Shreshth Jatak Kathayen
(0)
Author:
Shobha NigamPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
350
₹ 280 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
जातक कथाएँ भगवान बुद्ध के द्वारा समय-समय पर विभिन्न स्थानों पर दिए गए उपदेशों पर आधारित कथारूप में संग्रह है।</p> <p>जातक कथाएँ इन त्रिपिटकों से एक सुत्तपिटक में सन्निहित हैं। ये कथाएँ बौद्धधर्म की महत्त्वपूर्ण साहित्यिक रचनाएँ हैं। इनमें गौतम बुद्ध के सैकड़ों पूर्व जन्मों की कथाएँ हैं। यहाँ वे बोधिसत्व कहे गए हैं। बोधिसत्व का अर्थ है पूर्ण बुद्धत्व की ओर बढ़ता व्यक्तित्व।</p> <p>जातक कथाओं ने न केवल हमारे देश के परवर्ती कथा साहित्य जैसे ‘पंचतंत्र की कहानियाँ’, ‘हितोपदेश’, ‘कथासरित्सागर’ आदि को प्रभावित किया है, वरन् अनेक विदेशी कथाएँ; जैसे—‘ईसप की कहानियाँ’ तथा ‘अलिफ़ लैला के क़िस्से’ आदि भी इससे प्रभावित हुए हैं।</p> <p>सरल भाषा में किन्तु मूल पाठ को ध्यान में रखते हुए आम लोगों तक इन्हें पहुँचाने के लिए लेखक ने इन्हें अपने शब्दों में लिखा है। इसके साथ ही शोधार्थियों और जिज्ञासु पाठकों के लिए भी यह इस अर्थ में उपयोगी है कि तत्कालीन समाज, राजनीति, राजपरिवार, सामान्य एवं निम्न वर्ग की स्थिति, नैतिकता, स्त्रियों के प्रति भावनाएँ, समाज में धर्म के नाम पर फैले अंधविश्वास, इतिहास, भूगोल आदि का बोध भी होता है। इसके अतिरिक्त उस काल में समाज किस प्रकार बुद्ध के विचार से प्रभावित हो रहा था, राजाओं, रानियों तथा राजपरिवार के अन्य सदस्यों के मध्य बुद्ध की शिक्षा का क्या असर था, प्रव्रज्या लेने में लोगों की रुचि कितनी थी, बुद्ध के भिक्षुसंघ तथा भिक्षुणीसंघ की क्या स्थिति थी, भिक्षुगणों का स्वभाव कैसा था, शिक्षा के केन्द्र कहाँ और कैसे थे आदि के विषय में भी हमें इन कथाओं से तथ्य ज्ञात होते हैं।</p> <p>विविध विषयों पर कही गई ये कथाएँ आज भी प्रासंगिक हैं।
Read moreAbout the Book
जातक कथाएँ भगवान बुद्ध के द्वारा समय-समय पर विभिन्न स्थानों पर दिए गए उपदेशों पर आधारित कथारूप में संग्रह है।</p>
<p>जातक कथाएँ इन त्रिपिटकों से एक सुत्तपिटक में सन्निहित हैं। ये कथाएँ बौद्धधर्म की महत्त्वपूर्ण साहित्यिक रचनाएँ हैं। इनमें गौतम बुद्ध के सैकड़ों पूर्व जन्मों की कथाएँ हैं। यहाँ वे बोधिसत्व कहे गए हैं। बोधिसत्व का अर्थ है पूर्ण बुद्धत्व की ओर बढ़ता व्यक्तित्व।</p>
<p>जातक कथाओं ने न केवल हमारे देश के परवर्ती कथा साहित्य जैसे ‘पंचतंत्र की कहानियाँ’, ‘हितोपदेश’, ‘कथासरित्सागर’ आदि को प्रभावित किया है, वरन् अनेक विदेशी कथाएँ; जैसे—‘ईसप की कहानियाँ’ तथा ‘अलिफ़ लैला के क़िस्से’ आदि भी इससे प्रभावित हुए हैं।</p>
<p>सरल भाषा में किन्तु मूल पाठ को ध्यान में रखते हुए आम लोगों तक इन्हें पहुँचाने के लिए लेखक ने इन्हें अपने शब्दों में लिखा है। इसके साथ ही शोधार्थियों और जिज्ञासु पाठकों के लिए भी यह इस अर्थ में उपयोगी है कि तत्कालीन समाज, राजनीति, राजपरिवार, सामान्य एवं निम्न वर्ग की स्थिति, नैतिकता, स्त्रियों के प्रति भावनाएँ, समाज में धर्म के नाम पर फैले अंधविश्वास, इतिहास, भूगोल आदि का बोध भी होता है। इसके अतिरिक्त उस काल में समाज किस प्रकार बुद्ध के विचार से प्रभावित हो रहा था, राजाओं, रानियों तथा राजपरिवार के अन्य सदस्यों के मध्य बुद्ध की शिक्षा का क्या असर था, प्रव्रज्या लेने में लोगों की रुचि कितनी थी, बुद्ध के भिक्षुसंघ तथा भिक्षुणीसंघ की क्या स्थिति थी, भिक्षुगणों का स्वभाव कैसा था, शिक्षा के केन्द्र कहाँ और कैसे थे आदि के विषय में भी हमें इन कथाओं से तथ्य ज्ञात होते हैं।</p>
<p>विविध विषयों पर कही गई ये कथाएँ आज भी प्रासंगिक हैं।
Book Details
-
ISBN9789388211581
-
Pages304
-
Avg Reading Time10 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Pratidin
- Author Name:
Mamta Kaliya
- Book Type:

-
Description:
हिन्दी की सुपरिचित लेखिका ममता कालिया की कहानियों के इस संग्रह में शिक्षित मध्यवर्गीय नारी की आशाओं, आकांक्षाओं, संघर्षों और स्वप्नों का यथार्थपरक अंकन हुआ है। ममता कालिया हिन्दी के उन कथाकारों में उल्लेखनीय हैं, जिन्होंने मध्यवर्गीय भाव-बोध को अपनी कहानियों का विषय बनाते हुए भी उसकी सीमाओं का अतिक्रमण किया है। मध्यवर्गीय भाव-बोध के प्रति तीखी व्यंग्य-दृष्टि का सहज और तार्किक विकास उनकी जीवन-दृष्टि की गतिशीलता का प्रमाण है। नारी के प्रति परम्परागत भारतीय दृष्टिकोण को नकारते हुए वे किन्हीं पतनशील जीवन-मूल्यों को स्वीकार नहीं करतीं, बल्कि समाज के स्वस्थ जीवन-मूल्यों को आत्मसात् करती हुई, उन्हें नई सामाजिक अर्थवत्ता प्रदान करती हैं।
घर की चारदीवारी में क़ैद नारी की मुक्ति-आकांक्षा और उसका संघर्ष ममता कालिया को अधिकांश कहानियों का प्रस्थान बिन्दु है, जिसके आसपास वे समूचे कथानक को बुनती हैं। इन कहानियों के पात्रों से लेखिका का सम्बन्ध इतना सीधा और आत्मीय है कि वे हमारी आँखों के सामने गतिशील होने लगते हैं। कहना न होगा कि इस संग्रह की कहानियाँ भारतीय नारी के संघर्ष और उसकी छटपटाहट को मार्मिक प्रसंगों के माध्यम से उद्घाटित करती हैं।
The Anti Romantic
- Author Name:
Basant Kumar Satpathy +1
- Book Type:

- Description: "The Anti-Romantics" is a collection of Odia short stories that have been translated into English. These stories are unique in their themes, taste, style, and technique. They stand apart from contemporary experiments and isms. The creative artist who wrote them shows an extraordinary understanding of the world and human life. In particular, the author elevates marginalized characters, who were previously unrecognized, unwanted, neglected, and looked down upon. In literature, they were deemed unfit and unsuitable. However, in these stories, they become heroes and heroines. These characters are the anti-romantics that readers will meet. Through their own voices, they share their stories in a way that is truly remarkable.
Desh Vibhajan Ki Kahaniyan
- Author Name:
Salam Azad
- Book Type:

-
Description:
सीमा के उस पार अस्वस्थ पिता खड़े हुए और इस पार बेटी, बीच में लगभग आधे मील चौड़े पाट की एक नदी...धरती को बाँटने की कोशिशों का पीड़ाजनक नतीजा ऐसी ही सीमाओं में होता है। ‘देश विभाजन की कहानियाँ’ बांग्लादेश के लब्धप्रतिष्ठ लेखक सलाम आज़ाद ने इन्हीं सीमाओं और पीड़ाओं से आक्रान्त होकर क़लमबद्ध की हैं। इन कहानियों में उन्होंने अपने देश के विभाजन के कारणों, उसके परिणामों और निरीह मनुष्य की नियति पर पड़नेवाले उसके दूरगामी और विडम्बनापूर्ण प्रभावों को भावप्रवण कथात्मकता के साथ रेखांकित किया है।
सलाम आज़ाद बांग्लादेश के उन लेखकों में अपना महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं जिनका सरोकार साम्प्रदायिक सौहार्द और देश का धर्मनिरपेक्ष विकास है। उनकी यह चिन्ता भी इन कहानियों में लक्षित की जा सकती है। बांग्लादेश में हिन्दुओं के साथ किए जानेवाले भेदभाव और उनके नागरिक अधिकारों का हनन सलाम आज़ाद के लेखक को गहरा दु:ख पहुँचाता है, जिसके चलते वे ‘जन्मभूमि’ जैसी कहानियाँ लिखने को बाध्य होते हैं। ‘देश विभाजन की कहानियाँ’ कहानियाँ भी हैं, और दस्तावेज़ भी।
Chaupde Ki Chudailen
- Author Name:
Pankaj Subeer
- Book Type:

- Description: This book has no description
Ek Stri Ka Vidageet
- Author Name:
Mrinal Pande
- Book Type:

- Description: हमारे समय में, जब अख़बारी ख़बर को ‘स्टोरी’, और रोमांच और सनसनी-भरी वारदातों को 'सत्यकथा' या ‘नाटक‘ कहकर परिभाषित किया जाने लगा है, तो एक ईमानदार कहानीकार के लिए ज़रूरी हो जाता है, कि वह नए सिरे से वह लिखे, जो सत्यकथा नहीं, स्टोरी नहीं, राष्ट्र के नाम सन्देश या रिपोर्ताज भी नहीं, सिर्फ़ एक विशुद्धि गठी हुई कहानी हो, और कहानी के सिवा कुछ न हो। इस संकलन की कहानियाँ हमारे समय, और ख़ुद कलाकार की, रचनात्मक शक्ति को आख़िरी बूँद तक निथारकर, उससे वह अन्तिम आकार छान पाने की कोशिश करती हैं, जो प्रचार-माध्यमों की पकड़ के परे, कहानी-कला का विशुद्ध स्वरूप है। इनमें एकल क़िस्सागोई भी है, और सामूहिक हुंकारा भी। सुनी-सुनाई भी है, और देखि-दिखाई भी, जन्म भी है, और मृत्यु भी, चलायमान समय भी है, और सर्वव्यापी काल भी। और अगर कोई सुधीजन कुनमुना-हिनहिनाकर पूछे, कि इनमें आदि-मध्य-अन्त (और समाज के लिए सन्देश या सूक्तिवचन समान कुछ बातें) क्यों नहीं हैं? तो यह कहानियाँ बड़ी विनम्रता से पूछना चाहेंगी, जीवन में ही वह सब है क्या?
Jahangir Ki Swarnamudra
- Author Name:
Satyajit Ray
- Book Type:

-
Description:
‘जहाँगीर की स्वर्णमुद्रा’ सुविख्यात फ़िल्म-निर्देशक और बांग्ला लेखक सत्यजित राय की बारह कहानियों का महत्त्वपूर्ण संग्रह है।
सत्यजित राय विरल कथा-स्थितियों और मानव-जीवन की विविधता के चितेरे हैं। देशकाल का परिवेश इस चित्रण में एक विराट फलक का कार्य करता है और उनकी अनुभव-सम्पन्न जीवन-दृष्टि विविध रंगों का। एक ऐसा समाज इन कहानियों में बराबर दिखाई देता है, जिसमें विभिन्न प्रकार की आशंकाएँ, कुंठाएँ और अन्तर्विरोध मानव-जीवन को प्रभावित-परिचालित करते हैं। फिर भी उनका मनुष्य कहीं हारता नहीं। ठगा जाकर भी ठगने की कोशिश नहीं करता और मानव-मूल्यों के प्रति एकनिष्ठ बना रहता है। यही कारण है कि वर्तमान व्यावसायिक सभ्यता से शोषित-प्रताड़ित होने के बावजूद कहीं-कहीं तो वह नैतिक प्रतिरोध की शक्ल अख़्तियार करता दिखाई देता है।
राय के कथा-लेखन की कुछ और विशेषताओं से भी ये कहानियाँ परिचित कराती हैं। मसलन, स्थितियों की निस्संग रहस्यात्मकता, व्यंग्य-विनोद का महीन पुट और शिल्पगत नाटकीयता। संक्षेप में कहा जाए तो हिन्दी पाठकों के लिए ये कहानियाँ एक अलग तरह का अनुभव-संसार सँजोए हुए हैं।
Sach Bolne Ki Bhool
- Author Name:
Yashpal
- Book Type:

-
Description:
यशपाल के लेखकीय सरोकारों का उत्स सामाजिक परिवर्तन की उनकी आकांक्षा, वैचारिक प्रतिबद्धता और परिष्कृत न्याय-बुद्धि है। यह आधारभूत प्रस्थान बिन्दु उनके उपन्यासों में जितनी स्पष्टता के साथ व्यक्त हुए हैं, उनकी कहानियों में वह ज़्यादा तरल रूप में, ज़्यादा गहराई के साथ कथानक की शिल्प और शैली में न्यस्त होकर आते हैं। उनकी कहानियों का रचनाकाल चालीस वर्षों में फैला हुआ है। प्रेमचन्द के जीवनकाल में ही वे कथा-यात्रा आरम्भ कर चुके थे, यह अलग बात है कि उनकी कहानियों का प्रकाशन किंचित् विलम्ब से आरम्भ हुआ। कहानीकार के रूप में उनकी विशिष्टता यह है कि उन्होंने प्रेमचन्द के प्रभाव से मुक्त और अछूते रहते हुए अपनी कहानी-कला का विकास किया। उनकी कहानियों में संस्कारगत जड़ता और नए विचारों का द्वन्द्व जितनी प्रखरता के साथ उभरकर आता है, उसने भविष्य के कथाकारों के लिए एक नई लीक बनाई, जो आज तक चली आ रही है। वैचारिक निष्ठा, निषेधों और वर्जनाओं से मुक्त न्याय तथा तर्क की कसौटियों पर खरा जीवन—ये कुछ ऐसे मूल्य हैं जिनके लिए हिन्दी कहानी यशपाल की ऋणी है।
‘सच बोलने की भूल’ कहानी-संग्रह में उनकी ये कहानियाँ शामिल हैं : ‘सच बोलने की भूल’, ‘एक हाथ की उँगलियाँ’, ‘आत्मज्ञान’, ‘अपमान की लज्जा’, ‘होली का मज़ाक़’, ‘ख़ुदा का ख़ौफ़’, ‘नारद-परशुराम संवाद’, ‘चौरासी लाख जोनि’, ‘ख़ुदा और ख़ुदा की लड़ाई’, ‘नारी की ना’, ‘फलित ज्योतिष’ और ‘लखनऊ वाले’।
Sampurna Kahaniyan : Raghuvir Sahay
- Author Name:
Raghuvir Sahay
- Book Type:

-
Description:
रघुवीर सहाय अप्रतिम कवि थे। विचार की ठोस और स्पष्ट ज़मीन पर पैर रखे हुए उन्होंने अपने कवि को एक बड़ा आकाश दिया। जिसे आनेवाले समय में एक शैली बन जाना था। यह नवोन्मेष उनकी कहानियों में भी था, इससे कम लोग परिचित हैं। इस संकलन में उपस्थित उनकी समग्र कथा-सम्पदा के पाठ से हम जान सकते हैं कि कविता में जिस वृहत्तर सत्य को अंकित करने का प्रयास वे करते थे, वह किसी फ़ॉर्म को साधने-भर का उपक्रम न था, अपने अनुभव और उसकी सम्पूर्ण अभिव्यक्ति की व्याकुलता थी जो उन्हें अन्य विधाओं तक भी ले जाती थी।
इस पुस्तक में संकलित उनके कथा-संग्रहों के साथ प्रकाशित दो भूमिकाएँ एक बड़े रचनाकार के बड़े सरोकारों का पता देती हैं, जिनमें एक चिन्ता लेखन के उद्देश्य को लेकर भी है। वे कहते हैं कि मनुष्यों के परस्पर सम्बन्धों को बार-बार जानने और जाँचने की आवश्यकता ही लेखन की सबसे ज़रूरी वजह है। कुछ तत्त्व हमेशा काम करते रहते हैं जिनके राजनीतिक उद्देश्य समता और न्याय के विरुद्ध होते हैं, वे संगठित होकर लेखक द्वारा बताए सत्य को विकृत कर प्रचारित किया करते हैं। लेखक के लिए बार-बार अपने मत को बताना इस आक्रमण के विरुद्ध आवश्यक होता है। रघुवीर सहाय की कविताएँ अपनी काया का निरन्तर अतिक्रमण करते हुए यही कार्य हमेशा करती रहीं; और ये कहानियाँ भी वही करती हैं।
Bhari Dopheree Ke Andhere
- Author Name:
Madhu Kankariya
- Book Type:

-
Description:
मधु कांकरिया की कहानियों को कोई संज्ञा देनी हो तो कहना पड़ेगा–बेबाक। बेबाक विद्रोह! बिना किसी कुंठा और पूर्वाग्रह के खुले दिल से चीजों को देखना, समझना, स्वीकार हो तो स्वीकार, अस्वीकार हो तो अस्वीकार! बोल्ड भी और ब्यूटीफुल भी। अपनी गन्दगी पर परदा डालते व्यक्ति का गमछा खर्र से खींचने में भी उन्हें कोई दुविधा नहीं होती।
गाँव की सड़ती गलियों से लेकर महानगर के रिसते अँधेरे और वेश्यालयों के नरक–मधु के लिए कुछ भी वर्जित और अस्पृश्य नहीं। हर जगह फैली है मधु की कहानियों की दुनिया और मधु की भाषा-शैली! जोगन-जोगन रात...रेशम-रेशम यादें...यह वह कलम है जो पाखंड के लिए किसी को भी नहीं बख्शती लेकिन किसी की जलती हकीकत से आँख नहीं चुराती। मधु मानती हैं कि ‘कोई भी सत्य सार्वकालिक नहीं हो सकता...। कि सागर की विशालता की अपनी सीमा है, वहाँ कभी प्रेम के कमल नहीं खिलते...। कि जिन्दगी का हल खुद जिन्दगी है और प्यार का जवाब खुद प्यार !’
Meri Didi
- Author Name:
Oka Shuzo
- Book Type:

-
Description:
जापान के सुप्रसिद्ध साहित्यकार ओका शूज़ो की पुस्तक ‘मेरी दीदी’ और ‘वाशिंगटन पोस्टमार्च’ का हिन्दी अनुवाद मानसिक और शारीरिक रूप से अविकसित बच्चों के सामाजिक परिवेश का एक संवेदनशील संग्रह है जिसे डॉ. उनीता सच्चिदानन्द और जापान की योशिको ओकागुची ने मिलकर सम्पन्न किया है। दो भागों में प्रकाशित इस कथा-संग्रह में
मानसिक रूप से कमज़ोर बच्चों की सहज इच्छाओं और अनुभूतियों का संवेदनशील चित्रण है।
‘मेरी दीदी’ और ‘वाशिंगटन पोस्टमार्च’ पर फ़िल्म भी बन चुकी है।
Mr. Kanoonwalla's Chamber
- Author Name:
Apoorv Agarwal
- Book Type:

- Description: कहीं सत्य और न्याय की जीत, कहीं चरमराई हुई व्यवस्था की हार! जुर्म, जुल्म, क़ानून और सज़ा की आग धधकती आँधी में झूलती-झुलसती ज़िन्दगियाँ! हुस्न, आशिकी, प्रेम, सेक्स, दोस्ती, वैर-वैमनस्य, षड्यंत्र, पश्चात्ताप, आइडेंटिटी-थैप्ट, मर्डर के अस्त्रों और बेड़ियों से बँधी क्रिमिनल लॉ और जस्टिस की क्लासिकल रहस्यमयी-रोमांचक कहानियाँ, जिनमें न्याय-तंत्र की बीते सौ सालों की तस्वीरें हमारे सामने ख़ुद-ब-ख़ुद ज़िन्दा खड़ी हो जाती हैं।
Kee Re Hukum
- Author Name:
Shridharam
- Book Type:

- Description: Kee Re Hukum a collection of short stories by Shridharam.
Halant
- Author Name:
Hrishikesh Sulabh
- Book Type:

-
Description:
हृषीकेश सुलभ के कथा संकलन ‘हलंत’ की कहानियाँ हिन्दी की यथार्थवादी कथा-परम्परा का विकास प्रस्तुत करती हैं। इन कहानियों में भारतीय समाज की परम्परा, जीवनदृष्टि, समसामयिक यथार्थ और चिन्ताओं की अभिव्यक्ति के साथ-साथ विकृतियों और विसंगतियों का भी चित्रण है। मनुष्य की सत्ता और प्रवृत्ति की भीतरी दुर्गम राहों से गुज़रते हुए भविष्य के पूर्वाभासों और संकेतों को रेखांकित करने की कलात्मक कोशिश इन कहानियों की अलग पहचान बनती है। यथार्थ के अन्त:स्तरों के बीच से ढेरों ऐसे प्रसंग स्वत:स्फूर्ति उगते चलते हैं, जो हमारे जीवन की मार्मिकता को विस्तार देते हैं। संचित अतीत की ध्वनियाँ यहाँ संवेदन का विस्तार करती हैं और इसी अतीत की समयबद्धता लाँघकर यथार्थ जीवन की विराटता को रचता है।
हृषीकेश सुलभ की कहानियाँ भाषा और शिल्प के स्तर पर नए भावबोधों के सम्प्रेषण की नई प्रविधि विकसित करती हैं। नई अर्थछवियों को उकेरने के क्रम में इन कहानियों का शिल्प पाठकों को कहीं आलाप की गहराई में उतारता है, तो कहीं लोकलय की मार्मिकता से सहज ही जोड़ देता है। जीवन के स्पन्दन को कथा-प्रसंगों में ढालती और जीवन की संवेदना को विस्तृत करती ये कहानियाँ पाठकों से आत्मीय और सघन रिश्ता बनाती हैं।
हृषीकेश सुलभ के कथा-संसार में एकान्त के साथ-साथ भीड़ की हलचल भी है। सपनों की कोमल छवियों के साथ चिलचिलाती धूप का सफ़र है। पसीजती हथेलियों की थरथराहट है, तो विश्वास से लहराते हाथों की भव्यता भी है। भावनाओं और संवेदनाओं के माध्यम से अपना आत्यन्तिक अर्थ अर्जित करती इन कहानियों में क्रूरता और प्रपंच के बीच भी जीवन का बिरवा उग आता है, जो मनुष्य की संवेदना के उत्कर्ष और जिजीविषा की उत्कटता को रेखांकित करता है।
Fasadat Ke Afsane
- Author Name:
Zubair Razvi
- Book Type:

-
Description:
1947 से अब तक हमारी राजनीति फ़सादात करानेवाले को पहचानने में, उसे नंगा करने में आगे नहीं आई। कारण ये कि फ़सादात कराना सारे देश की राजनीति के दाँव-पेच का अंग बन चुका है। राजनीति से जुड़े सारे दल एक दूसरे को इल्ज़ाम देते रहते हैं लेकिन फ़सादात की जाँच करनेवाले कमीशन कुछ और कहते हैं। इन सबसे अलग फ़सादात का जो चेहरा अपने असली रूप में हमारे सामने आता है वो केवल साहित्यकार, रचनाकार के ज़रिए ही आता है। लेखक और रचनाकार ही ने फ़सादात के बारे में सच-सच लिखा है। उसी ने फ़सादात के मुजरिम को पहचाना है। दु:ख झेलनेवाले के दु:ख को समझा है।
इस संग्रह में कुछ अफ़साने तो वो हैं जो बँटवारे के फ़ौरन बाद होनेवाले साम्प्रदायिक दंगों पर लिखे गए और कुछ वो हैं जो बाबरी मस्जिद के गिराए जाने से पहले और उसके बाद होनेवाले फ़सादात पर लिखे गए। इनमें कई अफ़साना-निग़ार ऐसे भी हैं जो ख़ुद इस तूफ़ान से गुज़रे थे। फ़सादात के कारण बदलते रहे और साथ ही उनके बारे में लेखक का रवैया भी बदलता रहा, फ़सादात का अधिकतर शिकार बननेवाला समुदाय लेखक की सारी सहानुभूति समेटने लगा। वे राजनैतिक दल भी पहचान लिए गए जो फ़सादात की आग लगाते रहते हैं। पहले के अफ़सानों में हिन्दू मुसलमान की और मुसलमान हिन्दू की जानो-माल की हिफ़ाज़त करते हैं लेकिन बाद के फ़सादात में लेखक ने ये महसूस किया कि फ़सादात जब भी भड़कते हैं तो हिन्दू-मुसलमान के मेल-जोल में एक फ़ासला-सा आ जाता है। इस ट्रेजिडी की गूँज ‘नींव की ईंट’, ‘सिंघारदान’, ‘ज़िन्दा दरगोर’ जैसे अफ़सानों में सुनाई देती है।
फ़सादात ने हमारे जीवन और सायकी में एक मुस्तक़िल दहशत और लूटे जाने का ख़ौफ़ और भय पैदा कर दिया है। इस भय, डर और ख़ौफ़ की सायकी को ‘बग़ैर आसमान की ज़मीन’, ‘आदमी’ और ‘खौफ़’ जैसे अफ़सानों में महसूस किया जा सकता है।
Kathantar Vol. 1 and 2
- Author Name:
Editor Mrityunjay Singh
- Book Type:

- Description: 1975-2000 कथांतर 'कथांत'र दरअसल सन् 1975 और उसके आस-पास के काल से लेकर सन् 2000 तक के पच्चीस वर्षों में उभरे कथा-लेखकों की कहानियों का संग्रह होने के साथ-साथ इस काल खंड के कथा-कर्म की ऐतिहासिकता के दस्तावेज़ीकरण की भी एक कोशिश है। कहानी की दुनिया की सम्यक जानकारी रखने वाले इस तथ्य से परिचित हैं कि यह दौर स्वयं प्रकाश, रमेश उपाध्याय, असगर वजाहत, पंकज बिष्ट, नमिता सिंह, इसरायल, कामतानाथ, रमाकांत, सतीश जमाली, सुभाष पंत, मधुकर सिंह जैसे समर्थ कथा-लेखकों के दौर के तुरंत बाद शुरू हुआ है। यह दौर सामाजिक-राजनीतिक चेतना से सम्पन्न व्यापक सामाजिक बोध और गहरी अंतर्दष्टि रखने वाले कथा लेखकों का दौर रहा है। अगर वस्तुपरक दष्टि से देखा जाये तो विपुलता और गुणवत्ता की दष्टि से यह दौर पूर्ववर्ती और परवर्ती दौरों से बहुत विशिष्ट है। यह नई अंतर्वस्तु के संधान और अंतर्वस्तु और शिल्प की अन्विति के नये दष्टांतों का दौर भी है। इस पीढ़ी की रचनाशीलता इतनी प्रखर रही है कि इसने इक्कीसवीं शताब्दी में भी अपने लेखन से सतत मौजूदगी बनाये रखी है और कई अविस्मरणीय कहानियाँ रचकर कहानी के परिदश्य को समृद्ध किया है। हिन्दी कथा आलोचना में इस दौर का सम्यक मूल्यांकन नि:संदेह पूर्ववर्ती दौरों के मूल्यांकन सरीखा नहीं हुआ है और अभी इस दौर का मूल्यांकन होना बाकी है। 'कथांतर' के ये दोनों खंड पाठकों को हिन्दी कहानी के इस दौर की पूरी जानकारी देते हैं और कुछ उत्कृष्ट कहानियों से रूबरू कराते हैं। ये दोनों खंड हिन्दी कहानी में रुचि रखने वाले कथा-लेखकों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए अनिवार्य आधार-पुस्तकें हैं।
Thasak
- Author Name:
Mamta Kaliya
- Book Type:

-
Description:
वरिष्ठ कथाकार ममता कालिया की इन कहानियों में आज का वक़्त अपनी तमाम विडम्बनाओं के साथ मौजूद है। नब्बे के दशक के दौरान और उसके बाद हमारे समाज ने जीवन के जिन नए रूपों को देखा और भोगा, वह उससे पहले हमारे दैनिक अनुभवों का हिस्सा नहीं थे। उदारीकरण आया, और अपने साथ ऐसी अनेक चीज़ें लेकर आया जिनसे हमारा जीने और देखने का तरीक़ा एकदम बदल गया—मोबाइल, इंटरनेट, बैंकिंग की नई-नई पद्धतियों, एटीएम, मल्टीप्लेक्स, मनोरंजन की चारों दिशाओं में पसरे नए-नए साधन और इन सबका बिना किसी हिचक सुख भोगने के लिए ज़रूरी निश्चिन्तता।
इन कहानियों में ममता कालिया ने बिलकुल इसी दौर में जन्मे नए कथाकार जैसी ताज़गी और सहजता के साथ इन सब चीज़ों से बनते नए वक़्त और नए नागरिक के चित्र खींचे हैं। और यह सुनी-पढ़ी सूचनाओं के नहीं, प्राथमिक और आँखों देखे अनुभवों के चित्र हैं। मशीनी सुगमता में बीतते जीवन ने अपने को इन कहानियों में इतने स्पष्ट रूप में रेखांकित किया है कि ममता जी की भाषा और कहन के प्रवाह में डूबा पाठक भी, उन्हें महसूस करने से नहीं बच पाता। यही इन कहानियों को लगभग इन्हीं विषयों पर लिखी जा रही अनेक कहानियों से विशिष्ट बनाता है।
Refugee Camp
- Author Name:
Ashish Kaul
- Book Type:

- Description: उसने कहा जब मरना ही है तो चलो मेरे साथ। और बस वो पाँच हजार जिंदा लाशें चल पड़ीं मौत की आँखों में आँखें डालने। वो चल पड़े शांति की तलाश में। कहते हैं अपनी जमीन और हक की एक लड़ाई सहस्रों साल पहले पांडवों को लड़नी पड़ी थी। अपनों को युद्ध में सामने खड़ा देख अर्जुन धर्मसंकट में थे और उन्हें इससे उबारने के समाधान के रूप में गीता का जन्म हुआ। पर सवाल यह है कि शांति चाहता कौन है? पैसा, बाजार और ताकत तो अशांति में उत्सव मनाते हैं। सरकार और शांति दोनों ही कश्मीर में हर पल हार रहे हैं। कभी पत्थरबाजों के पत्थरों से, कभी सीमापार की गोलियों से, कभी पढ़ाई से बहुत दूर जाते बस्तों से। अकेली आर्मी या सरकार शांति नहीं ला सकती। न्याय, धर्म, स्वाभिमान और मानवता तो सिर्फ और सिर्फ एक आम आदमी की पहल से ही संभव है। क्योंकि एक वो ही है, जिसे शांति में नफा या नुकसान नहीं, जिंदगी दिखती है। यह कहानी एक ऐसे ही आम आदमी ‘अभिमन्यु’ की कहानी है। वह अभिमन्यु, जिसने ‘अशांति’ के अर्थतंत्र पर सेंधमारी की और शांति के लिए पहला कदम बढ़ाया। और जब वो पहला कदम उठा, उसने एक ऐसी असाधारण परिस्थिति को जन्म दिया, जिसका किसी को भान न था। देखते-ही-देखते पाँच हजार जिंदा लोग एक आम लड़के अभिमन्यु के नेतृत्व में आत्मघाती दस्ते में तब्दील हो गए। शायद वो विश्व का सबसे बड़ा आत्मघाती दस्ता था। जीना तो मुश्किल था ही, पर क्या मरना आसान था? क्या होगा जब इनके आगे भी इनका अतीत खड़ा होगा? क्या इनके आगे भी इनके अपने युद्ध के लिए खड़े होंगे? कुरुक्षेत्र में लड़े गए महाभारत में गीता का जन्म हुआ। क्या यह कहानी ‘रिफ्यूजी कैंप’ वादी में चल रही लड़ाइयों का कोई समाधान खोज पाएगी?
Offline Girlfriend Dil Dhoondhta Hai
- Author Name:
Abhishek Tripathi
- Book Type:

- Description: Book
Raat Ki Bahon Mein
- Author Name:
Mohan Rakesh
- Book Type:

-
Description:
एक ख़ास योजना के तहत हिन्दी के दस प्रमुख कथाकारों द्वारा लिखी गईं ये कहानियाँ भारतीय समाज में शहरीकरण से पैदा होनेवाले बदलावों को रेखांकित करती हैं।
दस अलग-अलग शहरों पर केन्द्रित इन कहानियों में नागरिक जीवन का एक बड़ा यथार्थ तो उभरकर आया ही है, नगरों की उन कठिनाइयों पर भी प्रकाश डाला गया है जो ख़ासकर रात में ही पैदा होती हैं। बीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध में भारतीय समाज कौन-सा नया रूप ग्रहण कर रहा है, उसकी सांस्कृतिक चेतना किस ओर अग्रसर हो रही है, व्यक्ति का संघर्ष क्यों सामाजिक संघर्ष का रूप नहीं ले रहा है आदि जैसे हमारे समय के कुछ अहम सवालों की ओर ही इशारा नहीं करती हैं ये कहानियाँ बल्कि, अपनी तरह से इनके जवाब भी तलाशती हैं।
Jahan Lakshmi Quaid hai
- Author Name:
Rajendra Yadav
- Book Type:

-
Description:
साहित्य की धारा जहाँ मोड़ लेकर सारे परिदृश्य को नया कर देती है, निश्चय ही वहाँ कुछ रचनाएँ होती हैं। ‘जहाँ लक्ष्मी क़ैद है’ ऐसी ही एक कहानी है। ‘नई कहानी’ आन्दोलन की एक आधार-कथा रचना के रूप में ‘जहाँ लक्ष्मी क़ैद है’ का उल्लेख किए बिना स्वतंत्रता के बाद की हिन्दी कहानी को नहीं समझा जा सकता।
स्वतंत्रता ने जिन सपनों को जगाया था, उन्हें आपसी सम्बन्धों में तिलमिल कर टूटते देखना, महसूस करना और लिखना हिन्दी कहानी को नया स्वरूप दे रहा था। सम्बन्धों, मानसिकताओं और भाषा में उतरती द्वन्द्वात्मकता में अकेला, अनसमझा व्यक्ति मोहभंग की त्रासदी का साक्षात् प्रतीक है।
हालाँकि ‘नई कहानी’ का प्रारम्भ ‘प्रतीक’ (सम्पादक अज्ञेय) के अगस्त, 1951 के अंक में प्रकाशित राजेन्द्र यादव की कहानी ‘खेल-खिलौने’ से माना जाता है, मगर ‘जहाँ लक्ष्मी क़ैद है’ ‘नई कहानी’ आन्दोलन का अनिवार्य कथा-संग्रह है।
इसी संग्रह में है ‘एक कमज़ोर लड़की की कहानी’ नाम की दूसरी बेहद चर्चित कहानी। ‘लंच टाइम’ और ‘रौशनी कहाँ है’ जैसी कहानियाँ सिर्फ़ ऐतिहासिक दृष्टि से ही महत्तपूर्ण नहीं हैं, वे आज भी प्रासंगिक हैं।
‘जहाँ लक्ष्मी क़ैद है’ संग्रह को पढ़ना एक पीढ़ी के मानसिक इतिहास से होकर गुज़रना है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book