Janapada Mattu Girijanara Kathegalu
(0)
Author:
Dr. L.R. HegdePublisher:
Sahitya AkademiLanguage:
KannadaCategory:
Short-story-collections₹
350
₹ 290.5 (17% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
ಜನಪದ ಮತ್ತು ಗಿರಿಜನರ, ಕಥೆಗಳು ಅತಿಮಾನುಷ, ರಮ್ಯ, ಮಾಂತ್ರಿಕ, ಹಾಸ್ಯ, ಪ್ರಾಣಿಕಥೆಗಳೇ ಅಲ್ಲದೆ ಇನ್ನೂ ಹಲವು ವರ್ಗಗಳಿಗೆ ಸೇರುವ 65 ಕ್ಕೂ ಹೆಚ್ಚು ಕನ್ನಡ ಜನಪದ ಕಥೆಗಳು ಇಲ್ಲಿ ಸಂಗ್ರಹಗೊಂಡಿವೆ. ಇಲ್ಲಿನ ಕಥೆಗಳು ಜಗತ್ತಿನ ಯಾವ ಭಾಷೆಯ ಜನಪದ ಕಥೆ ಗಳೊಡನೆಯಾದರೂ ಹೆಗಲೆಣೆಯಾಗಿ ನಿಲ್ಲ ಬಲ್ಲುವು. ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಗಿರಿಜನರ ಗುಂಪಿಗೆ ಸೇರುವ ಹಾಲಕ್ಕಿ ಒಕ್ಕಲಿಗರು, ಸಿದ್ಧಿಯರು, ಗೊಂಡರು, ಕುಣುಬಿಗಳಲ್ಲಿ ಪ್ರಚಲಿತವಿರುವ ಕಥೆಗಳು ಈ ಸಂಗ್ರಹದಲ್ಲಿರುವುದು ವೈಶಿಷ್ಟ್ಯಪೂರ್ಣ ಸಂಗತಿ. ಜನಪದ ಸಾಹಿತ್ಯ ಸಂಕಲನಕಾರ್ಯದಲ್ಲಿ ನುರಿತ ಡಾ.ಎಲ್.ಆರ್.ಹೆಗಡೆ ಅವರು ಸಂಗ್ರಹಿಸಿದ ಈ ಜನಪದ ಮತ್ತು ಗಿರಿಜನರ ಕಥೆಗಳು ಕೃತಿ ಕನ್ನಡ 'ಜಾನಪದಾಸಕ್ತರ ಗಮನ ಸೆಳೆಯುತ್ತದೆಂಬುದು ಸಾಹಿತ್ಯ ಅಕಾದೆಮಿಯ ಆಶಯ.
Read moreAbout the Book
ಜನಪದ ಮತ್ತು ಗಿರಿಜನರ, ಕಥೆಗಳು
ಅತಿಮಾನುಷ, ರಮ್ಯ, ಮಾಂತ್ರಿಕ, ಹಾಸ್ಯ, ಪ್ರಾಣಿಕಥೆಗಳೇ ಅಲ್ಲದೆ ಇನ್ನೂ ಹಲವು ವರ್ಗಗಳಿಗೆ ಸೇರುವ 65 ಕ್ಕೂ ಹೆಚ್ಚು ಕನ್ನಡ ಜನಪದ ಕಥೆಗಳು ಇಲ್ಲಿ ಸಂಗ್ರಹಗೊಂಡಿವೆ. ಇಲ್ಲಿನ ಕಥೆಗಳು ಜಗತ್ತಿನ ಯಾವ ಭಾಷೆಯ ಜನಪದ ಕಥೆ ಗಳೊಡನೆಯಾದರೂ ಹೆಗಲೆಣೆಯಾಗಿ ನಿಲ್ಲ ಬಲ್ಲುವು. ಕರ್ನಾಟಕದಲ್ಲಿ ಗಿರಿಜನರ ಗುಂಪಿಗೆ ಸೇರುವ ಹಾಲಕ್ಕಿ ಒಕ್ಕಲಿಗರು, ಸಿದ್ಧಿಯರು, ಗೊಂಡರು, ಕುಣುಬಿಗಳಲ್ಲಿ ಪ್ರಚಲಿತವಿರುವ ಕಥೆಗಳು ಈ ಸಂಗ್ರಹದಲ್ಲಿರುವುದು ವೈಶಿಷ್ಟ್ಯಪೂರ್ಣ ಸಂಗತಿ. ಜನಪದ ಸಾಹಿತ್ಯ ಸಂಕಲನಕಾರ್ಯದಲ್ಲಿ ನುರಿತ ಡಾ.ಎಲ್.ಆರ್.ಹೆಗಡೆ ಅವರು ಸಂಗ್ರಹಿಸಿದ ಈ ಜನಪದ ಮತ್ತು ಗಿರಿಜನರ ಕಥೆಗಳು ಕೃತಿ ಕನ್ನಡ 'ಜಾನಪದಾಸಕ್ತರ ಗಮನ ಸೆಳೆಯುತ್ತದೆಂಬುದು ಸಾಹಿತ್ಯ ಅಕಾದೆಮಿಯ ಆಶಯ.
Book Details
-
ISBN9789389778717
-
Pages380
-
Avg Reading Time13 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIN
Recommended For You
Bolta Lihaph
- Author Name:
Vishnu Nagar +1
- Book Type:

- Description: इस संग्रह में हिन्दी के श्रेष्ठ कथाकारों द्वारा लोकप्रिय मासिक 'कादम्बिनी' के ‘कथा-प्रतिमान’ स्तम्भ के लिए चयनित विश्व-साहित्य की श्रेष्ठ कहानियाँ संकलित हैं। चयनकर्ता कथाकारों ने इसमें अपनी पसन्द के कारणों का ज़िक्र करते हुए इन कहानियों की विशिष्टताओं का भी वर्णन किया है, जिससे इस संग्रह की उपयोगिता बढ़ गई है। विभिन्न कालखंडों में रची गई ये कहानियाँ अपनी रचनात्मक विशिष्टता के लिए चर्चित रही हैं। इस संग्रह में शामिल कथाकारों की कहानी-कला का मर्म मानव-जीवन के मूल्यों को लेकर उनकी सतत दुविधा और विस्मय का भाव है जो हमारे मन में मानव जीवन की असारता या क्षुद्रता के प्रति खीज नहीं उपजाते बल्कि एक गहरी हलचल मचाए रखते हैं। यही कारण है कि ये कहानियाँ आज भी हमें उतनी टटकी और अन्तरंग महसूस होती हैं जितनी अपने समकालीन पाठकों के लिए रही होंगी। विश्व के समर्थ कहानीकारों और उनकी विशिष्ट कथा कृतियों को सुलभ कराने का हमारा यह विनम्र प्रयास निश्चय ही आपको पसन्द आएगा और प्रेरणादायक लगेगा, ऐसा हमारा विश्वास है।
Shapgrasta
- Author Name:
Akhilesh
- Book Type:

-
Description:
हिन्दी कहानी की चर्चा पर अखिलेश की कहानियाँ याद न आएँ, असम्भव है। वह ऐसे लेखक हैं जो बौद्धिकों और सामान्य पाठकों के बीच एक साथ स्वीकृत हैं।
अखिलेश का ज़िक्र समर्थ कथाकार के रूप में किया जाता है तो इसमें सबसे अधिक योगदान ‘शापग्रस्त’ संग्रह में शामिल कहानियों का है। इस किताब की समस्त कहानियाँ अपनी संश्लिष्ट वास्तविकता, कलात्मकता और अद्वितीय गद्य के ज़रिए लगातार हिन्दी पाठक को मुग्ध, गर्वित और हैरान करती रही हैं। इसीलिए ‘शापग्रस्त’ को यदि कहानियों के संग्रह की जगह श्रेष्ठ कहानियों का संग्रह कहा जाए तो अत्युक्ति न होगी। इसमें उपस्थित ‘चिट्ठी’, ‘ऊसर’, ‘बायोडाटा’, ‘शापग्रस्त’ तथा ‘जलडमरूमध्य’ हिन्दी की बेहतरीन कहानियाँ हैं। साथ ही ‘अगली शताब्दी के प्यार का रिहर्सल’ एवं ‘पाताल’ भी अनेक चर्चित कहानियों की तुलना में बेहतर और पठनीय हैं।
‘शापग्रस्त’ की कहानियाँ इस अर्थ में विस्फोटक हैं कि सभी की सभी देश के नए सच से मुठभेड़ करती हैं। मनुष्य, समाज, परिवार, संस्कृति, राजनीति, प्रेम और आत्मा पर आघात कर रहे उपभोक्तावादी-बाज़ार व्यवस्था की सर्जनात्मक साक्ष्य हैं ये कहानियाँ। मौजूदा समय स्वातंत्र्योत्तर भारत का सबसे ज़्यादा हिंसक तथा आक्रान्ता समय है, और इसी को ‘शापग्रस्त’ की कहानियों में घेरा गया है।
अखिलेश के यहाँ ख़ास रंग के जीवन्त, हँसमुख और शरारती गद्य के ज़रिए सत्य को ढूँढ़ा, परखा, प्रकट किया गया है। और, इस अर्थ में तो अखिलेश की भाषा का मिज़ाज अभिनव है कि वह एक तरफ़ व्यंग्य-विनोद की छटा बिखेरती है तो दूसरी तरफ़ करुणा की अन्तःसलिला भी प्रवाहित करती है। शायद इसी वजह से ‘शापग्रस्त’ की कहानियाँ ग़ज़ब की वाग्विदग्ध होने के बावजूद अपने परिणाम में हमें बेचैन, उदास और आन्दोलित करती हैं।
ऐसी उम्मीद की जानी चाहिए कि अखिलेश का यह संग्रह लम्बे समय तक हलचल पैदा करता रहेगा।
Kahaniyan Rishton Ki : Maa
- Author Name:
Akhilesh
- Book Type:

- Description: माँ यानी दुनिया से पहली पहचान, पहला रिश्ता। एक ऐसा रिश्ता जो जन्म के पहले से ही शुरू हो जाता है। बाद में सन्तान जैसे-जैसे बड़ी होने लगती है, उसकी दुनिया का विस्तार होने लगता है, उसके जीवन में माँ की केन्द्रीयता ख़त्म हो जाती है पर माँ के समूचे व्यक्तित्व और सद् भावना के केन्द्र में उसकी सन्तान ही रहती है। इस संकलन में लगभग सभी महत्त्वपूर्ण कहानियों को चयनित किया गया है, जिससे ‘माँ’ का कोई भी जाना-अनजाना चेहरा छूट न सके। यक़ीनन इसे पढ़ते हुए पाठकों की अपने जीवन से जुड़ी बहुत सारी छवियाँ और स्मृतियाँ कुछ और चटख होंगी।
Meri Maai
- Author Name:
Dr. Sabiha Rehmani +1
- Book Type:

- Description: मेरी माई' विषय ही ऐसा है, जिस पर नजर पड़ते ही हर व्यक्ति के दिलो-दिमाग में अपनी माँ की तस्वीर उभर आएगी, न चाहते हुए भी वह इसे पढ़ना चाहेगा। इसीलिए इस अमूल्य कृति में माँ और सिर्फ माँ की तस्वीर उभारने की कोशिश की गई है, क्योंकि इस ब्रह्मांड में एक माँ ही है, जिसका अस्तित्व था, है और हमेशा बरकरार रहेगा। माँ है तो सृष्टि है।
Aurat Ka Ghar
- Author Name:
Jasinta Kerketta
- Book Type:

- Description: शहर के सम्पर्क और नए समय के प्रभाव में आदिवासी समाज भी अब ठीक-ठीक वैसा नहीं रहा, जैसा जंगल और प्रकृति ने उसे बनाया था। वह बदल रहा है और अफ़सोस कि अधिकतर विकृति की ओर ज़्यादा बदल रहा है। नागर सभ्यता अपनी तमाम नकारात्मक ऊर्जा के साथ उसे अपनी चपेट में ले रही है। जसिंता केरकेट्टा की ये कहानियाँ जैसे बदलाव की इस प्रक्रिया का जीवन्त दस्तावेज़ हैं। बिना किसी कलागत आग्रह के सरल-सीधी कथा-कहन के साथ वे इन कहानियों में आदिवासी स्त्रियों की असहायता को भी उजागर करती हैं और पुरुषों में बढ़ते ताक़त के नशे की ओर भी संकेत करती हैं। कुछ कहानियों में उन्होंने ऐसे वयस्क मूल्यबोध की ओर भी इशारा किया है जिसको स्वीकार करने में नागर जन की तथाकथित आधुनिकता भी बग़लें झाँकने लगेगी। मसलन ‘रिश्ता’ कहानी में विवाह नामक संस्था को आमूल-चूल पुनर्परिभाषित करते नैना, सूरज और सुरजमुनी के संवाद। संवाद-प्रधान कुछ कहानियों में धर्म-आधारित राजनीति और आदिवासी जीवन पर उसके प्रभाव को लेकर भी अच्छी रोशनी पड़ती है। व्यवस्था और अवधारणा के स्तर पर बहुत सूक्ष्म और रेडिकल बदलावों के संकेत इन कहानियों में कई जगह मिलते हैं। ये कहानियाँ बताती हैं कि आदिवासी समाज में भी भले ही पुरुषों ने स्त्री के लिए कोई सम्मानजनक जगह नहीं रखी, बाहरी दुष्प्रभाव में भले ही बेटे अपनी माँओं-बहनों के साथ हिंसा करने लगे हैं, लेकिन स्त्री अभी भी अपनी संस्कृति, अपनी प्राकृतिक सहजता को लेकर सचेत है, उसे खोने को तैयार नहीं। हिंसा का शिकार होकर भी वह हिंसा को नहीं चुनती। आदिवासी दुनिया के संघर्षों, मूल्यों, पीड़ाओं, उसके सामने मौजूद ख़तरों और बदलावों को दर्शातीं कहानियों का एक रोचक संग्रह।
Teen Nigahon Ki Ek Tasvir
- Author Name:
Mannu Bhandari
- Book Type:

-
Description:
‘आपका बंटी’ और ‘महाभोज’ जैसे कालजयी उपन्यासों की रचयिता मन्नू भंडारी की कहानियाँ अपने मन्तव्य की स्पष्टता, साफ़गोई और भाषागत सहजता के लिए ख़ास तौर पर उल्लेखनीय रही हैं। उनकी कहानियों में जीवन की बड़ी दिखनेवाली जटिल और गझिन समस्याओं की गहराई में जाकर, उनके तमाम सूत्रों को समेटते हुए, एक सरल, सुग्राह्य और पठनीय रचना को आकार दिया जाता है।
इस संग्रह में शीर्षक-कहानी के अलावा शामिल ‘अकेली’, ‘अनथाही गहराइयाँ’, ‘खोटे सिक्के’, ‘हार’ और ‘चश्मे’ आदि सभी कहानियाँ जीवन के विभिन्न सन्दर्भों को एक ख़ास रचनात्मक आलोचना-दृष्टि से देखते हुए पाठक को सोचने और अपने वातावरण को एक नई, ताज़ा निगाह से देखने को प्रेरित करती हैं।
Anand Karaj
- Author Name:
Balwant Singh
- Book Type:

- Description: बलवन्त सिंह सरीखे अनुभवी कथाकार से ही मुमकिन था कि किसी बहुत पुरानी कहानी को भी नए–नवेले, अनूठे और समसामयिक अन्दाज़ में पाठकों के सामने ले आए। कहानी ‘दंड’ में बिना कहे प्रेमिका के दर्द को समझनेवाला प्रेमी हो या प्रेमिका के लिखे आखिरी ख़त को खोलकर न देखनेवाला प्रेमी, जिसने दृढ़निश्चय किया था कि वह अपनी प्रेम-कहानी को अन्त तक कभी नहीं पहुँचाने देगा—जीवनपर्यन्त। दोनों ही कहानियों में निहित प्रेम की भिन्न परिभाषाएँ नितान्त एकान्त पल में हद के भीतर इस प्रकार के प्रेमी को पाने की आकांक्षा जाग्रत करती हैं। इंसानी रिश्तों की जिन बारीकियों को बलवन्त जी ने भाषा की सरलता में उतार दिया है वह अद्भुत है। आज की इस भागती-दौड़ती ज़िन्दगी में फ़ुर्सत के इतने निजी पल असम्भव से लगते हैं। लेकिन बलवन्त सिंह की कहानियाँ आशा के उस दीप की तरह हैं जो अपनी बेहद सीधी और सरल भाषा में हमें बताती हैं कि जीवन की असली ख़ुशियाँ उन छोटे-छोटे पलों में ही छिपी हैं जो रोज़ हमारे आस-पास से गुज़रती रहती हैं। बलवन्त जी की कहानियों के पात्र वही पुराने हैं, पर उन्हें देखने, आँकने टाँकने का अन्दाज़ बिलकुल नया है। हमारे आस-पास की घटनाओं का बयान करती ये कहानियाँ समकालीन जीवन-छवियों से जोड़ने का एक सफल प्रयास करती हैं।
Hoshiyari Khatak Rahi Hai
- Author Name:
Subhash Chandra Kushwaha
- Book Type:

- Description: Short Stories
Beyond the Shores of the River Existentialism
- Author Name:
Munipalle B Raju +1
- Book Type:

- Description: English translation by Nidadavolu Malathi of Sahitya Akademi Award winning Telugu short stories Astitvanadam Aavali Teerana by Munipalle B Raju.
Tang Galiyon se bhi Dikhta Hai Akash
- Author Name:
Yadvendra
- Book Type:

- Description: मेरा मानना है कि हिंदी में ही नहीं बल्कि भारतीय भाषाओं में अब तक अनूदित कहानियों के जितने संकलन हैं उनमें यह किताब इसलिए विशिष्ट है क्योंकि पहली बार छह महादेशों के 25 देशों की 27 स्त्री कहानीकारों की कहानियां इसमें शामिल हैं। दुनिया का कोई प्रश्न ऐसा नहीं है जो इसमें शामिल न किया गया हो। —प्रो. रविभूषण
Kailash Gautam Samagra : Vols. 1-3
- Author Name:
Kailash Gautam
- Book Type:

- Description: ‘कैलाश गौतम समग्र’ (तीन खंड) वस्तुतः समय के सच को रेखांकित करते हुए, चुनौतियों में जूझते हुए आम जनमानस की ही आवाज़ है। यह सहज साहित्यिक मौलिक अभिव्यक्ति का बोलता-बतियाता दस्तावेज़ है। सुव्यवस्थित दुर्व्यवस्था की विद्रूपताओं-विसंगतियों पर चोट के साथ-साथ, राग-अनुराग मिलन-मनुहार विछोह भी है। बदलते हुए गाँव और शहरीकरण का टूटता तिलस्म भी। ‘गंगा’, ‘झुनिया’, ‘अमावस्या का मेला’, ‘कचहरी’, ‘भाभी की चिट्ठी’, ‘कुर्सी’, ‘अन्हरे से लड़ाई’, ‘पप्पू की दुलहिन’, ‘रामलाल का फगुआ’, ‘धुरन्धर’, ‘मीराबाई’ जैसी अनेकानेक कालजयी रचनाएँ भी जो आम आदमी से लेकर शीर्षस्थ आलोचकों व समीक्षकों के भी ज़ुबान पर हैं। वे सारे पात्र और देसज मुहावरे सब सजीव हो उठते हैं, ऐसा लगता है। इसमें लोकबोली की मिठास के साथ ही तीज-त्योहारों, हँसी-ख़ुशी और पनप रहा फीकापन भी है। महँगाई की मार है तो रिश्तों की मिठास-खटास भी। तीन खंडों में प्रस्तुत यह समग्र कैलाश गौतम के गद्य-पद्य का समूचा रचना-संसार है। सुविख्यात सम्पादकों व आलोचकों की भूमिकाओं के साथ मनकवि-जनकवि कैलाश गौतम की रचनात्मक अभिव्यक्ति का एक निष्पक्ष, सच्चा और सारगर्भित लेखा-जोखा है।
Ek Duniya : Samanantar
- Author Name:
Rajendra Yadav
- Book Type:

-
Description:
आधुनिक साहित्य की सबसे अधिक सशक्त, जीवन्त और महत्त्वपूर्ण साहित्य विधा—कहानी—को लेकर इधर जो विवाद, हलचलें, प्रश्न, जिज्ञासाएँ और गोष्ठियाँ हुई हैं, उन सभी में कला-साहित्य के नए-पुराने सवालों को बार-बार उठाया गया है। कथाकार राजेन्द्र यादव ने पहली बार कहानी के मूलभूत और सामयिक प्रश्नों को साहस और व्यापक अन्तर्दृष्टि के साथ खुलकर सामने रखा है, देशी-विदेशी कहानियों के परिप्रेक्ष्य में उन पर विचार और उनका निर्भीक विवेचन किया है। कइयों की अप्रसन्नता और समर्थन की चिन्ता से मुक्त, यह गम्भीर विश्लेषण जितना तीखा है, उतना ही महत्त्वपूर्ण भी।
लेकिन उन कहानियों के बिना यह सारा विश्लेषण अधूरा रहता जिनका ज़िक्र समीक्षक, लेखक, सम्पादक, पाठक बार-बार करते रहे हैं; और जिनसे आज की कहानी का धरातल बना है।
निर्विवाद रूप से यह स्वातंत्र्योत्तर हिन्दी-कहानी का बेजोड़ संकलन और प्रामाणिक ‘हैंड-बुक’ है। यह सिर्फ़ कुछ कहानियों का ढेर या बंडल नहीं है, बल्कि इनके चुनाव के पीछे एक विशेष जागरूक दृष्टि और कलात्मक आग्रह है।
इसीलिए आज की सम्पूर्ण रचनात्मक चेतना को समझने के लिए ‘एक दुनिया : समानान्तर’ अपरिहार्य और अनुपेक्षणीय संकलन है, ऐतिहासिक और समकालीन लेखन का प्रतिनिधि सन्दर्भ ग्रन्थ...
‘एक दुनिया : समानान्तर’ की भूमिका ने कथा-समीक्षा में भीषण उथल-पुथल मचाई है, मूल्यांकन को नए धरातल दिए हैं। यह समीक्षा अपने आप में हिन्दी के विचार-साहित्य की एक उपलब्धि है।
यह नया संस्करण इसकी लोकप्रियता का प्रमाण है।
Bhagya-Rekha
- Author Name:
Bhisham Sahni
- Book Type:

-
Description:
'भाग्य-रेखा' भीष्म साहनी का पहला कहानी-संग्रह है, जिसके साथ उन्होंने साहित्य के क्षेत्र में क़दम रखा था। वर्ष 1953 में प्रकाशित इस संग्रह ने उन्हें साहित्य-संसार में अपनी एक पहचान दी; जिसके माध्यम से हिन्दी समाज ने कथा में सहज प्रवाह की शक्ति को महसूस किया।
भीष्म जी की कहानियों का ‘मैं’ भी कभी लेखक के प्रतिनिधि होने का आभास नहीं देता, पात्रों और उनके यथार्थ के साथ उनकी इस एकात्मता को, जो शायद बहुत गहरी तटस्थता से ही सधती होगी, बहुत कम लेखकों में चिह्नित किया जा सकता है। इस संग्रह में कई ऐसी कहानियाँ हैं जो भीष्म जी के गहरे मानवीय बोध को चिह्नित करती हैं और कुछ ऐसी हैं जो समकालीन समाज की अमानवीयता के प्रति घृणा का भाव भी पाठक के मन में जगाती हैं। उदाहरण के लिए 'क्रिकेट मैच' जिसमें पति-पत्नी सम्बन्धों के बीच आया दुराव इतने कौशल के साथ उभारा गया है कि बहुत कुछ न कहते हुए भी कहानी हमें घर-परिवार को बचाए-बनाए रखनेवाली स्त्री-भूमिका के प्रति आलोचनात्मक हो जाने को प्रेरित करती है। 'नीली आँखें' हाशिये पर रहनेवाले तबके के प्यार और शहरी पृष्ठभूमि में उसके प्रति असहिष्णु मध्यवर्गीय नज़रिए को बेहद कारुणिक रूप में व्यक्त करती है।
कहने की आवश्यकता नहीं कि भीष्म साहनी को चाहनेवाले पाठक इस संग्रह को अमूल्य पाएँगे ।
Mehfil
- Author Name:
Hariyash Rai
- Book Type:

- Description: Collection of Short Stories
Kuchh Udas Kahaniyan
- Author Name:
Pankaj Subeer
- Book Type:

- Description: Description Awaited
Rajdhani Kab Aayegi
- Author Name:
Martin John
- Book Type:

- Description: सामाजिक ताने-बाने में तेज़ी से हो रहे परिवर्तन, भगवान बनते जा रहे बाज़ार का दबाव, लगातार ज़्यादा ही मसरूफ होते जा रहे इन्सान की निरंतर भोथरी होती जा रहीं संवेदनाओं, हवस और रुतबे की अकड़ में अमानवीय होते जा रहे लोगों के अवैध नैक्सस जैसे मसलों को लेकर मार्टिन जॉन की चिंताएँ उनकी इस संग्रह की कहानियों में अलहदा ढंग से अभिव्यक्त हुई हैं। रेलकर्मी होने का उनका अनुभव और निजी जीवन-रुचियों के आत्मिक संस्पर्श इन चिंताओं को और ज़्यादा विश्वसनीय, ऐंद्रिक लगाव से भरपूर, जीवंत, चाक्षुष और विशिष्ट बनाकर परोसने में काफी मददगार साबित होते हैं। रेल-जीवन और रेलवे क्वार्टर हिंदी में कुछ ही कहानीकारों की रचनाओं में विश्वसनीय ढंग से आए हैं। इस रूप में रामदेव सिंह के बाद मार्टिन जॉन ही फिलहाल याद आ रहे हैं। 'राजधानी कब आएगी' की इंक्वायरी काउंटर पर काम कर रही तरुलता, उसके सीनियर सी.बी.एस. अंकल, मनचले पसेंजरों की बेहूदगी और रेलवे महकमे में व्याप्त अफसर-नेता नैक्सस आदि के चित्रण इतने विश्वसनीय और प्रभावशाली बन पड़े हैं कि यह कहानी लंबे समय तक पाठकों के जेहन में टिकी रहेगी। कहानीकार मार्टिन जॉन की कलम का कमाल है कि बाग-बागवानी और पक्षी-प्रेम यहाँ पर्यावरण चिंता मात्र न रहकर सामाजिक ताने-बाने के अंग बनकर सामने आते हैं। कोविड के दौर में गुलाब के फूल मात्र ही मज़हबी नफरतों के शिकार नहीं होते (रौंदे हुए फूल) मानवीय विश्वास भी दरकता है। 15 अगस्त के दिन शांतिदूत कबूतर के खून बहाने वाले और गांधी-नेहरू की तस्वीर पर पत्थर फेंकने वाले लोग हमारे समाज में किस तरह पैठ बना चुके हैं; बिना लाउड हुए लेखक बता देता है। —गौरीनाथ
Meri Chuninda Kahaniyan
- Author Name:
Ashok Gujarati
- Book Type:

- Description: Book
Shreshtha Bal Kahaniyan
- Author Name:
Balshauri Reddy
- Book Type:

-
Description:
विश्व की आबादी में बच्चों की संख्या एक तिहाई के आसपास है। जलवायु, वेशभूषा, रीति-रिवाज, रहन-सहन, खान-पान की दृष्टि से भले ही उनमें भिन्नता दर्शित होती हो, किन्तु उनके विचार और सोच एक समान हैं। बच्चे स्वभावत: परस्पर धर्म, जाति, वर्ण, वर्ग, सम्प्रदाय को लेकर भेदभाव नहीं रखते। उनका दिल स्वच्छ, काग़ज़ की भाँति निर्मल होता है। उनमें हम जैसे संस्कार डालते हैं, उन्हीं के अनुरूप उनका चरित्र बनता है। उनके शारीरिक विकास के लिए जैसे बलवर्धक आहार की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार उनके बौद्धिक विकास के लिए उत्तम साहित्य की नितान्त आवश्यकता है।
बच्चों में कहानी सुनने की प्रवृत्ति जन्मजात है। आयु की वृद्धि के साथ उनमें कहानी पढ़ने की रुचि और प्रवृत्ति भी बढ़ती जाती है। अत: उनकी रुचि के पोषण एवं परिष्कार के लिए स्वस्थ साहित्य एक सबल माध्यम बन सकता है।
भारतीय भाषाओं में सर्वप्रथम संस्कृत में बाल-साहित्य का प्रादुर्भाव हुआ। पंचतंत्र, हितोपदेश इत्यादि विश्व के अमर साहित्य में अपना अनुपम स्थान रखते हैं। कालान्तर में देश की अन्य भाषाओं में बाल-साहित्य का सृजन हुआ। आज भारत की प्राय: समस्त भाषाओं में उत्तम बाल-साहित्य का सृजन एवं प्रकाशन हो रहा है।
प्रस्तुत पुस्तक में 12 भारतीय भाषाओं की 131 बाल-कहानियों का चयन किया गया है। सम्भवत: भारतीय भाषाओं में इस प्रकार का प्रयास प्रथम है। बच्चों के मनोरंजन एवं ज्ञानवर्धन में ये कहानियाँ सफल होंगी तो हम अपने इस प्रयास को सार्थक मानेंगे।
Aranya Gatha
- Author Name:
Shaival
- Book Type:

-
Description:
1968 से 1975 तक खेतिहर आबादी, सामन्तवादी शोषण, वर्ण-विरोध और तमाम दूसरी असंगतियों से जुड़ा एक विशाल साहित्य बंगाल में सामने आया। ’75 के बाद हिन्दी, तेलुगू व मराठी में भी यह अन्तर्ध्वनि तेज़ हुई। शैवाल की कहानियों के लेखन की यह सामान्य पृष्ठभूमि है। यह दूसरी बात है कि इस वृहत्तर पृष्ठभूमि में शैवाल का अपना संसार भी झाँकता है। शैवाल की कहानियों में अलग-अलग स्थितियाँ ही नहीं हैं, अलग-अलग हलचलें हैं। अलग-अलग छाया-ध्वनियाँ हैं, भीतर के संसार के अलग-अलग शेड्स हैं और एक ऐसी रूढ़िमुक्त भाषा है जो अपने चरित्रों की बोलियों से परहेज़ नहीं करती।
शैवाल ने सामान्य जन की कहानियाँ भी लिखी हैं और बिहार के उन्हीं सामान्य लोगों को विशिष्ट बनाकर भी ढेर सारी कहानियाँ लिखी हैं। इन कहानियों का मूल राग एक ही है और वह आदिम राग भी है, जिसे मैं हिन्दुस्तान का केन्द्रीय अन्तर्विरोध मानता हूँ।
शैवाल की इन कहानियों में गाँव की दुनिया पर बढ़ते हुए दबावों की यंत्रणा है, असंगठित-साधनहीन फिर भी परिस्थितियों से जूझते हुए स्त्री-पुरुष हैं तथा छोटे-छोटे समुदायों के भीतर का आतंक है। इनमें ‘मरुयात्रा’ का कष्ट-भरा अनुभव और वह मारक आतंक भी है, जिससे घिरा हुआ परमेसरा कहता है, ‘सुक्को कुओं में कूद गई, मालिक।’ सूचना चाहे बड़ी न हो, पर सुअर की तरह रीं-रीं कर उसका रोना क्या इस घटना से बाहर जाकर हमें कुछ और सुनने के लिए बाध्य नहीं करता?
— डॉ. सुरेन्द्र चौधरी
Shreshta Burmi Kathegalu
- Author Name:
R. Lakshminarayana +1
- Book Type:

- Description: 1886ರಿಂದ 1937 ರವರೆಗೂ ಬ್ರಿಟಿಷ್ ವಸಾಹತುಶಾಹಿಯ ಭಾಗವೇ ಆಗಿ ಭಾರತದೊಂದಿಗೆ ಸೇರ್ಪಡೆಯಾಗಿದ್ದ ಬರ್ಮಾ ಆ ನಂತರ ಬೇರ್ಪಟ್ಟು 1948ರಲ್ಲಿ ಸ್ವತಂತ್ರ ದೇಶವಾಯಿತೆಂಬುದು ಈಗ ಇತಿಹಾಸ. ಇದು ರಾಜಕೀಯ ಇತಿಹಾಸವಾದರೆ ಸಾಂಸ್ಕೃತಿಕವಾಗಿ ಮತ್ತು ಸಾಮಾಜಿಕವಾಗಿ ಬರ್ಮಾಕ್ಕೂ ಭಾರತಕ್ಕೂ ಅತಿನಿಕಟ ಸಂಬಂಧವಿದೆ. ಬರ್ಮಾದ ಬಹುಸಂಖ್ಯಾತ ಜನ ನಿಷ್ಠೆಯಿಂದ ಅನುಸರಿಸಿ ಆಚರಿಸುತ್ತಿರುವ ಧರ್ಮವೆಂದರೆ ಭಾರತದಲ್ಲಿಯೇ ಹುಟ್ಟಿ ಬೆಳೆದ ಬೌದ್ಧ ಧರ್ಮವೇ. ಬುದ್ಧನ ನಾಡಾದ ಭಾರತಕ್ಕೆ ಲಾಗಾಯ್ತಿನಿಂದಲೂ ಬರ್ಮೀಯರು ಯಾತ್ರೆ ಬರುವುದು ನಡೆದೇ ಇದೆ. ಇನ್ನು ಭಾರತದಂತೆಯೇ ಬರ್ಮಾ ಕೂಡ ವ್ಯವಸಾಯ ಪ್ರಧಾನವಾದ ದೇಶವಾಗಿದ್ದು ರೈತಾಪಿ ಜನರ ನಾಡಾಗಿದೆ. ಭಾರತದಂತೆಯೇ ಮಧ್ಯಮ ಮತ್ತು ಕೆಳಮಧ್ಯಮ ವರ್ಗದ ಜನರೇ ಹೆಚ್ಚಾಗಿರುವ ಬರ್ಮಾದ ಶ್ರೀ ಸಾಮಾನ್ಯರ ಬದುಕು ಭಾರತದ ಬಡ ಜನತೆಯ ಬದುಕನ್ನು ಅತ್ಯಂತ ನಿಕಟವಾಗಿ ಹೋಲುತ್ತದೆ. ಪ್ರಭುತ್ವದ ಮೌಲ್ಯಗಳ ಅಡಿಯಲ್ಲಿ ಬದುಕು ಸಾಗಿಸುತ್ತಿರುವವರ ಅಸಹಾಯಕತೆ, ಎರಡನೇ ಮಹಾಯುದ್ಧ ಜನರ ಬದುಕನ್ನು ಅತಂತ್ರಗೊಳಿಸಿದ್ದರ ಬಡ ಬರ್ಮೀಯರ ಚಿತ್ರ ನಮ್ಮ ದೇಶದ ಜನರ ಬದುಕಿಗಿಂತ ಬೇರೆಯೇನಲ್ಲ ಎಂದು ಅನಿಸುತ್ತದೆ. ಮೂಲ ಅನುವಾದಕರಾದ ಚಂದ್ರಪ್ರಕಾಶ್ ಪ್ರಭಾಕರ್ 'ಮೌತೀರಿ' ಅವರು ಮೂಲತಃ ಬರ್ಮೀಯರಾಗಿದ್ದು ಬರ್ಮೀ ಹಿಂದೀ ಭಾಷೆಗಳಲ್ಲಿ ಅತ್ಯಂತ ನಿಷ್ಣಾತರಾಗಿದ್ದು ಅಲ್ಲಿಯ ಸಾಹಿತ್ಯ ಮತ್ತು ಸಾಹಿತಿಗಳ ನಿಕಟ ಪರಿಚಯವಿದ್ದವರಾದ ಕಾರಣ ಈ ಕಥೆಗಳ ಹಿಂದೀ ಅವತರಣಿಕೆ ಮೂಲವನ್ನು ಯಥಾವತ್ತಾಗಿ ಹೋಲುತ್ತವೆ. ಹಾಗಾಗಿ ಕನ್ನಡದಲ್ಲಿ ರೂಪು ತಾಳಿರುವ ಈ ಕಥೆಗಳು ಮೂಲಕ್ಕೆ ತೀರ ಹತ್ತಿರವಾಗಿವೆ. ಮೂಲತಃ ತುಮಕೂರಿನವರಾದ ಡಾ. ಆರ್. ಲಕ್ಷ್ಮೀನಾರಾಯಣ(1949) ಅವರು ಕಾಲೇಜು ಶಿಕ್ಷಣ ಇಲಾಖೆಯ ವಿವಿಧ ಸರ್ಕಾರಿ ಕಾಲೇಜುಗಳಲ್ಲಿ ಅಧ್ಯಾಪಕ, ಪ್ರಾಧ್ಯಾಪಕ ಮತ್ತು ಪ್ರಿನ್ಸಿಪಾಲ್ ಆಗಿ ಕೊನೆಯಲ್ಲಿ ಜಂಟಿ ನಿರ್ದೇಶಕರಾಗಿ 37 ವರ್ಷಗಳ ಸೇವೆ ಸಲ್ಲಿಸಿ ನಿವೃತ್ತರಾಗಿದ್ದು ಸದ್ಯ ಪ್ರತಿಷ್ಠಿತ ಬಿ.ಎಂ.ಶ್ರೀ. ಪ್ರತಿಷ್ಠಾನದ ಅಧ್ಯಕ್ಷರಾಗಿದ್ದಾರೆ. ಮೂರು ದಶಕಗಳಿಂದ ಅನುವಾದ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿ ಸಕ್ರಿಯರಾಗಿರುವ ಇವರು ಇಂಗ್ಲಿಷ್ ಮತ್ತು ಹಿಂದಿಯಿಂದ ಅನೇಕ ಕೃತಿಗಳನ್ನು ಅನುವಾದಿಸಿದ್ದಾರೆ. ಸಂಸ್ಕೃತದಿಂದ ಅನುವಾದಿಸಿದ 'ಕನ್ನಡ ವಕ್ರೋಕ್ತಿ ಜೀವಿತ' ಎಂಬ ಇವರ ಕೃತಿಗೆ 2004ರಲ್ಲಿ ಕರ್ನಾಟಕ ಸಾಹಿತ್ಯ ಅಕಾಡೆಮಿಯ ಪುಸ್ತಕ ಬಹುಮಾನ ಹಾಗೂ 2007ರಲ್ಲಿ ಕೇಂದ್ರ ಸಾಹಿತ್ಯ ಅಕಾಡೆಮಿಯ ಅನುವಾದ ಪುರಸ್ಕಾರ ದೊರೆತಿವೆ. ಕಿರಣ್ ನಗರ್ಕರ್ ಅವರ ಸಾಹಿತ್ಯ ಅಕಾಡೆಮಿ ಪ್ರಶಸ್ತಿ ಪುರಸ್ಕೃತ ಇಂಗ್ಲಿಷ್ ಕಾದಂಬರಿ 'ಕಕೋಲ್ಡ್' ನ ಕನ್ನಡ ರೂಪ 'ಬೇಗುದಿ'ಯನ್ನು ಕೇಂದ್ರ ಸಾಹಿತ್ಯ ಅಕಾಡೆಮಿ ಪ್ರಕಟಿಸಿದ್ದು ಅದಕ್ಕೆ 2013ರ ಕರ್ನಾಟಕ ಸಾಹಿತ್ಯ ಅಕಾಡೆಮಿಯ ಪುಸ್ತಕ ಬಹುಮಾನ ಬಂದಿದೆ.
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book