी महाकवि बाशो उन बिरले कवियों में से हैं जिनकी कविता का अनुवाद शायद संसार की हर छोटी-बड़ी भाषा में हुआ है। हाइकू नामक विधा का ज़िक्र आते ही प्राय: सभी रसिकों को जो पहला नाम याद आता है वह बाशो का है। बाशो जितने बड़े और अविराम कवि थे उतने ही अथक यात्री भी। उनका यह यात्रा-वृत्त अपने क़िस्म का अनोखा है। वरिष्ठ कवि सुरेश सलिल ने बहुत मनोयोग और कल्पनाशीलता से इसे अंग्रेज़ी से अनूदित किया है। उन्होंने बहुत जतन से यथास्थान सन्दर्भ के नोट्स भी दिए हैं जिनसे स्थानों, कवियों, राजवंशों आदि का पता भी होता चलता है। रज़ा पुस्तक माला में एक महाकवि का यात्रा-वृत्त बहुत अच्छे हिन्दी अनुवाद में प्रस्तुत करते हुए हमें प्रसन्नता है।’
—अशोक वाजपेयी।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book