Main Bhi Jaunga
(0)
Author:
Ganga Prasad VimalPublisher:
Antika Prakashan Pvt. Ltd.Language:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
235
192.7 (18% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Collection of Stories
Read moreAbout the Book
Collection of Stories
Book Details
-
ISBN9789385013348
-
Pages112
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Gyangarh ki Ladai
- Author Name:
Balraj Pandey
- Book Type:

- Description: s 'ज्ञानगढ़ की लड़ाई' ग्यारह कहानियों का संग्रह है। 20-25 वर्षों का लेखन—ग्यारह कहानियाँ। लिखने के सम्मोहन और कहानीकार कहलाने की कामना से कोसों दूर। लेकिन जब लिखा तो उस मेहतर की तरह लिखा जो साफ-सुथरेपन को कर्तव्य की तरह पूरा करता हो, दिनचर्या की तरह निभाता-भर नहीं हो। बलराज पांडेय आदर्शवादी, साफ-सुथरी कहानियों वाली लेखन-परंपरा के कहानीकार नहीं हैं। प्रतीकवादी कहन भी इन कहानियों की विशेषता नहीं। ये कहानियाँ प्रगतिशील परंपरा में, यथार्थवादी धारा की कहानियाँ हैं। यथार्थवादी धारा में भी, विरूपण (डिस्टार्शन) की कला के सहारे विद्रूपता का चित्रण इन कहानियों का शिल्प है। विद्रूपता के इस चित्रण में उपहास नहीं, बल्कि विडम्बना को उजागर करने वाली वह ट्रैजिक स्थितियाँ हैं, जिनमें पाखंड, भ्रष्टाचार, निकृष्टताएँ, दुरभिसंधियाँ, छल-प्रपंच, रीढ़हीनता, चाटुकारिता, पीठ-पीछे वार करने वाली निरीहता को जीने और पोषित करने वाले लोग हैं। धिक्कार, ज़ाहिर हो जा, है तू जैसा, प्रोन्नति का फेर, इंटरव्यू, तस्मै श्री गुरवे नम:, अध्यक्ष जी का वसंतोत्सव, ज्ञानगढ़ की लड़ाई आदि कहानियों को इन किरदारों के साथ पढ़ा जा सकता है। ये सभी किरदार जाने-पहचाने वास्तविक किरदार हैं। यह संग्रह शिक्षण-संस्थानों, उनके विभागों, उन विभागों में पदासीन आचार्यों की कार्य-संस्कृति, उनके बीच की अंदरूनी ख्वाहिशात, चालबाजि़यों और धूर्तताओं का रंगीन हलफनामा है। नैतिकता और मूल्यों के क्षरण-मरण का कथात्मक मर्सिया। इन कहानियों के बहाने आप देश के सभी विश्वविद्यालयों के हिन्दी-विभागों के खद्दो-खाल को पढ़ सकते हैं, देख सकते हैं।
Mansarovar Vol. 8 : Guptdhan Aur Anya Kahaniyan
- Author Name:
Premchand
- Rating:
- Book Type:

- Description: प्रेमचन्द मनुष्य और मानवीय स्थितियों में दिलचस्पी रखते थे।... प्रेमचन्द के लिए मनुष्य की स्थिति ही समाज की स्थिति थी। उनकी कहानियों में मनुष्य को स्वयं में सम्पूर्ण इकाई के रूप में शायद ही कहीं प्रस्तुत किया गया हो। मनुष्य के अन्तर्मन की उथल-पुथल और दुविधाएँ हमेशा समाज और आस-पास के माहौल से जुड़ी होती हैं। यहाँ तक कि पारिवारिक सम्बन्धों को भी सामाजिक तर्कों से प्रभावित होता दिखाया गया है। उनका गहरा सामाजिक निरीक्षण उनकी कहानियों में झलकता है जिनमें उन्होंने हर 'प्रकार' के इनसानों को और लगभग हर व्यवसाय को शामिल किया है। विश्वनाथ एस. नरवणे
Rocking Chair
- Author Name:
Aruna Sabbarwal
- Book Type:

- Description: Book
Mati Ki Mooraten
- Author Name:
Shriramvriksh Benipuri
- Book Type:

- Description: "जब कभी आप गाँव की ओर निकले होंगे, आपने देखा होगा, किसी बड़ या पीपल के पेड़ के नीचे, चबूतरे पर कुछ मूरतें रखी हैं—माटी की मूरतें! ये मूरतें—न इनमें कोई खूबसूरती है, न रंगीनी। किंतु इन कुरूप, बदशक्ल मूरतों में भी एक चीज है, शायद उस ओर हमारा ध्यान नहीं गया, वह है जिंदगी! ये माटी की बनी हैं, माटी पर धरी हैं; इसीलिए जिंदगी के नजदीक हैं, जिंदगी से सराबोर हैं। ये देखती हैं, सुनती हैं, खुश होती हैं; शाप देती हैं, आशीर्वाद देती हैं। खुश हुईं—संतान मिली, अच्छी फसल मिली, यात्रा में सुख मिला, मुकदमे में जीत मिली। इनकी नाराजगी—बीमार पड़ गए, महामारी फैली, फसल पर ओले गिरे, घर में आग लग गई। ये मूरतें जिंदगी के नजदीक ही नहीं, जिंदगी में समाई हुई हैं। इसलिए जिंदगी के हर पुजारी का सिर इनके नजदीक आप-ही-आप झुक जाता है। ये कहानियाँ नहीं, जीवनियाँ हैं! ये चलते-फिरते आदमियों के शब्दचित्र हैं। सुप्रसिद्ध लेखक श्रीरामवृक्ष बेनीपुरी कहते हैं—‘मानता हूँ, कला ने उन पर पच्चीकारी की है; किंतु मैंने ऐसा नहीं होने दिया कि रंग-रंग में मूल रेखाएँ ही गायब हो जाएँ। मैं उसे अच्छा रसोइया नहीं समझता, जो इतना मसाला रख दे कि सब्जी का मूल स्वाद ही नष्ट हो जाए।’ जिंदगी के विविध रंगों को रेखांकित करतीं बेनीपुरीजी की सशक्त लेखनी से निकली रोचक, मार्मिक व संवेदनशील रेखाचित्र। "
Allahabad Bhi !
- Author Name:
Sheshnath Pandey
- Book Type:

-
Description:
शेषनाथ पाण्डेय के कथा-संकलन ‘इलाहाबाद भी!’ की कहानियाँ हमारे समय का साक्ष्य प्रस्तुत करती हैं। पूँजी और बाज़ार के वर्चस्व ने इस समय को इस तरह जकड़ रखा है कि मनुष्य अपनी संवेदनाएँ खोकर निरन्तर हिंसक बनता जा रहा है। यह हिंसा जीवन के उन सारे मूल्यों और भावपक्ष को निगलती जा रही है, जिससे एक सुन्दर और मानवीय गरिमा से पूरित संसार का स्वप्न साकार हो सकता था। इस हिंसा को बिना किसी अतिरेक या अतिनाटकीयता के इन कहानियों में अभिव्यक्त करने के लिए इस युवा कथाकार ने मानव-मन की आन्तरिक उथल-पुथल का सहारा लिया है। जीवन के कई ऐसे पक्ष इन कहानियों में उजागर हुए हैं, जिनके आपसी टकराव से मनुष्य के भीतर अन्तर्द्वन्द्व उपजते हैं और असम्भव घटित हो जाता है।
‘इलाहाबाद भी!’ की कहानियाँ यथार्थ की जटिलता से टकराती हैं और अपने सादगी भरे अन्दाज़ में अपने कहन के कारण हमारे भीतर रच-बस जाती हैं। शेषनाथ पाण्डेय गाँव और महानगर दोनों के यथार्थ से परिचित हैं। गाँव से महानगर तक की यात्रा और महानगर में ज़िन्दगी की डोर को थामे रहने के संघर्षों ने उन्हें, जो जीवनानुभव सौंपा है, वह उनकी कहानियों का मूलाधार है। यह सब उनकी कहानियों में इस तरह विन्यस्त है कि उसे अलग करके देख पाना सम्भव नहीं। यथार्थ को रचनात्मक स्पर्श से पुनर्नवा करने का यह हुनर उनकी विशेषता है। इन कहानियों की भाषा सहज और सम्प्रेषणीय है। हिन्दी कहानी का समकालीन परिदृश्य विविधताओं से भरा हुआ है और मुझे भरोसा है कि शेषनाथ पाण्डेय की ये कहानियाँ पाठकों का ध्यान आकर्षित करेंगी।
—हृषीकेश सुलभ
Katha Saptak - Rajendra Dani
- Author Name:
Rajendra Dani
- Book Type:

- Description: Description Awaited
Jalti Jhadi
- Author Name:
Nirmal Verma
- Book Type:

-
Description:
नामवर सिंह के शब्दों में ‘...निर्मल ने यथार्थ की सीमा पार करने की कोशिश की है। उन्होंने तात्कालिक वर्तमान का अतिक्रमण करना चाहा है, कहानी-कला के दायरे से भी बाहर निकलने की कोशिश की है। यहाँ तक कि शब्द की अभेद्य दीवार को लाँघकर शब्द के पहले के ‘मौन जगत’ में प्रवेश करने का भी प्रयत्न किया है।’
मनुष्य के भीतर अवस्थित इस मौन को पकड़ने का प्रयास बार-बार निर्मल जी की कहानियों में दिखाई देता है जिसे वे जीवन के बीचोबीच ही सम्भव करते हैं। जीवन के भावनात्मक जोख़िम से भरे इलाक़ों में मनुष्य की सघन और सूक्ष्म अनुभूतियों को प्रकाशित करनेवाली इस संग्रह की कहानियाँ अकेलेपन, अवसाद, अजनबीयत और आधुनिक जीवन की विडम्बनाओं का अन्वेषण दुर्लभ चित्रात्मकता और प्रामाणिकता के साथ करती हैं।
सन् 1965 में पहली बार प्रकाशित इस संग्रह की ज़्यादातर कहानियाँ यूरोप की पृष्ठभूमि में लिखी गई हैं जिनमें ‘लन्दन की एक रात’, ‘अन्तर’ और ‘जलती झाड़ी’ जैसी प्रसिद्ध कहानियाँ भी शामिल हैं।
इसी संग्रह में ‘माया दर्पण’ शीर्षक कहानी भी है जिस पर समानान्तर सिनेमा के चर्चित निर्देशक कुमार शाहनी ने इसी नाम से फ़िल्म बनाई थी जिसे 1973 में सर्वश्रेष्ठ हिन्दी फ़िल्म पुरस्कार प्राप्त हुआ था।
Pratidin
- Author Name:
Mamta Kaliya
- Book Type:

- Description: हिन्दी की सुपरिचित लेखिका ममता कालिया की कहानियों के इस संग्रह में शिक्षित मध्यवर्गीय नारी की आशाओं, आकांक्षाओं, संघर्षों और स्वप्नों का यथार्थपरक अंकन हुआ है। ममता कालिया हिन्दी के उन कथाकारों में उल्लेखनीय हैं, जिन्होंने मध्यवर्गीय भाव-बोध को अपनी कहानियों का विषय बनाते हुए भी उसकी सीमाओं का अतिक्रमण किया है। मध्यवर्गीय भाव-बोध के प्रति तीखी व्यंग्य-दृष्टि का सहज और तार्किक विकास उनकी जीवन-दृष्टि की गतिशीलता का प्रमाण है। नारी के प्रति परम्परागत भारतीय दृष्टिकोण को नकारते हुए वे किन्हीं पतनशील जीवन-मूल्यों को स्वीकार नहीं करतीं, बल्कि समाज के स्वस्थ जीवन-मूल्यों को आत्मसात् करती हुई, उन्हें नई सामाजिक अर्थवत्ता प्रदान करती हैं। घर की चारदीवारी में क़ैद नारी की मुक्ति-आकांक्षा और उसका संघर्ष ममता कालिया को अधिकांश कहानियों का प्रस्थान बिन्दु है, जिसके आसपास वे समूचे कथानक को बुनती हैं। इन कहानियों के पात्रों से लेखिका का सम्बन्ध इतना सीधा और आत्मीय है कि वे हमारी आँखों के सामने गतिशील होने लगते हैं। कहना न होगा कि इस संग्रह की कहानियाँ भारतीय नारी के संघर्ष और उसकी छटपटाहट को मार्मिक प्रसंगों के माध्यम से उद्घाटित करती हैं।
Pratinidhi Kahaniyan : Ajneya
- Author Name:
Sachchidananda Hirananda Vatsyayan 'Ajneya'
- Book Type:

- Description: रचनाकर्म को अर्थवत्ता की खोज से जुड़ा मानने वाले अज्ञेय की कहानियाँ प्रचलित अर्थों में ‘यथार्थ’ से क़रीबी जताती भले ही मालूम न पड़ती हों लेकिन, उनके ही शब्दों में कहें तो, अर्थवत्ता की खोज की मानवीय जिजीविषा को वे सूक्ष्मता से उद्घाटित करती हैं। उनका यथार्थ-बोध बाहरी दृश्य-जगत के बजाय आन्तरिक सत्य पर अधिक आश्रित है, मानवीय जीवन-सन्दर्भ से परे कहानी के सन्दर्भ की स्वतंत्र सत्ता को वे स्वीकार नहीं करते। उनकी दृष्टि व्यक्ति-वैशिष्ट्य केन्द्रित है, वह सामाजिकता की विरोधी नहीं है। वस्तुतः जिस दौर में हिन्दी कहानी-लेखन में ‘यथार्थ’ से जुड़ाव और उसका चित्रण ही श्रेष्ठता की कसौटी समझा जा रहा था, उसी दौर में अज्ञेय ने अपनी कहानियों में यथार्थ को सामाजिकता की सतही सीमा तक सीमित न मानकर वैयक्तिक संवेदनाओं के आधार पर उसको रचने या परखने को प्राथमिकता दी। दुर्भाग्य से इसे सामाजिक चेतना के अभाव के रूप में देखा गया। यह उनकी रचनात्मकता का सही आकलन नहीं था। यह ऐसा अवरोध था जिसको हटाए बिना उनकी कहानियों के मर्म तक पहुँचना सम्भव नहीं हो सकता। आज के कथित उत्तर-आधुनिक बल्कि अधुनान्तिक समय में अज्ञेय की कहानियाँ मानवीय जीवन के ऐसे अनेक प्रासंगिक पहलुओं की तरफ ध्यान दिलाती हैं जिन्हें अतीत की रूढ़ बहसों से फैले धुन्ध में देखना कठिन था।
Adhkhaya phal
- Author Name:
Anand Harshul
- Book Type:

- Description: ‘अधखाया फल’ आनंद हर्षुल का तीसरा कहानी-संग्रह है। शिल्प-सजगता और भाषा का अपूर्व सौष्ठव लेखक के इस तीसरे संग्रह की कहानियों में भी भरपूर मौजूद है। यथार्थ के साथ रोमांस के जिस सर्जनात्मक दुस्साहस के लिए आनंद हर्षुल जाने जाते हैं, वह उनके विलक्षण कथा-गद्य में प्रकट हुआ है। यह ऐसा गद्य है जो इन दिनों प्रचलित कथात्मक गद्य की स्थूल रूढ़ियों—विवरणात्मकता, वृत्तान्त के निपट एकरैखिक विन्यास, यथार्थ की सपाट समाजशास्त्रीयता आदि—के बरअक़्स किंचित् स्वैरमूलक, बहुस्तरीय और स्मृतिबहुल रूप ग्रहण करता है। इस रूप में यह कहानी के जाने-पहचाने गद्य का प्रतिलोम जान पड़ता है। आनन्द हर्षुल कहानी की अन्तर्वस्तु को यथार्थवाद के वाचाल मुहावरों में पकड़ने की लोकप्रिय प्रविधि से परहेज़ करते हैं। वे यथार्थ की अन्तर्ध्वनियों को एकाग्रचित्त होकर सुनते हैं और उसकी आन्तरिक विडम्बनाओं पर धीरे-से उँगली रखते हैं। ज़ाहिर है, वे कहीं पहुँचने की आपाधापी में नहीं होते; कहानी उनके तईं यथार्थ के पेंच को आहिस्ता-आहिस्ता खोलने की सतर्कता और धीरज की कला है। कथा के मर्मस्थल तक आनंद दबे पाँव पहुँचते हैं और अनायास उसे उद्घाटित कर देते हैं। उनकी कहानियाँ सनसनी में नहीं, संवेदना में जीती हैं। प्रेम इस संग्रह की ज़्यादातर कहानियों की केन्द्रीय थीम है। यहाँ प्रेम के अनुभव के अलग-अलग रूप-रंग, छवियाँ और आस्वाद हैं—रोमानी उमंग, औत्सुक्य, आन्तरिक उत्ताप से लेकर वंचना और दुःखबोध तक। आनंद ने बहुत मार्मिक ढंग से इन्हें रचा है। उन्होंने अभाव और भूख के मर्म को भी वैसी ही आन्तरिक विकलता के साथ पकड़ा है, जिस तरह प्रेम के मर्म को। इन दोनों तरह के अनुभवों को संवेदनात्मक रूप से मुखर बनाने और प्रभावी ढंग से उजागर करने के लिए वे उनके पार्श्व में निश्छल-निर्बोध मनुष्यता की छवियों का सृजन करते हैं। ग़ौर करें कि आनंद अपने कथा-चरित्रों के कार्यकलाप का चित्रण करते हुए उनके अन्तर्मन में प्रवेश करते हैं और बाहरी दुनिया की घटनात्मकता को उनके अन्तर्जगत की हलचलों से जोड़ते हैं। यहाँ पात्र कथाकार की कठपुतलियाँ नहीं हैं; वे अपने आसपास की निष्ठुर वास्तविकता—अभाव, दु:ख और यंत्रणा—को भीतर तक महसूस करते स्पन्दित मनुष्य हैं। उनके जीवन-यथार्थ को अनुभूति के सूक्ष्म स्तरों पर ग्रहण करने की संवेदनशीलता के चलते भी इस संग्रह की कहानियाँ उल्लेखनीय सिद्ध होंगी।
Adhoore Afsaane
- Author Name:
Lavnya Deepak Shan
- Book Type:

- Description: Books
Kannadada Muvattu Kathegalu
- Author Name:
Krishnamurthy Hanur +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: ಸಾಹಿತ್ಯ ಅಕಾದೆಮಿಯ ಪ್ರಧಾನ ಉದ್ದೇಶದಂತೆ ಇತರ ಭಾರತೀಯ ಭಾಷೆಗಳಿಗೆ ಅನುವಾದಗೊಳ್ಳಲು ಒಂದು ಪ್ರಾತಿನಿಧಿಕ ಕಥಾ ಸಂಕಲನವನ್ನು ಸಂಪಾದಿಸಿಕೊಡುವಂತೆ 2008ರಲ್ಲಿ ಅಕಾದೆಮಿಯ ಕನ್ನಡ ಸಲಹಾ ಸಮಿತಿ ಲೇಖಕರಾದ ಶ್ರೀ ಫಕೀರ್ ಮಹಮದ್ ಕಟ್ಟಾಡಿ ಹಾಗೂ ಡಾ.ಕೃಷ್ಣಮೂರ್ತಿ ಹನೂರು ಅವರನ್ನು ಕೇಳಿಕೊಂಡಿತು. ಅದಕ್ಕನುಗುಣವಾಗಿ ಆಧುನಿಕ ಕನ್ನಡ ಕಥಾಲೋಕದ ಹಿರಿಯ ಚೇತನ ಮಾಸ್ತಿಯವರಿಂದ ಮೊದಲುಗೊಂಡು ವಿವಿಧ ಮನೋಧರ್ಮಗಳಿಗೆ ಸೇರಿದಂತಹ ಮೂವತ್ತು ಕಥೆಗಾರರ ಕಥೆಗಳನ್ನು ಸಂಪಾದಕರು ಇಲ್ಲಿ ಕೊಟ್ಟಿದ್ದಾರೆ. ಕಳೆದೊಂದು ಶತಮಾನದಲ್ಲಿ ಕನ್ನಡ ಕಥಾ ಜಗತ್ತು ತೆರೆದುಕೊಂಡ ಪ್ರಕ್ರಿಯೆ, ಅದರ ವೈವಿಧ್ಯತೆ ಹಾಗೂ ಅನಾವರಣಗೊಂಡ ರೀತಿಯನ್ನು ಸಮರ್ಥವಾಗಿ ಪ್ರತಿಪಾದಿಸುವ ಕಥೆಗಳು ಈ ಸಂಕಲನದಲ್ಲಿವೆ. ಶ್ರೀ ಫಕೀರ್ ಮಹಮದ್ ಕಟ್ಟಾಡಿ ಹಾಗೂ ಡಾ.ಕೃಷ್ಣಮೂರ್ತಿ ಹನೂರು ಇಬ್ಬರೂ ವಿಶಿಷ್ಟ ಕಥೆಗಾರರಾಗಿ ಪ್ರಸಿದ್ದರು ಹಾಗೂ ಕಾದಂಬರಿ, ವಿಮರ್ಶೆ ಇನ್ನಿತರ ಸಾಹಿತ್ಯ ಪ್ರಕಾರಗಳಲ್ಲೂ ಗಣನೀಯ ಕೊಡುಗೆಗಳನ್ನು ನೀಡಿರುವ ಲೇಖಕರಾಗಿ ಜನಪ್ರಿಯರಾಗಿದ್ದಾರೆ.
Chirswayamvara
- Author Name:
Shivani
- Book Type:

-
Description:
महिला कथाकारों में जितनी ख्याति और लोकप्रियता शिवानी ने प्राप्त की है, वह एक उदाहरण है श्रेष्ठ लेखन के लोकप्रिय होने का। शिवानी लोकप्रियता के शिखर को छू लेनेवाली ऐसी हस्ती हैं, जिनकी लेखनी से उपजी कहानियाँ कलात्मक और मर्मस्पर्शी होती हैं।
अन्तर्मन की गहरी पर्तें उघाड़नेवाली ये मार्मिक कहानियाँ शिवानी की अपनी मौलिक पहचान हैं जिसके कारण उनका अपना एक व्यापक पाठक वर्ग तैयार हुआ।
इनकी कहानियाँ न केवल श्रेष्ठ साहित्यिक उपलब्धियाँ हैं, बल्कि रोचक भी इतनी अधिक हैं कि आप एक बार शुरू करके पूरी पढ़े बिना छोड़ ही न सकेंगे।
प्रस्तुत संग्रह में ‘उपहार’, ‘केया’, ‘चीलगाड़ी’, ‘पिटी हुई गोट’, ‘चिरस्वयंवरा’, ‘मास्टरनी’, ‘भूमि-सुता’ एवं ‘विनिपात’ कहानियाँ संकलित हैं। हर कथा अपनी मोहक शैली में अभिभूत कर देने की अपार क्षमता रखती है।
कलात्मक कौशल के साथ रची गईं ये कहानियाँ हमारी धरोहर हैं जिन्हें आज की नई पीढ़ी अवश्य पढ़ना चाहेगी।
Sach Kahati Kahaniyan
- Author Name:
Kusum Khemani
- Book Type:

-
Description:
कुसुम खेमानी की कहानियों का यह पहला संग्रह हिन्दी कथा-संसार के लिए एक घटना से कम नहीं। सम्भवतः पहली बार इतनी मार्मिक कौटुम्बिक कहानियाँ हिन्दी पाठकों को उपलब्ध हो रही हैं। यह सच कहती कहानियाँ नहीं; बल्कि स्वयं सच हैं; सच का तना रूप। भिन्न-भिन्न सामाजिक स्तरों के प्रसंगों एवं अनुभवों से बुनी गई ये कहानियाँ समकालीन जीवन का एक अद्भुत कसीदा जड़ती हैं। चाहे ‘लावण्यदेवी’ हो या ‘रश्मिरथी माँ’ या ‘एक माँ धरती-सी’, इन सबमें सूक्ष्मता और अन्तरंगता से घर-परिवार के भीतर के जीवन को यथार्थ के साथ अंकित किया गया है।
कुसुम खेमानी भाव से कथा कहती हैं, लोक कथा की तरह। उनकी कहन शैली से पाठक इतना बँध जाता है कि हुंकारी भरे बिना नहीं रह पाता। इन कहानियों की सबसे बड़ी ख़ूबी है इनकी भाषा और शैली। हिन्दी में होते हुए भी ये कहानियाँ एक ही साथ बांग्ला, राजस्थानी और उर्दू का भी विपुल व्यवहार करती हैं जो इन्हें एक महानगरीय संस्कार प्रदान करता है। कुसुम खेमानी के पहले ऐसा प्रयोग शायद कभी नहीं हुआ। इन कहानियों की बुनावट और अन्त भी सहज, किन्तु अप्रत्याशित होता है। हर कहानी अपने आपमें एक स्वतंत्र लोक है।
इस संग्रह के साथ कुसुम खेमानी के रूप में हिन्दी को एक अत्यन्त सशक्त शैलीकार एवं संवेदनशील क़िस्सागो मिला है। निश्चय ही यह संग्रह सहृदय पाठकों एवं साहित्य के अध्येताओं द्वारा अंगीकार किया जाएगा।
—अरुण कमल
Awara Adakar
- Author Name:
Vikram Singh
- Book Type:

- Description: विक्रम सिंह युवा कहानीकारों की तरह अपने वर्तमान और सामाजिक यथार्थ के अन्तरसम्बन्धों को चित्रित करते हैं। जीवन की विविधता और सम्बन्धों की जटिलता के प्रति वे अधिक जागरूक हैं। कहानी और कहानी के परिवेश के सम्बन्ध में रचनात्मकता दिखाई देती है। मध्यवर्ग और निम्न मध्यवर्ग की विडम्बना और दुख में सुख की खोज को उन्होंने बहुत सजगता से चित्रित किया है। उनके पात्र समय के साथ एक तारतम्य में भी दिखाई देते हैं और इसी के साथ-साथ वे विपरीत भी जाते नजर आते हैं। विक्रम सिंह की कहानियों का मुहावरा आज का मुहावरा है और वे अपने समकालीन कहानीकारों के साथ चलते दिखाई देते हैं। —असग़र वजाहत विक्रम सिंह अपनी कहानियों में ऐसे चरित्रों और जीवन-स्थितियों से संवाद करते हैं जिसकी तरफ कम लोग ही जाते हैं। यहाँ अरब देशों में बदतर परिस्थितियों में काम कर रहे मजदूर हैं, बच्चों की बेरोजगारी से चिन्तित पिता हैं, इंटरनेट पर ठगी के कारोबार में लिप्त ‘चीटर’ विदेशी प्रेमिकाएँ हैं, कोरोना काल में अपने देस के लिए निकल पड़े बदहाल लोगों और साथी मजदूरों के लिए चिन्तित ‘खोटा सिक्का’ है तो मुहब्बत में अपने आपको साबित करने में जीवन खपा देनेवाला ‘आवारा अदाकार’ भी है। ये एक कठिन दुनिया में संघर्षरत चरित्रों की मार्मिक और विश्वसनीय कहानियाँ हैं, जिनका ताप देर तक भीतर बना रहता है। —मो. आरिफ़
Khachchar Aur Admi
- Author Name:
Yashpal
- Book Type:

-
Description:
यशपाल के लेखकीय सरोकारों का उत्स सामाजिक परिवर्तन की उनकी आकांक्षा, वैचारिक प्रतिबद्धता और परिष्कृत न्याय-बुद्धि है। यह आधारभूत प्रस्थान बिन्दु उनके उपन्यासों में जितनी स्पष्टता के साथ व्यक्त हुए हैं, उनकी कहानियों में वह ज़्यादा तरल रूप में ज़्यादा गहराई के साथ कथानक की शिल्प और शैली में न्यस्त होकर आते हैं। उनकी कहानियों का रचनाकाल चालीस वर्षों में फैला हुआ है। प्रेमचन्द के जीवनकाल में ही वे कथा-यात्रा आरम्भ कर चुके थे, यह अलग बात है कि उनकी कहानियों का प्रकाशन: किंचित् विलम्ब से आरम्भ हुआ। कहानीकार के रूप में उनकी विशिष्टता यह है कि उन्होंने प्रेमचन्द के प्रभाव से मुक्त और अछूते रहते हुए अपनी कहानी-कला का विकास किया। उनकी कहानियों में संस्कारगत जड़ता और नए विचारों का द्वन्द्व जितनी प्रखरता के साथ उभरकर आता है उसने भविष्य के कथाकारों के लिए एक नई लीक बनाई, जो आज तक चली आ रही है। वैचारिक निष्ठा, निषेधों और वर्जनाओं से मुक्त न्याय तथा तर्क की कसौटियों पर ख़रा जीवन—ये कुछ मूल्य हैं जिनके लिए हिन्दी कहानी यशपाल की ऋणी है।
‘खच्चर और आदमी’ कहानी-संग्रह में उनकी ये कहानियाँ शामिल हैं : ‘वैष्णवी’, ‘मक्खी या मकड़ी’, ‘उपदेश’, ‘कलाकार की आत्महत्या आदमी या पैसा?’ ‘जीव दया’, ‘चोरी और चोरी’, ‘अश्लील!’, ‘सत्य का द्वन्द्व तथा खच्चर और आदमी’।
Yani Ki Ek Baat Thee
- Author Name:
Mrinal Pande
- Book Type:

-
Description:
कुछ ही दिन पहले मेरी दो कहानियाँ पढ़कर दो पाठकों के क्रोध–भरे पत्र आए। एक ने लिखा था कि ‘अपने लेखों और अन्य कार्यक्रमों में मैं स्त्री–मुक्ति और आत्मनिर्भरता की बात करती हूँ, जबकि इस कहानी की नायिका की घुटन-भरी—दब्बू ज़िन्दगी हमें कोई ऐसा ‘सन्देश’ नहीं देती।’ दूसरे पाठक ने भी घुमा–फिराकर यही पूछा था कि ‘ठीक है, पात्रों की निजी दुनिया के दबावों और उनके सुख–दु:ख से कहानी हमारा साक्षात्कार तो कराती है, पर यह अन्त में आकर हमें ‘सिखाती’ क्या है ?’ मुझे लगता है कि एक बोझिल हितोपदेशी पाठ्यक्रम की किताबों से ‘साहित्य’ पढ़कर निकले ऐसे पाठक रचनात्मक साहित्य की आत्मा से अपरिचित ही रह आए हैं।
मुझे खेद है, मेरी कहानियाँ इनकी थोथी उपदेश–तृष्णा नहीं बुझा सकतीं। हर कहानी या उपन्यास घटनाओं–पात्रों के ज़रिए सत्य से एक आंशिक और कुतूहल-भरा साक्षात्कार होता है। साहित्य हमें जीवन जीना सिखाने के बजाय टुकड़ा–टुकड़ा ‘दिखाता’ है, वे तमाम नर्क–स्वर्ग, वे राग–विराग, वे सारे उदारता और संकीर्णता–भरे मोड़, जिनका सम्मिलित नाम मानव–जीवन है।
जो साहित्य उघाड़ता है, वह अन्तिम सत्य या सार्वभौम आदर्श नहीं, बहुस्तरीय यथार्थ होता है। हाँ, यदि जीवन में आदर्श या सत्य अनुपस्थित या अवहेलित हैं, तो उस विडम्बना को भी वह जताता जाता है। मेरी तहत साहित्य को रचना, परोक्ष रूप से सत्य से आंशिक साक्षात्कारों की ऐसी ही एक शृंखला पाठकों के लिए तैयार करना होता है, जिसके सहारे एक सहृदय व्यक्ति अपनी चेतना, अपनी संवेदना और अभिव्यक्ति–क्षमता का सहज ही कुछ और विस्तार होता पाए। चिन्तनपरक लेख और रचनात्मक लेखन के बीच का फ़ासला तर्कसंगत ज्ञान और संवेदनात्मक समझ के बीच का फ़ासला है।
Pajame Mein Aadmi
- Author Name:
Nag Bodas
- Book Type:

-
Description:
यद्यपि नाग बोडस एक नाटककार के रूप में अधिक प्रसिद्ध हैं, पर उनके साहित्यिक जीवन की शुरुआत कहानी-लेखन से ही हुई थी। उनकी पहली कहानी अज्ञेय द्वारा सम्पादित पत्रिका ‘नया प्रतीक’ में छपी थी। इसके बाद साहित्य की लगभग सभी महत्त्वपूर्ण पत्रिकाओं में उनकी कहानियाँ छपी हैं। उनकी कहानियों में एक बौद्धिक ऊर्जा देखी जा सकती है। ये सभी कहानियाँ न केवल विषयों के स्तर पर, बल्कि ‘कहने’ के स्तर पर भी भिन्न-भिन्न प्रकार की हैं। पर इसके बावजूद इनमें लेखक की छाप देखी जा सकती है और इसलिए कम-से-कम हिन्दी में ये अपनी अलग पहचान बनाती हैं।
इनमें प्रयोगात्मकता तथा भाषा का विशेष प्रकार का उपयोग है और इसलिए इन्हें पढ़ना एक अलग तरह के अनुभव से गुज़रना है। इस हिसाब से इनके लोकप्रिय होने में सन्देह किया जा सकता है, पर स्तरीय होने में नहीं। वैसे आज की लोकप्रिय कहानियों की हालत को देखते हुए, लोकप्रिय न होना अपने-आप में कोई सीमा नहीं है।
नाग बोडस के लेखन में अन्वेषण का उत्साह है, यद्यपि यह अन्वेषण किसी बुनियादी या बड़े सत्य के लिए न होकर स्थितियों के अन्दर से और अन्दर झाँकने की कोशिश के हिस्से की तरह लगता है।
विडम्बना उनकी कहानियों का एक प्रमुख तत्त्व है और ‘जन्मदिन’ जैसी कहानी तो इसी पर आधारित है। जो पाठक लीक से हटकर किन्तु दिलचस्प पढ़ने की लालसा रखते हैं, वे निश्चय ही इस संग्रह को अपने पाठन-मन के अनुकूल पाएँगे।
Shobha Yatra
- Author Name:
Bhisham Sahni
- Book Type:

- Description: सीधी सरल शब्दावली और सहज बिम्बों में सामाजिक यथार्थ की जटिल विडम्बनाओं को अभिव्यक्त करनेवाली भीष्म साहनी की कहानियाँ आज क्लासिक रचनाओं की श्रेणी में आती हैं। 1981 में पहली बार प्रकाशित उनका यह कहानी-संग्रह अपनी मूल्यपरक अर्थवत्ता और वैचारिक निष्ठा के चलते विशेष तौर पर सराहा गया था। ‘शोभायात्रा’ की इन कहानियों में 'फ़ैसला' के जज शुक्ला जी हों या 'रामचन्दानी' के रिटायर्ड अफ़सर रामचन्दानी—सही आदमी इस व्यवस्था में बराबर अव्यावहारिक और उपहास का विषय है। 'निमित्त' में यदि भाग्य और भगवान को ही कारण माननेवाले 'निमित्त मात्रों' की क्रूरता और चालाकी का कलात्मक खुलासा हुआ है तो 'शोभायात्रा' सत्ता के 'अहिंसा परमो धर्म' रूपी ढोंग को उघाड़ती है। दूसरी ओर 'खिलौने' जैसी कहानी है, जिसमें बच्चे और खिलौने के माध्यम से आधुनिक जीवन की भयावह कैरियरिस्ट संवेदनहीनता का मार्मिक चित्रण हुआ है। वस्तुगत यथार्थ और उसका दृष्टि-सम्पन्न चित्रण, यही इस संग्रह की कहानियों की विशेषता है जिसके कारण इन्हें दशकों से एक ही लगाव के साथ पढ़ा जाता रहा है।
Amreeka Meri Jaan And Other Stories
- Author Name:
Hari Om
- Book Type:

- Description: Stories have a way of shaping the world we live in. They weave together our beliefs, emotions and the truths we hold dear, often blending reality with imagination. This book is a collection of such stories deeply rooted in the fabric of communal dynamics, yet echoing universal human experiences. Each story sheds light on the innocence, complexities and conflicts that emerge when communities, cultures and individuals collide. The tales in this book are set against the backdrop of day-to-day life in villages and towns. They feature vibrant characters, each with their own quirks and stories to tell. From Rahmat, the oil presser, whose quiet resilience and legendary past make him a figure of endless fascination, to the youthful debates and riddles that animate village temples, these stories explore the deep connections-and divides that define us. While these stories are fictional, they reflect the reality of the world around us. They are not just about individuals or communities; they are about humanity as a whole its flaws, its beauty and its unrelenting pursuit of harmony
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book