Mansarovar Vol. 5 : Lottery Aur Anya kahaniyan
Author:
PremchandPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections0 Ratings
Price: ₹ 120
₹
150
Available
Awating description for this book
ISBN: 9789393603241
Pages: 216
Avg Reading Time: 7 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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हमारे आसपास नित्य ऐसी घटनाएँ होती रहती हैं जिनमें अनेक कहानियों के बीज निहित होते हैं, लेकिन हम कभी उन पर ध्यान नहीं देते। लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो ऐसी जगहों में बड़ी कहानियाँ तलाश कर लेते हैं। यह संग्रह ऐसी ही कहानियों से सजा है।
डॉ. जगदीश प्रसाद सिंह की ये कहानियाँ मानव-मन और समाज की ऐसी अनोखी परतों को उघाड़ती हैं कि सहसा विश्वास नहीं होता। मसलन संग्रह की पहली ही कहानी ‘विसंगति’ को लें। इसमें स्वामी गोविन्दानन्द का जीवन कुछ ऐसी घटनाओं का प्रतिबिम्ब है जो भारतीय समाज में बहुत आम रहा है—यानी विपरीत परिस्थितियों के चलते संन्यास ले लेना। माधव वसु को जब पता चलता है कि उसकी पत्नी का उसके छोटे भाई से सम्बन्ध है तो वह घर-बार छोड़ देता है और एक सफल आध्यात्मिक जीवन जीने लगता है। लेकिन फिर एक दिन अतीत एक अलग ही रूप में उसके सामने आ खड़ा होता है।
‘प्रतीम सिंह का ढाबा’, ‘दाँत का दर्द’, ‘राह का काँटा’, ‘भगवती का शाप’, और ‘सरस्वती का भोंपू’ सहित इस संग्रह की सभी कहानियाँ समाज के किसी न किसी पहलू की विडम्बना को सामने लाती है। ये कहानियाँ अपनी सरल कहन के चलते हमें किसी शैल्पिक उलझाव से परे वास्तविकता की एक सहज दुनिया में ले जाती हैं जिसकी तहों के नीचे कई विसंगतियाँ साँस लेती रहती हैं।
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