🇮🇳 India’s home-grown full-stack ecosystem for Publishers, Authors, Writers, and Readers. 🎊🎊 Celebrate Your Language, Authors from Your Own Land, with Rachnaye!!! 🎊🎊 Enjoy 🎧 Audiobooks at Rachnaye, download the Rachnaye App from Play Store or App Store

Hasil Aur Anya Kahaniyan

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


About the book

प्रख्यात कथाकार राजेन्द्र यादव की इन कहानियों के केन्द्र में है, स्त्री-पुरुष सम्बन्ध। सामन्ती मानदंडों और मूल्यों से ग्रस्त लोगों के लिए ये कहानियाँ ‘अश्लील, आपत्तिजनक, फूहड़ और कुंठित व्यक्ति की सेक्स-भड़ास’ हो सकती हैं। लेकिन नए मानवीय विवेक के आधार पर स्त्री-पुरुष सम्बन्धों को देखने-परखने वाले पाठक इन कहानियों में उस स्त्री की करुणा और प्रतिरोध को भी लक्षित कर सकते हैं जो उसी बिस्तर से मुक्ति का नया द्वार ढूँढ़ने की बेचैन कोशिश कर रही है जहाँ वह अब तक पुरुष की हवस और क्रूरता की शिकार होती रही है। कथाकार ने खलनायकत्व का ख़तरा उठाकर भी इन कहानियों के माध्यम से पुरुष वर्ग की हिंस्र लम्पटता को परत-दर-परत उघाड़ कर रख दिया है। अपने शैली लाघव और जीवन की जटिलताओं को भीतर तक उकेरनेवाली ये कहानियाँ परिपक्व कथाभाषा के कारण भी पाठकों का ध्यान खींचती हैं। ये कहानियाँ मध्यवर्गीय पाठक ही नहीं, हिन्दी कथालोचना के सामने भी एक बड़ी चुनौती पेश करती हैं।

Read more

₹ 125

₹ 100 20% off

Available

Rachnaye membership

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format

Frequently bought together
Hasil Aur Anya Kahaniyan This book ₹100
Aadmi Ki Nigah Mein Aurat Rajendra Yadav ₹399
Hansini Anton Chekhav ₹300
3 books selected ₹824 ₹799

100% Original

Fast Dispatch

Secure Payment

About the Book

प्रख्यात कथाकार राजेन्द्र यादव की इन कहानियों के केन्द्र में है, स्त्री-पुरुष सम्बन्ध। सामन्ती मानदंडों और मूल्यों से ग्रस्त लोगों के लिए ये कहानियाँ ‘अश्लील, आपत्तिजनक, फूहड़ और कुंठित व्यक्ति की सेक्स-भड़ास’ हो सकती हैं। लेकिन नए मानवीय विवेक के आधार पर स्त्री-पुरुष सम्बन्धों को देखने-परखने वाले पाठक इन कहानियों में उस स्त्री की करुणा और प्रतिरोध को भी लक्षित कर सकते हैं जो उसी बिस्तर से मुक्ति का नया द्वार ढूँढ़ने की बेचैन कोशिश कर रही है जहाँ वह अब तक पुरुष की हवस और क्रूरता की शिकार होती रही है। कथाकार ने खलनायकत्व का ख़तरा उठाकर भी इन कहानियों के माध्यम से पुरुष वर्ग की हिंस्र लम्पटता को परत-दर-परत उघाड़ कर रख दिया है। अपने शैली लाघव और जीवन की जटिलताओं को भीतर तक उकेरनेवाली ये कहानियाँ परिपक्व कथाभाषा के कारण भी पाठकों का ध्यान खींचती हैं। ये कहानियाँ मध्यवर्गीय पाठक ही नहीं, हिन्दी कथालोचना के सामने भी एक बड़ी चुनौती पेश करती हैं।

Book details

Fast dispatchShips within 48 hours
Secure paymentOnline, or cash on delivery on eligible orders
100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
2nd
Publication year
2006
Weight
135 grams
ISBN-13
9788126715602
Pages
136
Reading time
~5 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 21.5 cm
Language
Hindi

Recommended for you

Customer reviews

Be the first to write a review

Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.

Offers

Loading offers…

whatsapp